प्रधानाध्यपक की भूमिका
विद्यालय के संचालन हेतु कार्य तथा भूमिकाओं का निर्वाह करना। इसकी भूमिकाओं को प्रमुख रूप से तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है
A. प्राचार्य की विद्यालय में प्रशासनिक भूमिका
विद्यालय की कार्य-प्रणाली में प्राचार्य का स्थान सबसे ऊँचा होता है। इसे अनेक कार्य करने विद्यालय सम्बन्धी प्रत्येक प्रकार की क्रियाओं का उत्तरदायित्व प्राचार्य का ही होता है।
प्रशासनिक को दो भागों में विभाजित करते हैं-
(1) सामान्य कार्य
(2) पर्यवेक्षण कार्य
B. प्राचार्य से प्रशासन सम्बन्धी भूमिका
प्रधानाचार्य से प्रशासनिक क्रियाओं के साथ यह भी अपेक्षा की जाती है कि वह शिक्षण कार्य भी करे। उसे एक शिक्षक का भी निर्वाह करना होता है। अच्छे प्रशासक के साथ प्रभावशाली शिक्षकभी होना चाहियें।
C. प्राचार्य के जन-सम्पर्क कार्य
विद्यालय संचालन के लिये प्राचार्य को विभिन्न लोगो से सम्पर्क करना होता है। प्राचार्य में जन सम्पर्क की कुशलता भी होनी चाहिये
शैक्षिक क्रियाओं सम्बन्धी कार्य- शिक्षण क्रियाओं के रूप में प्रधानाचार्य द्वारा पाठ्यक्रम का चयन करना, शिक्षण विधियों व सहायक सामग्री की व्यवस्था करना, मूल्यांकन करना, निर्देशन देना आदि कार्य किए जाते हैं, ताकि विद्यालय का चहुँमुखी विकास किया जा सके।