श्रीमद्भागवत गीता पुस्तक हर घर तक पहुंचना ही हिंदी विंग का उद्देश्य है।
समाज का ऋण चुकाना, माता, पिता, गुरू, दोस्त, गुरूकुल, विद्यालय, समाज, रिश्तेदार, अच्छे लोगो की कृपा और सहयोग से मनुष्य अपनी जीवन यात्रा में उन्नति और वृद्धि करता है। दान देने वाला समाज, सृष्टि और परमेश्वर के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करता हैं। धन का दान या त्याग महानता की निशानी होती हैं इसलिए पहले के लोग अधिक से अधिक दान दिया करते थे।
इस सनातन नियम को याद रखो – यदि आप प्राप्त करना चाहते हो तो अर्पित करना सीखो।
कोई भी धर्म प्रेम से बड़ा नही होता
और दान से बड़ा कोई कर्म नही होता ।।