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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के बारे में पूरी जानकारी – इस लेख में प्रतियोगियों के लिए UPSC से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी का उल्लेख किया गया है। यदि आप भी सिविल सेवा की परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक पढ़ें। इस लेख में संघ लोक सेवा आयोग क्या है ? संघ लोकसेवा आयोग का इतिहास। सिविल सेवा क्या है ? सिविल सेवाओं के लिए शैक्षणिक योग्यता ? सिविल सेवा की तैयारी कैसे करें ? सिविल सेवा की तैयारी के लिए क्या पढ़ें ? सिविल सेवा की तैयारी के लिए क्या न पढ़ें ? सिविल सेवा की तैयारी के लिए कौनसा विषय सही रहेगा ? परीक्षा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें ? UPSC में कितने पेपर होते हैं ? IAS परीक्षा में कितने पेपर होते हैं ? संघ लोकसेवा आयोग कौन-कौन सी परीक्षाएं संपन्न कराता है ? यही वो सवाल हैं जो सभी प्रतियोगियों के मन में आते हैं। अपने इस लेख के माध्यम से हमने इन सभी जिज्ञासाओं को शांत करने का प्रयास किया है।
भारत में सुपीरियर सिविल सर्विसेज के संबंध में लार्ड ली की अध्यक्षता में सन् 1924 में रॉयल कमीशन ने प्रस्तुत की अपनी रिपोर्ट में लोकसेवा आयोग के गठन की सिफारिश की। इसके फलस्वरूप 1 अक्टूबर 1926 को सर रॉस बार्कर की अध्यक्षता में पहले लोकसेवा आयोग का गठन किया गया। इसके बाद भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन (FPSC) की स्थापना 1 अप्रैल 1937 ईo को की गयी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद FPSC संघ लोकसेवा आयोग बन गया और 26 जनवरी 1950 को भारत के गणतंत्र होने के बाद इसे संवैधानिक संस्था का दर्जा प्राप्त हुआ।
UPSC एक संवैधानिक संस्था है क्योंकि इसका गठन संविधान के अनुच्छेदों के आधार पर किया गया है। आयोग से संबंधित उपबंधों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद – 315 से 323 तक वर्णित किया गया है। अनुच्छेद- 315 के अनुसार संघ और राज्यों हेतु लोक सेवा आयोगों का गठन किया जायेगा। अनुच्छेद – 316 में आयोग के सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि संबंधी उपबंध दिए गए हैं। अनुच्छेद – 317 में आयोग के किसी सदस्य को हटाए जाना और निलंबित किये जाने का जिक्र है। अनुच्छेद-318 में आयोग के सदस्यों व कर्मचारियों की सेवाओं की शर्तों के बारे में विनिमय बनाने संबंधी उपबंध किया गया है। अनुच्छेद – 320 में आयोग के कृत्य/कार्य को वर्णित किया गया है। अनुच्छेद – 321 में लोक सेवा आयोगों के कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति दी गयी है। अनुच्छेद – 322 में लोकसेवा आयोग के व्यय का वर्णन है। अनुच्छेद – 323 में लोकसेवा आयोग के प्रतिवेदन वर्णित हैं।
बचपन के स्कूल के दिनों से ही हर बच्चा अपने करियर में कुछ कर गुजरने के लिए तरह तरह के सपने संजोता है। परन्तु धीरे-धीरे जब वह बड़ा होता है उन सभी विकल्पों पर विचार करता है और उनमें से एक बेहतरीन विकल्प की खोज करता है। एक ऐसा विकल्प जिसमें अर्थ, सुविधाएँ, प्रतिष्ठा और देश सेवा के उद्देश्य की प्राप्ति की जा सके। इन सभी के लिए UPSC एक बेहतर विकल्प है। इसके माध्यम से आप IAS, IPS, IRS, IFS इत्यादि जैसे महत्वपूर्ण पदों पर चयनित होकर अपने सपने पूरे कर सकते हैं। वर्तमान में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा कराई जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा देश ही नहीं विश्व की सर्वोच्च सेवाओं में से एक है। इस परीक्षा की तैयारी से लेकर चयन तक का सफर किसी एडवेंचर से कम नहीं है। यह परीक्षा हमारी सोच, समझ और कार्यान्वयन तीनों की कसौटी सिद्ध करती है।
सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन पहली बार 1855 ईo में लंदन में कराया गया था। तब इसमें परीक्षार्थियों की निम्नतम आयु सीमा 18 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 23 वर्ष निर्धारित की गयी थी। प्रारंभ में कई वर्षों तक इसका आयोजन लन्दन में ही हुआ करता था। सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले पहले भारतीय सत्येन्द्रनाथ टैगोर (रवीन्द्रनाथ टैगोर के बड़े भाई) थे। इन्होंने यह परीक्षा 1864 ईo में पास की। इसके बाद सुभास चंद्र बोस ने IAS की परीक्षा 1920 ईo में चौथी रैंक से पास की।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिर्फ सिविल सेवाओं की ही परीक्षा नहीं कराता। इसके अतिरिक्त अन्य परीक्षाओं को भी संपन्न कराता है जो कि निम्नलिखित हैं :-
भारतीय वन सेवा परीक्षा
इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा
सम्मिलित चिकित्सा सेवा परीक्षा
भू-विज्ञानी परीक्षा
सम्मिलित रक्षा सेवा परीक्षा
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और नौसेना अकादमी परीक्षा
स्पेशल क्लास रेलवे अप्रेंटिस परीक्षा (SCRA)
भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा (ISS) इत्यादि
इन सेवाओं के लिए प्रतियोगी को विधि द्वारा स्थापित किसी विश्वविद्यालय से स्नातक होना अनिवार्य है। साथ ही वह भारत का नागरिक हो। इस परीक्षा के लिए किसी भी प्रकार की कोई शारीरिक मापदंड तय नहीं किया गया है। इन परीक्षाओं में आपकी मानसिक योग्यता ही एकमात्र चयन का मापदंड है। इसके लिए सामान्य वर्ग के प्रतियोगियों की आयु सीमा 21-32 वर्ष निर्धारित की गयी है। साथ ही OBC के प्रतियोगियों को अधिकतम आयु सीमा में 03 वर्ष की और SC, ST को 05 वर्ष की छूट दी गयी है।
यह परीक्षा तीन चरणों में विभाजित है। सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन होता है। इसमें सामान्य अध्ययन के 200-200 अंकों के दो पेपर होते हैं और इसके प्रश्नों का स्वरूप वैकल्पिक होता है। सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 को सीसैट कहते हैं। इसमें कम से कम 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। सामान्य इसमें उत्तीर्ण प्रतियोगियों को मुख्य परीक्षा के लिए आमंत्रित किया जाता है। मुख्य परीक्षा में चयनित प्रतियोगियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। वर्तमान में साक्षात्कार के लिए कुल 275 अंक निर्धारित किये गए हैं। प्रतियोगी के फ़ाइनल चयन के लिए मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों को जोड़कर मेरिट बनाई जाती है। उसी आधार पर अन्तिम चयन होता है। याद रहे इस चयन में प्रारंभिक परीक्षा के अंकों को सम्मिलित नहीं किया जाता है। अर्थात प्रारंभिक परीक्षा का आपकी फ़ाइनल मेरिट में कोई योगदान नहीं है। परन्तु सिविल सेवा में आने के लिए सबसे पहली कड़ी प्रारंभिक परीक्षा ही है और उसे पास करना अनिवार्य है।
IAS की मुख्य परीक्षा में कितने पेपर होते हैं ? इंटरनेट पर यह बहुत सर्च किया जाता है। IAS की मुख्य परीक्षा में कुल 09 पेपर होते हैं। इनके लिए अधिकतम अंक 1750 निर्धारित किये गए हैं। परंतु अंतिम मैरिट हेतु सात पेपर ही गिने जाते हैं। बाकी दो पेपर में सिर्फ न्यूनतम अंक लाना ही अनिवार्य होता है। IAS की मुख्य परीक्षा दो पालियों में संपन्न कराई जाती है।
पेपर-1 निबंध
पेपर-2 सामान्य अध्ययन – 1
पेपर-3 सामान्य अध्ययन – 2
पेपर-4 सामान्य अध्ययन – 3
पेपर-5 सामान्य अध्ययन – 4
पेपर-6 भारतीय भाषा (कुल 23 भाषाओं में से कोई एक)
पेपर-7 अंग्रेजी
पेपर-8 वैकल्पिक विषय – प्रथम प्रश्नपत्र
पेपर-9 वैकल्पिक विषय – द्वितीय प्रश्नपत्र
सिविल सेवा परीक्षा की फाइनल मैरिट मुख्य परीक्षा (1750 अंक) और साक्षात्कार (275 अंक) में प्राप्त अंकों को मिलाकर तैयार की जाती है। इसमें मुख्य परीक्षा के अंको का कोई औचित्य नहीं।
UPSC के नियमानुसार मुख्य परीक्षा में आपको एक विषय चुनना पड़ता है। जरुरी नहीं कि वह विषय आपने स्नातक में पढ़ा हो। यह भी जरुरी नहीं की उसी विषय से आपकी स्नातक डिग्री हो। यहाँ पर ज्यादातर लोग आपको आपके इंटरेस्ट वाले विषय को लेने की सलाह देते हैं जो कि काफी हद तक ठीक भी है। परन्तु इसके साथ कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें भी ध्यान रखनी जरुरी हैं। जैसे – उस विषय का आपको ज्ञान, उस विषय में आपकी पकड़, विषय की अध्ययन सामग्री की उपलब्धता, उस विषय का मार्गदर्शन, उस विषय को पढ़ने की आपकी क्षमता इत्यादि। किसी विषय की चार किताबें पढ़ लेना मात्र ही अपना इंटरेस्ट न समझें। इस बात का ध्यान रखें कि इस परीक्षा में किसी भी विषय का दायरा उतना संकीर्ण नहीं है जितना हम पढ़ चुके हैं और न ही उतना विस्तृत कि हम पढ़ न सकें।
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए सबसे जरुरी है इसके लिए दृढ निश्चय करना कि हमें इसी क्षेत्र में करियर बनाना है। इसके लिए आप इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ग्रेजुएशन के दौरान तैयारी में जुट सकते हैं। सिविल सेवा परीक्षा के लिए यही सर्वाधिक उपयुक्त समय होता है। क्योकि इस समय हमें सभी विषयों की बेसिक जानकारी ध्यान में होती है। सामान्य तौर पर इसकी तैयारी में दो से तीन वर्ष का समय लग सकता है। इसकी तैयारी में कितना समय लगेगा यह आपकी अब तक की शिक्षा पर निर्भर करता है। अक्सर हमें सुनने को मिलता है कि उसने पहले प्रयास में ही यह परीक्षा पास कर ली। ध्यान रखें पहले प्रयास का मतलब पहले साल की तैयारी या एक साल में तैयार हो जाना कभी नहीं होता। यह उन अभ्यर्थियों की अब तक की शिक्षा और अध्ययन का ही परिणाम होता है जो उन्होंने बचपन से अब तक किया होता है। इसके साथ ही सबकी मानसिक योग्यता भी समान नहीं होती जिसके कारण किसी को कम समय लगता है तो किसी को अधिक।
इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए क्या पढ़ने से ज्यादा महत्वपूर्ण है क्या नहीं पढ़ना है। आज के समय में विश्व भर में असंख्य पुस्तकों का अस्तित्व है और वे सभी किसी न किसी तरह से आपके ज्ञान को बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाती हैं। आज के दौर में तरह तरह की ऑनलाइन व ऑफलाइन, सॉफ्ट व हार्ड कॉपी पाना और भी आसान हो गया है। इससे एक ओर जहाँ हमारी सामरिक सोंच का दायरा बढ़ा है वहीं तरह तरह की भ्रांतियों को भी जन्म दिया है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि प्रसिद्ध लेखकों और प्रकाशकों की पुस्तकों को ही वरीयता दें। हम सब जानते हैं कि 10 फर्जी पुस्तकों को एक बार पढ़ने से बेहतर है कि एक प्रामाणिक पुस्तक को 10 बार पढ़ा जाये। क्योंकि एक बार पढ़ी हुयी पुस्तक बस आपका मनोरंजन कर सकती है, आपको किसी परीक्षा में लाभ नहीं पहुंचा सकती। वैसे तो हर तरह का ज्ञान जीवन में कभी न कभी काम आ ही जाता है। परन्तु सिविल सेवा के प्रतियोगी को चाहिए कि वह हर क्षेत्र की सटीक जानकारी रखे। याद रहे आपको सिविल परीक्षा निकालनी है ज्ञानी नहीं बनाना है। हर व्यक्ति का किसी विषय में कम और किसी में ज्यादा झुकाव होता है परन्तु किसी एक विषय में हद से ज्यादा घुस जाना अन्य विषयों के लिए नकारात्मक साबित हो सकता है।
समसामयिकी एक ऐसा टॉपिक है जिसकी तैयारी आप पहले से नहीं कर सकते। इस टॉपिक को छोड़ा भी नहीं जा सकता क्योंकि अब इन परीक्षाओं में इससे काफी प्रश्न पूछे जाने लगे हैं। इसके लिए आपको परीक्षा के पूर्व लगभग एक वर्ष की घटनाओं का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना होगा। सामाजिक और राजनीतिक विचारकों द्वारा अखवार में प्रकाशित होने वाले लेखों को नियमित रूप से अवश्य पढ़े। यह न केवल आपको राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय परिवेश की जानकारी देगा बल्कि आपके सोचने के नजरिये को भी विस्तृत करेगा। इसके लिए सबसे आसान और सटीक जानकारी उपलब्ध कराते हैं समाचार पत्र और दूरदर्शन का न्यूज बुलिटेन, इस पर नियमित रूप से ध्यान बनाये रखें। इसके अतिरिक्त कुछ प्रमुख पाक्षिक या मासिक पत्रिकाएं भी ले सकते हैं। महत्वपूर्ण इन सबको पढ़ना नहीं बल्कि उसे याद रखना है। इसलिए समसामयिक से संबंधित सभी सामग्री को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसके लिए अलग से एक नोट बनाएं। क्योकि बहुत सी ऐसी घटनाएं होती हैं जो कुछ समय तक ध्यान में रहती हैं परन्तु परीक्षा के वक्त तक वह सब भूल जातें हैं और इतना समय नहीं होता कि वो सब फिर से विस्तृत रूप में पढ़ा जा सके।
सिविल सेवा परीक्षा के लिए अभ्यर्थी को मानव जीवन के प्रत्येक पहलू की जानकारी होना आवश्यक है। सबसे पहले सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम को डाउनलोड करें और उसी के आधार पर अध्ययन करें। इस परीक्षा के लिए अभ्यर्थी को सभी विषयों की मूलभूत जानकारी होना आवश्यक है। इसके लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है NCERT के 12वीं तक की सभी पुस्तकें हैं। इसके बाद किसी भी विषय के अच्छे लेखक की पुस्तक को पढ़ें। इसके बाद एक ही विषय की विभिन्न टॉपिक्स पे लिखी गयी पुस्तकों का अध्ययन करें।
यदि सिविल सेवा परीक्षा में कामयाब होना चाहते हैं तो इस ओर विशेष ध्यान दें। मुख्य परीक्षा में हमारे ज्ञान के साथ साथ उसे सामने वाले को समझाने की कला को भी परखा जाता है। मुख्य परीक्षा में समय कम होता है और लिखना अधिक इसलिए बहुत से अभ्यर्थी ज्ञान होते हुए भी सटीक जानकारी नहीं दे पाते हैं। इसलिए यदि इस ओर पहले से ध्यान नहीं दिया तो इसका खामियाजा आपको भी भुगतना पड़ सकता है। अपनी लेखन शैली को सुधारने का सबसे अच्छा तरीका है निरंतर अभ्यास करना। इसके लिए आप हर रोज किसी भी टॉपिक पर लिखना शुरू कीजिये। प्रारंभ में थोड़ी समस्या होगी परन्तु आप बस एक पेज लिखने से शुरुवात कीजिये और समयानुसार इसे बढ़ाते जाइये। इससे न सिर्फ आपकी लेखन की गति बढ़ेगी बल्कि अपने बात को सटीक तरीके से रखने की कला भी आपमें आएगी। साथ ही साथ व्याकरण संबंधी कमियां भी दूर होती जाएँगी।
अक्सर यह सवाल अभ्यर्थियों के मन में आता है कि क्या कोचिंग जॉइन करके ही ये परीक्षा पास की जा सकती है। उसके बाद ये कि किसी सामान्य कोचिंग के माध्यम से या किसी नामचीन कोचिंग के सहारे ही हम ये परीक्षा पास कर सकते हैं ? इसके लिए अभ्यर्थियों को बता दें कि कोचिंग का अर्थ दिल्ली जाना या किसी नामचीन कोचिंग की मोटी फीस भरना नहीं है। यहाँ पर कोचिंग से आशय सही मार्गदर्शन और सही रणनीति से है। यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसे इस क्षेत्र की जानकारी और अनुभव है तो आप उसका भी मार्गदर्शन ले सकते हैं।
आज के दौर में इंटरनेट को किसी भी क्षेत्र की जानकारी प्राप्त करने के लिए सबसे पहले प्रयोग में लाया जाता है। यदि आप देश-दुनिया से खुद को जोड़े रखना चाहते हैं तो ये एक अच्छा प्लेटफार्म हैं। यहाँ पर हम एक क्लिक में ही किसी भी चीज के बारे में अनगिनत जानकारी पा सकते हैं। परन्तु जब बात आती है सिविल सेवाओं में इसके उपयोग की तो आप इसका सहारा ले सकते हैं। परन्तु आज कल इंटरनेट पर पायी जाने वाली जानकारी की प्रमाणिकता पर संदेह रहने लगा है। कई बार इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी प्रमाणिकता से कोसों दूर और अत्यधिक भ्रामक होती है। इसलिए बेहतर यही होगा कि इसका प्रयोग करें परन्तु उसकी प्रमाणिकता को जाँच लें।
सबसे पहले तो परीक्षा के दौरान स्ट्रेस बिलकुल न लें। ध्यान रखें कि परीक्षा जीवन का एक अंग है और इसके हर कदम पर हमें इससे सामना करा होगा। खान-पान का रखें विशेष ध्यान – अक्सर लोग अंतिम समय में पढाई में इतना ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं कि खान-पान का ध्यान नहीं रख पाते जिससे कई बार तो बीमार भी पड़ जाते हैं। अन्य समस्याओं को दर किनार कर दें – समस्या सभी की जिंदगी में होती हैं। परन्तु परीक्षा के दौरान हम पूरे साल में अर्जित किये अपने ज्ञान को फिर से अपने माइंड में एकत्रित करते हैं इसके लिए बेहद जरुरी है कि कुछ समय के लिए हम अपनी समस्याओं को माइंड में न लाएं। नींद भी है जरुरी – परीक्षा के दिनों में हम अक्सर देर रात तक जागते रहते हैं इससे भी हमारे मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए इसका भी ध्यान रखें। नए टॉपिक को न पढ़ें – परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार के किसी नए टॉपिक को न पढ़ें। ऐसा करने से आपका माइंड डिस्टर्ब हो सकता है और पढ़ा हुआ भी भूलने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। परीक्षा से पूर्व किसी भी प्रकार की शंका न रखें- परीक्षा देने से पूर्व पूरे कॉन्फिडेंस और सकारात्मक विचारों के साथ खुद को तैयार रखें। ऐसे समय किसी भी प्रकार की शंका आपके लिए नकारात्मक सिद्ध हो सकती है। टाइम मैनेजमेंट का रखें विशेष ध्यान – परीक्षा के दौरान आपका हर पल कीमती होता है इसलिए व्यर्थ के सवालों पर अपना समय बर्बाद न करें।
UPSC Syllabus in Hindi: यूपीएससी सिलेबस (पाठ्यक्रम) हर साल संघ लोक सेवा आयोग द्वारा यूपीएससी अधिसूचना पीडीएफ के साथ जारी किया जाता है जो यूपीएससी सीएसई (CSE) 2023 परीक्षा के लिए 1 फरवरी 2023 को जारी किया जाएगा। यूपीएससी पाठ्यक्रम, यूपीएससी सीएसई परीक्षा के कवरेज क्षेत्र और विषयों को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक व्यापक दस्तावेज है। UPSC CSE के विस्तृत पाठ्यक्रम की सहायता से, उम्मीदवार आसानी से समझ सकते हैं कि कौन से विषय पर कितना समय और ध्यान देना हैं और साथ ही साथ कौन से समाचार लेख, सूचना और करंट अफेयर्स पढ़ने के लिए आवश्यक हैं।
विस्तृत यूपीएससी पाठ्यक्रम के लिए पूरा लेख पढ़ें। IAS प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम को जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्क्रीनिंग परीक्षा है जो उम्मीदवारों को अगले चरण, यानी मुख्य परीक्षा के लिए योग्य बनाती है। यूपीएससी परीक्षा के सभी उम्मीदवारों को पहले परीक्षा पैटर्न और आईएएस परीक्षा पाठ्यक्रम से परिचित होना चाहिए, और फिर तैयारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
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यूपीएससी पाठ्यक्रम 2023
यूपीएससी पाठ्यक्रम, यूपीएससी के आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाता है। यह पाठ्यक्रम संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना है। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए IAS पाठ्यक्रम को दो भागों में विभाजित किया गया है। UPSC परीक्षा की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को अपनी तैयारी शुरू करने से पहले UPSC सिलेबस के बारे में अच्छी तरह से पता होना चाहिए।
UPSC का सिलेबस जटिल है, इसलिए इसे आसानी से पूरा करना मुश्किल है। हालांकि, यही कारण है कि यूपीएससी इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा है। इच्छुक छात्रों को यह सुनिश्चित करने के लिए पाठ्यक्रम का विश्लेषण करने की आवश्यकता है कि वे अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं या नहीं।
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प्रारंभिक परीक्षा के लिए यूपीएससी पाठ्यक्रम
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के लिए यूपीएससी पाठ्यक्रम को दो पेपरों में विभाजित किया गया है, यानी सामान्य अध्ययन पेपर 1 और सामान्य अध्ययन पेपर 2। यूपीएससी सीएसई 2023 प्रारंभिक परीक्षा 28 मई 2023 को आयोजित की जाएगी। विस्तृत प्रारंभिक यूपीएससी पाठ्यक्रम के लिए, नीचे दी गई तालिका देखें।
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यूपीएससी पाठ्यक्रम सामान्य अध्ययन 1 (GS-1)
UPSC CSE प्रीलिम्स सिलेबस के सामान्य अध्ययन 1 में मुख्य रूप से इतिहास, भूगोल, राजनीति, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और पारिस्थितिकी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सामान्य विज्ञान और करंट अफेयर्स आधारित कार्यक्रम शामिल हैं। यूपीएससी सामान्य अध्ययन प्रारंभिक पेपर 1 पाठ्यक्रम को निम्नलिखित व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत करता है:
सामान्य अध्ययन 1 पाठ्यक्रम
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं। अधिकतम अंक: 200 अंक
अवधि: दो घंटे
भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन।
भारतीय और विश्व भूगोल- भारत और विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल।
भारतीय राजनीति और शासन-संविधान, राजनीतिक व्यवस्था, पंचायती राज, सार्वजनिक नीति, अधिकार मुद्दे, आदि।
आर्थिक और सामाजिक विकास-सतत विकास, गरीबी, समावेश, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र की पहल, आदि।
पर्यावरण पारिस्थितिकी, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन पर सामान्य मुद्दे – जिनके लिए विषय विशेषज्ञता की आवश्यकता नहीं है।
सामान्य विज्ञान
सीएसएटी यूपीएससी पाठ्यक्रम (GS-2)
UPSC CSE के सामान्य अध्ययन 2 को CSAT (सिविल सेवा योग्यता परीक्षा) पेपर के रूप में भी जाना जाता है। यह पेपर पहली बार 2011 में प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अनिवार्य योग्यता पत्र के रूप में पेश किया गया था। उम्मीदवार की योग्यता, विश्लेषणात्मक कौशल और तर्क क्षमता का आकलन करने के लिए यह UPSC CSE प्रारंभिक परीक्षा का एक हिस्सा बनाया गया था। इस पेपर के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए, प्रत्येक उम्मीदवार के लिए न्यूनतम 33% (66 अंक) आवश्यक हैं।
UPSC CSAT सिलेबस को निम्नलिखित व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत करता है जो की नीचे तालिका में दिए गए है :
सामान्य अध्ययन 2 (CSAT) पाठ्यक्रम
बोधगम्यता अधिकतम अंक: 200 अंक
अवधि: दो घंटे
संचार कौशल सहित पारस्परिक कौशल
तार्किक तर्क और विश्लेषणात्मक क्षमता
निर्णय लेना और समस्या-समाधान
सामान्य मानसिक क्षमता
बुनियादी संख्यात्मकता (संख्याएं और उनके संबंध, परिमाण के क्रम, आदि) (कक्षा X स्तर), डेटा व्याख्या (चार्ट, ग्राफ़, टेबल, डेटा पर्याप्तता आदि। – कक्षा X स्तर)
यूपीएससी सिलेबस 2023 मुख्य परीक्षा
मुख्य परीक्षा के लिए यूपीएससी पाठ्यक्रम में 9 पारंपरिक/सैद्धांतिक पेपर शामिल है। हर पेपर का अपना महत्व होता है। यूपीएससी सीएसई 2023 मेन्स परीक्षा 15 सितंबर 2023 को आयोजित की जाएगी और आयोग द्वारा 5 दिनों में आयोजित की जाएगी। UPSC CSE मुख्य परीक्षा का उद्देश्य केवल उम्मीदवारों के ज्ञान और स्मृति का परीक्षण करने के बजाय उम्मीदवारों की समग्र बौद्धिक क्षमताओं और समझ के स्तर का आकलन करना है। मुख्य परीक्षा के लिए यूपीएससी पाठ्यक्रम नीचे विस्तार से वर्णित है।
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यूपीएससी सिलेबस मुख्य भाषा पेपर
इन प्रश्न पत्रों का उद्देश्य गंभीर गद्य को पढ़ने और समझने के साथ-साथ प्रासंगिक भारतीय और अंग्रेजी भाषाओं में स्पष्ट और सटीक तरीके से विचारों को व्यक्त करने के लिए उम्मीदवार की योग्यता का मूल्यांकन करना है। इन पेपरों में प्राप्त अंकों का उपयोग रैंक निर्धारित करने के लिए नहीं किया जाएगा। ये पेपर केवल क्वालिफाइंग नेचर के हैं (प्रत्येक पेपर में न्यूनतम 25% अंक)।
यूपीएससी पाठ्यक्रम मुख्य: भारतीय भाषा
इस UPSC Mains भारतीय भाषा के पेपर में प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है जैसे की कॉम्प्रिहेंशन पैसेज, संक्षेपण, सटीक लेखन, शब्द प्रयोग, शब्द भंडार और शब्दावली, लघु निबंध, अंग्रेजी से भारतीय भाषा में अनुवाद और भारतीय भाषा से अंग्रेजी में अनुवाद।
उम्मीदवार दी गई तालिका से निम्नलिखित में से कोई भी एक भारतीय भाषा चुन सकता है जो की संविधान के आठवीं अनुसूची में सम्मिलित्त हैं।
भाषा लिपि
असामिआ असामिआ
बंगाली बंगाली
गुजराती गुजराती
हिंदी देवनागरी
कन्नड़ कन्नड़
कश्मीरी पर्शियन/फ़ारसी
कोंकणी देवनागरी
मलयालम मलयालम
मणिपुरी बंगाली
मराठी देवनागरी
नेपाली देवनागरी
उड़िया उड़िया
पंजाबी गुरमुखि
संस्कृत देवनागरी
सिंधि देवनागरी/अरबी
तमिल तमिल
तेलुगु तेलुगु
उर्दू पर्शियन/फ़ारसी
बोडो देवनागरी
डोगरी देवनागरी
मैथिलि देवनागरी
संथाली देवनागरी/ओलचिकी
नोट: संथाली भाषा का प्रश्न पत्र देवनागरी लिपि में मुद्रित किया जाएगा, हालांकि, उम्मीदवार ओलचिकी या देवनागरी में उत्तर देने के लिए स्वतंत्र हैं।
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यूपीएससी पाठ्यक्रम मुख्य: अंग्रेजी पेपर
UPSC सिलेबस मेन्स इंग्लिश पेपर: अंग्रेजी का पेपर भी एक क्वालिफाइंग पेपर होता है जिसमें मुख्य रूप से कॉम्प्रिहेंशन पैसेज, संक्षेपण, सटीक लेखन, शब्द प्रयोग, शब्द भंडार और शब्दावली, लघु निबंध शामिल होते हैं।
यूपीएससी मुख्य पाठ्यक्रम निबंध पेपर
उम्मीदवारों से विभिन्न विषयों पर निबंध पूछे जाएंगे और उनसे अपने विचारों को व्यवस्थित करने कीअपेक्षा की जाएगी। निबंध उन पेपरों में से एक है जहां उम्मीदवार बेहतर स्कोर कर सकते हैं और सावधानीपूर्वक अपनी रैंक में सुधार कर सकते हैं। निबंध के पेपर को दो खंडों में विभाजित किया गया है और प्रत्येक खंड में 4 विषय हैं। निबंध पेपर कुल 250 अंको का होता है जिनमे से प्रत्येक निबंध 125 अंक का होता है।
यूपीएससी मेन्स पाठ्यक्रम सामान्य अध्ययन
पेपर विवरण
पेपर 2 – सामान्य अध्ययन I सामान्य अध्ययन पेपर I में मुख्य रूप से विश्व का इतिहास, भूगोल, समाज, भारतीय विरासत और संस्कृति शामिल हैं।
पेपर 3 – सामान्य अध्ययन II सामान्य अध्ययन पेपर II में मुख्य रूप से राजनीति, संविधान, शासन, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध शामिल हैं।
पेपर 4 – सामान्य अध्ययन III सामान्य अध्ययन पेपर III में मुख्य रूप से आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, जैव विविधता, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन शामिल हैं।
पेपर 5 – सामान्य अध्ययन IV सामान्य अध्ययन पेपर IV में मुख्य रूप से नैतिकता, सत्यनिष्ठा और योग्यता शामिल है।
यूपीएससी पाठ्यक्रम वैकल्पिक विषय
UPSC पाठ्यक्रम वैकल्पिक विषय: पेपर 6 और पेपर 7 वैकल्पिक विषय के पेपर हैं जो अनिवार्य पेपर होते हैं। ये पेपर उन पेपरों में से एक हैं जिनमें उम्मीदवार अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि ज्यादातर मामलों में ये विषय या तो स्नातक विषय होते हैं या उम्मीदवारों के रुचि क्षेत्र के विषय होते हैं।
प्रत्येक वैकल्पिक विषय का अपना व्यापक पाठ्यक्रम है जिसे उम्मीदवार को वैकल्पिक विषय तय करने से पहले एक बार ध्यान से पढ़ना चाहिए। UPSC मुख्य परीक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ वैकल्पिक विषय तय करने के लिए कई कारक और मानदंड हैं जैसे पाठ्यक्रम, उस विषय के लिए उपलब्ध संसाधन, तैयारी के लिए आवश्यक समय आदि।
Read More: UPSC Optional Subjects
उम्मीदवार नीचे दी गई यूपीएससी के लिए वैकल्पिक विषयों की सूची में से किसी एक वैकल्पिक विषय का चयन कर सकते हैं।
यूपीएससी 2023 मुख्य परीक्षा के लिए वैकल्पिक विषयों की सूची
कृषि विज्ञान विधि/कानून (Law)
पशुपालन और पशु चिकित्सा विज्ञान प्रबंधन
नृविज्ञान (Anthropology) गणित
वनस्पति विज्ञान मैकेनिकल इंजीनियरिंग
रसायन विज्ञान चिकित्सा विज्ञान
सिविल इंजीनियरिंग दर्शन शास्त्र
वाणिज्य शास्त्र और लेखा विधि भौतिक विज्ञान
अर्थशास्त्र राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध (PSIR)
विद्युत इंजीनियरिंग मनोविज्ञान
भूगोल लोक प्रशासन
भू-विज्ञान समाज शास्त्र
इतिहास सांख्यिकी
प्राणि विज्ञान निम्नलिखित में से किसी एक भाषा का साहित्य :
असमिया, बंगाली, हिंदी, बोडो, डोगरी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू और अंग्रेजी।
यूपीएससी पाठ्यक्रम साक्षात्कार/व्यक्तित्व परिक्षण
यूपीएससी साक्षात्कार के लिए कोई विशिष्ट पाठ्यक्रम नहीं है, जिसे व्यक्तित्व परीक्षण के रूप में भी जाना जाता है। यह यूपीएससी परीक्षा का अंतिम चरण होता है जो की २75 अंको का होता है। यह चरण मुख्यतः व्यक्ति के तार्किक प्रस्तुति, मानसिक सतर्कता, तर्कों को लेकर स्पष्टता, निर्णय लेने की क्षमता और उसका संतुलन बनाये रखना, आत्मसात करने की महत्वपूर्ण शक्ति, बौद्धिक और नैतिक अखंडता, सामाजिक सामंजस्य और नेतृत्व के लिए योग्यता का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है।
यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के टिप्स
किसी भी माध्यम (अंग्रेजी / हिंदी / अन्य भाषाओं) के उम्मीदवारों के लिए यूपीएससी सीएसई 2023 को पहले प्रयास में उत्तीर्ण करने के लिए, उम्मीदवारों से आग्रह किया जाता है कि वे यूपीएससी पाठ्यक्रम को पूरी लगन से पढ़ें और उसके अनुसार अपनी अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए जरुरी पुस्तकों / संसाधनों को पढ़ें। उम्मीदवारो को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आईएएस पाठ्यक्रम में शामिल सभी विषयों का एक बार अच्छी तरह से विश्लेषण हो जाना चाहिए ताकि अंतिम समय में कोई भी समस्या ना आये। IAS परीक्षा के लिए, आपके द्वारा चुने गए संसाधनों और आपकी तैयारी के दौरान किए गए संशोधनों पर बहुत अधिक निर्भर करता है।
UPSC परीक्षा की तैयारी के लिए क्या करें और क्या न करें
सबसे पहले UPSC CSE सिलेबस और परीक्षा पैटर्न की समीक्षा करें।
प्रीलिम्स और मेन्स की तैयारी को एकीकृतकर के पढ़ना चाहिए लेकिन दोनों के लिए दृष्टिकोण अलग होगा।
एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें बुनियादी अवधारणाओं के निर्माण के लिए मौलिक किताबें हैं और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी के लिए StudyIQ की बुनियादी किताबें जैसे भारतीय भूगोल, भारतीय राजनीति, कला और संस्कृति आदि को भी देख सकते हैं।
विषयों को बेहतर ढंग से समझने के लिए दैनिक करंट अफेयर्स ऑडियो/वीडियो/प्रिंट सामग्री को अवश्य शामिल करें।
सुनिश्चित करें कि CSAT में, कम से कम 33% स्कोर आराम से कर लें क्यूंकि बीते वर्षों में UPSC ने CSAT का लेवल थोड़ा बढ़ा दिया है , इसलिए CSAT के लिए विवेकपूर्ण तरीके से तैयारी करें।
एक समय सारिणी बनाएं और उसका विवेकपूर्ण तरीके से पालन करें और सभी विषयों का अध्ययन करना सुनिश्चित करें। प्रत्येक प्रश्नो को परीक्षा हॉल में आराम से पढ़ें, अन्यथा आप भ्रमित हो सकते हैं और अनावश्यक रूप से गलत उत्तरों को भी चिह्नित कर सकते हैं और जिससे नकारात्मक अंक प्राप्त करेंगे।
एक सहकर्मी समूह बनाएं जो गुणवत्ता संबंधी चर्चाओं में शामिल हो।
पिछले साल के प्रश्न पत्रों को नियमित रूप से हल करें और साथ ही साथ मॉक टेस्ट भी समय समय पर देते रहें।
स्वस्थ आहार और नियमित नींद लेते रखें क्यूंकि UPSC 1-2 दिन की यात्रा नहीं है।
UPSC Syllabus in Hindi PDF
UPSC अपना पाठ्यक्रम अंग्रेजी और हिंदी दोनों माध्यमों में जारी करता है। उम्मीदवार, यूपीएससी सिलेबस पीडीएफ को सीधे आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं या नीचे दिए गए लिंक से सीधे डाउनलोड कर सकते हैं।
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