कुंडली को अंग्रेजी भाषा में ‘होरोस्कोप’ (Horoscope) कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इसका अत्यधिक प्रयोग किया जाता है। यह इस बात पर निर्भर करती है कि किसी व्यक्ति के जीवन में किसी विशेष घटना के समय कौन सा ग्रह किस समय पर किस दशा में विराजमान है तथा उसका प्रभाव क्या होगा।
अतः जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है, उसके जन्म का स्थान, दिनांक, दिन, समय तथा अन्य जानकारियां सहेज कर रख ली जाती हैं। इसके पश्चात किसी ज्योतिषी द्वारा उसके प्रमुख तारे, सात ग्रहों, सूर्य तथा चन्द्रमा की स्थितियों को ध्यान में रखकर एक चार्ट तैयार किया जाता है।
इस चार्ट में अलग-अलग खण्डों में अलग-अलग अंक लिखे गए होते हैं। इन अंकों के आधार पर ही ग्रह तथा नक्षत्रों की स्थिति आंकी जाती है। इसका अर्थ सन्तरिक्ष में स्थित ग्रहों की स्थिति से नही है, बल्कि कुंडली में कुछ गणनाओं तथा समय देशों के आधार पर उस व्यक्ति विशेष के ग्रहों की स्थिति पता लगाई जाती है।