कहा जाता है, अभिनेता को किसी विशेष पद्धति का अनुसरण नहीं करना चाहिए और न किसी अभिनेता का अनुसरण करना चाहिए.
1)शरीर अथवा आंगिक अभिनय body languageआंगिक अभिनय का अर्थ है, शरीर, मुख हाथ इन के हावभाव से से कोई भाव या अर्थ प्रकट करना होता है .
2)वाचिक अभिनय vocal actingअभिनेता रंगमंच पर जो कुछ मुख से कहता है वह सबका सब वाचिक अभिनय कहलाता है. जिसे अंगेजी में डायलॉग कहते है .
3)सात्विक अभिनय natural acting इस में नैसर्गिक/ नेचरल अभिनय आता है.स्वेद(पसीना ), स्तंभ, कंप(काँपना), अश्रु(आंसूओं), वैवर्ण्य(चेहरे का रंग उड़ जाना), रोमांच(शरीर के रोओं का खड़ा होना), स्वरभंग(आवाज में कम्पन या बदलाव )आदि होता है .
4)आहार्य अभिनय backstage /stage property इस में नेपथ्यकर्म / स्टेज प्रॉपर्टी का उचित और सहज उपयोग रहता है .
Note-My Videos are not fun videos like others (Part 3rd to 8th ), these are self personality development activities for my personal growth
1) शांत रस और करुण रस आधरित सोशल ड्रामा.
2) संघर्ष , वीर रस ,रौद्र रस ,बीभत्स रस और करुण रस आदि विषय पर नाट्य अभिनय (देशभक्ति).
3) हास्य व्यंग्य तथा शांत रस, आधारित मिमिक्री / नक़ल .
4) कहानी (कथा ) कथन भयानक रस कॉमिक्स बुक उदाहरण.
5) भक्ति रस , शृंगार रस , वात्सल्य रस आधारित शास्त्रीय नृत्य नाटिका .
आशा है मेरा प्रैक्टिकल वर्क आप को पसंत आया होगा . आप की प्रतिक्रिया youtube विडियो के नीचें दे दीजिए .