एसिड फॉस Q – शारीरिक और मानसिक थकावट, नपुंसकता, स्वप्न दोष , एकाग्रता की कमी, उदासीनता, दिन के समय नींद आना। (7 – 7 बून्द दिन में ३ बार)
Avena sativa Q – Neurasthenia, मानसिक overstrain, यौन दुर्बलता, विटामिन और खनिजों से भरपूर। (7 – 7 बून्द दिन में ३ बार)
कैल्शियम फॉस्फोरिकम 6X – कैल्शियम के उत्पादन में कमी और हड्डियों के विकास में गड़बड़ी। (4 – 4 टेबलेट दिन में ३ बार)
China 30 – जनरल टॉनिक humours और थकावट, बीमारियों, नपुंसकता के नुकसान के लिए।
Cinnamomum Q- Convalescence, सभी प्रकार के ब्लीडिंग के लिए है। (7 – 7 बून्द दिन में ३ बार)
जिनसेंग Q – विटामिन डी 1, और बी 2 (थायमाइन और राइबोफ्लेविन) के साथ-साथ सल्फर की उच्च मात्रा के साथ इसके खनिज तत्वों के कारण इसका उत्कृष्ट परिणाम है। (7 – 7 बून्द दिन में ३ बार)
बीमारी से संबंधित वजन में कमी, थकावट, हाइपोस्टेनिया में हाइड्रैस्टिस Q जनरल टॉनिक। (7 – 7 बून्द दिन में ३ बार)
मैग्नीशियम फॉस्फोरिकम 30 C- केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का स्थिरीकरण, नसों और मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन, नसों का दर्द। (दिन में ३ बार)
मेडिकैगो सैटिवा Q- में अमीनो एसिड होता है, जो शारीरिक संरचना के लिए वरदान हैं। (7 – 7 बून्द दिन में ३ बार)
नक्स वोमिका 30C- नसों में ऐंठन का स्थिरीकरण। (दिन में ३ बार)
बुढ़ापे को खुद से दूर रखने के लिए Lycopodium 200 महीने में एक बार जरूर ले। और बच्चो को आत्मविश्वाश से भरपूर बनाने के लिए भी ये उत्तम औषधि है।
सिस्टिक ओवरी डिजेनेरेशन(CYSTIC OVARY DEGENARATION)
इस स्थिति में ग्राफियन फॉलिकल में डिजेनेरेशन होता है। ओवम की अंदर
व बाहरी परते नष्ट हो जाती है। फॉलिकल बड़ा होकर एलार्मल साइज का ही
जाता है और फटता भी नहीं है। ओवरी पर एक से ज्यादा सिस्ट भी हो सकते हैं।
. एपिस मेल (Apis Mellifica)
यह एब्लोर्मल साइज के सिस्ट के को
सोख कर छोटा कर देता है। इसे दिन में दो
बार एक सप्ताह तक दें।
म्युरेक्स परप्युरिया (Murex Purpurea)
यह ओव्यूलेशन को नियमित करता है तथा बार बार अधिक अनियमित
(nymphomania) हीट को सामान्य करता है। इसे सप्ताह में एक बार तीन
सप्ताह तक दें।
, कोलोसिन्थिस (Colocynthis)
जब आवेरी पर एक से ज्यादा सिस्ट हो तथा , पेट दर्द भी हो तो कोलासिन्थिस दिन में एक बार एक सप्ताह तक दें।
. नेट्रम म्युर (Natrum Muriaticum)
सिस्टिक ओवरी की स्थिति में जब गर्भाशय से हरा पीला डिस्चार्ज आता हो
तो नैट्रम म्यूर दिन में एक बार एक सप्ताह तक दें।
. प्लेटिना (Platina)
आवरी के कई विकार दूर करने में प्लेटिना प्रभावशाली असर डालता है।
जब अनियमित हीट के साथ वजिनाइटिस हो तो प्लेटिना दिन में तीन बार
पाच दिन तक दें।
. पैलेडियम (Palladium)
यदि सिर्फ दाहिनी आवरी ही रोगग्रस्त हो तो
फेलेडियम 8 दिन में दो बार एक सप्ताह तक दें।
महिला जननांगों के रोग(DISEASES OF REPRODUCTIVE ORGANS)
मादा जननांगों के रोग
(DISEASES OF REPRODUCTIVE ORGANS)
पल्सेटिला (Pulsatilla)
ovulation में नहीं आना
सीपिया (Sepia)
यह ओवरी व युटेरस के लिए एक प्रकार का टॉनिक है। इसके अलावा पूरे
जनन अंगों पर भी असर होता है तथा कई विकार दूर करती हैं।
(lodum)
जब रेक्टल परीक्षण में लगे कि ओवरी नॉर्मल साइज से छोटी या सिकुडी
हुई हो जिससे नॉर्मल ओव्युलेशन नहीं होता है तो आयोडम दिन में एक बार
दस दिन तक दें।
कैल्केरिया फॉस्फोरिका (Calcarea Phosphorica)
जब गर्भाशय में इन्फेक्शन के कारण मवाद
निकलती हो या वेजिनाइटिस हो। एक डोज रोजाना तीन दिन फिर एक
दिन छोड़कर तीन डोज दें।
कैल्केरिया कार्ड + नेट्रम म्यूर (Cal Carb+Natrum Mur)
इन दोनों दवाओं को सप्ताह में दो बार एक महीने तक दें।
सूखी खाँसी, गीली खाँसी और कूकर खाँसी रोग
सूखी खाँसी, गीली खाँसी और कूकर खाँसी रोग
सूखी खाँसी (Dry Cough & Cold)
(a) एकोनाइट 30 : सर्दी लगने सूखी खाँसी के होने पर इस दवा का प्रयोग
करना चाहिए।
(b) सल्फर 200 : जब खाँसी बहुत पुरानी हो जाये तो सल्फर 200 देने
से बहुत लाभ होता है।
(c) फॉस्फोरस 30 : जब दिन-रात लगातार खुश्क खाँसी होती हो।
(d) वेलाडोना 30 : गले में खुश्क खाँसी तथा गला खाँसते-खाँसते दुखने
लगे।
(e) व्रायोनिया 30 : ज्यादा खुश्की आने पर तथा जरा सा भी बोलने पर
खाँसी आने लगती हो तब यह दवा दी जाती है।
गीली खाँसी (Wet Cough)
(a) ड्रोसेरा- खाँसते-खाँसते उल्टी हो जाना, ऐसी दशा में इसे दें।
(b) रसटाक्स- जब भीग जाने पर खाँसी हो जाती है, तब इसे देना चाहिए।
(c) इपिकाक- पुरानी खाँसी जिसमें छाती में कफ भरा महसूस होता हो।
(d) कैलिसल्फ- पीले रंग का ढीला कफ निकलता है।
कूकर-खाँसी (Whooping Cough)
यह एक संक्रामक रोग माना गया है। इस खाँसी का वेग बहुत ही अधिक होता
है। खाँसते-खाँसते चेहरा लाल हो जाता है। कभी-कभी तेज खाँसी के कारण
वमन भी हो जाता है। इसकी प्रमुख दवायें निम्न हैं-
(a) ड्रोसेरा 30 : इस दवा की एक ही खुराक से इसमें तत्काल लाभ मालूम
पड़ने लगता है। यह कूकर खाँसी (Whooping cough) की सबसे अच्छी
दवा है।
(b) फास्फोरस 200 : जब शाम को कूकर-खाँसी का प्रकोप अधिक
मालूम पड़े तो इसमें गला बैठ जाता है तथा ठण्डा पानी पीने की तीव्र
इच्छा होती है।
(c) कुप्रेम मेट 30 : जब दौरा बहुत ही तेज हो। खाँसी में ऐंठन सी महसूस
हो और ठण्डा पानी पीने में आराम मिलता हो।
पुरानी खाँसी
(a) इपिकाक 30- पुरानी खाँसी जिसमें छाती में कफ भरा महसूस हो तथा
खाँसते-खाँसते उल्टी हो जाती हो।
(b) पल्सेटिला 30 : पीले रंग का कफ निकलता हो, शाम को बढ़ जाता है।
(c) अमोनियम कार्व 30 : वृद्ध लोगों की खाँसी में बहुत ज्यादा कफ का
आना।
(d) हिपर सल्फ 30 : पुरानी खाँसी, खाँसते-खाँसते गला रुंध जाता हो।
एलर्जी
एलर्जी
एलर्जी के लक्षणों के खिलाफ सीधे हार्मोनल प्रभाव के लिए Adrenalinum 6X । (4 गोली दिन में 3 बार),
एंटीहिस्टामिनिक प्रभाव के लिए Hepar sulphuris 6X। (4 गोली दिन में 3 बार)
Histaminum 30C एंटीहिस्टामाइन प्रभाव के लिए सबसे अच्छा एंटीएलर्जिक प्रतिक्रिया प्रदान करता है। (दिन में 3 बार)
Aller-N drop का रिजल्ट भी बहुत बढ़िया है।
प्रतिरोधक दवाएं – Preventive Medicines
प्रतिरोधक दवाएं – Preventive Medicines
अगर आपके आस पास नीचे लिखे बिमारियों में से कोई बीमारी फ़ैल रहा है तो उसकी प्रतिरोधक दवा पहले हीं ले लें ताकि वो बीमारी आपको लगे हीं नहीं l
● छोटी माता (Chicken Pox) – (पल्साटिला 200, एक खुराक)
● खसरा (Measles) – (मोर्बेलिनम 200, एक खुराक)
● चेचक (Small Pox) – (वेरियोलिनम 200 या 1M, एक खुराक)
● हैजा (Cholera) – (क्युप्रम मैट 30 या 200, एक खुराक)
● डिफ्थिरिया (Diphtheria) – (डिफ्थिरिनम 200, एक खुराक)
● फ्लू (Influenza) – (इन्फ़्लुएन्जिनम 200, एक खुराक)
● मैनिन्जाइटिस (Meningitis) – (बेलाडोना 200, एक खुराक)
● मम्पस (Mumps) – (पैरोटिडीनम 200, एक खुराक)
● काली खांसी (WhoopingCough) – (परटूसिन 1M, एक खुराक)
खांसी – Cough
खांसी – Cough
खांसी दो तरह की होती है – एक सुखी तथा दूसरी बलगम वाली l खांसी अगर ज्यादा दिनों तक रहे तो अन्य अनेक रोगों को उत्पन्न कर देती है l खांसी के रोगी को तेल, खटाई, गुड़, लालमिर्च का सेवन एवं धूम्रपान नहीं करना चाहिये l
● एकोनाइट 30- नई सुखी खांसी, खासकर रात में बढ़ जाना , गले के भीतर खरखराहट , ठंडा पानी पीने की इच्छा – (2 -3 घंटे के अंतर पर)
● हिपर सल्फर 30 – सुखी या बलगम वाली खासी , सर्दी लगने से बढने वाली, पुरानी खांसी ,दिन में कफ अधिक निकलना – (दिन में 3 बार)
● इपेकाक 30 और एंटीम टार्ट 30- सीने में बलगम जमा होने पर भी न निकलना साँस लेने में कष्ट , खासते खांसते उल्टी जैसा होना , हाथ पाव अकड़ जाना , हाफने लगना – (दिन में 3- 4 बार)
● ब्रायोनिया 30 – खासते हुए छाती में दर्द , हाथ से दबाने से आराम , प्यास ज्यादा , होठ और जीभ सुखा , खून मिला कफ निकलना , खाना खाने के बाद खासी होना – (दिन में 3-4 बार)
● खासी के साथ मुंह या नाक से पीला चिपचिपा बलगम निकलना , गाढ़ा तार खिंचने जैसा – (काली बाई 30 और पल्साटिला 30, दिन में 4 बार)
● स्पोंजिया 30- बिलकुल सुखी खांसी, गले में सुरसुराहट , खासी की आवाज सीटी बजने जैसा हो – (दिन में 3 -4 बार)
सर्दी , जुकाम – Cold , Catarrh
सर्दी , जुकाम – Cold , Catarrh
कारण : वर्षा में भीगना, ओस या सर्दी लगना, देर तक भीगे कपड़े पहने रहना, एकाएक पसीना बंद हो जाना, बदहजमी, आदि l लक्षण : शरीर में सुस्ती, बदन में अंगड़ाई, जम्हाई आना, सिर में दर्द या भारीपन, आंखे लाल, छीकें आना, आंखो से पानी आना, खांसी बुखार, भूख कम हो जाना आदि l
● एकोनाइट 30- जब सुखी ठंडी हवा लग कर रोग आया हो, ठंडक महसूस होना, सिर दर्द, आँखों से पानी, छीकें आना, सूखी खांसी, बार – बार बेचैनी तथा भय , खुली हवा में अच्छा लगता है – (3 – 4 खुराक दिन भर में दें )
● ब्रायोनिया 30- चिडचिडापन , तेज सर दर्द के साथ नजला जुकाम , नाक से बहुत पानी बहने के साथ होठ सुखा होना – (दिन में 3-4 बार)
● पल्साटिला 30 – हरा पीला स्राव , स्वाद न रहना , प्यास न हो – (दिन में 3-4 बार )
● एलियम सीपा 30 – सर्दी के कारण लगातार छीकें आती है , गर्म कमरे में जाने से बढ़ती है , नाक से बहुत ज्यादा पानी की तरह का जलनयुक्त स्राव , सिरदर्द , खांसी तथा आवाज बैठी हुई , आँखों में पानी – (2 -3 घंटे के अंतर पर )
● आर्सेनिक एल्ब 30- नाक से जख्म कर देने वाला स्राव , आँख व नाक में जलन , बेचैनी , थोड़ी – थोड़ी देर में थोडा – थोडा पानी पीने की इच्छा , कमजोरी , बुखार व सिरदर्द l सभी लक्षण गर्मी व गर्म चीजों के उपयोग से घटते हों – (2 -2 घंटे के अंतर पर )
● बेलाडोना 30 – गले में व सिर में दर्द , चेहरा तमतमाया हुआ , नींद गायब , खांसी-जुकाम – ( दिन में 3 – 4 बार )
● कालि बाई 30 – जब नाक से गाढ़ा पीला या हरा , चिपचिपा बलगम निकले – (दिन में 3 – 4 बार )
छोटी और बड़ी सांस की नलियों या उनकी श्लैष्मिक झिल्ली में सूजन होने को ब्रोंकाइटिस कहते हैं। बच्चों और बूढ़ों को यह रोग होने पर अधिक कठिनाई हो सकती है। यदि कारण लगातार बना रहे तो यह रोग पुराना हो जाता है।
कारण: अधिक देर तक गीले वस्त्र पहनना, भीगना, आदि।
लक्षण: (सर्दी जुकाम देखिए) आलस्य, सिरदर्द, स्वरभंग, हल्का बुखार, श्वास कष्ट आदि।
(रोग की प्रथम अवस्था)
● अच्छे भले स्वस्थ, प्रसन्नचित व्यक्तियों में अचानक सूखी ठंड लगने के कारण बेचैनी के साथ ठंड, तेज बुखार, नाड़ी तेज व डर – ( Aconite 30, हर 3 घंटे बाद)
● Ferrum Phos 6x,- कमजोर व्यक्तियों में जब तेज बुखार हो- ( 4-4 गोलियां दिन में 4 बार)
● Belladonna 30,- आंखें लाल, चेहरा लाल तमतमाया हुआ, और तेज बुखार के साथ बेहोशी जैसा – ( दिन में 4 बार)
● Bryonia 30,- प्यास अधिक, बुखार तेज, मुंह सुखा, हंसने से छाती व सिर में दर्द जैसे कि सिर फट जाएगा जो हिलने डुलने से बढ़ता है, इसलिए रोगी चुपचाप लेटा रहता है- ( दिन में 3-4 बार)
● मर्क सोल 30,- जब बुखार तेज हो, पसीना खूब आए, परंतु आराम न मिले, मुंह लार से तर, दुर्गंध, जीभ पर दातों के निशान व जीभ मोटी- ( दिन में 3 बार)
● Dulcamara 30,- मौसम बदलते समय रोग; जब दिन में गर्मी व रात में ठंड हो- (3-4 खुराक हर 3 घंटे बाद)
यदि उपरोक्त दवाओं से फायदा कम हो या ना हो तो सल्फर 30 की एक खुराक देखकर प्रतीक्षा करें। फिर लक्षण साफ होने पर लक्षण अनुसार दवा दें। जिन लोगों को यह रोग बार बार होता है उन्हें ट्यूरबरकुलाइनम 200 या 1M की एक खुराक महीने में एक बार कुछ महीनों तक देनी चाहिए।
(रोग की द्वितीय अवस्था)
● जब जरा सी ठंड से भी रोग बढ़ता हो, यहां तक कि हाथ भी उघड़ जाए तो रोग बढ़े। छाती में घड़घड़ाहट और नाक से स्राव रुक रुक कर आए – ( हिपर सल्फर 30, दिन में 3 बार)
● शाम के समय व बाईं करवट लेने से रोग बढ़े, रोगी कराहे और बात भी ना कर पाये, गले में दर्द – ( फॉस्फोरस 30, दिन में 3 बार)
● छाती में घरघराहट, ढीली बलगम वाली खांसी हो मगर बलगम निकल नहीं पाए, जीभ सफेद- (एंटीम टार्ट 30, दिन मे 3 बार)
● जब ऊपर की दवाओं से कोई फायदा ना हो और सांस व शरीर ठंडा होते हुए भी रोगी ताजी हवा या पंखा चलाना चाहे- ( कार्बो वेज 30, दिन में 4 बार)
(रोग की तीसरी अवस्था)
● यदि दूसरी अवस्था में उपरोक्त दवाओं से फायदा हो मगर बलगम पूरी तरह साफ ना हुई हो; प्यास तथा स्वाद भी वापस न आया हो और ठंडी हवा की इच्छा हो- ( पल्सेटिला 30, दिन में 2-4 बार)
बायोकेमिक औषधि काली सल्फ 6x भी ऐसी अवस्था में अच्छा काम करती है।
ब्रोंकाइटिस रोग अक्सर सोरा (Psora) की वजह से होता है और इसलिए सल्फर एवं ट्यूरबरकुलाइनम इस रोग की प्रमुख औषधियां हैं।
नोट: दूसरी दवाई जो ब्रोंकाइटिस में फायदा पहुंचा सकती है खांसी वाले अध्याय में देखें।
मरीज को हल्का खाना लेना चाहिए। दही, चावल चिकनाई को तो छूना भी नही चाहिए। शाम को जल्दी भोजन कर लेना चाहिए
साइनुसाइटिस – Sinusitis
साइनुसाइटिस – Sinusitis
माथे, गाल व नाक की हड्डियों के अंदर के भाग में सूजन व श्लेष्मा जमा होना। जुकाम बिगड़ जाने पर इस स्थान में बलगम या म्यूकस जमा हो जाता है जिससे इन हड्डियों में दर्द होता है, इसी को साइनस का दर्द कहते हैं।
लक्षण: इस रोग में जुकाम और सिरदर्द के मिले-जुले लक्षण रहते हैं।
● रोगी ठंडी हवा के प्रति संवेदनशील हो, सिर को ढक कर रखना चाहे, नाक व आंखों के ऊपर दर्द हो- ( साइलीशिया 1M सप्ताह में एक बार)
● जब बलगम ठंड से बढ़े – ( कालीबाई 30, दिन में 4 बार)
● जब रोग दाहिनी ओर ज्यादा हो- (सैंगुनेरिया 30, दिन में 3-4 बार)
● जब रोग बाई और ज्यादा हो- ( स्पाइजिलिया 30, दिन में तीन चार बार)
सर्दी जुकाम व खांसी अध्याय भी देखें।
रक्तचाप का बढ़ना – High Blood Pressure
रक्तचाप का बढ़ना – High Blood Pressure
अधिक मानसिक श्रम या चिंता, शारीरिक श्रम का कम होना, गरिष्ठ भोजन, भोग विलास, अधिक भोजन करने, मोटापा, शराब धूम्रपान या खानपान की गड़बड़ से शिराओं का कड़ा होना और उनकी फैलने की शक्ति में कमी या रक्त गाढ़ा(अधिक नमक मिर्च खाने से) होने के कारण रक्तचाप बढ़ जाता है। लक्षण: सिर में दर्द व चक्कर,घबराहट, बेचैनी, दिल में दर्द,नींद न आना आदि।
● प्रमुख दवा। गर्भावस्था में चिकित्सक की देखरेख में ही लें – ( रौवलफिया Q, 10-15 बूंद पानी मे मिलाकर कर दिन में 3 बार)
● कनपटियों में दर्द, गर्मी व धूप से रोग बढ़े – (ग्लोनॉइन 6 या 30, दिन में 3 बार)
● सिर हिलाते ही चक्कर आना, अविवाहितों के लिए खास दवा – (कोनियम 30 या 200 2-3 खुराक)
● जब नींद से उठने के बाद रोग बढ़े। खुले कपड़े पहनने की इच्छा हो – (लैकेसिस 200 या 1M, 2-3 खुराक)
● मोटे व्यक्तियों में जो मांसाहारी भोजन ज्यादा लेते हैं -(एलियम सैटाइवा Q)
● दुखी लोगों में जिनमें नमक खाने की इच्छा ज्यादा हो – ( नेट्रम म्यूर 200 या 1M, 2-3 खुराक)
● अचानक बुरी खबर या घबराहट के कारण रोग – (जलसेमियम 200 या 1M 2-3 खुराक)
● बूढ़े लोगों के लिए – (बैराइटा म्यूर 3X, दिन में 3 बार)
● सिर दर्द, घबराहट, त्वचा लाल व गर्म लेकिन प्यास ना हो- ( बेलाडोना 30, दिन में 2-3 बार)
दिल का ज्यादा धड़कना – Palpitation
दिल का ज्यादा धड़कना – Palpitation
ऐसे तो हमारे शरीर में हृदय प्रति मिनट औसतन 72 बार धड़कता है और इस धड़कन से खून हमारे शरीर में चक्कर लगाता रहता है। मगर हृदय का कोई भी रोग होने पर खून की कमी, चिंता, भय, ज्यादा नशा करने, सूजन, आदि से हृदय की धड़कन तेज हो जाती है।
● मुख्य दवा। – (क्रेटेगस Q, 5-15 बूंद, दिन में 4 बार)
● जब धड़कन के कारण लगे की दिल काम करना ही बंद कर देगा। भय, घबराहट व मृत्यु भय हो – ( एकोनाइट 30)
● चोट लगने के कारण धड़कन का बढ़ना – ( आर्निका 30 या 200, 3-4 खुराक)
● ऐसा लगे कि दिल लोहे के शिकंजे में जकड़ा है – (कैक्टस Q, 5-15 बूंद दिन में 5 बार)
● जब धड़कन रक्त स्राव या अन्य स्राव के कारण बढ़े – ( चाइना Q या 30, दिन में 4 बार)
● जब नशीले पदार्थों (तम्बाकू आदि) के सेवन के कारण रोग हो। मन दुखी व हृदय में दर्द हो – ( स्पाइजिलिया 30, दिन में 3 बार)
● जब लगे कि कुछ ना कुछ हरकत करते रहना चाहिए, नही तो कहीं दिल काम करना ही बंद ना कर दे – (जलसेमियम 30, दिन में 3 बार)
● जब चलते समय लगे कि दिल हिल रहा है। निराशा व आत्महत्या की इच्छा हो – (ऑरम मैट 200, 2-3 खुराक)
● जब बाएं करवट लेटने से धड़कन बढ़े – (फॉस्फोरस 30 या 200, 2-3 खुराक)
निम्न रक्तचाप – Low Blood Pressure
रक्तचाप कम होने पर रोगी को सुस्ती, आलस्य, निराशा और घबराहट सी रहती है।
● अधिक स्राव (उल्टी-दस्त, वीर्य, खून) के कारण – (चाइना Q या 6, दिन में 3 बार)
● धूप में बेहोश हो जाना नमक की इच्छा ज्यादा हो – (नेट्रम म्यूर 6X या 30, दिन में 3 बार)
● कमजोरी व पेट में वायु के कारण; रोगी खुली हवा चाहे – (कार्बो वेज 6 या 30, दिन में 3 बार)
● कमजोर व बढ़ती उम्र के लोगों में -(कैलकेरिया फॉस 6X, दिन में 3 बार)
● जब नब्ज़ क्षीण व धीमी हो, दिल पर बोझ सा महसूस हो – (विस्कम एल्बम Q, 5-15 बूंद, दिन में 3 बार)
● जब लगे कि हरकत बंद करते ही दिल काम करना बंद कर देगा – (जलसेमियम 30, दिन में 3 बार)
खाने पीने में पौष्टिक व संतुलित आहार लें। चिंता ना करें। फल व सब्जियां प्रचुर मात्रा में लें।
इंफ्लुएंजा- Influenza
इंफ्लुएंजा- Influenza
एक तरह के जीवाणु इस बीमारी के खास कारण माने जाते हैं। यह एक तरह की छूत और फैलने वाली, सर्दी की बीमारी है।
लक्षण: सर्दी, शरीर में टूटन, गले में दर्द, सिर में दर्द, बार बार ठंड लगना, छीकें आना, बुखार जैसा महसूस होना आदि।
● जब रोगी को काफी ठंड महसूस हो और कपकपी आती हो- ( नक्स वोमिका 30, हर 2 घंटे बाद)
● शरीर में दर्द, खांसी जुकाम, चुपचाप लेटे रहने की इच्छा हो, प्यास न हो- ( जेल्सीमियम 30, हर 2 घंटे बाद)
● हड्डियों तथा मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी व बुखार – ( यूपेटोरियम पर्फ 30, दिन में चार बार)
● जब हिलने डुलने से रोग बढ़े, यहां तक की खाँसने तक से भी सिर में दर्द हो जाए, प्यास अधिक हो- ( ब्रायोनिया 30, दिन में 4 बार)
● जब थोड़ी प्यास के साथ हिलने डुलने से रोगी को अच्छा लगे – (रस टॉक्स 30, दिन में 4 बार)
● जब उपरोक्त दवाओं से पूर्ण रुप से फायदा ना हो, बेचैनी हो और रोगी थोड़ी थोड़ी देर में थोड़ा थोड़ा पानी पीना चाहे गर्म पेय से आराम महसूस करें- (आर्सेनिक एल्ब 30, दिन में 4 बार)
● जब चेहरा लाल हो व बुखार हो, रक्त का जमाव शरीर के ऊपरी भाग में हो – ( बेलाडोना 30, दिन में 4 बार)
गर्म पानी से पैर धोकर सोने से फायदा होता है। एवेना सैटाइवा Q, 10-15 बूंद गर्म पानी में मिलाकर दिन में तीन चार बार लेने से आराम आ जाता है। बायोकेमिक औषधि नेट्रम सल्फ 6x बहुत फायदेमंद है।
सिर दर्द – Headache
सिर दर्द ज्यादातर बहुत सी नई और पुरानी बीमारियों का एक लक्षण ही होता है। सिर दर्द, बुखार, मस्तिष्क में खून का अधिक दबाव, पेट की गड़बड़ी, सिर पर चोट लगने तथा कभी कभी स्वास्थ्य के सामान्य रूप से क्षीण हो जाने के कारण होता है।
● सिर में रक्त संचय , चेहरा तमतमाया हुआ, दर्द अचानक शुरू हो और अचानक ही खत्म हो – (बेलाडोना 30, हर 2 -3 घंटे पर)
● सिर में दाहिनी तरफ दर्द – (सैंगुनेरिया 30, दिन में 3 बार)
● सिर में दर्द, सिर को लपटने से आराम, ठंड से रोग बढ़े – (साइलीशिया 30, दिन में 3 बार)
● सिर में बाईं ओर दर्द, रोशनी और शोर बर्दाश्त न हो – (स्पाइजिलिया 30, दिन में 3 बार)
● जब सिर दर्द के साथ खट्टी या पित्तवाली उल्टी हो, सिर दर्द के कारण बुरा हाल हो – (आइरिस वी 30, दिन में 3 बार)
● स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का सिर दर्द। जब बच्चा कमजोर हो – (कैल्केरिया फॉस 6X, दिन में 3-4 बार)
● धूप में व प्रातः 10-11 बजे सिर दर्द अधिक हो, रोगी को नमक खाने की ज्यादा इच्छा हो – (नैट्रम म्यूर 6X या 30, दिन में 3-4 बार)
● सिर दर्द जो जरा सा भी हिलने – डुलने स3 बढ़े व प्यास अधिक हो। कब्ज हो – (ब्रायोनिया 30, दिन में 4 बार)
● सिर दर्द होने के बाद पित्त की उल्टी हो और सिर दर्द कम हो जाये – (चियोनैन्थस Q, 5-10 बूंद, दिन मे 3 बार)
● सिर दर्द में लगे जैसे कोई सिर में कील ठोक रहा है; धुंए से व मानसिक तनाव से रोग बढ़े – (इग्नेशिया 30 या 200, दिन में 3 बार)
● रोगी दर्द के मारे बेहोश तक हो जाए; रोगी चिड़चिड़ा तथा ठंडी तासीर वाला हो। पेट ठीक न रहता हो – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
● गुस्से से सिर दर्द बढ़ता हो। रोगी दर्द के प्रति अति संवेदनशील हो – (कैमोमिला 30 या 200, दिन में 3 बार)
● धूप व लू लगने से सिर दर्द, सूरज की धूप में दर्द का बढ़ना, गर्मी बर्दाश्त न हो – (ग्लोनॉइन 6 या 30, दिन में 3 बार)
● शरीर से बहुत खून बह जाने या अधिक वीर्यपात की वजह से बहुत कमजोरी व सिर दर्द – (चाइना 6 या 30, दिन में 3 बार)
● तेल, घी आदि से बनी गरिष्ट चीजें खाने की वजह से सिर दर्द ; प्यास न के बराबर जबकि गला सूखा रहे – (पल्साटिला 30, दिन में 3 बार)
हल्का सुपाच्य भोजन दें। अगर रक्त संचय की वजह से सिर दर्द हो रहा हो तो ठंडे पानी से सिर धोयें। अगर पेट की गड़बड़ी के कारण सिर दर्द हो तो उपवास से फायदा होता है।
आधा सीसी का दर्द – Migraine
आधा सीसी का दर्द – Migraine
सिर के किसी एक तरफ होने वाला भयंकर दर्द जो आमतौर पर उल्टी होने के बाद शांत हो आधा सीसी का दर्द कहलाता है। रोगी दर्द के कारण तड़पता है, चुपचाप लेटे रहना चाहता है।
● धूप लगने, गैस या बिजली की रोशनी में काम करने से रोग बढ़े। सिर में अत्यधिक गर्मी महसूस हो – (ग्लोनॉइन 30, दिन में 4 बार)
● सिर दर्द खास कर बाईं ओर सोने से बढ़े, उल्टी लगने या मासिक स्राव के बाद थोड़ा आराम मिले – (लैकेसिस 30 या 200)
● तीव्र अवस्था मे; जब सिर दर्द असह्य हो – (डैमियाना Q)
● संवेदनशील व्यक्तियों में अचानक खुशी या गम के कारण भयंकर सिर दर्द – (कॉफिया 30 या 200)
सिर दर्द अध्याय भी देखें।
दमा – Asthma
दमा – Asthma
फेफड़े में हवा ले जाने वाली नालियों (Bronchi) तथा फेफड़ों (Lungs)में जब श्लेष्मा (Mucous)जमा हो जाता है, निकाले नहीं निकलता, सांस मुश्किल से आता है, छाती से सांय सांय की आवाज आती है, सीटियां सी बजती हैं, रोगी हवा के लिए तरसता है, अक्सर रात में कष्ट बढ़ता है l
कारण : मानसिक उत्तेजना, कब्ज, वात,धूल, या धुएं भरे वातावरण में रहना l ज्यादा मात्रा में ख़राब भोजन करना l यह रोग वंशानुगत भी हो सकता है l
● एकाएक तेज दमे का आक्रमण (acute attack) l रोग के शुरू में – जब बेचैनी व मितली हो l – (एकोनाइट Q, इपिकैक Q, 10-10 बूंद पहले 1 घंटे के अंतर से अदल-बदल कर व आराम आने पर 3-3 घंटे के बाद दें)
● जब रात के 12 बजे रोग बढ़े, बेचैंनी व प्यास अधिक हो – (आर्सेनिक एल्ब 6 या 30, दिन में 4 बार)
● दमा के प्रकोप को कम करने के लिए, जब दम घुटे, सांस ठीक से न ली जाय – (ब्लैटा ओ Q, सेनेगा Q, ग्रिंडीलिया Q व कैशिया सोफोरा Q बराबर मात्रा में मिला कर दें )
● मितली, कलेजे में संकुचन, दम घुटे, जीभ साफ़ हो – (इपिकैक 6 या 30, 2-2 घंटे के बाद)
● सोने से तकलीफ बढ़े, श्लेष्मा निकलने से आराम आए l प्रौढ़ स्त्रियों में रजःस्राव बंद होने के समय दमा – (लैकेसिस 30, 3-3 घंटे के बाद)
● थोड़ी देर सोने के बाद तकलीफ बढ़े – (अरेलिया रेसिमोसा Q या 30, दिन में 3 बार)
● रोग जब अंग्रेजी दवा(steroids etc) लेने के बाद आए, रोगी ठंडी प्रकृति का हो – (थूजा 1M या 200)
● जब इओसिनोफिल्स की मात्रा बढ़ जाए l सांस फूलने लगे – (थायरोएडिन 200 या 1M व लैकेसिस 30)
● वाहनों के धुंए या इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन से रोग हो या बढ़ता हो – (एसिड सल्फ्यूरोसम 30, दिन में 3 बार)
● जब रोगी सिर्फ खड़ा रह कर सांस ले सके – (कैनाबिस इंडिका 200 या 1M)
● सूती कपड़ा बुनने व रुई धुनने वाले मजदूरों में – (गौसिपियम 30, दिन में 3-4 बार)
● पत्थर तोड़ने वाले मजदूरों में – (साइलिशिया 30, दिन में 3-4 बार)
● फूलों की खुश्बू से – (ऐलेन्थस जी. 30, दिन में 3-4 बार)
● गुस्से की वजह से रोग बढ़े – (कैमोमिला 200 या 1M)
● मल्लाहों का दमा, जहाज पर समुद्र में रहने से ठीक रहे और समुद्र तट पर आने से उभर आए – (ब्रोमियम 30, दिन में 3 बार)
● मानसिक तनाव या अशांति के कारण, धुएं से बढ़े – (इग्नेशिया 200 या 1M)
● बायोकैमिक दवा – (मैग्नीशिया फॉस 6X व काली फ़ॉस 6X अदल-बदल कर 3-3 घंटे के बाद)
मांस-मछली, दूध, सफ़ेद चीनी, केक, पेस्ट्री, मैदा के बिस्किट, सफ़ेद डबल रोटी, व मैदा से बनी चीजें न दें l आटा मोटा पिसा इस्तेमाल करें l शहद, सलाद, ताजी सब्जियां, उबला अंडा, पनीर आदि इस्तेमाल करें l रात का भोजन कम व सांयकाल ही कर लें l
न्यूमोनिया – Pneumonia
न्यूमोनिया – Pneumonia
फेफड़ों के तंतुओं में सूजन हो जाने को न्यूमोनिया कहते हैं l
लक्षण : पहली या आरंभिक अवस्था में ठण्ड लगने के कारण फेफड़े में सूजन हो जाती है और सांस लेने में कष्ट होता है l तेज बुखार, बेचैंनी, प्यास आदि लक्षण होते हैं l दूसरी अवस्था में बलगम बनकर सारे फेफड़े में फ़ैल जाता है ; इस अवस्था में बलगम में खून भी आने लगता है और फेफड़ा कड़ा हो जाता है l यह अवस्था 4-18 दिन तक रह सकती है l तीसरी अवस्था: आराम होने की ओर बढ़ने वाली अवस्था l इसमें स्राव जज्ब (Absorb)होने लगता है तथा फेफड़ा पुनः काम करने लगता है l अगर स्राव जज्ब न हो तो रोगी मर भी सकता है l आरंभिक अवस्था में दवा देकर योग्य डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए l
● बीमारी की शुरू की हालत में जब कंपकंपी तेज हो l तेज बुखार, बेचैंनी, प्यास, डर व खुश्क खांसी हो – (एकोनाइट 30, हर आधे घन्टे पर)
● जब रोग रात में 12 बजे के बाद बढ़े, रोगी सुस्त हो, बेचैंनी महसूस करे व थोड़ा-थोड़ा पानी थोड़ी-थोड़ी देर के अंतर से पिये – (आर्सेनिक एल्ब 30, हर 2 घंटे पर)
● तेज बुखार के साथ बेहोशी, चेहरा तमतमाया लाल, ढके हुए अंगों पर पसीना; और खून का मस्तिष्क व छाती में जमाव हो – (बेलाडोना 30, हर 2 घंटे पर)
● जब बेचैंनी ख़त्म होने पर रोगी चुपचाप पड़ा रहे, हिलने-डुलने से रोग बढ़े, छाती में दर्द व दबाव महसूस हो, खासने से छाती व माथे में दर्द – (ब्रायोनिया 30, दिन में 4 बार)
● जब बलगम मवाद की तरह का हो, ठण्ड से रोग बढ़े, रोगी ठंडी प्रकृति का हो – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 3-4 बार)
● जब खूब पसीना आये मगर आराम न मिले, रोग रात में बढ़े – (मर्क सौल 30, दिन में 3-4 बार)
● सुखी खांसी, छाती में दर्द, खून मिला बलगम, ठंडा पीने की इच्छा l आखिरी अवस्था में – (फ़ॉसफोरस 30, दिन में 3-4 बार)
● छाती में बलगम घड़घड़ाये मगर फिर भी न निकले; जीभ सफ़ेद – (एंटीम टार्ट 30 या 200, 2-3 खुराक)
● आखिरी अवस्था में जब रोगी ठंडा होने लगे, ठंडा पसीना आए – (विरेट्रम एल्ब 30, 15-20 मिनट पर)
छाती को रुई से ढकना अच्छा है पर अनावश्यक रूप से कपड़े न लादें जायें l ठंडी हवा से बचाव करें l खाने पीने में हल्का व थोड़ा गर्म खाना दें l दलिया, कॉर्नफ्लेक्स, दूध, रोटी, गर्म दूध के साथ खजूर व बनफशा दूध में उबालकर देने से लाभ होता है l
काली खांसी – Whooping Cough
काली खांसी – Whooping Cough
श्वासतंत्र, स्वरतंत्र की सूजन और साथ ही स्वरनली में अकड़न हो और और खांसी आए तो उसे काली खांसी कहते हैं l
लक्षण: शुरू में हल्का सा बुखार, छींके, जुकाम, व आंखो से पानी; बाद में खांसी के दौरे पड़ने लगते हैं l खांसते खांसते सांस रुक जाता है, चेहरा लाल या नीला l आंखे लगता है की निकल पड़ेगी, नसें फूल जाती है और थोड़े समय के अन्दर ही खांसी प्राणघातक रूप धारण कर लेती है l यह बच्चों की जानलेवा बीमारी है l
● रोग की शुरू अवस्था में ; जब काफी बेचैंनी हो – (एकोनाइट 30, हर 2 घंटे बाद)
● चेहरा लाल हो, सिर दर्द हो l शरीर की उपरी भाग में रक्त का जमाव हो – (बेलाडोना 30, 2-3 घंटे पर)
● जब ठण्ड लगने के कारण खांसी हो, गले में मछली का कांटा फंसने जैसा आभास हो – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 4 बार)
● जब बलगम गाढ़ा व तार की तरह खिंचने वाला हो; सुबह के समय ज्यादा हो – (काली बाई 30, दिन में 4 बार)
● जब नींद में या नींद के बाद रोग बढ़ता हो l गले के पास कपड़ा तक न सुहाए – (लैकेसिस 30, दिन में 3 बार)
● जब गले के अन्दर आरी चलने जैसी आवाज हो और कुत्ता खांसी हो – (स्पोंजिया 6 या 30, दिन में 3 बार)
पुराने रोग में सिफिलिनम 1M की एक खुराक देकर परटूसिन 1M की एक खुराक अगले दिन दें और फिर उपरोक्त दवाओं में से लक्षण के अनुसार जो दवा उचित समझें दें l ड्रोसेरा Q, 5 बूंद और जस्टिशिया Q, 5 बूंद अदल-बदल कर गर्म पानी में लेने से जल्दी फायदा होता है l
बाल का गिरना – Falling of hair
बाल का गिरना – Falling of hair
● बाल गुच्छे के रूप में झड़ते हो . कभी यहाँ से कभी वहां से , चकत्ते के रूप में – (फास्फोरस 30 या 200, दिन में 2 बार तथा कैल्केरिया फ़ॉस 6X दिन में 4 बार )
● सफ़ेद खुश्क रूशी के कारण बालों का झड़ना , बालों का टूटकर गिरना – (थूजा 30, दिन में 3 बार )
● चिंता तथा मानसिक अवसाद के कारण सिर , भौं , पलकों , तथा , जननांग से बाल झड़ना – (एसिड फॉस 30, दिन में 3 बार)
● कंघी करने पर बाल टूटना – (कार्बो वेज , चाइना तथा बिस्बैडेन 30, दिन में 3 बार)
● सिफलिस के कारण बाल झड़ना – (अस्टिलेगो Q या 30 तथा फ्लोरिक एसिड 30, दिन में 3 बार)
● महिलाओं को प्रसव के बाद बाल झड़ना – (चाइना , कार्बो वेज , बिस्बैडेन . सभी 30, दिन में 3 बार)
● जब कोई खास कारण पता न चले – (सेलेनियम , फास्फोरस , कैल्केरिया फ़ॉस, एसिड फॉस)
● बालों को तेजी से बढ़ने और चमक लाने के लिए – (बिस्बैडेन 30, दिन में 3 बार)
बाल जल्दी सफेद होना – Grey hair
बाल जल्दी सफेद होना – Grey hair
● मुख्य दवा बाल जल्दी सफ़ेद हो जाना – (थायरोडीन 30 या 200, दिन में तीन बार)
● बाल जल्दी सफ़ेद हो जाने की अवस्था में दोनों दवा एक के बाद दूसरी एक एक सफ्ताह के अंतर पर – (लाइकोपोडीयम 200 और एसिड फास 200)
● अगर ऊपर दी गयी दवाओं से लाभ न हो तो – (पाइलोकारपस 1M, सफ्ताह में 1 बार)
कान का दर्द – Otalgia
कान का दर्द – Otalgia
सर्दी लगने, कान में सूजन हो जाने, चोट लगने, कान में अधिक मैल हो जाने, या कान में फुन्सी हो जाने की वजह से कान में दर्द होता है l
● जब अचानक ठण्ड लग जाने से कान दर्द शरू हुआ हो – (एकोनाइट 30, हर 2 घंटे पर)
● असहनीय दर्द जो गर्म सेक से बढे – (कैमोमिला 30, हर 2 घंटे पर)
● अचानक दर्द शुरू हो, कील चुभने सा अभास हो – (बेलाडोना 30, हर 2 घंटे पर)
● कान में फुन्सी हो, कान से स्राव आए जिसमे खट्टी बदबू आए – (हिपर सल्फर 30, दिन में 3 बार)
कान में प्लांटेगो Q व मुल्लियन ऑयल (Mullian Oil) डालने से भी बहुत फायदा होता है l
कान बहना – Otorrhoea
कान बहना – Otorrhoea
यह बीमारी प्रायः कई कारणों से होती है जैसे कान में सूजन, खसरे के बाद आदि l
● गाढ़ा पीला स्राव – (पल्साटिला 30, दिन में 3 बार)
● जब स्राव बहुत चिपचिपा निकले – (काली बाई 30, दिन में 3 बार)
● कान बहने की पुरानी बीमारी में – (साइलिसिया 12X या 30, दिन में 3 बार)
● जब कान बहने के साथ साथ दर्द भी हो – (हिपर सल्फर 30, दिन में 3 बार)
● जब कान से बदबूदार स्राव आए और अन्य दूसरी दवा से फायदा न हो – (सोराइनम 1M , 10 -15 दिन में एक बार)
कान में आवाज होना – Sound in ear
कान में आवाज होना – Sound in ear
कान के परदे पर बहुत ज्यादा दवाब पड़ने के कारण कई बार कान में तरह तरह का शोर होता है l
● चबाते समय कान में शोर सुनाई देना – (काली सल्फ़ 6X या 30, दिन में 3 बार)
● गाने की या हिस हिस की आवाज सुनाई देना – (काली आयोडायड 6X या 30, दिन मे 3 बार)
● कान में रेलगाड़ी चलने की आवाज या चिड़िया की चहचहाट जैसा सुनाई दे – (काली मयूर 6X या 30, दिन में 3 बार)
● मासिक होने से पहले कान में शोर सुनाई दे – (फैरम मेट – 3X या 30, दिन में 3 बार)
● कान में तूफ़ान चलने की आवाज या घंटियों की आवाज आये – (लीडम पाल 30, दिन में 3 बार)
● अपनी हीं आवाज कान में बार बार गूंजे – (लाइकोपोडीयम 30, दिन में 3 बार)
तुतलाना, हकलाना – Stammering, Lisping
तुतलाना, हकलाना – Stammering, Lisping
● जब रोग जुबान मोटी होने के कारण हो – (नैट्रम कार्ब 30, दिन में 3 बार)
● बच्चों का तुतलाना – (बोविस्टा 30, दिन में 3 बार)
● प्रमुख औषधि। काफी प्रयास करने के बाद ही मुंह से कोई शब्द निकले – (स्ट्रामोनियम 30 या 200)
● रोगी जब रुक रुक कर बात करें – (काली ब्रोम 6, दिन में 3 बार)
● बोलते समय बीच-बीच में शब्द छूट जाए – ( कैमोमिला 30,दिन में 3 बार)
● बोलते समय रोगी गलत शब्दों का प्रयोग करे – (लाइकोपोडियम 30, दिन में 3 बार)
● शब्द मुंह में आते आते मुंह में ही रह जाए – ( साइक्युटा 30, दिन में 3 बार)
● रोगी जब सिर्फ कुछ खास शब्दों पर ही अटके – (लैकेसिस 30, दिन में 2 बार)
आँख के रोग – Diseases of the Eyes
आँख के रोग – Diseases of the Eyes
● जब आँख की पलकों पर गुहेरी हो जाये – (स्टेफिसेगिरिया 30 या हिपर सल्फ़ 1M)
● जब आँखों में नेत्र शोथ(Conjunctivitis) हो जाये – (एकोनाइट 30, दिन में 3-4 बार)
● निकट दृष्टि दोष(Myopia) यानि की निकट की वस्तु दिखे परन्तु दूर की वस्तु ठीक से न दिखे तो – (फाइसोस्टिगमा 3X या 6, दिन में 3 बार)
● रतौंधी, यानि की रात के अंधेरे में ठीक से न देख पाना – (फाइसोस्टिगमा 3X या 6, दिन में 3 बार)
● दिनौंधी, यानि की दिन में ठीक से न देख पाना – (बोथरौप्स 30, दिन में 3 बार और फ़ॉसफोरस 200, सफ्ताह में 1 बार)
● मोतियाबिंद – (फ़ॉसफोरस 200, सफ्ताह में 1 बार तथा कल्केरिया फ्लोर 6 या 12X दिन में 3 बार)
खुजली – Itch
खुजली – Itch
इस रोग में शरीर में खुजली, त्वचा का लाल हो जाना, खुजलाते – खुजलाते खून निकल आना, गर्मी लगना आदि लक्षण होते हैं l इस रोग में बाहरी मलहम लगा देने पर रोग दब जाता है और शरीर के दुसरे अंग में हो जाता है l इसलिए इस रोग को दबाना नहीं चाहिये l इसे खाने की दवा से ही ठीक करना चाहिये l रोग की उग्रता कम करने के लिए सल्फर या बैन्जिल बैंजोएट लोशन इस्तेमाल किया जा सकता है l रोगी के कपड़े 2 – 3 दिन पर गर्म पानी में धोने चाहिये l
● मुख्य दवा, जब रोग नहाने – धोने से बढ़े – (सल्फर 6 या 30, दिन में 3 बार)
● शरीर में छोटे छोटे दाने और खुजली, बेचैंनी, ठण्ड से रोग बढ़े – (रस टाक्स 30, दिन में 3 बार)
● जब खुजली के साथ थोडा दर्द भी हो – (सोराइनम 200, दिन में 2 – 3 बार)
● जब रात में खुजली बहुत ज्यादा हो – (मर्क सौल 30, दिन में 3 बार)
● जननेंद्रिय की खुजली में – (ऐम्बरा ग्रिजिया 30, दिन में 3 बार)
● जब खुजली का कारण छोटे छोटे मवाद भरी फुंसियां हो – (हिपर सल्फर 30, दिन में 3 बार)
● खुजली इतनी हो की खुजलाते खुजलाते खून निकल आये – (मेजेरियम 30, दिन में 3 बार)
फोड़े – फुंसियां – Boils
फोड़े – फुंसियां – Boils
● जब दाने लाल हो, दर्द व जलन हो – (बेलाडोना 30, दिन में 3-4 बार)
● जब फोड़े या फुंसियों में मवाद बनना शुरू हो जाये – (मर्क सौल 30, दिन में 3-4 बार)
● जब असहनीय दर्द हो एवं फोड़ा पका नही हो – (हिपर सल्फ़ 30 और बेलाडोना 30, हर 2 घंटे पर अदल-बदल कर)
● छोटे छोटे बहुत सारे दाने, घनी फसल के जैसे – (आर्निका 30, दिन में 3 बार)
● फोड़े पक कर फुट चुके हों तो उन्हें सुखाने के लिए – (कैल्केरिया सल्फ़ 6X या साइलिशिया 12X, दिन में 3-4 बार)
● जब फोड़े – फुंसियां बार बार हो – (सल्फर 30, दिन में 3 बार)
कैलेंडुला Q या इचीनेशिया Q गर्म पानी में मिला कर फोड़े – फुंसियों पर लगायें, जल्द आराम मिलेगा
मस्से – Warts
मस्से – Warts
● सभी तरह के मस्सों की मुख्य दवा – (थूजा 30 या 200 या 1M)
● छोटे-छोटे बहुत सारे मस्से – (कौस्टिकम 30 या 200, दिन में 2-3 बार)
● अगर मस्से छूने से दुखे – (नैट्रम कार्ब और सल्फर 30, दिन में 3 बार)
● होंठ पर के मस्सों के लिए – (नाइट्रिक एसिड 30 या 200, दिन में 2-3 बार)
● जननेन्द्रिय की आगे की त्वचा पर मस्से या शरीर पर बड़े-बड़े काले मस्से – (सीपिया 30 या 200)
● मस्सों की बायोकेमिक दवा – (साइलिशिया 12X, दिन में 3-4 बार)
बिना मुंह का फोड़ा – Carbuncle
बिना मुंह का फोड़ा – Carbuncle
यह फोड़ा अक्सर मधुमेह (Diabetes) के मरीजों को हुआ करता है। यह गर्दन, पीठ, कंधे, कूल्हे, कहीं भी हो सकता है। इसकी जड़ें शरीर के भीतर नाड़ियो तक फैल जाती हैं। जब यह फटता है तो कई जगह से मवाद रिसने लगता है इसमें बहुत जलन व दर्द होता है।
● बिना मुंह के फोड़े की प्रमुख दवा – (ऐंथ्राक्सिनम 200)
● बहुत जलन होती है और जैसे फोड़े पर जलते अंगारे रखे हों ऐसा दर्द होता है। गर्म सेक से अच्छा लगता है – (आर्सेनिक 30)
● बहुत बेचैनी व जरा सी भी छुअन बर्दाश्त नहीं होती – (हिपर सल्फ 30)
● जब फोड़ा बहुत धीरे धीरे बढ़े उसमें से मवाद आने लगे – (साइलिशिया 12x)
● जब खून में शक्कर की मात्रा ज्यादा होने के कारण फोड़ा ठीक न होता हो – (सिजीजियम Q, या 30)
यदि फोड़ा मधुमेह के मरीज को हो तो मधुमेह को किसी भी तरह से नियंत्रण में रखना अति आवश्यक है।
मुहासे – Pimples
मुहासे – Pimples
चेहरे पर जवानी के दिनों में छोटे छोटे दाने हो जाते हैं l इनमे अक्सर मवाद भर जाती है या कील बन जाती है l
● मुख्य दवा (चेहरे पर बड़े बड़े कील वाले मुहासे जो माहवारी के समय या कॉफ़ी, मांस आदि खाने से बढे) – (सोराइनम 200 या 1M, सफ्ताह में एक बार)
● जवानी आने के समय मुहासे की दवा – (ऐस्टेरियास रूबेन्स 30, दिन में 4 बार)
● यदि ऐस्टेरियास रूबेन्स से फायदा न हो – (काली ब्रोम 30 और कल्केरिया पिक्रेटा 30 , दिन में 4 बार)
● जब मुहासे सर्दियों में एवं अंडा खाने से बढे – (स्ट्रेप्टोकॉक्सिन 200, दिन में 2-3 बार)
● जब मुहासों में मवाद हो एवं दर्द हो – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 3 बार)
● मुहासों व त्वचा साफ़ करने के लिए – (बर्बेरिस एक्विफोलियम Q, दिन में 3 बार)
● जब उपरोक्त दवायों से फायदा न हो ,रोगी गन्दा रहना पसंद करता हो –(सल्फर 1M, सफ्ताह में 1 बार)
● जवानी के दिनों में, जब पेट में गैस भी बनती हो – (कार्बो वेज 30, या 200, दिन में 2 बार)
बहुत घी , तेल वाली चीजें न खाएं l हरी सब्जियां व मौसमी फल अधिक खाएं l
दाद – Ringworm
दाद – Ringworm
दाद के लिए बाजार में बहुत सारी क्रीम उपलब्ध है लेकिन उनसे एक बार अच्छा होने के बाद फिर से हो जाता है l लक्षण के अनुसार होमियोपैथी दवा लेने से दाद हमेशा के लिए ठीक हो जाता है l
● मुख्य दवा – (बैसिलिनम 200 या 1M, सफ्ताह में 1 बार)
● अंगूठी की तरह गोल आकार वाले दाद के लिए – (सीपिया 30, दिन में 3 बार)
● दाद, जिसमे अत्यधिक खुजली हो (खासकर चेहरे पर नाई के यहां के उस्तरे के इस्तेमाल की वजह से) – (टेल्युरियम 30, दिन में 3 बार)
● जननेंद्रिय या अंडकोष के पास दाद जो सर्दियों में बढ़े – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 3 बार)
● जब एसिडिटी रहता हो, भूख न लगता हो एवं उपरोक्त दवायों से फायदा न हो – (सल्फर 30, दिन में 3 बार)
● जब दाद जीभ पर हो जाये – (सैनिकुला 30, दिन मे 3-4 बार)
सीपिया 1M सप्ताह में 1 खुराक और टेलुरियम 30 रोज दिन में 3 बार लेने से किसी भी तरह का दाद ठीक हो जाता है l
पित्ती – Urticaria
पित्ती – Urticaria
इसमें शरीर मे जगह जगह ददोड़े होकर फूल उठते हैं, उनमें खुजली व जलन होती है। इसमें कभी-कभी अपने आप आराम आ जाता है। कभी-कभी रोगी का कष्ट अत्यंत बढ़ जाता है।
● मुख्य औषधि। चकत्तों में डंक चुभने जैसा आभास; जलन व खुजली। सूजन अधिक, प्यास कम या बिल्कुल न हो – (एपिस मेल 6 या 30, दिन में 4 बार)
● यदि एपिस से फायदा न हो – (अर्टिका यूरेन्स Q या 6, दिन में 4 बार)
● चकत्तों में जलन व खुजली, अत्यधिक बेचैनी। थोड़ा-थोड़ा पानी बार-बार पीने की इच्छा – (आर्सेनिक एल्ब 6 या 30, दिन में 3 बार)
● चकत्तों में जलन व खुजली, ठंड से रोग बढ़े – (रस टॉक्स 30, दिन में 3 बार)
● शराब पीने के कारण पित्ती – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
● गरिष्ठ या अधिक चिकनाई युक्त भोजन करने के कारण पित्ती। प्यास कम, खुली ठंडी हवा में अच्छा लगे – (पल्साटिला 30, दिन में 3 बार)
● जब रोग पुराना हो और चकत्तों में खुजली रात को बिस्तर की गर्मी से बढ़े – (सल्फर 30, दिन में 2 बार)
● पुराने रोग में जब उपरोक्त दवाओं से फायदा न हो – (एस्टेकस फ्लेवस 30, दिन में 3 बार)
बाह्य प्रयोग के लिए, अर्टिका यूरेन्स Q, की 10-20 बूंदे एक चौथाई कप पानी मे मिला कर चकत्तों पर लगाएं।
एग्जीमा – Eczema
एग्जीमा – Eczema
खुजली, जलन एवं दर्द के साथ त्वचा के ऊपर होने वाले दानों को एग्जीमा कहते हैं l यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है l कान, शरीर के जोड़ व माथे, या कान के पीछे यह रोग ज्यादा होता है l यह सुखा भी हो सकता है या चिपचिपा स्राव निकलने वाला भी हो सकता है l
● त्वचा खुश्क, व छिछड़ेदार(Scaly) l रोगी के आँख की पलकें, कान, नाक के अगले हिस्से लाल हो – (सल्फर 30, दिन में 2-3 बार)
● त्वचा खुश्क व छिछड़ेदार(Scaly), खासकर चेहरे व सिर में, बदबूदार स्राव भी निकले – (सोराइनम 200, दिन में 2-3 बार)
● त्वचा पर दाने व फुंसियो के कारण अत्यधिक खुजली हो – (रस टाक्स 30, दिन में 3 बार)
● पतला पानी बहना और जहा पानी लगता है वहा भी घाव जैसा हो जाना – (टेलुरियम 30 , दिन में 3 बार)
● जब पानी गाढ़ा बहे – (ग्रेफाइटिस -30, दिन में 3 बार)
● सिर के एग्जीमा मे – (मेजेरियम – 30, दिन मे 3 बार)
● एग्जीमा की बायोकैमिक दवा – (कैल्केरिया सल्फ़ 6X, दिन में 4 बार)
सोरायसिस – Psoriasis
सोरायसिस – Psoriasis
इलाज शुरू करने के पहले सल्फर CM पावर की एक खुराक खानी चाहिये फिर 10-15 दिन बाद ही लक्षण के अनुसार अपनी दवा लें l
● चकत्ते कमर, भुजाओं या कुहनियों के आस पास हो, चमड़े छूटते हों तथा अन्दर से लाल त्वचा निकले, अत्यधिक खुजली – (काली आर्स 30, दिन में 3 बार)
● हथेलियों व पंजों पर चकत्ते – (कोरेलियम रयुब्रम 30, दिन में 3 बार)
● जब रोग के कारण त्वचा मोटी हो जाये – (हाइड्रोकोटाइल Q या 30, दिन में 3 बार)
● शरीर में जलन के साथ खारिश – (रेडियम ब्रोम 30, दिन में 3 बार)
● जब रोग सर्दियों में बढ़े – (पेट्रोलियम 30, दिन में 3 बार)
● जब उपरोक्त दवाओं से लाभ न हो – (कर्सिनोसिन 200, 2-3 बार)
● बायोकेमिक दवा – (नेट्रम म्यूर और नेट्रम सल्फ़ 12X, दिन में 4 बार)
सौंदर्य और होम्योपैथी – Beauty Tips
सौंदर्य और होम्योपैथी – Beauty Tips
कई बार मस्से, त्वचा का ज्यादा खुरदरापन, या चिकनाहट, अनचाहे बाल, बालों का असमय सफेद होना, त्वचा पर धब्बे, कील, मुँहासे, आंखों का अंदर को धंसे होना, आदि के कारण व्यक्ति कुरूप नजर आने लगता है। मगर होम्योपैथिक चिकित्सा द्वारा इस कुरूपता को सुंदरता में काफी हद तक बदला जा सकता है।
● खुश्क व खुरदरी त्वचा के लिए, रोगी जब नहाने से कतराए – (सल्फर 30 या 200)
● खुश्क व खुरदरी त्वचा के लिए जब खारिश के बाद दर्द महसूस हो – (सोराइनम 30 या 200)
● औरतों में आंखों के चारों ओर काले धब्बे जब किसी पुराने दुःख के कारण हो – (स्टेफिसेगिरिया 30 या 200)
● जब आंखों के चारों ओर काले धब्बे स्नायविक कमजोरी (nervous weakness) के कारण हो – (फॉस्फोरस 30 या 200)
● जब आंखों के चारों ओर काले धब्बे अत्यधिक स्राव (discharge) के कारण हो। चेहरा पीला व आंखें अंदर को धंसी हुई हो – (चाइना 30)
● चेहरा पीला व साथ मे चेहरे व सीने पर पीले या भूरे धब्बे – (सीपिया 30 या 200)
● काले या नीले रंग के धब्बों के लिए – (आर्सेनिक 30 व लैकेसिस 30)
● चेहरे या अन्य किसी अंग पर लाल रंग की धारियां – (हाइपेरिकम 30 या 200)
● चेहरे का रंग मुर्दे के समान पीला व आंखों के चारों ओर नीले रंग की पट्टी सी – (बिस्मथ 30)
● रक्त की कमी (anaemia) के कारण पीलापन – (फेरम मैट 3X)
● त्वचा का रंग साफ करने के लिए – (सरसापैरिला 30)
● चेहरे पर निशान जो फोड़े – फुंसियों या मुहासों, आदि के कारण हो – (साइलीशिया 6X व काली फॉस 6X)
● चेहरे पर चेचक के दाग – (वैरिओलिनम 200, सारासिनिया 30, थायोसिनैमिनम 2X)
खाने में दूध, दही, फल, हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज व सलाद खूब खाएं।
बिवाइयां – Chilblains
बिवाइयां – Chilblains
● मुख्य दवा – (एगेरिकस 30, दिन में 3 बार)
● बिवाइयों में सुई चुभने जैसा दर्द, जो शाम को बढ़ता है व ठण्डी हवा से आराम मिलता है – (पल्साटिला 30, दिन में 4 बार)
● जब बिवाइयों में खुजली, जलन व तेज दर्द हो – (कैमोमिला 30, दिन में 3 बार)
● जब जलन अत्यधिक हो व बेचैनी हो – (आर्सेनिक एल्ब 30, दिन में 3 बार)
● बिवाइयां जो नम व गहरी हों, खुजली व जलन हो – (पेट्रोलियम 30, दिन में 3 बार)
● जब रोग भीगने(नहाने, धोने) से बढ़े व सर्दियों में ज्यादा हो – (रस टॉक्स 30, दिन में 3 बार)
● खुश्क बिवाइयों की मुख्य दवा। रोगी गन्दा सा दिखे या गन्दा रहना चाहे – (सल्फर 30, दिन में 2 बार)
बाह्य प्रयोग के लिए सफेद वैसलीन या नारियल का तेल इस्तेमाल करें। यदि ज़ख्म हो तो कैलेंडुला मलहम का प्रयोग करें। मोम या देशी घी मिलाकर लगाने से फायदा होता है।
नाक के अंदर मांस बढ़ना – Nasal Polypus
नाक के अंदर मांस बढ़ना – Nasal Polypus
यह रोग प्रायः एक नथुने में होता है; बढ़ा हुआ मांस नर्म और चिपका होता है, कभी-कभी इसमें मवाद भी पैदा हो जाती है, यदि दोनों नथुने में हो जाता है तो नाक से सांस लेने में कष्ट होता है और रोगी मुंह से सांस लेने लगता है।
● मुख्य दवा – (फॉरमिका रुफा 1x या 3x, दिन में 3-4 बार या लैम्ना माइनर Q, दिन में 3 बार)
● यदि नाक से खून आए; हरा, पीला मवाद निकले- (फॉस्फोरस 30, दिन में तीन बार)
● रोगी जिस करवट लेटता है उधर का सांस रुक जाता है, पूरी नाक मांस के बढ़ने से बंद हो जाए तो – (ट्यूक्रियम 6, दिन में 3 बार)
● नाक में मांस बढ़ने के साथ-साथ किसी भी गंध का पता ना लगे – (कैलकेरिया कार्ब 30, दिन में तीन बार)
● मांस बढ़ने के साथ-साथ साइनस की शिकायत, बुरी गंध वाला पतला हरा स्राव, गंध का महसूस ना होना – (थूजा 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
नाखूनों के रोग – Nails diseases
नाखूनों के रोग – Nails diseases
● नाखूनों पर सफेद रंग के दाग हो जाए – (एसिड नाइट्रिक 30 या 200, दिन में 3 बार)
● नाखून मोटे व कड़े हो जाएं, किनारे से खाल छूट जाती है और सहज में ही चूर चूर हो जाते हैं। नाखून की जड़ में सूजन – (ग्रेफाइटिस 30 या 200, दिन में 3 बार)
● नाखून से मांस का झड़ना व मवाद पड़ जाना। दो अंगुलियों के बीच की जगह में घाव हो जाए – (इयुजिनिया 30 या 200, दिन में 3 बार)
● नाखून की जड़ की जगह पर सूजन व पत्थर की तरह कड़ापन। मवाद में परिवर्तित न होकर कड़ा हो जाने से यह दवा विशेष लाभदायक है – (कैल्केरिया फ्लोर 12X या 30, दिन में 3 बार)
टॉन्सिलाइटिस – Tonsillitis
टॉन्सिलाइटिस – Tonsillitis
टॉन्सिल में सूजन आ जाने को टॉन्सिलाइटिस कहते हैं।
कारण : खाने-पीने, सर्दी अथवा नजला-जुकाम आदि से टॉन्सिल फूल जाते हैं।
लक्षण : गला दुखना, बुखार, निगलने में गले मे दर्द आदि।
● प्रथम अवस्था मे जब सूखी ठंड लगने से टॉन्सिल सूज जाए। तेज बुखार, बेचैनी व घबराहट हो – (एकोनाइट 30, दिन में 3 बार)
● टॉन्सिल चमकीले लाल रंग के, फुले हुए(उनमें जख्म भी हो सकता है), जलन व डंक लगने जैसा दर्द; टॉन्सिल खुश्क महसूस हो पर प्यास न हो – (एपिस मेल 30, दिन में 3 बार)
● जब बार बार टॉन्सिलाइटिस हो, बच्चा शर्मीली प्रकृति का हो – (बैराइटा कार्ब 30 या 200, दिन में 3 बार)
● गला व टॉन्सिल लाल, सूजे हुए, निगलने में दर्द, बुखार – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● जब बुखार के कारण रोगी सुस्त हो व चुपचाप लेटना चाहे, प्यास न हो, टॉन्सिल पर सुरसुराहट हो – (जलसेमियम 30, दिन में 3 बार)
● जब टॉन्सिल पकने के कारण असह्य दर्द हो, गला छूने तक से डर लगे, रोगी ठंडी प्रकृति का हो- (हिपर सल्फ 30, दिन में 3 बार)
● टॉन्सिल पर जख्म, सांस बदबूदार, खूब लार बहे, रात में दर्द व बुखार बढ़े – (मर्क सॉल 30, दिन में 3 बार)
● जब टॉन्सिल बार बार परेशान करे – (बैसिलिनम 1M या ट्यूरबरकुलाइनम 1M, की 1 खुराक 2-3 सफ्ताह के अंतर से दें)
● जब गले मे स्ट्रेप्टोकोकाई इंफेक्शन (Streptococci infection) हो – (स्ट्रेप्टोकोकस 200, 2-3 खुराक)
● जब गले मे स्टेफाइलोकोकाई इंफेक्शन (Staphylococci infection) हो – (स्टेफाइलोकोकस 200, 2-3 खुराक)
● बायोकैमिक दवा – (बायो नं. 10, दिन में 4 बार)
फाइटोलक्का Q, 10 बून्द, एक कप गुनगुने पानी मे डाल कर दिन में 3-4 बार गरारे करें। यदि ठंडा पेय लेने या किसी चीज के खाने से रोग बढ़ता हो तो ऐसी चीज़ों का इस्तेमाल न करें।
मसूड़ों के रोग – Gum disease
मसूड़ों के रोग – Gum disease
● मसूड़ों से खून आना, ठंडा और गर्म पानी का लगना (Sensitivity) – (मर्क सौल 30, दिन में 3 बार)
● मसूड़ों में लाल रंग के फोड़े जैसे हो जाना जिनमे दर्द हो – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● पायोरिया के लक्षण (मसूड़ों से खून और बदबू आए, या केवल खून आए) – (कार्बो वेज 3X या 30, दिन में 3 बार)
● मसूड़ों से मवाद आए, और ठंडा पेय पीने से दर्द बढे – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 3 बार)
● जब मसूड़ों से मवाद आने की बीमारी बहुत पुरानी हो – (साइलिशिया 30, दिन में 4 बार)
दांत दर्द – Toothache
दांत दर्द – Toothache
दांत गंदे रहना, दांतों में जख्म होना, कीड़े लगना, चोट लग जाना आदि कारणों से दांत दर्द होता है l
दन्त का दर्द चाहे कैसा भी हो कैलेंडुला Q की १० बुँदे तीन टाइम लेनी है और दन्त पर सीधा रुई से लगाना भी है। दॉंतो पर होने वाले खर्चो से आपको हमेशा के लिए छूट मिल सकती है।
● मुख्य दवा – (प्लांटेगो 30, दिन में 3 बार तथा प्लांटेगो Q दांत पर लगाएं)
● जब दांत सड़ने की वजह से दर्द हो – (क्रियोजोट 30, दिन में 3 बार)
● जब ठण्ड या ठंडा पानी पीने से दर्द बढे – (साइलिशिया 30, दिन में 3 बार)
● जब चबाने से दर्द बढ़े – (स्टेफिसेगिरिया 30, दिन में 3 बार)
● मसूड़ों में फोड़ा, जबड़े में सूजन व दर्द हो – (हेक्ला लावा 3X या 6X, दिन में 3 बार)
● जब गर्म चीज खाने से दर्द बढ़े – (मैग्नीशिया फ़ॉस 6X दिन में 4 बार)
● मसूड़ों की जड़ों में लाल रंग के फोड़े होने से दर्द – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● कैल्सियम की कमी, दांत पीले व दांतों पर मैल, दांत कमजोर हों – (कैल्केरिया फ्लोर 6X, दिन में 3 बार)
● यदि दांत निकलवाने के बाद खून न रुके – (फ़ॉसफोरस 200, 1 खुराक)
दंत क्षय – Caries of the teeth
दंत क्षय – Caries of the teeth
● दाँत की जड़ व मसूड़ों में नासूर हो जाए; ठण्डक से आराम मिले – (एसिड फ्लोर 30 या 200, दिन में 3 बार)
● दाँत में जल्द कीड़ा लगे और दाँत काले पड़ जाए – (स्टेफीसेगिरिया 30 व 200, दिन में 3 बार)
● दूध के दाँतों में ही कीड़ा लग जाए। दाँत पहले पीला व बाद में काला हो जाए – (क्रियोजोट 30 या 200, दिन में 3 बार)
● कीड़ा लगकर दाँत में घाव हो जाए मसूड़ों में घाव व फोड़े हो जाए – (हेक्ला लावा 30 या 200, दिन में 3 बार)
● हर प्रकार के दंतशूल में लाभदायक – (प्लांटेगो 30 या 200, दिन में 3 बार)
● दाँत दर्द; जरा से स्पर्श से लगे कि जान निकल जाएगी पर दाँत पर दाँत रख कर जोर से दबाने पर आराम आए – (चाइना 30 या 200, दिन में 3 बार)
● दाँत का दर्द, ठंडा पानी मुँह में रखने से घट जाए – (कॉफिया 30 या 200, दिन में 3 बार)
● गर्म चीजें पीने से दाँत का दर्द बढ़े – (कैमोमिला 30 या 200, दिन में 3 बार)
● दाँत की जड़ में फोड़े, गरम सेक से आराम मिले, ठंडी हवा सहन न हो। काफी समय से चले आ रहे नासूर जो ठीक होने में न आते हों – (साइलिशिया 6X या 30, दिन में 3 बार)
● दाँत हिले व जरा सा कुछ लगते हीं असहनीय दर्द हो – (कैल्केरिया फ्लोर 6X या 30, दिन में 3 बार)
पीलिया – Jaundice
पीलिया – Jaundice
लीवर में गड़बड़ी होने के कारण पित्त (Bile) सीधा रक्त में मिल जाता है जिससे रोगी का रक्त पीला होने लगता है जिससे रोगी की त्वचा, पेशाब का रंग, आँख और नाख़ून आदि पीले दिखने लगते हैं l मुख में कड़वापन, बुखार, दुर्बलता व सुस्ती आ जाती है l
● इलाज शुरू करने के पहले दें – (सल्फर 30, की 3 खुराक 2-2 घंटे पर)
● जब उबकाई आए, उल्टी लगे, बेचैनी व प्यास जल्दी – जल्दी लगे – (इपिकैक 30 और आर्सेनिक एल्ब 30, दिन में 3 बार)
● जब उल्टी आनि बंद हो चुकी हो, शरीर में पीलापन नजर आने लगे – (कारडूअस Q या 6, दिन में 3 बार)
● जब जिगर (Liver) बढ़ जाये, आंखे पीली व पेशाब पीला – (चेलीडोनियम Q या 6, दिन में 3 बार)
● अगर रोगी शराबी हो या शराब पीने से लीवर की बीमारी हुई हो – (नक्स वोमिका Q या 6 या 30, दिन में 3 बार)
● कालमेघ Q, चेलिडोनियम Q, केरिका पपाया Q, माइरिका Q इन सब को बराबर मात्रा में मिला लें और दस – दस बूंद पानी में मिलाकर दिन में 3-4 बार लें l
पेट दर्द – Colic
पेट दर्द – Colic
पेट दर्द कई कारणों से हो सकता है l गरिष्ठ खाना, गैस, डकार का न आना, पेट में कीड़े, अधिक मीठा खाना, कब्ज आदि l पेट दर्द का मूल कारण पाचन क्रिया का गड़बड़ है l
● जब असहनीय दर्द हो, पेट को दबाने से आराम मिले – (कोलोसिंथ 30, हर 2 घंटे पर)
● जब अधिक चिकनाई युक्त, मांसाहारी भोजन आदि खाने के बाद पेट दर्द हो – (पल्साटिला 30, हर 2 घंटे पर)
● अधिक व मसालेदार, गरिष्ठ भोजन के बाद या अपच व बदहजमी के कारण पेट दर्द – (नक्स वोमिका 30, 2-3 घंटे पर)
● पेट में अफारा के कारण दर्द – (लाइकोपोडियम 30, दिन में 3 बार)
● पेट फूलना, पित्त की उल्टी व मरोड़ के साथ दर्द – (आइरिस वर्सी 30, 2-3 घंटे पर)
खाना कम से कम लें, चिकनाई युक्त खाने से परहेज करें l तरल पदार्थ लें l पेट पर गर्म पानी का सेंक भी कई बार लाभदायक होता है l
अजीर्ण, गैस बनना व अफारा आदि – Gastric complaints
अजीर्ण, गैस बनना व अफारा आदि – Gastric complaints)
● अधिक मात्रा में या देर से हजम होने वाला भोजन करने के कारण अधिक गैस बने; कब्ज रहे, बार-बार पाखाना आए – (नक्स वोमिका 30, दिन में तीन बार)
● गैस बनने की प्रवृत्ति रोकने के लिए मुख्य दवा – (सोराइनम 30, एक खुराक)
● गरिष्ठ भोजन करने के बाद अधिक गैस बने; अनपचा भोजन पेट में पड़ा रहे। प्यास न हो या बहुत कम हो। जीभ पर गाढ़ी मैल की परत जमी हो – (पल्साटिला 30, दिन में तीन बार)
● अधिक गैस के कारण अफारा। सारा पेट ढोल की तरह फूल जाए। गैस निकलने से भी आराम न मिले। फल खाने से रोग बढ़े – (चाइना 30, दिन में 3 बार)
● पेट में वायु के कारण अफारा आए। खासकर पेट का ऊपरी हिस्सा फूल जाए। डकार आने या गैस निकलने से आराम आए – (कार्बो वेज 30, दिन में तीन बार)
● कब्ज या कड़े मल के साथ अफारा। खासकर पेट का निचला हिस्सा फूल जाए, खासकर शाम को 5 से 8 बजे तक ज्यादा हो – (लाइकोपोडियम 30, दिन में तीन बार)
● पेट में अधिक वायु इकट्ठे होने के कारण अफारा। पेट में तरल पदार्थ गढ़गढ़ बोले – (असाफोएटिडा 30, दिन में तीन बार)
● जब वायु ऊपर या नीचे कहीं से भी न निकले, बहुत परेशानी हो। गर्म डकार आए – (रैफेनस सैटाइवा 30, दिन में तीन बार)
● पेट में गैस के कारण खट्टी डकार आए। खाना बनते समय की खुशबू से उल्टी सी आए – (स्टैनम मेट 30, दिन में तीन बार)
● वायु इकट्ठा होने के कारण पेट में दर्द हो। खाने की खुशबू से मितली आए। साथ में जोड़ों में दर्द हो – (कॉलचिकम 30, दिन में तीन बार)
कृमि – Worms
कृमि या पेट में कीड़े तीन प्रकार के होते हैं।
(1) छोटे सूत की तरह (Small thread worms) : ये इकट्ठी मलद्वार के पास रहते हैं, कभी मूत्र नली या योनि में भी चले जाते हैं और वहाँ खुजली होने लगती है, जलन भी होती है।
लक्षण : सांस में बदबू, पाखाने के समय तकलीफ, नाक में खुजली, नींद में दाँत किटकिटाना, गुदा में बराबर खुजली रहने से नींद भी नहीं आती।
(2) गोल कृमि (Round worm) : ये केचुए की तरह, सफेद होते हैं, छोटी आंत में रहते हैं। कभी उल्टी के साथ, कभी पाखाने के साथ निकलते हैं।
लक्षण : पेट फूलना, पेट दर्द, दाँत किटकिटाना, नींद में चीखना, नाक खुजाना, चेहरा पीला, शरीर दुबला, भूख अधिक, या खाने में अरुचि आदि।
(3) फीता कृमि (Tape worm) : सफेद चपटे, यह कृमि छोटी आंत में रहता है।
● कृमि रोग की मुख्य दवा। यह हर तरह के कृमि के लिए इस्तेमाल होती है; बच्चों में चिड़चिड़ापन, हमेशा खाते रहना चाहे – (सिना 30, दिन में 3 बार)
● गोल कृमि की मुख्य दवा – (सैंटोनिन 1X या 3X साथ मे मर्क डल 1X दिन में 4 बार)
● फीता कृमि की मुख्य दवा – (क्युप्रम ऑक्सिडेटम नाइग्रम 1X या 3X, दिन में 4 बार, साथ मे नक्स वोमिका Q, 5-5 बूंद दिन में 3 बार)
● सूत कृमि की मुख्य दवा – (सिना Q या 30, दिन में 4 बार)
● बायोकैमिक औषधि – (नैट्रम फॉस 6X, दिन में 4 बार)
पेचिश – Dysentery
पेचिश – Dysentery
बड़ी आंत में घाव होकर मरोड़ के साथ खून एवं आंव मिले व थोड़े-थोड़े दस्त आने को पेचिश कहते हैं।
कारण : अमीबा नामक जीवाणु या बैसिलस इसका कारण है।
लक्षण : भूख न लगना, उल्टी या मिचली, पेट मे तेज दर्द व बार बार दस्त, बुखार व दर्द के साथ पाखाना आए।
● रोग की प्रथम अवस्था मे जब बुखार, बेचैनी, घबराहट व पेट मे दर्द हो, खास कर सर्दी लगकर रोग पैदा होने पर – (एकोनाइट 30, दिन में 3 बार)
● दस्त में खून की मात्रा बहुत ज्यादा व मल की मात्रा कम हो। दस्त आने से पहले, साथ, और बाद में, (tenesmus), मुंह मे लार भर जाना, और फिर भी प्यास लगे। दस्त जाने के बाद भी मरोड़ बनी रहे – (मर्क कौर 30, दिन में 4 बार)
● दस्त में खून की अपेक्षा आंव की मात्रा बहुत ज्यादा हो – (मर्क सॉल 30, दिन में 3 बार)
● जब आंव के साथ उबकाई भी आए – (इपिकैक 30, दिन में 3 बार)
● नमी वाली जगह पर रहने से या बरसात में रोग वृद्धि – (रस टॉक्स 30, दिन में 4 बार)
● बायोकैमिक औषधि – (बायो नं. 9, दिन में 4 बार)
पायोरिया – Pyorrhoea
पायोरिया – Pyorrhoea
दांत साफ़ न रखना, मसूड़ों के पुराने घाव, भोजन में विटामिन सी की कमी व पेट की गड़बड़ियों के कारण पायोरिया होता है l इस रोग में मसूड़ों से खून आता रहता है व दर्द और सूजन भी रहता है तथा मुंह से बदबू आती है l
● मुख्य दवा – (कार्बो वेज और कैलेंडुला 30, दिन में 3 बार)
● जब मुंह से बहुत बदबू आए व दांत ढीले हो जाए – (काली कार्ब 30 या हेक्ला लावा 6X, दिन में 3 बार)
● दांतों में सडन, बदबू तथा गन्दा खून आए – (क्रियोजोट 30, दिन में 3 बार)
● मसूड़े काले या लाल हो, बदबू आए, बहुत लार आए, मसूड़ों से खून आए – (बैप्टिशिया 30, दिन में 3 बार)
कैलेंडुला Q की कुछ बूंदें पानी में मिलाकर कुल्ला करना चाहिये l विटामिन सी युक्त भोजन लें एवं ठंडा – गरम पदार्थ एक साथ सेवन न करें l
कब्ज – Constipation
कब्ज – Constipation
मल साफ़ न आना कब्ज कहलाता है l लक्षण: पाखाना साफ़ नहीं होना या कई बार थोड़ा – थोड़ा पाखाना आना l कारण : लीवर का रोग, ठीक – ठीक भोजन न करना, नियमित रूप से परिश्रम न करना आदि l
● साधारण कब्ज में – (नक्स वोमिका 30, रोज सोते समय एवं सल्फर 30, रोज सुबह)
● जब मल बहुत कड़ा बकरी की मेंगनी की तरह का हो – (एलुमिना 30, दिन में 3 बार)
● मल बहुत कड़ा व बड़े बड़े लैंड के रूप में निकलता हो और आंव लिपटा हुआ हो – (ग्रेफाइटिस 30, दिन में 3 बार)
● बार – बार पाखाना जाने की इच्छा पर पाखाना होता नहीं; मल सुखा व कड़ा l बैठे रहने की अपेक्षा खड़े होने पर आसानी से पाखाना होता है – (कॉस्टिकम 30, दिन में 3 बार)
● मलद्वार में डाट सी लगी हुई अनुभव हो – (लाइकोपोडियम 30, दिन में 3 बार)
● जब कब्ज की वजह से पेट अन्दर को धंसता सा महसूस हो – (हाइड्रैस्टिस Q या 30, दिन में 3 बार)
● जब मल छोटी – छोटी गोलियों की तरह हो, शौच जाने की हाजत बिलकुल न हो, कई दिन तक पाखाना न होने पर भी कष्ट नहीं होता – (ओपियम 30, दिन में 3 बार)
पानी बहुत मात्रा में पीयें, हल्का सादा भोजन करें, हरी सब्जियां, सलाद व फल प्रचुर मात्रा में खाएं तली हुई व महीन चीजों (मैदा से बने खाद्य पदार्थ) का सेवन बिलकुल न करें l
आंत उतरना – Hernia
आंत उतरना – Hernia
पेट से आंत का नाभि में या अंडकोष में जाने को हर्निया कहते हैं। बाहर से देखने में सूजन की तरह लग सकती है। कई बार ये आंते सावधानी से धीरे-धीरे चढ़ा देने से या दबा देने से अंदर चली जाती है। कभी-कभी ऑपरेशन करवाना जरूरी हो जाता है।
कारण : कब्ज, अधिक खाँसना, भारी वजन उठाना, ज्यादा घुड़सवारी, अधिक श्रम, ज्यादा घूमना, टट्टी पेशाब के समय ज्यादा जोर लगाने आदि कारणों से यह रोग होता है।
● दाएं भाग के हर्निया में – (लाइकोपोडियम 30, दिन में तीन बार)
● बाएं भाग के हर्निया में; जब कब्ज भी हो – (नक्स वोमिका 30, दिन में तीन बार)
● जब सख्त कब्ज रहने के कारण हर्निया हो – (पलम्बम मैट 30, दिन में तीन बार)
● जब आंत अचानक बीच में अटक जाए और उसकी वजह से सूजन, जलन वाला दर्द, घबराहट, ठंडा पसीना व मृत्यु भय हो – (एकोनाइट 30, हर आधे घंटे बाद)
● हर्निया की मुख्य दवा; खासकर मोटे व्यक्तियों के लिए – (कैलकेरिया कार्ब 200, 2-3 खुराक)
अगर ऊपर दी गई दवाओं से फायदा ना हो तो तुरंत ही किसी कुशल होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
अपेंडिक्स की सूजन – Appendicitis
अपेंडिक्स की सूजन – Appendicitis
पेट में दाएं तरफ जहां छोटी और बड़ी आत मिलती है वहां एक छोटा सा दुम जैसा अंग है जिसे अपेंडिक्स कहते हैं। जब इस अंग में किन्ही कारणों से सूजन हो जाती है तो यह रोग अपेंडिक्स की सूजन कहलाता है।
लक्षण : पेट के निचले हिस्से में नाभि के दाई ओर भयंकर दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, बुखार आदि।
● अपेंडिक्स की प्रमुख दवा। दर्द वाली जगह को छूने से दर्द बढ़े – (आइरिस टेनैक्स 30, हर 2 घंटे बाद)
● अचानक तेज बुखार, बेचैनी, घबराहट व मृत्यु भय – (एकोनाइट 30, हर आधे घंटे बाद)
● दर्द के कारण चेहरा लाल, दर्द अचानक उठे और अचानक समाप्त हो जाए – (बेलाडोना 30, हर आधे घंटे बाद)
● जब दर्द में दाहिनी ओर लेटने से आराम आए। कब्ज हो, अधिक प्यास व बुखार हो, हिलने डुलने से दर्द बढ़े – (ब्रायोनिया 30 या 200, हर आधे घंटे बाद)
● जब अपेंडिक्स की जगह कपड़ा तक छू जाने से भी दर्द हो – (लैकेसिस 30, आवश्यकतानुसार)
● जब रोग दाहिनी ओर लेटने से बढ़े़े व मवाद पड़ने का डर हो – (मर्क सॉल 30, हर 2 घंटे बाद)
● जब रोगी दर्द के मारे दोहरा हो जाए, पेट को दबाने से आराम आए – (कोलोसिन्थ 30, हर 2 घंटे बाद)
● जब रोग पुराना हो जाए व अन्य दवाओं से फायदा न हो – (सल्फर 200, आवश्यकतानुसार)
यदि रोग ज्यादा बढ़ गया हो तो दवा देकर मरीज को अनुभवी डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अपेंडिक्स सड़ जाने पर ऑपरेशन करवाना आवश्यक हो जाता है।
पित्त की पथरी का दर्द – Gall stone colic
पित्त की पथरी का दर्द – Gall stone colic
● पित्त की पथरी के दर्द की प्रमुख दवा – (कोलैस्ट्रीनम 3x, दिन में 3 बार)
● जब दर्द दाएं कंधे के निचले हिस्से में हो। यकृत को दबाने से दर्द महसूस हो। चेहरा पीला, फीका सा लगे। उल्टियां आए, पसीना पीला दाग छोड़े – (चेलिडोनियम 30, दिन में 3 बार)
● पित्त की पथरी। पीलिया। यकृत के आसपास में बेचैनी एवं भारीपन महसूस हो – (कार्डूअस मैरिएनस Q या 6, दिन में 3 बार)
● पित्त की पथरी व पीलिया। खाने की इच्छा न हो, ठंड लगे – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
● जब रोगी को ठंडे पेय पीने की तीव्र इच्छा हो – (फॉस्फोरस 200, सप्ताह में एक बार)
● प्रमुख दवा; जब पित्त की पथरी का दर्द बंधे समय पर आए(periodical)। यकृत को छूने एवं दबाने से दर्द महसूस हो। खाने की इच्छा न हो जबकि भूख लगती हो, पाचन क्रिया मंद हो – (चाइना 6 या 30, दिन में 3 बार, 2-3 महीने लगातार दें)
● पित्त की पथरी का बनना रोकने के लिए। जब साथ में कब्ज भी हो – (चियोनैंथस विर Q, दिन में 3 बार)
बवासीर – Piles
बवासीर – Piles
परिश्रम के चोर, भोग, विलासी, शराबी, कब्ज के रोगी अक्सर बवासीर के शिकार हो जाते हैं l बार बार जुलाब लेना, रबर के फोम या नरम गद्दी पर बैठना, शौच के समय कांखना, जोर लगाना आदि कारण से बवासीर होता है l बादी बवासीर में मटर जैसे मस्से मलद्वार पर हो जाते हैं, शिराएं फूल जाती हैं l यह मस्से मलद्वार के अंदर भी या बाहर भी हो सकते हैं l जब मस्से फट जाते हैं तो उनसे खून निकलने लगता है l
लक्षण कोई भी हो लेकिंन साथ में Rush Tox 30C दिन में दो बार जरूर इस्तेमाल करें।
● खूनी या बादी बवासीर की अचूक दवा – (सल्फर 1M की 1 खुराक 15 दिन में 1 बार बाकी दिन नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
● जब काले रंग का खून निकले और दर्द बिल्कुल न हो; मलद्वार में तपकन महसूस हो – (हेमामैलिस Q या 30, दिन में 3 बार)
● खूनी बवासीर की रामबाण दवा – (डोलिकोस Q, 5-5 बूंद दिन में 3 बार)
● चमकीले लाल रंग का खून निकले – (मिलिफोलियम Q, 5-5 बूंद दिन में 3 बार)
● हर बार पाखाना होने के बाद खून की पिचकारी छूटे – (फ़ॉसफोरस 30, दिन में 3 बार)
● जब गुदा में तिनके फंसे होने का एहसास और दर्द हो, कब्ज हो – (कौलिन्सोनिया 30, दिन में 3 बार)
● मस्सों में बहुत जलन हो, गर्म पानी से धोने से आराम मिले l बहुत बेचैनी हो – (आर्सेनिक 200, दिन में 2-3 खुराक दें)
● जब मस्सों को ठंडे पानी से धोने से आराम मिले – (एपिस मेल 30, दिन में 3 बार)
● जब बवासीर के मस्सों में खड़े रहने या बैठे रहने पर दर्द हो मगर चलने – फिरने से आराम मिले – (इग्नेशिया 30, दिन में 3 बार)
● जब मस्सों में खून बहना रुकने के बाद अत्यधिक दर्द हो – (एसिड नाइट्रिक 1M, हफ्ते में 1 खुराक 3-4 हफ़्तों तक)
मलद्वार का फटना – Fissure in Ano
मलद्वार का फटना – Fissure in Ano
सख्त कब्ज में जब रोगी मल निष्कासन के लिए जोर लगाए तो गुदाद्वार की झिल्ली फट सकती है। इसके कारण शौच जाने के समय या बाद में बहुत जलन होती है, और पाखाने में खून की लकीर सी दिखती है। बहुत कष्ट होता है, कभी-कभी बेहोशी भी हो सकती है।
लक्षण कोई भी हो लेकिंन साथ में Rush Tox 30C दिन में दो बार जरूर इस्तेमाल करें।
● पाखाना जाते समय तथा बाद में अत्यधिक दर्द हो जो घंटों बना रहे। रोगी बेचैनी के कारण टहलता रहता है – (एसिड नाइट्रिक 30, दिन में 3 बार)
● जब दर्द पाखाना आने के पहले थोड़ा कम व पाखाना आने के बाद अधिक हो, आग लगने जैसी जलन हो – (रटेनिया 30, दिन में 3 बार)
● जब सख्त कब्ज के कारण मलद्वार फट जाए – (ग्रेफाइटिस 30, दिन में 3 बार)
● जब खुश्की के कारण मलद्वार के साथ होंठ तथा मुंह के कोर तक भी फट जाए (आंते भी खुश्क हों) – (नैट्रम म्यूर 6X या 30, दिन में 3 बार)
● जब मलद्वार फटने से स्राव सा बहता रहे और मलद्वार में कतरने जैसा दर्द हो – (पियोनिया Q या 30, दिन में 3 बार)
कांच निकलना – Prolapsus of Anus
कांच निकलना – Prolapsus of Anus
मलद्वार से जब बड़ी आंत का निचला भाग मलद्वार से बाहर निकल आता है तो इसे कांच निकलना कहते हैं। यह कभी-कभी स्वयं ही अंदर चली जाती है, कभी-कभी दबाने से अंदर जाती है। यह रोग आम तौर पर कमजोर बच्चों को हो जाया करता है।
कारण : बवासीर,कब्ज, पेचिश, मलद्वार में खुजली, सख्त मल निकालने के लिए जोर लगाना आदि। बूढों या गर्भवती महिलाओं को भी हो सकता है।
● मुख्य दवा; पाखाना जाते समय या उसके पहले ही कांच निकल आए – (पोडोफाइलम 30 से CM तक)
● जब मलद्वार की संकोचन पेशी थिथिल हो जाने के कारण गुदा बाहर निकल आए। इस थिथिलता के कारण पखाना तक अनजाने में हो जाता है – (एलो 30, दिन में 3 बार)
● जब पेशाब करते समय कांच निकलने के साथ पखाना तक हो जाए – (एसिड म्यूर 6 या 30, दिन में 3 बार)
● जब पाखाना जाते समय जरा सा जोर लगाने से ही कांच निकल आए – (रूटा 30, दिन में 3 बार)
● गुदा में खुजली के साथ कांच निकलना – (इग्नेशिया 30, दिन में 3 बार)
● गुदा की मांसपेशियों को ताकत देकर रोग ठीक करने के लिए – (कैलकेरिया फ्लोर 12x, दिन में तीन बार)
● बायोकेमिक औषधि – (फेरम फॉस 6x, दिन में चार बार)
टायफायड – Typhoid
टायफायड – Typhoid
यह बीमारी टायफस बैसिलाई नामक कीटाणु से होता है l यह छूत का रोग है l इसमें शुरुआत में धीरे – धीरे बुखार बढ़ता है, जितना बुखार सुबह होता है उससे 2 डिग्री तक शाम को बढ़ जाता है l इस बुखार की अवधि लगभग 4 सफ्ताह तक रहती है l पहले तीन सफ्ताह के अन्दर शरीर पर छोटे छोटे लाल रंग के दानें निकल सकतें हैं l इस रोग में आंतों में जख्म हो जाता है l
● रोग की पहली अवस्था में जब रोगी शांति चाहता है, इसका कारण बहुत दर्द होना है l हिलने डुलने की इच्छा नहीं होती, जीभ सफ़ेद, होंठ खुश्क, कब्ज हो और प्यास ज्यादा लगे – (ब्रायोनिया 30, दिन में 3-4 बार, यदि दवा का चुनाव सही है तो रोग शुरू में ही रुक जायेगा l
● पहले सफ्ताह में l बच्चों के टायफ़ायड में यह ज्यादा फायदेमंद है l बहुत कमजोरी व सुस्ती, ऊँघना, पलकें भरी, आंखे खोले रहना मुश्किल – (जल्सेमियम 30, दिन में 3 -4 बार)
● सिरदर्द, मल बदबूदार, सांस में भी बदबू, बातों का जवाव देते देते रोगी सो जाए, प्रलाप करे – (बैप्टिशिया Q, 5-10 बूंद दिन में 3 – 4 बार, 30 पावर भी दी जा सकती है)
● रोगी को पतले दस्त हो, जीभ सख्त व अग्र भाग लाल, शरीर में दर्द, बेचैनी, सुस्ती, रोगी बडबडाता हो और शरीर को इधर उधर घुमाता हो – (रस टाक्स 6 या 30, दिन में 3 – 4 बार)
● रोग की बढ़ी हुई अवस्था में , जब रोगी बहुत कमजोर हो जाये, बेचैनी, तेज प्यास l सब लक्षण रात के समय बढ़ जायें खासकर 1 बजे के करीब – (आर्सेनिक 6 या 30, दिन में 2 -3 बार)
डेंगू बुखार – Dengue Fever
डेंगू बुखार – Dengue Fever
इस बुखार में गर्दन व हड्डियों में बेहद दर्द होता है , इसलिए इसे हड्डी – तोड़ या गर्दन तोड़ बुखार भी कहतें हैं l
● हड्डियों में बहुत अधिक दर्द, ठण्ड लगे तो पीठ व हाथ – पैरों में दर्द l पित्त विकार, उल्टी-दस्त – (युपेटोरियम पर्फ 30, दिन में 3 -4 बार)
● मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द, सुस्ती, ऊँघना या नींद सी आई रहना, चुपचाप लेटे रहने की इच्छा – (जल्सेमियम 30, दिन में 3 -4 बार)
● आँख व चेहरा लाल, तेज सिर दर्द व बुखार, कमर दर्द – (बेलाडोना 30, दिन में 3 – 4 बार)
● शरीर दर्द, बेचैनी, हिलने – डुलने से आराम – (रस टाक्स 30, दिन में 3 -4 बार)
● अधिक प्यास, शरीर दर्द, हिलने-डुलने से रोग बढे – (ब्रायोनिया 30, दिन में 3 बार)
अगर जल्दी फायदा न हो तो किसी अच्छे डॉक्टर को दिखायें l
चेचक – Small Pox
चेचक – Small Pox
चेचक छुआछुत की बीमारी है l एक तरह के जीवाणु के कारण यह रोग होता है l
● प्रतिरोधक दवा (रोग किसी भी अवस्था में हो, इलाज शुरू करने के पहले जरुर दें) – (वैरियोलिनम 200 या 1M, 2-3 खुराक हर 10-15 मिनट पर)
● तेज बुखार के साथ बेचैनी – (एकोनाइट 30, दिन में 4-5 बार)
● तेज बुखार, सिरदर्द, रोगी बेहोशी की अवस्था में हो, शोर सहन न हो – (बेलाडोना 30, दिन में 4-5 बार)
● जब दानों का का रंग काला हो, दानों से खून बहता हो l बेचैनी और सुस्ती हो l थोडा – थोडा पानी पीने की इच्छा हो – (आर्सेनिक 30, दिन में 3-4 बार)
● चेचक की किसी भी अवस्था में इस दवा का प्रयोग किया जा सकता है l यदि पहले हीं इसका प्रयोग किया जाये तो रोग की तेजी घाट जाती है l इस दवा में चेचक के दाग दूर करने की भी क्षमता है l – (एन्टिम टर्ट 30, सिर्फ 3 खुराक हर आधे घंटे पर)
● जब बहुत जल्दी मवाद भरे दाने निकल आयें मवाद में बदबू हो; इस दवा में प्रतिरोधक तथा उपचारात्मक दोनों गुण हैं – (थूजा 30, दिन में 3 बार)
● जब चेचक के दाने पकने लगे , गले में जख्म ; खून मिले दस्त हों – (मर्क सोल 30, दिन में 3 बार)
मलेरिया बुखार – Malaria
मलेरिया बुखार – Malaria
आमतौर पर मलेरिया बुखार सर्दी लग कर चढ़ता है व पसीना आकर उतर जाता है l अधिक दिन तक मलेरिया रहने से जिगर व तिल्ली बढ़ जाते हैं l
● बुखार 9 से 11 बजे रात के समय हो l सर्दी थोड़ी देर लगती हो, बुखार ज्यादा देर तक रहता है l सिरदर्द जैसे सिर फट जायेगा l प्यास न लगे, जी मिचलाए, उल्टी लगे – (इपिकैक 30, हर 2 घंटे पर)
● बुखार सुबह 8 बजे से दोपहर तक रहे l अन्दर से अत्यधिक सर्दी महसूस हो; रोगी हर समय कपड़ा ओढ़ना चाहे l सुबह के समय जी मिचलाए – (नक्स वोमिका 30, दिन में 4 बार)
● दिन में 12 बजे के बाद या रात में 12 बजे के बाद बुखार आए l कंपकंपी, बुखार, और पसीने में अनियमितता हो l पसीना आने से रोगी को आराम मिले l थोड़ी – थोड़ी देर में थोड़ा पानी का प्यास – (आर्सेनिक 30, दिन में 3 बार)
● सर्दी दिन के 2-3 बजे के बीच लगे, सर्दी के साथ बुखार, पैर ठंडे रहे l सिर पर ज्यादा पसीना आए – (कल्केरिया कार्ब 200, 2-3 खुराक)
● बुखार जब घड़ी की सुई की तरह नियत समय पर आए – (सिड्रोन 30, दिन में 2-3 बार)
खसरा – Measles
खसरा – Measles
यह एक छूत की बीमारी है। एक से पाँच वर्ष की आयु में प्रायः बच्चों को होती है। यह रोगी के कपड़ों से हवा के द्वारा फैलती है। शुरू-शुरू में जुकाम जैसे लक्षण प्रकट होते हैं। बुखार के साथ 4-5 दिन बाद चेहरे व गले पर दाने निकलते हैं और धीरे-धीरे सारे शरीर पर फैल जाते हैं। फिर चौथे – पांचवे दिन ये दाने प्रायः लुप्त हो जाते हैं, बुखार भी चला जाता है। परंतु खांसी कुछ दिनों तक रहती है।
● प्रतिरोधक दवा (रोग की प्रत्येक अवस्था मे उपयोगी) – (मोरबिलिनम 200 या 1M, 3 खुराक 10-15 मिनट के अंतर से)
● प्रथम अवस्था में। तेज बुखार, बेचैनी, प्यास, नाड़ी भारी और तेज – (एकोनाइट 6 या 30, 2-3 घंटे के अंतर पर)
● जब दाने ठीक से न निकले, अचानक बैठ जाएं, जिससे सांस लेने में कष्ट हो, गले के अंदर श्लेष्मा घड़घड़ाये। जीभ सफेद – (एंटीम टार्ट 30, 3 खुराक, हर 2 घंटे बाद)
● जब दाने अचानक बैठ जाये। रोगी खूब बड़बड़ाए। शरीर मे डंक मारने जैसा दर्द, जलन व तनाव – (एपिस मेल 30, 3 खुराक, हर 2 घंटे पर)
● दाने अचानक गायब होने से तेज बुखार और सर्दी। लगातार नाक व आंखों से पानी गिरे, नाक में घाव, आँखें ओर मुंह लाल, सुस्ती, उंघाई – (जल्सेमियम 6 या 30, दिन में 3-4 बार)
● सर्दी पकने पर जब नाक से गाढ़ा बलगम निकले, प्यास न हो (यह दवा प्रतिरोधक दवा के रूप में भी काम आती है) – (पल्साटिला 30, हर 3-4 घंटे के अंतर पर)
● बुखार तेज हो, गर्मी सिर को चढ़े, शरीर व माथा गर्म, आंखे व चेहरा लाल – (बेलाडोना 6 या 30, हर 2 घंटे बाद)
● अचानक दाने बैठ जाने के कारण, शरीर बर्फ की तरह ठंडा, रोगी फिर भी शरीर पर कपड़ा न डालना चाहे – (कैम्फर Q या 6, हर आधे घंटे बाद)
● बायोकैमिक दवा – (काली म्यूर 6X व फेरम फॉस 6X)
गैस्ट्रोएन्टेराइटिस – Gastroenteritis
गैस्ट्रोएन्टेराइटिस – Gastroenteritis
अत्यधिक उल्टी व दस्त, जो जानलेवा भी हो सकते हैं।
● प्रथम अवस्था में जब अत्यधिक प्यास एवं बेचैनी हो, उल्टी और दस्त बार-बार हो – (आर्सेनिक एल्ब 30, और इपिकैक 30, हर आधे घंटे बाद)
● यदि उल्टी और दस्त लगातार हो, बंद होने का नाम न ले, सारा शरीर ठंडा व नीला पड़ जाए, ठंडा पानी पीने की इच्छा हो – (विरेट्रम एल्ब 30, दिन में 3-4 बार)
● अत्यधिक उल्टी व दस्त के बाद जब रोगी ठंडा पड़ने लगे और हमेशा पंखा करवाना चाहे – (कार्बो वेज 30, दिन में 3-4 बार)
जीवन रक्षक घोल (नमक, चीनी व पानी का मिश्रण), शिकंजी, ग्लूकोज, या अन्य तरल पदार्थ रोगी को जल्दी जल्दी दें जिससे निर्जलन का उपचार हो।
हैजा – Cholera
हैजा – Cholera
हैजा – यानि दस्त और उल्टी जो एक विषय में जीवाणु के कारण होता है।
लक्षण : चावल के मांड जैसा, झाग मिला, दस्त और उल्टी। प्यास, बेचैनी, ज्यादा कमजोरी, पेशाब में रुकावट, शरीर में ऐंठन, ठंडापन, नाड़ी कमजोर व सुस्त। पानी हमेशा साफ, प्रदूषण मुक्त पीना चाहिए, विशेषकर बरसात में सड़ी गली चीजों के खाने, गंदा पानी पीने आदि से यह जीवाणु शरीर में प्रवेश करते हैं। रोगी का बदन ऐंठने लगता है, पेशाब रुक जाता है; तुरंत इलाज ना होने पर निर्जलन भी हो सकता है और रोगी कुछ ही घंटों में मर सकता है।
● हैजा की प्रथम अवस्था में जब शरीर में काफी ठंडक और शक्तिहीनता आने लगे – (कैम्फर Q, 2-3 बूंद हर 10-15 मिनट बाद)
● जब उल्टी और दस्त काफी मात्रा में हो और ठंडा पसीना आए – (विरेट्रम एल्ब 30, हर 10-15 मिनट बाद)
● जब उल्टी और दस्तों के साथ ऐंठन प्रबल हो – (क्युप्रम मेट 30, हर आधे घंटे बाद)
● यदि हैजे के रोगी में बेचैनी और जलन के लक्षण प्रधान हो, दस्त काले और बहुत बदबूदार हो – (आर्सेनिक एल्ब 30, हर 10-15 मिनट बाद)
● हैजे की आखिरी अवस्था में या उल्टी दस्त बंद होने की अवस्था में यदि रोगी ठंडा होने लगे, मगर हवा के लिए छटपटाए – (कार्बो वेज 30, हर 10-15 मिनट बाद)
फेफड़ों की टी.बी. – Pulmonary Tuberculosis
फेफड़ों की टी.बी. – Pulmonary Tuberculosis
हर समय थोड़ी-थोड़ी खुश्क खांसी लगातार बनी रहती है। अगर रोगी बलगम को बाहर न थूक कर निगल जाए तो आंतो की टी. बी. भी हो सकती है।
● मुख्य दवा, सुखी खांसी, खून मिला बलगम। रोग बढ़ जाने पर यह औषधि न दें – (फॉस्फोरस 30, दिन में 3 बार)
● बीच-बीच में प्रतिरोधक दवा के रूप में दें। जिनको खांसी होने के बाद ठीक न होती हो – (ट्यूरबरकुलाइनम 1M, 2-3 खुराक)
● सुखी खांसी, बलगम खून भरा। सुबह चमकीले लाल रंग का खून व शाम को काला जमा हुआ खून। छाती में हमेशा दर्द बना रहे – (एकालिफ़ा इंडिका Q या 3X, दिन में 3 बार)
● रोग की हर अवस्था मे यह दवा उपयोगी है, बहुत कमजोरी, शरीर दुबला पड़ जाए। तेज प्यास। ठंडे पानी से पेट मे बेचैनी, इसलिए रोगी गर्म पानी पीना चाहता है – (आर्सेनिक आयोडायड 6 या 3X, दिन में 4 बार)
● न्यूमोनिया इत्यादि के बाद फेफड़ों में सूजन और फिर क्षय रोग हो जाए। पेशाब गाढ़ा, व कब्ज; बलगम हरा व गाढ़ा। फेफड़ा रोगग्रस्त होकर ठोस हो जाए – (लाइकोपोडियम 30, दिन में 2-3 बार)
● बहुत ज्यादा खून की उल्टी या खून मिली खांसी हो तब – (फाइकस रैलीजियोसा Q, दिन में 3-4 बार)
● फेफड़ा ठोस हो जाए। छाती में बलगम की घड़घड़ाहट। पीला बलगम काफी मात्रा में निकले। कष्ट रात में बढ़े – (हिपर सल्फ 30, दिन में 2-3 बार)
● खाँसते – खाँसते रोगी ने जो भी खाया पीया हो उलट दे। खांसी के साथ ऐंठन हो – (ड्रॉसेरा 6 या 30, 2-3 खुराक)
● सामान्य खांसी के साथ बहुत ज्यादा मात्रा में खूब लाल चमकदार खून निकले। दर्द या बेचैनी न हो – (मिलीफोलियम Q या 6, दिन में 3-4 बार)
● मानसिक व शरीरिक विकास पूरा न हुआ हो, ठंड से रोग बढ़े। ग्रंथियों में सूजन हो – (बैराइटा कार्ब 30, दिन में 3 बार)
● बायोकैमिक दवा – (कैल्केरिया फॉस 6X, दिन में 3 बार)
दिल का दर्द – Angina pectoris
दिल का दर्द – Angina pectoris
यह दर्द दिल के अंदर के विकार के कारण नहीं, बल्कि मांशपेशियों व स्नायुमंडल में हुई गड़बड़ी के कारण होता है। ज्यादा शराब के सेवन से, मानसिक परेशानियों, बीड़ी-सिगरेट, वातरोग, आदि से भी हो सकता है। दिल में एकाएक दर्द उठकर छाती के सामने वाले भाग, बाएं कंधे व बाजू तक फैल जाता है। सांस जल्दी-जल्दी आने लगता है, घबराहट, पसीना, बेहोशी तक हो जाती है। समय पर ठीक उपचार ना मिलने पर रोगी की मृत्यु तक हो सकती है।
● मुख्य औषधि – (लैट्रोडेक्टस 6 या 30, दिन में 3 बार)
● जब हृदय की गति बहुत तेज हो। बाईं ओर घूमने से हृदय में सुई चुभने जैसा दर्द हो – (आइबेरिस Q, 5-10 बूंद)
● जब लगे कि हृदय काम करना ही बंद कर देगा – ( डिजिटेलिस Q या 30, दिन में 4 बार)
● जब दर्द के कारण बाईं ओर न लेटा जाए – (स्पाइजिलिया 30, दिन में 4 बार)
● हृदय को ताकत देने के लिए – (कैक्टस Q व क्रेटेगस Q, पानी मे मिला कर)
● जब अत्यधिक बेचैनी, कमजोरी, प्यास व जलन हो; ऐसा लगे जैसे कि प्राण निकलने ही वाले हैं – ( आर्सेनिक 30, हर 15-20 मिनट बाद)
● जब पेट में वायु के दबाव के कारण हृदय दर्द हो, रोगी खुली हवा या पंखा चाहे – ( कार्बोवेज 30, दिन में 3 बार)
● जब दर्द हृदय की मांसपेशियां कमजोर होने के कारण हो – (स्ट्रोफैन्थस Q, दिन में 3 बार)
● जब दर्द के कारण रोगी गश खा जाए, बायां हाथ सुन्न हो जाए – (नाजा 6 या 30, दिन में 3-4 बार)
● बायोकेमिक औषधि – ( मैग्नीशिया फॉस 6X व काली फॉस 6X)
डर – Fears
डर – Fears
● सड़क पार करने, अकेले रहने, और तूफान से डर – (फॉस्फोरस 30 या 200)
● भीड़ का डर – (अर्जेंटम नाइट्रिकम 30 या 200)
● अंधेरे का डर – (बेलाडोना 30, स्ट्रामोनियम 200, काली ब्रोम 30)
● परीक्षा का डर – (एनाकार्डियम 200, लाइकोपोडियम 200, साइलीशिया 200)
● बच्चों में गोद से या झूले से गिर जाने का डर – (जेलसेमियम 30, बोरेक्स 30)
● पिछली डर वाली बातें याद करके डर लगना – (ओपियम 200)
● ऊंचाई का डर – (अर्जेंटम नाइट्रिकम 200, पल्साटिला 200, स्टेफीसेगिरिया 200)
● बारिश से डर – (इलेप्स कॉर 30, नाजा 30)
● अजनबियों का डर – (बैराइटा कार्ब 200)
● किसी से बात करने, छूने, या देखने का डर – (एंटीम क्रूड 200)
शायटिका – Sciatica
शायटिका – Sciatica
कमर के निचले हिस्से (कूल्हे) से एड़ीतक जो स्नायु (nerve) जाती है उसको शायटिका स्नायु (sciatica nerve) कहते हैं l उसी के दर्द को शायटिका कहा जाता है l शायटिका का दर्द एक ऐसा दर्द है जो किसी भी इन्सान को बहुत अधिक बेचैन कर देता है l
● जब दर्द खास कर दायीं टांग में हो, दर्द कूल्हे से घुटने या एड़ी तक जाय, चलते चलते टांग सुन्न हो जाए, दर्द वाली टांग का घुटना मोड़ कर लेटने से आराम आये – (कोलोसिन्थ 200 या 1M, दिन मे 2 बार)
● दर्द के साथ सुन्न हो जाना, टांग को पेट के साथ सिकोड़ कर लेटने से और कुर्सी पर बैठने से आराम , चलने फिरने से दर्द बढ़े – (नैफेलीयम 200 या 1M, दिन में 2 बार)
● अधिक मेहनत करने या ठण्ड लगने के कारण रोग, चलने फिरने से आराम – (कैमोमिला 30 या 200, दिन में 3 बार)
● अधिक मेहनत करने या ठण्ड लगने के कारण रोग, चलने फिरने से आराम – (कैमोमिला 30 या 200, दिन में 3 बार)
● जब दर्द असहनीय हो – (मैडोरिनम 200 या 1M 2-3 खुराक)
● जब दर्द नीचे से ऊपर को जाए – (कालमिया लैट 200, दिन में 3 बार)
● जब ठंडी पट्टी से आराम आये – (लीडम 200 या 1M , दिन में 2 बार)
(इन दवाओं के साथ साथ मैग फ़ॉस 6X दिन में 4 बार लेना चाहिये)
कशेरुका का खिसकना – Slip disc
कशेरुका का खिसकना – Slip disc
मेरुदंड(spinal cord) में 26 कशेेरूकाएँ हैं, हर दो कशेरुकाओं के बीच कार्टिलेज का पैड होता है जिससे यह आपस में रगड़ नहीं खाती। पैड में कोई विकार होने या इसका लचीलापन खत्म होने पर कशेरुका अपने स्थान से हट जाती है जिसे कशेरुका का खिसकना(slip disc) कहते हैं। ऐसा होने से इस स्थान की स्नायु(nerve) कशेरुकाओं के बीच दब जाने से दर्द करने लगती है।
● प्रमुख दवा – (आर्निका 200 या 1M, आवश्यकतानुसार)
● मेरुदंड के क्षय विकार आदि में – (साइलिशिया 6x या 30, दिन में 4 बार)
● हड्डियों के बढ़ जाने या क्षय विकार आदि के कारण रोग – (हेक्ला लावा 6x या 1M, दिन में 4 बार)
● जब रोग जोड़ों तक में घुस जाए – (ऑरम मेट 30 या 200, दिन में 3 बार)
जोड़ों का दर्द, गठिया, वात रोग सेक्शन भी देखें।
कमर दर्द – Backache
कमर दर्द – Backache
ठण्ड लगने , झटका या कमर में मोच आ जाने या अन्य किसी कारण से कमर दर्द हो सकता है l
● ठंडी हवा लगने के कारण अचानक दर्द – (एकोनाइट 30, हर 2 घंटे बाद)
● जब दर्द चलने – फिरने से घटे , ठंड व लेटे रहने से बढ़े – (रस टॉक्स 200, दिन में 3 बार, कैलकेरिया फ्लोर 6X या 12X, दिन में 4 बार)
● यदि सेकने से आराम हो – (मैग फ़ॉस 6X या 30 , दिन में 4 बार)
● जब दर्द ठंड व चलने फिरने से बढ़े – (ब्रायोनिया 30 या 200, दिन में 3 बार)
● कमर के निचले हिस्से में (रीढ़ की हड्डी के निचले भाग) झटका आने का दर्द – (एस्कुलस 6 या 30, दिन में 3 बार)
● कमर दर्द जैसे की कुछ चुभ रहा हो , कमजोरी व पसीना , सुबह 3-4 बजे दर्द बढ़े – (काली कार्ब 30 या 200, दिन में 3 बार)
● ज्यादा काम करने या चोट लगने के कारण दर्द – (आर्निका 30 या 200, दिन में 3 बार)
● मोटे थुलथुले लोगों में नहाते समय कमर दर्द – (कैलकेरिया कार्ब 200, सप्ताह में एक बार)
● चिडचिडे. ठंडी प्रकृति वाले रोगियों में l लेटे-लेटे कमर दर्द जिसकी वजह से रोगी करवट भी बैठ कर ही बदल सके – (नक्स वोमिका 30 या 200, दिन में 3 बार)
● सोने व आराम करने से अच्छा लगे , कमर के निचले हिस्से में दर्द (खासकर औरतों में ) – (पल्साटिला 30, दिन में 3 बार)
● कमर दर्द में डकारे आने से आराम आये – (सीपिया 30, दिन में 3 बार)
स्नायु की सूजन – Neuritis
स्नायु की सूजन – Neuritis
इस रोग में किसी एक स्नायु(nerve) में सूजन आ जाती है या कई स्नायु एक ही समय में सूज जाती है। स्नायु में दर्द होता है, सुन्न हो जाती है। चोट लगना, सर्दी लगना या टाइफाइड डिफ्थीरिया आदि घातक रोगों के परिणाम स्वरुप यह रोग हो सकता है। जहरीली दवाओं और ज्यादा अल्कोहल लेने आदि कारणों से भी रोग हो सकता है।
● ठंडी हवा लगने की वजह से रोग – (एकोनाइट 30, दिन में 3 बार)
● स्नायु में टपकन की तरह दर्द, बहुत तेज बुखार, दर्द अचानक आता है व अचानक चला जाता है – (बेलाडोना 30, दिन में तीन बार)
● जब स्नायु चोट लगने की वजह से कुचला जाए। उदाहरणस्वरूप उंगलियों के पीस जाने से, नाखूनों पर चोट लगने से। इस रोग की मुख्य दवा है – (हाइपेरिकम 6 या 30, दिन में तीन बार)
● स्नायु में दर्द जो धीरे-धीरे शुरू हो व धीरे-धीरे खत्म हो। दर्द किसी भी अंग में हो यह लक्षण पाए जाने पर यही औषधि देनी चाहिए – (स्टैनम मेट 30, दिन में 3 बार)
● स्नायु में दर्द जैसे बिजली का करंट दौड़ गया हो। स्नायु दर्द के दौरे पड़ने लगे – (प्लम्बम मेट 30, दिन में 3 बार)
मिर्गी – Epilepsy
मिर्गी – Epilepsy
इसमे रोगी अचानक बेहोश हो जाता है। जहाँ और जैसी भी हालत में हो गिर पड़ता है। मुँह से झाग आने लगती है। हाथ – पैर अकड़ जाते हैं और जबड़ा भिंच जाता है।
● आत्म ग्लानि (प्यार में धोखा), भय, शोक के कारण रोग – (इग्नेशिया 200 या 1M)
● त्वचा रोग दब जाने के कारण। दौरे से पहले छाती व पेट मे तनाव । दौरा पड़ने पर ज़बान कट जाती है। सिर एक तरफ को झुक जाता, पेशाब निकल जाता है। पानी पीने से रोग में आराम – (कॉस्टिकम 30, दिन में 3 बार)
● रोग की लहर घुटनों से उंगलियों व अंगूठो से उठे और फिर पेट के निचले हिस्से तक जाए। रोगी अचानक दौरा पड़ने के कारण चीख के साथ गिर पड़ता है और दौरे के बाद सो जाता है -(क्युप्रम मैट 30, दिन में 3 बार)
● जब दौरे नींद के दौरान आए। रोग की लहर नाभि के आस पास से शुरू हो। पूर्णिमा को या उसके आस पास दौरे आए – (साइलीशिया 1M, 15 – 20 दिन में एक बार)
● मोटे लोगों में भय के कारण दौरे जो कि पूर्णिमा के आस पास आए। रोग की लहर नाभि के आस पास से ऊपर उठे और ऐंठन बढ़ती जाये। पानी पीने से रोग बढ़े। दौरे रात के समय ज्यादा आये – (कैलकेरिया कार्ब 1M, 15-20 दिन में एक बार)
● हस्त मैथुन या ज्यादा वीर्यह्रास के कारण दौरे। रोग की लहर नाभि के आसपास से शुरू हो, रोगी बेहोश हो जाये – ( ब्यूफो राना 30 या 200, दिन में 2 बार)
● जब दौरा सुबह के समय हर 2-3 सफ्ताह बाद आए – ( सीपिया 200 या 1M, 10-15 दिन में एक बार)
● बच्चों में जब किसी खास रोग के दब जाने से इस रोग की शुरुआत हो। उत्तेजना से रोग बढ़े – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● जब दौरे अचानक और जल्दी जल्दी आये। किसी भी मामूली कारण (भय, आतंक, हस्तमैथुन आदि) से दौरे पड़ने लगे – (आर्टिमिसिया वल्गेरिस Q या 6, दिन में 3 बार)
● जब शरीर अचानक अकड़ जाए और अंग फड़कने लगे और इसके बाद काफी कमजोरी आ जाये, जबड़े अकड़ जाये – (साइक्युटा विरोसा 6 या 30, दिन में 3 बार)
● चिड़चिड़े, तुनक मिजाज रोगी जो अक्सर कब्ज से पीड़ित हो – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
उन्माद (पागलपन) – Insanity
उन्माद (पागलपन) – Insanity
मन की स्वाभाविक अवस्था मे गड़बड़ी हो जाने को उन्माद कहते हैं। उन्माद या पागलपन में रोगी में अलग अलग प्रकार के लक्षण होते हैं। रोगी कभी बहुत बोलने लगता है, कभी गाने लगता है, कसमें खाता है, मारता है, काटता है, कपड़े फाड़ता है; मन में अनेक प्रकार के भ्रम हो जाते हैं।
कारण: वंशगत दोष, बहुत ज्यादा नशीली चीजें खाना, बहुत ज्यादा इन्द्रिय सेवन या नकली मैथुन, बहुत अधिक शोक, मानसिक पोषण कम होना, बहुत परिश्रम करना, आदि।
● तोड़ – फोड़, गाली – गलौच, दूसरों पर थूकना; बोलने व काम करने में अत्यधिक तेजी। चेहरा लाल, प्रकाश असहनीय – (बेलाडोना 30 या 6, दिन में 3 बार)
● बेहूदी हरकतें करना, चिल्लाना, हँसना, ईर्ष्यालु और शंकाशील, बकवास करना, गुप्तांगो पर हमेशा हाथ रखना – (हायोसाइमस 30 या 200, दिन में 3 बार)
● चेहरा लाल, बहुत बकवास करना, ऊंचा बोलना, गाने गाना, गाली देना, मारना, मुँह से सीटी बजाना, कपड़े फाड़ डालना। रोगी अंधेरे से डरता है मगर चमकती हुई चीज या पानी को देख कर दौरा पड़ जाता है। मौत का डर हर समय रहता है। ऐसा लगता है जैसे उसका कोई अंग बहुत बड़ा हो गया है – (स्ट्रामोनियम 30 या 200, दिन में 3 बार)
● जब समय, दूरी व स्थान का ज्ञान न रहे। भुल्लकड़पन, मजेदार बातों में खोया रहे, हंसना शुरू करे तो हंसता ही रहे, उंगली नचाता रहे, आदि – (कैनेबिस इंडिका 6 या 30, दिन में 3 बार)
● अपने आप को मानसिक व शारीरिक रूप से बहुत बड़ा व बाकी सब को बहुत छोटा समझे – (प्लैटिना 200 या 1M, 10-15 दिन में एक बार)
● चेहरा पीला व बेहद कमजोरी। बाकी लक्षण स्ट्रामोनियम की तरह हो। छेड़ते ही बकवास शुरू कर दे – (विरेट्रम एल्ब 30, दिन में 3 बार)
● जब आत्महत्या का आवेग हो – (ऑरम मैट 200 या 1M, 2-3 खुराक दें)
● अपने को धनवान, राजा समझे। चिथड़े पहन कर भी सोचे कि बहुत सुंदर वस्त्र पहने हैं – (सल्फर 30 से 10M तक जरूरत अनुसार)
● औरतों में मासिकधर्म दब जाने के कारण रोग – (पल्साटिला 200 या 1M की 2-3 खुराक)
● निराशा, शोक, चिंता व डर, आदि के कारण रोग – (इग्नेशिया 200या 1M, दिन में 2-3 बार)
● कसमें खाना, लगे जैसे कि किसी दूसरी आत्मा के अधीन है – (ऐनाकार्डियम 30 या 200, दिन में 2-3 बार)
● सिर में चोट लगने के कारण रोग, छुए जाने का डर – (आर्निका 200 या 1M, 2-3 खुराक)
● दुःखी मन, रंज, गम के कारण रोग। रोगी अकेला रहना चाहता है ताकि रो सके। सांत्वना बुरी लगती है – (नैट्रम म्यूर 200 या 1M की 2-3 खुराक)
नींद न आना – Insomnia
नींद न आना – Insomnia
मानसिक उत्तेजना, बेचैनी, भय, आदि, लक्षणों के साथ नींद न आने की बीमारी हो जाती है। माथे में खून का दबाव ज्यादा हो जाता है। कई बार कोई खास कारण पता न होते हुए भी नींद नहीं आती।
● प्रमुख दवा – (पैसिफ्लोरा Q, 20 बून्द सोते समय)
● जब किसी खुशखबरी के कारण नींद न आए – (कॉफिया 200, 2-3 खुराक)
● जब डर, आतंक या किसी बुरी खबर के कारण नींद न आए – (जल्सेमियम 30, दिन में 3 बार)
● निराशा या दुःख, किसी निकट संबंधी की मौत के कारण नींद न आये – (इग्नेशिया 200 या 1M, की 3 खुराक)
● मस्तिष्क में रक्त संचय के कारण नींद न आना – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● जब लगातार विचारों के कारण मस्तिष्क आराम न पा सके – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
● जरा सी आवाज से नींद टूट जाय और फिर न आए – (सल्फर 30, दिन में 2 बार)
● खास कर बूढ़े व्यक्तियो में जब दिन में तो नींद आये मगर रात में नहीं – (फॉस्फोरस 30, दिन में 2 बार)
● चिन्ताओं के कारण नींद न आये – (ऐम्ब्रा ग्रिजिया 30, दिन में 2-3 बार)
● बायोकैमिक औषधि – (फेरम फॉस 30 X, सोते समय)
उबासियाँ (जम्हाई) – Yawning
उबासियाँ (जम्हाई) – Yawning
● नींद न आए पर उबासियां लगातार आती रहे- (एकोनाइट 30, दिन में 3 बार)
● खाना खाने के बाद उबासियां आए – (लाइकोपोडियम 30, दिन में 3 बार)
● सोकर उठने के बाद उबासियां इतनी ज्यादा कि लगे जबड़ा ही हिल जाएगा – (इग्नेशिया 30 या 200)
● उबासियों के साथ शरीर में ठिठुरन महसूस हो – (नैट्रम म्यूर 30)
● उबासियों के साथ डकारें भी आए – (सल्फर 30 या 200)
● उबासियों के साथ अंगड़ाइयां आए, लगे कि रोगी सारी रात सो नहीं पाएगा – (चेलिडोनियम 6 या 30)
हिचकी – Hiccough
हिचकी – Hiccough
पेट की साधारण गड़बड़ी के कारण हिचकी या बच्चों में हिचकी चिंताजनक नहीं होती, परंतु कष्ट अवश्य देती है। तेज बुखार, हैजा तथा अन्य प्राणघातक बीमारियों में जटिलता के रूप में जो हिचकी पैदा हो जाती है; वह अगर जल्दी ही बंद ना हो तो जानलेवा भी हो सकती है।
● दुख, निराशा या मानसिक उद्वेग, बेचैनी और रोते-रोते हिचकी आने लगे। तंबाकू खाने या खाने-पीने के बाद हिचकी आए – (इग्नेशिया 30, दिन में 3-4 बार)
● सब प्रकार की हिचकियों में रामबाण दवा – (जिन्सेंग Q, 5-5 बूंद, हर आधे घंटे बाद)
● हिचकी के कारण सारे शरीर में झटका सा लगना; शाम के समय और खड़े होने पर हिचकी का बढ़ना – (एगेरिकस 6 या 30, आवश्यकतानुसार)
● भोजन या धूम्रपान के बाद बार-बार हिचकी और पेट फूलने का एहसास हो – ( लाइकोपोडियम 30, दिन में तीन बार)
● कब्ज व अपच के कारण हिचकी; खाना खाने से बढ़े – (नक्स वोमिका 30, दिन में चार बार)
● खाने के बाद हिचकी आए – (साइक्लेमन 30, दिन में 3 बार)
● बायोकेमिक औषधि – (नैट्रम म्यूर 6x, दिन में तीन बार)
स्नायु शूल – Neuralgia
स्नायु शूल – Neuralgia
स्नायुओं(nerves) के दर्द को ही स्नायु शूल कहते हैं। यह कोई अलग बीमारी नहीं है बल्कि दूसरी बीमारी का लक्षण मात्र है। इसमें शरीर के किसी भी हिस्से में तेज दर्द हो सकता है जो असहनीय होता है।
● दाएं चेहरे का स्नायु शूल – (सैंगुनेरिया 30, दिन में 3 बार)
● जब गर्म सेक से आराम हो – (मैग्नीशिया फॉस 6x या 30, दिन में चार बार)
● बाएं चेहरे का स्नायु शूल – (स्पाइजिलिया 30, दिन में 3-4 बार)
● ठंडी हवा से चेहरे का स्नायु शूल – (एकोनाइट 30, हर 2 घंटे बाद)
● हाथों में व छाती में दर्द, चलने फिरने से घटे – (रस टॉक्स 30 या 200, दिन में 3 बार)
● चोट लगने के कारण स्नायु शूल – (आर्निका 30 या 200, दिन में 3 बार)
कारण का पता लगाकर ठीक से उपचार करना चाहिए।
हिस्टीरिया – Hysteria
हिस्टीरिया – Hysteria
स्नायुमंडल की क्रिया में गड़बड़ी के कारण यह रोग होता। यह रोग विशेषकर औरतों में ज्यादा होता है। स्नायविक दुर्बलता ही इस रोग का प्रमुख कारण है।
● जब औरतों में मासिक बंद होने के कारण रोग हो। – (पल्साटिला 30 या 200, दिन में 3 बार)
● ऐसे रोगी, खासकर औरतें, जो दौरे में भी दूसरों को घृणा की दृष्टि से देखे – (प्लैटिना 200, दिन में 2 बार)
● जब आत्महत्या का विचार प्रबल हो – (ऑरम मैट 200 या 1M, की 3 खुराक)
● मासिक के समय दौरा। शंका जैसे कोई जहर खिला देगा – (हायोसाइमस 30 या 200, दिन में 3 बार)
● जब कब्ज, पेट फूलना, हिचकी, आदि लक्षण भी हो – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
● दौरे के साथ नींद न आना, सिरदर्द, जैसे कोई सिर में कील ठोंक रहा है – (कॉफिया 30, दिन में 3 बार)
क्रोध – Anger
क्रोध – Anger
शारीरिक व मानसिक कमजोरी की वजह से रोगी बहुत चिड़चिड़ा, क्रोधी स्वभाव का हो जाता है। कई बार अन्य कारण भी इस रोग के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
● बच्चों का गुस्सा, गोद मे उठाने से शांत हो जाना। क्रोध के कारण दस्त, खांसी, आदि। – (कैमोमिला 200 या 1M, सफ्ताह में एक बार)
● क्रोध या अपमान के दुष्परिणाम, दूसरे लोगों की प्रतिक्रिया से चिंतित होना – (स्टेफिसेगेरिया 200 या 1M, सफ्ताह में 1 बार)
● चिड़चिड़ा स्वभाव, बदले की भावना, झुंझलाहट, कोई भी रुकावट पसंद नहीं। – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
● ऐसे लोग जो झगड़े को तत्पर रहते हैं – (लाइकोपोडियम 30 या 200, दिन में 2 बार)
● बच्चों में पेट मे कीड़ा के कारण चिड़चिड़ापन। – (सिना 200, दिन में 2 बार)
● मोटे थुलथुले लोगों में गुस्सा – (कैल्केरिया कार्ब 200 या 1M, दिन में 2 बार)
● तेज गुस्सा, गुस्से के समय जो भी पास आये उसे मार देना चाहे – (आयोडियम 200, दिन में 2 बार)
● गर्भावस्था के दौरान गुस्सा। – (नक्स मॉस्काटा 30, दिन में 2 बार)
सिर चकराना – Vertigo
सिर चकराना – Vertigo
● सिर में ऐसा चक्कर आये लगे जैसे कि नशा किया है, मितली हो। लेटने के बाद उठते-बैठते सिर में चक्कर आए जिसकी वजह से रोगी को फिर से लेटना पड़े – (कॉकुलस इंडिका 30 या 200, दिन में 3 बार)
● सिर झुकाने या चलने से चक्कर आए, एक के बदले दो या सिर्फ आधा दिखाई दे। चलते हुए बाईं ओर को लड़खड़ा जाए – (ऑरम मैट 30 या 200, दिन में 3 बार)
● थोड़ा सा भी सिर हिलाने या करवट बदलने पर चक्कर आए, रक्त की कमी के कारण सिर में चक्कर आए, अविवाहितों के लिए खास फायदेमंद – (कोनियम मैक 30 या 200, दिन में 3 बार)
● ऐसा लगे कि घर द्वार व सभी चीजें चक्के की तरह घूम रहे हैं; सिर में बेहद जलन – (कैडमियम 30 या 200, दिन में 3 बार)
● सुबह बिस्तर से उठते हीं सिर में चक्कर आए। ऐसा लगे कि मस्तिष्क ढीला हो गया है, जिस ओर सिर घुमाये उसी ओर मस्तिष्क लुढ़कता सा लगे – (ऐमोनियम कार्ब 30 या 200, दिन में 3 बार)
● सिर चकराए ऐसा लगे कि सिर हल्का व खाली हो गया है – (मैनसिनेला 30 या 200, दिन में 3 बार)
● ऊंची इमारत को देखने से सिर चकराए, सिरदर्द हो, रोगी को ऐसा लगे कि सिर बड़ा हो गया है और उसमें कुछ रेंग रहा है – (अर्जेंटम नाइट्रिकम 30 या 200, दिन में 2-3 बार)
मोटापा – Obesity
मोटापा – Obesity
जब व्यक्ति आराम प्रिय जिंदगी व्यतीत करे। खूब खाए पीये, चलने फिरने व कसरत करने से कतराए तब उसके शरीर मे चर्बी जमा होने लगती है, और व्यक्ति मोटापा का शिकार हो जाता है। कई व्यक्तियों में यह रोग हार्मोन्स की गड़बड़ी के कारण भी हो सकता है।
● मुख्य औषधि – (फाइटोलक्का बेरी Q, 10-15 बूंद, दिन में 3 बार)
● जब रोगी मोटा थुलथुला हो (सोते समय सिर में खूब पसीना आए) – (कैल्केरिया कार्ब 200 या 1M)
● जब कैल्केरिया कार्ब से फायदा न हो (गले मे गॉयटर हो) – (फ्यूकस वेस Q, 20-30 बूंद, हर 4 घंटे पर)
● जब मोटापा पेट की गड़बड़ी के कारण हो, कब्ज हो, जीभ पर सफेद परत जमी हो – (एंटीम क्रूड 30 या 200)
● जब थायराइड ग्रंथि की गड़बड़ी के कारण मोटापा हो – (थायरोइडिनम 30, 200)
● औरतों के लिए। जब कब्ज रहता हो – (ग्रेफाइटिस 30)
● जब मोटापे के साथ खून की कमी (anaemia) हो – (फेरम मैट 3X, या 6)
● जब कमर के निचले हिस्से से जांघों तक ज्यादा चर्बी चढ़ी हो – (अमोनियम म्यूर 3X, 200)
टेटनस (धनुष्टन्कार) – Tetanus
टेटनस (धनुष्टन्कार) – Tetanus
शरीर पीठ की ओर से धनुष की तरह टेढ़ा हो जाए। यह रोग एक प्रकार के जीवाणु के शरीर में घुसने के कारण होता है। यह जीवाणु प्रायः हाथ पैर में जंग लगे लोहे से कट जाने के कारण हुए घाव से शरीर में प्रवेश करते हैं।
लक्षण : रोगी मुंह नहीं खोल पाता। गर्दन अकड़ जाती है। जबड़े बंद हो जाते हैं। शरीर प्रायः पीठ की तरफ से धनुष के आकार में मुड़ जाता है। कभी-कभी बच्चे की नाल काटते हुए जंग लगा गंदा औजार इस्तेमाल करने से या गंदा कपड़ा बांधने से भी यह जीवाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए बच्चे की नाल काटते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
● मुख्य दवा – (लीडम पाल 200)
● यदि कील आदि चुभने के बाद समय पर लीडम न दिया गया हो – (हाइपेरिकम 200)
(आजकल काफी होमियोपैथ ऐसी चोट जो लोहे के औजार, कील, या सड़क पर रगड़ आदि के कारण हो – आर्निका 200, लीडम 200, व हाइपेरिकम 200, तीनों दवाएं देते हैं। ये दवाएं 1M पोटेन्सी में भी दी जा सकती है।)
लकवा – Paralysis
लकवा – Paralysis
यह स्नायु संस्थान(nervous system) का रोग है। यह दो तरह का हो सकता है। संवेदनात्मक पक्षाघात(sensory paralysis) या प्रतिरोधक पक्षाघात(motor paralysis) – यह दोनों अलग-अलग या साथ-साथ भी हो सकते हैं।
संवेदनात्मक पक्षाघात : इसमें रोगी की संवेदन शक्ति, जानने-पहचानने, काम करने की, शक्ति जाती रहती है। स्पर्श का ज्ञान नहीं रहता। अंग अपने आप हिलता रहता है।
प्रतिरोधक पक्षाघात : इसमें रोगी अंगों को हिला डुला नहीं सकता, रोगी कुछ उठा नहीं सकता, चल फिर नहीं सकता।
● सारे शरीर में कमजोरी, भारीपन, मांस पेशियों की शिथिलता, सुन्नपन। भिन्न-भिन्न अंगों में समन्वय नहीं रहता, सारे अंग ढीले पड़ जाते हैं। – (जेल्सीमियम 30, दिन में 3 बार)
● पैरों में स्पर्श का अनुभव नहीं होता। पिन चुभने पर भी दर्द नहीं होता। टांगे इतनी भारी हो जाती है कि उन्हें घसीट कर चलना पड़ता है। बैठे-बैठे टांगे भारी महसूस होती है। मेरुदंड के क्षय के कारण टांगों का पक्षाघात – (एल्युमिना 30, दिन में 3 बार)
● जरा सा भी स्पर्श सहन नहीं होता। अंगों में डंक लगने और फाड़ने जैसी वेदनाएं। सुन्नपन, कुछ एक मांसपेशियों के पक्षाघात में उपयोगी, जैसे कलाई का झूल पड़ना(wrist drop), पैर का झूल पड़ना(foot drop) आदि। अत्याधिक कब्ज – (प्लम्बम मेट 30, दिन में 3 बार)
● किसी भी प्रकार के पक्षाघात में उपयोगी। ज्यादातर दाईं तरफ का पक्षाघात। ठंडी हवा लगने से टाइफाइड या डिप्थीरिया के कारण पक्षाघात – (कॉस्टिकम 200, 2-3 खुराक हफ्ते में एक बार)
● पक्षाघात जो क्रमशः नीचे से ऊपर के अंगों की तरफ जाता है। आंख बंद करते ही रोगी को पसीना आने लगता है। सिर को इधर या उधर करने में चक्कर आता है – (कोनियम 30, हर 2 घंटे बाद)
● चोट लगने से पक्षाघात। काफी रोगी इस दवा से लाभ पाते हैं – (आर्निका 1M, 2-3 खुराक)
● अगर रह्युमेटिज्म(rheumatism) के कारण टांगों में पक्षाघात हो। बहुत बेचैनी हो वह रोगी हरकत करते रहना पसंद करें – (रस टॉक्स 30, दिन में 3 बार)
● टांगों में बेहद अकड़ाहट। बैठते हुए रोगी टांग न फैला सके। पिंडलियां अत्यधिक तनी हुई। रोगी सामने झुक कर बैठता है। कठिनाई से ही तन कर सीधा हो सकता है – (लैथाइरस 6 या 30, दिन में 3 बार)
● आधे चेहरे का पक्षाघात। रोगी बोल नहीं पाता। रोगी को अपने चेहरे पर मकड़ी का जाला सा चिपका अनुभव होता है – (ग्रेफाइटिस 30, दिन में 3 बार)
तिल्ली (प्लीहा) के विकार – Diseases of the Spleen
तिल्ली (प्लीहा) के विकार – Diseases of the Spleen
पेट में बाईं ओर (नाभी के थोड़ा ऊपर की ओर) तिल्ली होती है। बहुत दिन तक बुखार आने से यह बढ़ जाती है और सख्त भी हो जाती है।
● तिल्ली के रोगों की मुख्य दवा – (सिएनोथस Q दिन में 3 बार)
● मलेरिया बुखार के बाद तिल्ली के रोग – (नैट्रम म्यूर 6x या 30, दिन में 3 बार)
● जब बेचैनी हो व अधिक प्यास लगे – (आर्सेनिक एल्ब 30, दिन में 3 बार)
● मलेरिया ज्वर में क्विनिन का अधिक सेवन होने के बाद प्लीहा का बढ़ जाना – (आर्स आयोड 30 या 200, दिन में 2 बार)
● रक्तहीनता, अधिक कमजोरी, यकृत तथा प्लीहा दोनों ही बढ़े हुए हों – (फेरम आर्स 30 या 200, दिन में 3 बार)
● प्लीहा खूब बढ़ी हुई। ज्वर में रोगी को हमेशा ठण्ड लगे, शीत से रोगी मानो जम सा जाता है – (एरेनिया 30 या 200, दिन में 3 बार)
● प्लीहा पर इस औषधि की मुख्य क्रिया है – (एंडरसोनिया Q या 6, दिन में 3 बार)
● ज्वर के साथ प्लीहा का बढ़ना, इतना दर्द कि हाथ भी नहीं लगाया जाता। प्लीहा खूब बड़ी व कड़ी रहती है उस पर हाथ लगाने से उसकी तह कटी-कटी सी मालूम देती है – (यूकेलिप्टस 30 या 200, दिन में 3 बार)
चोट – Injury
चोट – Injury
लड़ाई झगड़ा हो जानें से, गिर जाने से या फिसल जाने से आघात या चोट लगती रहती है l ये चोटें भिन्न प्रकार की होती हैं l उनका इलाज भी उनके अनुरूप ही होता है l
● सिर में चोट लगने पर – (आर्निका 200, 3 खुराक फिर बाद में नैट्रम सल्फ़ 200 की कुछ खुराक)
● अचानक चोट लगना, लड़ाई – झगड़ा, मारपीट के बाद – (आर्निका 200 या 1M की 3 खुराक, आर्निका Q चोट वाले जगह पर लगायें)
● चोट के कारण जख्म; यदि जख्म बड़ा हो तो डॉक्टर से टांके लगवाएं – (फैरम फ़ॉस 1X या 3X का पाऊडर जख्म पर छिड़क कर कैलेंडुला Q से पट्टी करें)
● खून (चोट आदि के कारण) बहना रोकने के लिए- बर्फ या ठंडे पानी की पट्टी बांधनी चाहिये – (कैलेंडुला Q ठंडे पानी में मिलाकर पट्टी करें)
● तेज चाकू, छुरी आदि से कटने के कारण खून बहना रोकने के लिए – (स्टेफिसेगिरिया Q की पट्टी करें व 30, खाएं)
● नसों की चोट व सुई, पिन व कील आदि चुभने से जब खून कम निकले मगर दर्द ज्यादा हो – (हाइपैरिकम Q की पट्टी करें व 200 पोटेन्सी दिन में 3 बार खायें)
● हड्डी टूटने पर x-ray करा कर प्लास्टर अवश्य करायें व साथ में खाएं – (सिम्फाइटम 3X या 6, दिन में 3 बार, साथ में कल्केरिया फ़ॉस 6X दिन में 3 बार)
● जब चोट या भय के कारण रोगी बेहोश हो जाये एवं शरीर ठंडा हो जाये – (कैम्फर Q, 5-5 बूंद 10 मिनट पर)
● मोच आना – (आर्निका 200 की 2-3 खुराक, बाद में रूटा 30, दिन में 3 बार)
आग से जलना – Burns
आग से जलना – Burns
कपड़ों में आग लग जाने पर कभी भागना नहीं चाहिए; बल्कि फ़ौरन लेट जाना चाहिये और दरी, कम्बल, चादर या कुछ मोटा कपड़ा जो भी मिले उससे फ़ौरन ढक देना चाहिये l चुने के पानी में नारियल का तेल मिलाकर जले हुए स्थान पर लगाना चाहिये l कुछ सुविधा होने पर कैंथेरिस Q और पानी एक और दस के अनुपात में मिला कर लगाना चाहिये l ज्यादा जल जाने पर प्राथमिक उपचार करने के बाद मरीज को फौरन अस्पताल ले जाना चाहिये l
● मुख्य दवा; जब बेहद जलन हो – (कैंथेरिस 6 या 30 हर 2 घन्टे पर)
● जब ज्यादा जलने के कारण जख्म हो जाये – (कैलेंडुला Q, पानी में मिला कर साफ़ करें)
● जब ज्यादा जलने के कारण भय, बेचैनी व घबराहट आदि हो – (एकोनाइट 30, दिन में 4 बार)
● यदि तेज प्यास, कमजोरी व मृत्यु भय हो – (आर्सेनिक एल्ब 30, दिन में 3 बार)
● यदि जख्मों में मवाद पड़ने लगे व बेहद दर्द हो – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 3 बार)
● यदि जख्म सड़ने लगे – (साइलिशिया 30, दिन में 3 बार)
● गर्म पानी या तेल से जलने पर जब तक छाले न बनें हों – (अर्टिका युरेन्स Q, और पानी 1:10 के अनुपात में मिला कर लगायें)
● जलने के बाद जब बार – बार जख्म हो – (कौस्टिकम 30, दिन में 3 बार)
बेहोशी – Unconsciousness
बेहोशी – Unconsciousness
कभी – कभी अचानक घबराहट, भय, कमजोरी या किसी सदमे से व्यक्ति बेहोश हो जाता है l रोगी के आसपास से भीड़ हटा दें, खुली हवा लगने दें, कपड़े ढीले कर दें, मुंह पर ठंडे पानी के छीटें दें l अगर किसी रोग की वजह से बेहोशी हुई है तो उस रोग की चिकित्सा करनी चाहिये l कैम्फर Q सुंघाने से फायदा होता है l
● जब बेहोशी गुस्से के बाद या मानसिक कष्ट के कारण हो – (कैमोमिला 200, 3 खुराक)
● जब मानसिक दुःख, प्यार में धोखा या बुरी खबर के कारण रोग हो – (इग्नेशिया 200 या 1M की 3 खुराक)
● जब अचानक भय के कारण रोग हो – (एकोनाइट 30, 2-3 खुराक)
● अधिक खून बह जाने, उल्टी, या दस्त हो जाने के कारण – (चाइना 30, दिन में 3-4 बार)
● पुरानी दुर्घटना आदि की याद आने से या डर जाने के कारण बेहोशी – (ओपियम 200 या 1M, 3 खुराक)
● लगातार जागने के कारण – (नक्स वोमिका 30 या 200, 3-4 खुराक)
● तेज दर्द या अचानक कोई ख़ुशी होने के कारण – (कॉफिया 30 या 200, 2-3 खुराक)
● ठण्ड या बर्फ गिरने के कारण – (कैम्फर Q की कुछ बूंदें पानी में मिला कर)
यात्रा के दौरान उल्टी – Travel Sickness
यात्रा के दौरान उल्टी – Travel Sickness
कई व्यक्तियों को रेल, नाव, जहाज, आदि में यात्रा करने पर जी मिचलाने लगता है l पहाड़ों की यात्रा में, बस या रेल से यात्रा करने पर जी मिचलाना व उल्टी हो जाती है l सबको यह कष्ट नहीं होता है परन्तु कुछ लोगों को यह कष्ट होता है l यात्रा के दौरान नींबू चुसना या इलायची मुंह में रखना लाभदायक है l
● कार, बस या जहाज में यात्रा करने से उल्टी – (कोकुलस इन्डिका 30, हर 1 घन्टे बाद)
● सिगरेट का धुआं बुरा लगे, चक्कर आये व जी मिचलाए – (स्टेफिसेगिरिया 30, हर आधे घंटे बाद)
● आँख बंद करने, पानी पीने, व पानी की ओर देखने से उल्टी – (थेरिडियोन 30, 3-4 खुराक)
● खट्टी उल्टी; कम सोने के कारण कष्ट बढ़े – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
लू लगना – Sun Stroke
लू लगना – Sun Stroke
गर्मी के मौसम में तेज धूप व गर्म हवा लगने (लू) के कारण सिरदर्द व घबराहट हो जाती है l रोगी को तेज बुखार हो जाता है l ऐसे में रोगी के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी करें और प्याज का रस निकाल कर दें l
● मुख्य दवा – (ग्लोनाइन 6 या 30, हर आधे घंटे पर)
● माथा तेज गर्म, आंखे लाल व तेज बुखार – (बेलाडोना 6 या 30, हर आधे घंटे पर)
● बुखार तेज, चुपचाप पड़े रहने की इच्छा, प्यास न लगे – (जल्सेमियम 6 या 30, हर आधे घंटे पर)
● दिन में 11-12 बजे रोग(सिरदर्द, बुखार) ज्यादा रहे – (नैट्रम म्यूर 6 या 30, हर आधे घंटे पर)
● लू लगने के कारण तेज बुखार, छाती व माथे में रक्त संचय l रोगी ठंडा होने लगे – (विरेट्रम विर 3X या 6, हर 15 मिनट पर)
गर्मियों में कच्चे आम का पन्ना व प्याज खाना लाभदायक है l सिर व शरीर को धूप में ढंक कर रखें l खालीपेट कभी बाहर न निकलें l
मादक द्रव्यों और खराब भोजन के दुष्परिणाम
मादक द्रव्यों और खराब भोजन के दुष्परिणाम – Bad effects of food and drinks, etc
ज्यादा शराब पीने, अफीम, चरस आदि लेने वाले व्यक्तियों में कई बार भिन्न भिन्न प्रकार के विकार उत्पन्न हो जाते हैं।
● शराब ज्यादा पीने के कारण बेहोशी – (ओपियम 30, हर 15-20 मिनट पर)
● जब कोई बच्चा गलती से शराब पी ले। मिर्च मसाले ज्यादा खाने के दुष्परिणाम – (नक्स वोमिका 30, हर आधे घंटे बाद)
● जब शराब पीने के कारण चेहरा लाल व तमतमाया हुआ हो – (बेलाडोना 30, 2-3 खुराक दें)
● कॉफी ज्यादा पीने के कारण अनिद्रा; सिर दर्द, कब्ज आदि – (नक्स वोमिका 30, 3-4 खुराक दें)
● धूम्रपान व आयरन (टॉनिक आदि) के दुष्परिणाम – (पल्साटिला 30, दिन में 3 बार)
● खट्टी चीज या खट्टे फल खाने के बाद रोग बढ़े – (लैकेसिस 30, दिन में 3 बार)
● अफीम के दुष्परिणाम के लिए – (प्लम्बम मेट 200, रात में सोते समय दें)
● मरकरी या मरकरी युक्त दवाओं के दुष्परिणाम – (हिपर सल्फ 6 या 30, दिन में 3 बार)
● बासी या सड़ा भोजन करने के बाद रोग – (आर्सेनिक एल्ब 30, हर 2 घंटे बाद)
दांत निकलते समय कष्ट – Teething Troubles
दांत निकलते समय कष्ट – Teething Troubles
● दांत निकलते समय बच्चा दर्द सहन न कर सके, चिल्लाये; सिर्फ गोद में उठाने से शांत हो – (कैमोमिला 30, दिन में 3 बार)
● दांत निकलने के दिनों में बच्चे का शरीर ऐंठना – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● मोटे, थुलथुले बच्चों में दस्त हो, हड्डियां कमजोर हो, सिर पर पसीना आये – (कल्केरिया कार्ब 200, 2-3 खुराक)
● बच्चा दिन में खुश रहे मगर रात में परेशान करे -(लाइकोपोडियम 30, दिन में 3 बार)
● दांत निकलते समय लकवा हो जाये – (काली फ़ॉस 6X, दिन में 4 बार)
● दांत निकलते समय पतले दस्त, जो मात्रा में बहुत अधिक हो, बच्चा मसूड़ों को दबाता रहे – (पोडोफाइलम 30, दिन में 3 बार)
● दांत देर से निकले, खासकर जब परिवार टी. बी. के रोग का इतिहास हो – (ट्यूबरकुलाइनम 200, 15 दिन में 1 बार)
● मन्द बुद्धि के बच्चों के लिए – (बैराइटा कार्ब 30, दिन में 3 बार)
बिस्तर में पेशाब करना – Bed Wetting
बिस्तर में पेशाब करना – Bed Wetting
● मुख्य दवा, खासकर नम्र स्वभाव के बच्चों के लिए – (पल्साटिला 30)
● पहली नींद के दौरान – (कास्टिकम 30 या 200)
● अगर कास्टिकम काम न करे – (जल्सेमियम 30)
● जब चुपचाप बैठे बैठे या पहली नींद के बाद बिस्तर में पेशाब हो – (रस टाक्स 30 या 200)
● जब पेशाब परिमाण में बहुत ज्यादा हो – (प्लांटेगो 30)
● बच्चे को रात में जगाना मुश्किल हो – (क्रियोजोट 30)
● जब बच्चा पेशाब सिर्फ आदत की वजह से करे; और कोई लक्षण न हो – (एक्विजिटम 6 या 30)
● पेट में कीड़े की वजह से बिस्तर में पेशाब करना – (साइलिशिया 30 और सिना )
● जब पेशाब बिस्तर पर लेटते हीं या कुछ समय बाद हो – (सीपिया 30 या 200)
सुखा रोग व शक्ति की कमी – Rickets and Marasmus
सुखा रोग व शक्ति की कमी – Rickets and Marasmus
● जब टांगें पहले पतली पड़ जाये और शरीर का उपरी हिस्सा बाद में – (एब्रोटेनम 30, दिन में 3 बार)
● जब सूखे रोग के कारण बच्चा बूढ़ा जैसा दिखने लगे – (एम्बेरा ग्रिजिया 30, दिन में 3 बार)
● अच्छा खाते पीते हुए भी कमजोरी महसूस हो, शरीर का उपरी हिस्सा (गर्दन) पहले पतला पड़े व निचला हिस्सा बाद में – (नैट्रम म्यूर 6 या 30, दिन में 3 बार)
● जब कमजोरी महसूस न हो लेकिन पूरा शरीर सूखता चला जाए – (आयोडियम 30 या 200, दिन में 2 बार)
● शरीर के सब अंग सूखने लगे, पेट फूल जाए – (सल्फर और कल्केरिया कार्ब 30 या 200, दिन में 2 बार)
● जब सुखा रोग में पेट अन्दर की ओर धंस जाये – (कल्केरिया फ़ॉस 6 या 6X, दिन में 4 बार)
● बोतल से दूध पीने वाले बच्चों में सुखा रोग, पेट फूला हुआ – (नैट्रम फ़ॉस 6X या 30, दिन में 3 बार)
● असाध्य सुखा रोग में जब पेट फूला हो व नाभि के आसपास बहुत दर्द हो, कब्ज हो – (प्लंबम मेट 30 या 200, दिन में 2-3 खुराक)
● जब शारीरिक व मानसिक दोनों विकास नगण्य हो – (बैराइटा कार्ब – 200 या 1M)
● दुबले-पतले बच्चों में शक्ति की कमी, शरीर पर मांस न के बराबर, पेट कद्दू की तरह बड़ा, मांसपेशियां अपुष्ट, दूध न पचे – (साइलिशिया 30, दिन में 3 बार)
● माथा बड़ा और शरीर दुबला पतला , पोषण की कमी की वजह से दुबलापन और अस्थि विकार पेट अंदर धंसा हुआ, गर्दन बहुत पतली जो की सिर को न संभाल पाए, बालक मुर्ख सा दिखता हो – (कल्केरिया फ़ॉस 6 या 6X, दिन में 3 बार)
● सिर बड़ा, खूब भूख, खाता भी है और कमजोरी भी रहता हो, झुर्रियां पड़ जाती है, चमड़ी लटकने लगती है – (सल्फर 30, दिन में 2 बार)
बच्चों में हड्डियों का मुलायम होना – Rickets
बच्चों में हड्डियों का मुलायम होना – Rickets
बच्चों की हड्डियां कैल्शियम की कमी के कारण कड़ी न होकर मुलायम रह जाती है। जिसकी वजह से बच्चे के बड़े होने पर भी हड्डियां पतली रह जाती है और टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है। सिर की हड्डियां जुड़ती नहीं जिससे सिर बड़ा दिखता है। पेट बाहर को निकल आता है। हाथ-पैर दुबले पड़ जाते हैं। यह सब पोषण क्रिया की गड़बड़ी के कारण भोजन में से कैल्शियम के भाग को पूरी तरह से न ले सकने के कारण होता है।
● मोटे थुलथुले बच्चों में, रात में खूब पसीना आता है। पाखाने में खट्टी गंध। शरीर में जगह जगह फूली ग्रंथियां – (कैल्केरिया कार्ब 200, दिन में 2 बार)
● दूसरी मुख्य दवा। दुबले पतले बच्चों में, शरीर पर मांस न के बराबर, पेट कद्दू की तरह बड़ा। मांस पेशियां पुष्ट नहीं होती। दूध पचता नहीं – (साइलिशिया 30, दिन में 3 बार)
● माथा बड़ा और शरीर दुबला पतला। पोषण की कमी की वजह से दुबलापन और अस्थि विकार। पेट अंदर को धंसा हुआ। गर्दन बहुत पतली जो कि सिर को न संभाल पाए। बालक मूर्ख सा दिखता है – (कैल्केरिया फॉस 6x, दिन में 4 बार)
● सिर बड़ा, खूब भूख, खाता भी है और कमजोर भी होता जाता है। बुढा लगता है, झुर्रियां पड़ जाती है। चमड़ी लटकने लगती है – (सल्फर 30, दिन में दो बार)
पोलियो – Polio
पोलियो – Polio
यह रोग प्रायः बच्चों को होता है। एक प्रकार के संक्रामक रोग के विष से उत्पन्न होता है। इससे मेरुदंड तथा मस्तिष्क में सूजन आ जाती है। बुखार, खांसी, जुकाम, गला दुखना, कभी-कभी दस्त आना, ऐंठन होना आदि लक्षण होते हैं और फिर पक्षाघात हो जाता है। अगर रोक यही न रुके तो मृत्यु भी हो सकती है।
● पेट तथा आंतों में शक्तिहीनता के कारण बच्चा दूध पीते ही उसे ऐसे ही उलट देता है। हाथ पैरों में सुन्नपन। सिर को संभाले रहने कि व खड़े होने की शक्ति नहीं रहती। मुट्ठी भींच जाती है – (एथ्यूजा 30, दिन में 3 बार)
● जब पोलियो के साथ सख्त कब्ज भी हो – (प्लम्बम मेट 30, दिन में 3 बार)
● इन्फ्लूएंजा आदि बीमारियों के बाद जब अंगों में कमजोरी, टांगों में कड़ापन महसूस होता है। बहुत थकान, बच्चा सुस्त पड़ा रहता है। – (लैथाइरस 6, दिन में 3 बार)
● टांगे सुन्न व झनझनाहट, चीटियां सी चलती है, रोगी बदन पर कपड़ा नहीं ओढ़ना चाहता – (सिकेल कोर 30, दिन में 3 बार)
बच्चों में ऐंठन – Convulsions
बच्चों में ऐंठन – Convulsions
किसी-किसी बच्चे में ऐंठन पड़ते हैं जिनका कई बार कारण तक भी समझ नहीं आता। कई बार ऐंठन कमजोरी, बुखार, दांत निकलते समय, चोट या पेट में कीड़े आदि के कारण हो सकती है।
● जब ऐंठन का कारण समझ ना आए – (इग्नेशिया 30)
● अगर तेज बुखार के कारण बेहोशी सी के साथ ऐंठन हो – (बेलाडोना 30)
● अगर गुस्से के साथ शरीर में ऐंठन आए। एक गाल लाल व गर्म और दूसरा पीलापन लिए ठंडा – (कैमोमिला 30)
● रोग जब कीड़ों के कारण हो – (सिना 30 व साथ मे सप्ताह में सल्फर 200 की 1 खुराक दें)
● अगर मन में बैठे किसी डर के कारण रोग हो – (ओपियम 200)
● जब मितली व उल्टी हो, छाती पर बोझ सा लगे – (इपिकैक 30)
● जब उपरोक्त दवाओं से फायदा ना हो – (ट्यूरबरकुलाइनम 200)
मासिक धर्म में विलंब – Amenorrhoea
मासिक धर्म में विलंब – Amenorrhoea
यह दो तरह का होता है, (क) मासिक धर्म में प्राथमिक विलम्ब एवं (ख) मासिक धर्म में द्वितीयक विलम्ब l हमारे देश में बलिकायों को प्रायः 12-13 वर्ष की आयु तक मासिक धर्म शुरू हो जाता है, परन्तु कई बार युवावस्था आने पर भी मासिक (menses) नहीं होता, उसे मासिक धर्म में प्राथमिक विलम्ब कहा जाता है l कारण: वंशानुगत, पूर्ण रूप से शारीरिक विकास न होने या योनिच्छद झिल्ली में छिद्र न होने के कारण हो सकता है l जब मासिक एक बार शुरू होकर फिर रुक जाये तो उसे मासिक धर्म में द्वितीयक विलम्ब कहा जाता है l
● प्राथमिक विलम्ब में, कन्या संवेदनशील व बात बात पर रो देती हो, गर्मी सहन न होती हो – (पल्साटिला30 या 200, दिन में 2-3 बार)
● स्वभाव चिडचिडा, उदासी, एकान्त में रहने की इच्छा, मासिक बहुत ही कम या बिलकुल बंद हो जाए l सफ़ेद पानी, कब्ज, योनि में भारीपन – (सीपिया 30 या 200)
● मासिक न होने पर सिर दर्द , ठंड लगना व कब्ज – (नैट्रम म्यूर 30, दिन में 3 बार)
● खून की कमी की वजह से मासिक न हो – (फैरम मैट 30, दिन में 3 बार)
● डर या अचानक सर्दी लग जाने से मासिक न होना, बुखार, प्यास, व बेचैनी – (एकोनाइट 30, दिन में 3 बार)
● मासिक धर्म न होकर नाक या मुंह से खून निकलने लगे – (ब्रायोनिया 30, दिन में 3 बार)
● कमजोरी के कारण मासिक धर्म न होना – (चाइना 30, दिन में 3 बार)
● दिल घबराना , पेट दर्द , मसूड़ों व गालों में सूजन , सफेद पानी – (काली कार्ब 30, दिन में 3 बार)
● अगर सही लक्षण के अनुसार दवा देने से भी लाभ न हो तो उस दवा के साथ सल्फर 200 या 1M की एक खुराक दें l
अनियमित मासिक स्राव – Irregular Menstruation
अनियमित मासिक स्राव – Irregular Menstruation
मासिक स्राव नियत समय पर न हो, कभी समय से पहले तो कभी समय के बाद , बहुत कम मात्रा में या ज्यादा हो तो अनियमित मासिक स्राव कहलाता है l
● बहुत देर से और बहुत थोड़ी मात्रा में मासिक स्राव , संवेदनशील व गर्म प्रकृति की स्त्रियों में विशेष लाभदायक – (पल्साटिला 30 या 200)
● देर से और थोड़ी मात्रा में मासिक स्राव – (कोनियम 30 या 200)
● हर 15 दिन में मासिक स्राव – (इग्नेशिया 30 या 200, दिन में 2-3 बार)
● अनियमित मासिक की मुख्य दवा – (सैनेशियो Q, 10-15 बूंद दिन में 3 बार पानी के साथ)
● नियमित समय से पहले मासिक स्राव, स्राव होने के पहले तेज दर्द – (अमोनियम कार्ब 30, दिन में 3 बार)
● स्राव चमकीले लाल रंग का, मात्रा में अधिक व समय से पहले, बहुत कमजोरी हो – (इपिकैक 30, दिन में 3 बार)
ऋतू शूल – Dysmenorrhoea
ऋतू शूल – Dysmenorrhoea
मासिक धर्म के समय कमर या पेट के निचले हिस्से आदि में कभी कभी असहनीय दर्द होता है l हार्मोन असंतुलन या हार्मोन अस्थिरता ही इसका मुख्य कारण जाना जाता है l आमतौर पर दर्द गर्भाशय की दीवारों में ऐंठन आने से होता है l मासिक स्राव कम होता है और दर्द अधिक l
● मासिक धर्म के पहले कमर में तेज दर्द , ठण्ड लगना , जी मिचलाना – (कॉलोफ़ाइलम 30, दिन में 3 बार)
● चिडचिडी , क्रोधित व उत्तेजित स्वभाव की स्त्रियों में, मासिक के एक-दो दिन पहले से ही पेट में तेज दर्द, काले रंग के रक्त का मासिक स्राव – (ऐब्रोमा अगस्टा Q)
● बहुत तेज दर्द के साथ अधिक मात्रा में मासिक स्राव, प्रशव वेदना की तरह दर्द – (कैमोमिला 30 या 200)
● नियमित समय से बहुत पहले मासिक स्राव, बहुत कम मात्रा में, कमर दर्द जैसे की कमर टूट गयी हो , पेट दर्द – ( कॉकुलस इंडिका 30)
● मासिक स्राव बहुत मात्रा में हर दसवें या पंद्रहवे दिन हो; काला, थक्केदार, दुर्गन्धयुक्त स्राव – (इग्नेशिया 30 या 200)
● स्राव कम होने पर दर्द बढ़ जाता है; और स्राव ज्यादा होने पर दर्द कम हो जाता है, स्राव बहुत देर से व कम मात्रा में होता है – (लैकेसिस 30)
मासिक रुक जाना – Amenorrhoea
मासिक रुक जाना – Amenorrhoea
युवावस्था में ऋतू न होने या एक बार होकर दोबारा न हो उसे मासिक रुक जाना कहते हैं l
● डर या अचानक सर्दी लग जाने से मासिक न होना , बुखार प्यास व बेचैनी – (एकोनाइट 30, दिन में 3 बार)
● पैर में सर्दी लग कर या ज्यादा ठंडी हवा लग जाने से मासिक बंद हो जाना , मासिक के बदले सफ़ेद पानी आना – (पल्साटिला30 या 200)
● मासिक बहुत थोडा हो या बंद हो जाये, सफ़ेद पानी, कब्ज, व योनि में भारीपन महसूस होना – (सीपिया 30 या 200)
● मासिक न होने पर सिरदर्द, ठण्ड लगना व कब्ज – (नैट्रम म्यूर – 200 या 1M)
● खून की कमी से मासिक न होता हो – (फैरम मैट 3X या 30)
मासिक का ज्यादा होना – Menorrhagia
मासिक का ज्यादा होना – Menorrhagia
मासिक के समय कभी-कभी बहुत अधिक मात्रा में रक्त स्राव। अधिक खून निकल जाने से रोगी बहुत दुर्बलता महसूस करती है व उसका चेहरा पीला पड़ जाता है।
● हर प्रकार के अति रज: में लाभकारी है। कभी-कभी गर्भाशय में ट्यूमर होने की वजह से भी ज्यादा रक्त स्राव होता है। – (हाइड्रेस्टिस Q, 15-20 बूंद आधे कप पानी के साथ दिन में 3 बार)
● मासिक स्राव समय से पहले व बहुत मात्रा में हो, खासकर मोटी थुलथुली स्त्रियों में – (कैल्केरिया कार्ब 30 या 200, दिन में 3 बार)
● ज्यादा मात्रा में काले रंग का स्राव व बेहद कमजोरी – (चाइना 30, दिन में 3 बार)
● दर्द के साथ बहुत अधिक मात्रा में बहुत दिन तक रहने वाला स्राव – (थलैस्पी बर्सा पी Q,15-20 बूंद आधे कप पानी के साथ दिन में 3 बार)
● पेट के निचले हिस्से में बहुत भारीपन के साथ अधिक मात्रा में काले रंग का रक्त स्राव। प्रसव वेदना की तरह दर्द – (एलेटेरिस फैरीनोसा Q,15-20 बूंद आधे कप पानी के साथ दिन में 3 बार)
● बहुत अधिक मात्रा में व बहुत दिनों तक रहने वाला रक्तस्राव – (अशोका Q,15-20 बूंद आधे कप पानी के साथ दिन में 3 बार)
● चोट लगने के कारण चमकीले लाल रंग का रक्त स्राव – (आर्निका 30 या 200, दिन में 3 बार)
● मासिक धर्म समय से बहुत पहले व बहुत अधिक हो, जी मिचलाना और पेट में बेहद दर्द – (बोरेक्स 30, दिन में 3 बार)
● चमकीले लाल रंग का गर्म रक्त स्राव। सिर में दर्द, चक्कर, आंखें लाल। गर्भाशय में दबाव – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● गर्भाशय से बहुत अधिक रक्तस्राव हो – (ट्रिलियम Q, 15-20 बूंद आधे कप पानी के साथ दिन में 3 बार)
● मानसिक शोक व दु:ख के कारण ज्यादा रक्त स्राव होने पर – (इग्नेशिया 30, दिन में 3 बार)
● बहुत चमकीले लाल रंग का पतला रक्त स्राव। जरा से झटके से बहुत मात्रा में खून निकलना। जी मिचलाना व पेट दर्द – (इपिकैक 30, दिन में 3 बार)
● बिना दर्द के बहुत ज्यादा मात्रा में रक्त स्राव – (मिलीफोलियम Q, 15-20 बूंद आधे कप पानी के साथ दिन में 3 बार)
● प्रौढ़ उम्र की स्त्रियों में मासिक धर्म बंद होने के पहले बहुत मात्रा में रक्त स्राव – (लैकेसिस 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
दो मासिक धर्म के बीच रक्त स्राव – Metrorrhagia
दो मासिक धर्म के बीच रक्त स्राव – Metrorrhagia
● ज्यादा रक्त स्राव से बहुत कमजोरी, रक्त स्राव बहुत समय तक लगातार होता रहे – (चाइना 30, दिन में 3 बार)
● बहुत अधिक काला व थक्केदार स्राव। हर दसवें या पंद्रहवे दिन रज:स्राव – (इग्नेशिया 200, दिन में 2 बार)
● गर्भाशय की कमजोरी के कारण बहुत अधिक मात्रा में रक्त स्राव – (अशोका Q, 15-20 बूंद आधे कप पानी के साथ दिन में 3 बार)
● गर्भाशय से चमकीले लाल रंग का काफी रक्तस्राव। जी मिचलाना एवं प्रसव वेदना की तरह दर्द – (फाइकस रैलीजियोसा Q,15-20 बूंद आधे कप पानी के साथ दिन में 3 बार)
● रोगी स्वस्थ भी नहीं हो पाता कि अगले महीने का रक्तस्राव शुरू हो जाता है – (थलैस्पी बर्सा पी Q, 15-20 बूंद आधे कप पानी के साथ दिन में 3 बार)
● चिड़चिड़ी व उग्र स्वभाव की स्त्रियों में असहनीय दर्द के साथ काला थक्केदार रक्त स्राव – (कैमोमिला 30 या 200, दिन में 3 बार)
● प्रसव के बाद बहुत रक्तस्राव। गर्भाशय में ऐंठन की तरह दर्द – (कॉलोफाइलम 30, दिन में 3 बार)
● दुर्गंधयुक्त काला थक्केदार स्राव। सोने या लेटने पर स्राव बढ़े, उठकर बैठने पर स्राव बंद हो – (क्रियोजोट 30, दिन में 3 बार)
● अविवाहिता स्त्रियों में गर्भाशय से बहुत मात्रा में रक्त स्राव। रात को सोने के बाद बढ़े – (मैग्नेशिया म्यूर 30, दिन में 3 बार)
● गर्भाशय से चमकीला लाल रंग का गर्म रक्तस्राव, गर्भाशय में बहुत दर्द हो – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● बहुत अधिक कामेच्छा। पहले मासिक का स्राव खत्म होने से पहले ही दूसरे मासिक का स्राव शुरू हो जाए – (सैबाइना 30, दिन में 3 बार)
● गर्भाशय में प्रसव वेदना जैसा दर्द व दुर्गंधयुक्त काला रक्त स्राव। शरीर ठंडा हो मगर फिर भी शरीर पर कपड़ा पसंद ना हो – (सिकेल कोर 30, दिन में 3 बार)
रजोनिवृत्ति – Menopause
रजोनिवृत्ति – Menopause
स्त्रियों में 40 से 50 वर्ष की उम्र में मासिक धर्म होना हमेशा के लिए बंद हो जाता है इसे रजोनिवृत्ति कहते हैं। उस समय कई तकलीफ हो सकती है जैसे- बहुत ज्यादा रक्त स्राव होना, चिड़चिड़ापन व शरीर में गर्मी की लपेटे सी महसूस होना।
● मुख्य औषधि। गर्मी की लपटें महसूस होना, चिड़चिड़ापन, पसीना आना, नींद से उठने के बाद तकलीफ बढ़ना – (लैकेसिस 200, दिन में दो बार)
● चेहरा एकदम गर्म हो जाना व हल्का पसीना आना। सिर में गर्मी, पैर ठंडे व पेट में कमजोरी – (सल्फर 30 या 200, दिन में दो-तीन बार)
● लंबी, पतली, उदासीन औरतों के लिए जब अचानक गर्मी की लपटें महसूस हो। सफेद पानी व कमर के निचले हिस्से में दर्द हो, ठंड लगे – (सीपिया 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
● जब रोग-लक्षण बदलते रहे। लक्षण बताते समय रोगिनी रो पड़े – (पल्साटिला 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
● चिड़चिड़े व झगड़ालू स्वभाव की स्त्रियों में काफी मात्रा में रज:स्राव। कब्ज भी हो – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
श्वेत प्रदर – Leucorrhoea
श्वेत प्रदर – Leucorrhoea
अस्वस्थ रोगिणी की योनि से स्राव निकलता है जिसे श्वेत प्रदर या सफ़ेद पानी जाना कहते हैं , लेकिन यह किसी और रंग का भी हो सकता है l
● गर्भाशय संबंधी रोगों की मुख्य दवा, पेट के निचले हिस्से में लगातार बोझ बाने रहना जैसे की भीतर के सभी अंग बाहर निकल पड़ेगें, पतला दुधिया त त्वचा को छीलने वाला कम मात्रा में स्राव , सख्त कब्ज – (सीपिया 30 या 200)
● त्वचा छीलने वाला ज्यादा देर तक रहने वाला स्राव, जलन पैदा करने वाला, बहुत कमजोरी और कमर दर्द के साथ – (क्रियोजोट 30)
● साधारण प्रदर में जब श्लेष्मा का रूप मलाई जैसा होता है; रोगिणी बात बात पर रोती है – (पल्साटिला 30 या 200)
● जलन पैदा करने वाला स्राव , खुजली और छीलन के साथ, रात में बढ़ता है – (मर्क्युरियस 30)
● दही या अंडे की सफेदी जैसा स्राव, गर्म पानी बहने जैसा अहसास – (बोरेक्स 30)
● पतला, दुधिया स्राव, बच्चियों में श्वेत प्रदर – (कल्केरिया कार्ब 30)
● स्राव इतना अधिक की टांगों तक बह जाता हो , पतला पानी जैसा स्राव, कब्ज रहता हो – (एल्युमिना 30 या 200)
● मासिक धर्म की जगह श्वेत प्रदर होना, गुप्तांगों में खुजली व दानें , कब्ज – (ग्रेफाइटिस 30)
● जब उपरोक्त दवायों से फायदा न हो – (मैडोराइनम 200 की एक खुराक 4-5 दिन के अंतर से)
बांझपन – Sterility
बांझपन – Sterility
जब स्त्री संतान उत्पन्न करने में असमर्थ हो l यह गर्भाशय के विकार या डिम्ब ग्रंथियों के विकार के कारण हो सकता है l
● बांझपन की मुख्य दवा l मासिक धर्म की अनियमितता, श्वेत प्रदर, व कब्ज – (सीपिया 30)
● यदि डिम्ब ग्रंथियां व स्तन ग्रंथियां सिकुड़ व सुख गई हो – (बैराइटा कार्ब 30)
● गर्भाशय संबंधी विकारों के कारण बांझपन – (ऑरम म्यूर नैट्रोनेटम 3X)
● श्वेत प्रदर की अधिकता के कारण – (बोरेक्स 6 या 30)
● स्त्री में कामेच्छा बिलकुल खत्म हो गयी हो (महीने में एक बार CM पावर की खुराक दें – (ऑनोस्मोडियम 30 या CM)
● मानसिक उदासीनता के कारण – (ऑरम मैट 200 या 1M)
● श्वेत प्रदर के कारण बांझपन l जननांगों में बेहद बदबूदार पसीना, व टांगों और हाथों पर बाल – (थूजा 30 या 200)
स्तन में फोड़ा या सूजन – Abscess, Mastitis
स्तन में फोड़ा या सूजन – Abscess, Mastitis
● सूजन की प्रथम अवस्था में जब स्तन लाल व कड़े हों – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● मवाद हो जाने पर, जरा सा स्पर्श भी सहन न हो – (हिपर सल्फ 30, दिन मे 3 बार)
● बच्चे का सिर लगने, चोट लगने या दूध इकट्ठा हो जाने से स्तनों में सख्त गांठे हो जाने पर – (फाइटोलक्का 30, दिन मे 3 बार)
● दूध इकट्ठा हो जाने पर स्तन बहुत कड़ा हो जाए – (ब्रायोनिया 200)
● स्तन की रंगत फोड़े की वजह से नीली या जामुनी हो जाने पर – (लैकेसिस 30)
स्तनाग्रो की दुखन – sore nipples
स्तनाग्रो की दुखन – sore nipples
● निप्पल के सूजन व फटने पर – (सीपिया 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
● निप्पल पर जख्म हो जाएं व उनसे गोंद जैसा चिपचिपा स्राव निकलने पर – (ग्रेफाइटिस 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
स्तनों के जख्मों को कैलेंडुला लोशन (आधा प्याला पानी में एक चम्मच कैलेंडुला Q) से धोएं। बच्चे को दूध पिलाते समय स्तनों को साफ पानी से अवश्य धो लें।
स्तनाग्रो में दर्द – Painful Nipples
स्तनाग्रो में दर्द – Painful Nipples
● शिशु के स्तनपान करने के बाद निप्पल दर्द करने लगे – (फ़ैलेन्ड्रीयम 6, दिन में 3 बार)
● स्तनपान कराते समय दर्द स्तन से चलकर पीठ की तरफ जाने लगे – (क्रोटन टिग 6 या 30, दिन में 3 बार)
स्तन सुख जाना – Atrophy
स्तन सुख जाना – Atrophy
● स्तन को उनके प्राकृतिक रूप व आकार में लाने की मुख्य दवा – (ओनोस्मोडियम CM, महीने में एक बार)
● स्तन के सुख जाने या बहुत ज्यादा बढ़ जाने में उपयोगी – (चिमाफिला Q या 30)
● स्तन जो बहुत अच्छे गोलाई लिए हुए थे अचानक सुख जाने पर – (नक्स मॉस्काटा 3X या 30)
● स्तन सुख जाने व त्वचा लटक जाने पर – (कोनियम 200 या 30)
● स्तन सुख जाने एवं शरीर की अन्य ग्रंथियों के बढ़ जाने या सूज जाने पर – (आयोडियम 30)
● गर्भाशय के विकारों व मासिक बहुत देर से होने पर स्तनों का सुख जाना – (सैबाल सेरुलाटा Q)
स्तनों का बढ़ जाना – Hypertrophy
स्तनों का बढ़ जाना – Hypertrophy
● स्तन बहुत बढ़ जाए व भारी लगे – (फाइटोलक्का 200)
● स्तनों में बहुत ज्यादा दूध हो जाने पर दूध कम कर प्राकृतिक रूप में लाने के लिए – (फैगेरिया 30)
● स्तन बहुत बढ़ जाने पर अत्यंत उपयोगी – (कोनियम 200)
● स्तन के बढ़ जाने अथवा सुख जाने, दोनों में उपयोगी – (चिमाफिला Q या 30)
दूध – Milk
दूध – Milk
● स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए – (कल्केरिया कार्ब 30 या 200 या लैक्चुआ विरोसा Q)
● स्तनों में दूध कम करने के लिए – (लैक वैफ डेफ 6 या 30)
● स्तनों का दूध बिलकुल बंद करने के लिए – (चियोनैनथस Q)
● स्तनों में दूध बिलकुल न हो तो दूध बढ़ाने के लिए – ( सैबाल सेरुलता Q)
● शिशु को दूध पिलाने वाली माताओं में दूध बढ़ाने के लिए – (रिसिनस कौम 6 या 30)
● स्तनों से जब दूध के साथ रक्त भी आये – (ब्यूफो 30)
● प्रसव के बाद स्तनों में दूध न आने पर – (सिकेल कोर 30 या 200)
● इस दवा को देने से दूध की मात्रा भी बढ़ती है और दूध सुपाच्य हो जाता है – (अल्फाल्फा Q)
खांसी – Cough
खांसी – Cough
● लगातार खांसी हो जिससे गर्भपात होने की आशंका हो – (काली बाईक्रोम 30, दिन में 3 बार)
● खुश्क थका देने वाली खांसी जो रात में ज्यादा हो – (काली ब्रोम 30, दिन में 3 बार)
● खुश्क खांसी, खांसते समय पेशाब तक निकल आए – (कॉस्टिकम 30, दिन में 3 बार)
● खासते खासते मुंह लाल हो जाए – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
इच्छाएं – Desires
● ठंडी, नमकीन व तीखी चीजों की इच्छा – (विरेट्रम एल्ब 30, दिन में 3 बार)
● मीठा व अचार खाने की इच्छा – (सल्फर 30, दिन में 3 बार)
● नमक व नमकीन चीजें खाने की इच्छा – (नैट्रम म्यूर 30 एवं नाइट्रिक एसिड 30, दिन में 3 बार)
● चूना, मिट्टी, चौक आदि खाने की इच्छा – (कैलकेरिया कार्ब 30, दिन में 3 बार)
● कोयला, चौक, चुना आदि खाने की इच्छा – (एल्युमिना 30, दिन में 3 बार)
सूजन – dropsy
● जब पैरों व मुंह पर सूजन हो; प्यास न हो – (एपिस मेल 30)
● जब सूजन जिगर की वजह से हो – (एपोसाइनम Q)
● जब सूजन के साथ धड़कन ज्यादा हो – (डिजेटेलिस 30)
● जब प्यास थोड़ा-थोड़ा पानी पीने के लिए जल्दी-जल्दी लगे, बेचैनी हो – (आर्सेनिक एल्ब 30)
गर्भावस्था के रोगों के इलाज के लिए अन्य अध्याय भी देखें।
उल्टियां – Morning sickness
● जब उल्टियां शुरू हो। पेट मे वायु हो, कब्ज हो, मुंह से खट्टा या कड़वा पानी आए। जीभ पर सफेद लेप हो – (नक्स वोमिका Q व एंटीम क्रूड 6, अदल बदल कर दें)
● जब उल्टियां रुकने का नाम न लें – (सिम्फोरिकार्पस रेसि 200)
● पेट मे वायु हो, ज़बान साफ हो – (इपिकाक 30)
● यात्रा के दौरान उल्टियां ज्यादा हो। खाने की गंध से मिचली बढ़े – (कॉलचिकम 30)
● खाते समय नींद आए। चलते समय मिचली हो – (काली कार्ब 30)
● पानी को देखने से उल्टियां बढ़े, नहाते समय रोगिणी आंखें बंद करके नहाए – (फॉस्फोरस 30)
प्रसव वेदना – Labour pains
प्रसव वेदना – Labour pains
● प्रसव का दर्द तेज व नियमित करने के लिए – (पल्साटिला 1M)
● जब पल्साटिला से फायदा न हो – (गौसिपियम Q)
● जब दर्द काफी समय तक रहने के बाद कम हो जाए – (कॉलोफाइलम 30 या 200)
● दुर्बल या रक्तहीन औरतों में जब प्रसव पीड़ा बंद हो जाए या कम हो जाए – (सीकेल कोर 200)
● जब चिड़चिड़ी औरत प्रसव वेदना सहन न कर चिल्लाए – (कैमोमिला 200 या 1M)
● जब दर्द के साथ पेशाब और पाखाने की हाज़त हो – (नक्स वोमिका 200)
● जब तेज प्रसव दर्द अचानक आए, जाए, चेहरा व आंखे लाल, जरा सा झटका लगते ही तकलीफ बढ़े – (बेलाडोना 200)
● जब दर्द के साथ तेज मितली रहे – (इपिकैक 30 या 200)
● जब दर्द बंद होकर रोगिणी पसीने से तर होकर बर्फ की तरह ठंडी हो जाए मगर फिर भी कपड़ा ओढ़ना पसंद न करे – (कैम्फर 30 या 200)
● बायोकैमिक औषधि – (काली फॉस 6X)
प्रसव सरल करने के लिए गर्भ के अंतिम माह में 15 दिन तक कॉलोफाइलम 30, रोज एक खुराक दें।
गर्भाशय का अपनी जगह से हटना – Prolapse of uterus
गर्भाशय का अपनी जगह से हटना – Prolapse of uterus
जब गर्भाशय अपनी जगह से हट कर आगे-पीछे या नीचे को टेढ़ा हो जाता है। यह गर्भाशय को सही स्थान में रखने वाली मांसपेशियों के ढीला होने की वजह से होता है। बहुत अधिक सहवास, भारी चीजें उठाना, चोट लगना, गिरना या बहुत ज्यादा प्रसव होने के बाद ऐसा होता है।
● मुख्य औषधि। रोगिणी योनिद्वार को हाथ से दबाकर रखना चाहती है। उसे लगता है कि अगर ऐसा नहीं करेगी तो गर्भाशय योनिद्वार से बाहर निकल पड़ेगा – (सीपिया 1M या 10M, 15 दिन में एक खुराक)
● श्वेत प्रदर बहुत मात्रा में हो व गर्भाशय अपने स्थान से हट जाए, लेटने पर रोग बढ़ना – (पल्साटिला 30 या 200, दिन दो या तीन बार)
● यदि चोट लगने या गिरने की वजह से गर्भाशय अपने स्थान से हट जाए – (आर्निका 1M, सप्ताह में एक बार)
● ऐसा लगे कि योनीपथ से पेट की सभी नस नाड़ियां बाहर निकल पड़ेगी। सिर में रक्त का बहुत दबाव व टपकन की तरह दर्द होना – (बेलाडोना 30, दिन में तीन बार)
● ऐसा अनुभव हो कि गर्भाशय योनि से बाहर निकल पड़ेगा। बार-बार पेशाब जाने की इच्छा। सीपिया से आराम ना आने पर दें – (लिलियम टिग 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
● जब पुरानी सूजन के कारण गर्भाशय बाहर निकलने लगे – (औरम म्यूर नेट्रोनेटम 3X, दिन में 3 बार)
तंतु ट्यूमर तथा कैंसर आदि – fibroid and cancer
तंतु ट्यूमर तथा कैंसर आदि – fibroid and cancer
अक्सर प्रौढ़ावस्था में स्त्रियों को यह रोग हो सकते हैं। अगर शुरू में ही उपयुक्त होम्योपैथिक इलाज कराएं तो बहुत लाभ होता है।
● गर्भाशय की दीवार में फाइब्रॉएड होने पर – (पल्साटिला 1M, सप्ताह में एक बार)
● पल्साटिला से आराम ना होने पर दें। सारा गर्भाशय फाइब्रॉएड से भरा रहता है तो – (काली आयोडाइड 3X या 30, दिन में 3 बार)
● डिंबकोष व गर्भाशय में ट्यूमर अथवा कैंसर में लाभदायक। स्तन में ट्यूमर होने पर। ट्यूमर जो बहुत कड़े हों वह उनमें दर्द हो – (हाइड्रेस्टिस Q, 15-20 बूंद आधा कप पानी के साथ, दिन में दो या तीन बार)
● कैंसर में दूसरी उपयोगी दवा – (आर्सेनिक आयोडाइड 3X या 6, दिन में 3 बार)
● हर प्रकार के ट्यूमर में उपयोगी – (कैलकेरिया आयोडाइड 3X या 30, दिन में 3 बार)
● बहुत सख्त ट्यूमर और कैंसर में उपयोगी – (कोनियम 30, दिन में 3 बार)
● हफ्ते में एक बार देने पर ट्यूमर और कैंसर में लाभ होता है – (कार्सिनोसिन 1M)
● गर्भाशय के किसी भी प्रकार के विकार, ट्यूमर व कैंसर के लिए – (थूजा 200 या 1M, सप्ताह में एक बार)
गर्भावस्था के दौरान तकलीफें – Ailments during pregnancy
गर्भावस्था के दौरान तकलीफें – Ailments during pregnancy
● मुख्य औषधि। सारे शरीर में सूजन। प्यास बिल्कुल नहीं लगती – (एपिस मेल 6 या 30, दिन में 3 बार)
● पेशाब बूंद बूंद करके व तीव्र जलन के साथ आए व पेशाब करने के बाद भी जलन बनी रहे – (कैंथरिस 30, दिन में 3 बार)
● पेशाब में रुकावट हो, पेशाब बूंद बूंद करके आए – (टैरेबिन्थ Q, दिन में 3 बार आधा कप पानी के साथ 15-20 बूंद)
● गर्भावस्था के आखिरी चरण में – (फॉस्फोरस 30, दिन में 3 बार)
रोग की तीव्र अवस्था में नमक कम से कम दें। हल्का सुपाच्य भोजन या सिर्फ दूध ही दें।
अनिच्छा – Aversions
● गर्भावस्था के दौरान रोटी की इच्छा बिल्कुल ना हो, खाने तक का विचार आने से जी घबराए – (सीपिया 30 या 200, दिन में दो-तीन बार)
● गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह के खाने की इच्छा ना हो – (लोरोसैरेसस 30, दिन में 3 बार)
गर्भपात – Abortion or miscarriage
गर्भपात – Abortion or miscarriage
गर्भपात रोकने के लिए जो दवाएं फायदा करती हैं, यहां दी गयी है l
● गर्भावस्था के किसी भी महीने में गर्भपात – (वाइबरनम प्रूनस Q)
● गर्भावस्था में शुरू के महीनों में गर्भपात – (वाइबरनम ओपुलस Q)
● गर्भावस्था के पहले महीनों में गर्भपात – (क्रोकस सटाइवा Q)
● गर्भावस्था के दुसरे महीनों में गर्भपात – (काली कार्ब 200 या 1M)
● गर्भावस्था के तीसरे महीनों में गर्भपात – (सैबाइना 30)
● गर्भावस्था के चौथे महीनों में गर्भपात – (एपीस मेल 30 या 200)
● गर्भावस्था के पांचवे – सातवे महीनों में गर्भपात – (सीपिया 30 या 200)
● गर्भावस्था के सातवे महीने के बाद गर्भपात – (ओपियम 200 या 1M)
कामोन्माद – Nymphomania
कामोन्माद – Nymphomania
जब स्त्री में कामेच्छा इतनी ज्यादा हो कि वह अपने पर नियंत्रण ना रख पाए तो उस रोग को कामोन्माद कहते हैं।
● स्त्री में अत्यधिक कामोत्तेजना। खासकर अविवाहित स्त्रियों में; उत्तेजना इतनी ज्यादा कि हर किसी से संबंध बनाना चाहे – (प्लैटिना 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
● अगर प्लैटिना से आराम ना आए। रोगिणी अंग उघाड़े। कामवासना रोकना उसके वश से बाहर हो जाए – (फॉस्फोरस 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
● जननांगों में जरा सा भी स्पर्श होने से अत्याधिक कामोत्तेजना हो – (म्युरैक्स 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
● जब योनि में कृमि (worms) पहुंच जाने के कारण योनि को खुजलाने से कामोत्तेजना हो – (कैलेडियम 30, दिन में 3 बार)
● स्वत: ही जननांगों में बेहद खुजली व बेचैनी, कामोत्तेजना, आलिंगन की इच्छा – (एगेरिकस 30, दिन में 3 बार)
● जब कामोत्तेजना के साथ श्वेत प्रदर की तकलीफ भी हो – (सीपिया 30 एवं पल्साटिला 30, दिन में 3 बार, एक के बाद दूसरी दवा दें)
● रोगिणी बहुत अश्लील हरकतें करती है। अपने जननांगों को उघाड़ती है, बेशर्म हो जाती है – (हायोसाइमस 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
● मासिक धर्म के दौरान बेहद कामोत्तेजना – (स्ट्रामोनियम 30 या 200, दिन में दो या तीन बार)
लिंग की आगे की त्वचा पीछे न खिंचे – Phimosis
लिंग की आगे की त्वचा पीछे न खिंचे – Phimosis
कुछ पुरुषों की लिंग की आगे की त्वचा पीछे को नहीं खिंच पाती है जिससे तनाव के समय काफी परेशानी होती है l यह रोग किसी खास कारण से हो सकता है , यदि जन्म से हो तो सर्जरी से ठीक हो जाता है l
● मुख्य दवा – (मर्क आयोडाइड 3X)
● जब दर्द के साथ स्खलन हो – (हिपर सल्फ़ 6 या 30)
● जब रोग उपदंश (syphilis) के कारण हो – (मर्क सोल 6 या 30)
● जब रोग अचानक सूजन के कारण हो – (एकोनाइट 30)
● बच्चों में दुर्गन्धित मवाद के साथ – (सल्फर 6 या 30)
वीर्यपात(स्वप्नदोष)- Spermatorrohea
वीर्यपात(स्वप्नदोष)- Spermatorrohea
जब वीर्य स्खलन हस्तमैथुन या कल्पनाओं की वजह से हो l यह स्वप्न में भी हो सकता है व बिना स्वप्न के भी l
● स्वप्नदोष, वीर्यपात के कारण दुर्बलता व भुल्लकड़पन, लिंग कमजोर, सहवास के समय जल्दी वीर्यपात – (एसिड फ़ॉस – Q)
● अधिक वीर्यपात, हस्तमैथुन आदि की वजह से कमजोरी, लिंग कमजोर, तनाव न हो, ठंडा व ढीलापन, कामवासना अधिक मगर शक्ति कम – (ऐग्नस कास्टस Q या 6)
● जब स्वप्नदोष या अधिक वीर्यपात के कारण बहुत कमजोरी हो, चक्कर आये – (चाइना 6,30 या स्टेफिसेगिरिया 30)
● शीघ्र वीर्य पतन की मुख्य दवा – (सैलेनियम 6 या 30)
● दिल की धड़कन के साथ वीर्य स्खलन – (डिजीटेलिस 6 या 30)
● जवान लड़कों में वीर्य स्खलन – (काली ब्रोम 6 या 30)
● जब वीर्य खून मिला हो – (कॉस्टिकम 30)
● लिंग में तनाव होने के पहले ही वीर्य स्खलन – (सल्फर 30 या 200)
पुरुषों में लिंग के रोग – Troubles of penis
पुरुषों में लिंग के रोग – Troubles of penis
● लिंग में सहवास के दौरान जलन व अगले दिन सूजन – (क्रियोजोट 30)
● सुबह के वक्त लिंग में जलन व तनाव – (मैग म्यूर 6 या 30)
● पेशाब की शिकायत के साथ जलन – (पैरिएरा ब्रावा Q)
● ऐसा महसूस हो जैसे लिंग है ही नहीं – (कोका 6 या 30)
● लिंग ठंडा रहे – (लाइकोपोडियम 30 या 200)
● लिंग में खारिश – (कॉस्टिकम 30)
● रात के समय दर्द के साथ तनाव – (कैप्सिकम 30)
● बच्चा अपना लिंग पकड़कर खींचता रहे – (मर्क सोल 30)
हस्तमैथुन – Masturbation
हस्तमैथुन – Masturbation
● एकान्त में बैठ कर हस्तमैथुन की प्रबल इच्छा; दिमागी कमजोरी – (ब्यूफो राना 30 या 200)
● हस्तमैथुन की प्रबल इच्छा, उत्तेजक स्वप्न, वीर्य स्खलन – (अस्टिलेगो Q)
● जवानी आने के पहले ही हस्तमैथुन की आदत – (प्लेटिना 30 या 200)
● हस्तमैथुन की आदत, लिंग कमजोर व ढीला – (कैलेडियम 30)
● अत्यधिक कामेच्छा के कारण हस्तमैथुन की तीव्र इच्छा – (ओरिगेनम 30)
● बच्चों में हस्तमैथुन की आदत – (स्टेफिसेगिरिया 30)
● अविवाहितों में हस्तमैथुन व इसके कारण रोग – (कोनियम 30 या 200)
● हस्तमैथुन के कारण लिंग में तनाव न रहे – (ऐग्नस कॉस्ट 30)
नपुंसकता – Impotency
नपुंसकता – Impotency
जब आदमी सम्भोग या बच्चे पैदा करने में असफल हो तो उसे नामर्द या नपुंसक कहते हैं l
● मुख्य दवा – (डैमियाना Q)
● कामेच्छा न हो, लिंग में तनाव न हो, पाखाना व पेशाब के साथ वीर्य पतन – (नुफर ल्युटियम Q)
● हस्तमैथुन की आदत के कारण – (कैलेडियम 30)
● ज्यादा उम्र होने के कारण – (लाइकोपोडियम 200)
● उपदंश (syphilis) के कारण – (काली आयोडायड 30 या 200)
● कामवासना में ज्यादा लिप्त रहने के कारण – (स्टेफिसेगिरिया 30 या 200)
● मोटे थुलथुले लोगों में – (कल्केरिया कार्ब 200)
शुक्राणु का कम या न होना – Azoospermism
शुक्राणु का कम या न होना – Azoospermism
● मुख्य दवा – (डैमियाना Q)
● जब रोग नामर्दी के लक्षणों के साथ हो – (कोनियम 30 या 200)
● प्रबल कामेच्छा(अंडकोषो की सूजन भी हो सकती है) – (स्ट्रिचनिनम 3X या 30)
● जब कामेच्छा बिलकुल न हो – (चिचिनम सल्फ़ 6 या 30)
सहवास विकार – Ailments of coition
सहवास विकार – Ailments of coition
पुरुषों में सहवास के समय, या पहले, या बाद के विकार यहां दिए गए हैं l
● सहवास के बाद कमजोरी – (सैलेनियम 6 या 30)
● सहवास के बाद बहुत पसीना – (नैट्रम कार्ब 6 या 30)
● हमेशा कामवासना भरे विचारों में लिप्त – (स्टेफिसेगिरिया 30)
● सहवास के समय शीघ्र पतन – (टिटेनियम 3X)
● सहवास के बाद उल्टी – (मोस्कस 6 या 30)
● सहवास के बाद पेशाब की नली में दर्द – (कैंथेरिस 30)
● सहवास के बाद दांत दर्द – (डैफने इंडिका Q या 6)
● सहवास के समय शर्म या हीन भावना के कारण लिंग में उत्तेजना न होना – (स्ट्रिचनिनम फ़ॉस 3X)
● पूरा तनाव होने के पहले ही वीर्य पतन – (सल्फर 30 या 200)
● सहवास की क्रिया करते हीं सांस की तकलीफ हो – (एम्बेरा ग्रिजिया 6 या 30)
● सहवास की क्रिया के बाद कमर दर्द व आँख की कमजोरी – (काली कार्ब 30 या 200)
● सहवास के बाद पेशाब की परेशानी – (सैबाल सेरुलता Q या 6)
● सहवास की क्रिया के बाद लिंग में जलन – (क्रियोजोट 6 या 30)
● सहवास के दौरान दौरा – (ब्यूफो राना 30)
उपदंश – Syphilis
उपदंश – Syphilis
यह सम्भोग के दौरान लगने वाला रोग है और संसर्ग से फैलता है एवं इसे फिरंगी रोग भी कहा जाता है l
● रोग के शुरू में जब जख्म की शुरुआत हो – (मर्क सोल 6 या 30)
● जख्म गहरे, जुवान, लैरिंक्स या फेफड़ों में सूजन, नाक छीलने वाला स्राव, आदि – (काली आयोड 6 या 30)
● जब रोग पुराना हो – (सिफिलिनम 200, 30)
● जब रोग के कारण जांघों में गांठ, दर्द, व सूजन हो – (फाइटोलाक्का 30 या 200)
● जब रोग के कारण दर्द बहुत हो – (एसिड नाएट्रिक 30 या 200)
● जब जख्म सड़ने लगे व जलन हो – (आर्सेनिक 30 या 200)
● जब जख्म पकने पर पीव भर जाये – (साइलिशिया 12X या 30)
सुजाक – Gonorrhoea
सुजाक – Gonorrhoea
जननेद्रिय की सूजन की बीमारी l सम्भोग से फैलती है l गुप्तांगों से शुरू होकर खून के रास्ते दिमाग तक पहुंच सकती है l
● रोग के शुरू में जब पेशाब करते समय भयंकर दर्द l मवाद के कारण मूत्रद्वार बंद, पेशाब बूंद-बूंद कर आये – (कैंनाविस सैटाइवा 30 या 200)
● जब पेशाब जलन के साथ खून मिला हुआ, बूंद-बूंद कर आये – (कैंथेरिस 6 या 30 और थूजा 200 या 1M)
● जब sujak के कारण जननांग पर मस्से हो l – (मैडोराइनम 200 या 1M)
● पुराना रोग, गठिया, आदि; ठण्ड से परेशानी – (मर्क सोल 30 या 200)
● रोग दबाने के कारण मूत्र नली में अत्यधिक दर्द – (एसिड नाइट्रिक 30 या 200)
● बायोकेमिक दवा – (काली सल्फ़ – 6X)
अंडकोष में पानी – Hydrocele
अंडकोष में पानी – Hydrocele
● बाएं अंडकोष का रोग, धीरे-धीरे रोग वृद्धि – (पल्साटिला 30 या 200)
● दायें अंडकोष का रोग, आंधी-तूफान में रोग बढ़े – (रोडोडैनड्रोन 30)
● जब अंडकोष बढ़ता ही चला जाये, डंक मारने सा दर्द – (एपीस मेल 30 या 200)
● लड़कपन के दौरान – (साइलिशिया 200 या 1M)
● छोटे बच्चों में – (ग्रेफाइटिस 30 या 200)
बुढ़ापे की खास दवाएं – some important medicines
बुढ़ापे की खास दवाएं – some important medicines
● बुढ़ापे में बच्चों की सी हरकत करना। बुद्धि ह्रास – (बैराइटा कार्ब 200 या 1M)
● जब 50 वर्ष की उम्र में ही 80 वर्ष की उम्र लगे, याददाश्त कम, शरीर के अंगों का स्वतः हिलना – (ऐम्बरा ग्रिजिया Q या 30)
प्रोस्टेट ग्रंथि – Prostatitis and prostatocystitis
प्रोस्टेट ग्रंथि – Prostatitis and prostatocystitis
पुरुषों में मूत्राशय मुख ग्रंथि की सूजन, आदि के रोग यहां दिए गए हैं।
● मुख्य दवा – (पल्साटिला 30 या 200)
● जब रोग की शुरुआत हो। अण्डकोषों में भी दर्द; छूने से बढ़े, पेशाब में रुकावट हो – (सैबाल सैरुलटा Q)
● जब रोग चोट लगने के कारण हो – (आर्निका 30 या 200)
● जब कष्ट रात के समय बढ़े – (मर्क सौल 30)
● जब पेशाब रुक-रुक कर बूंद-बूंद आए – (पैरिएरा ब्रावा Q)
● जब रोग पुराना हो और उपरोक्त दवाएं काम न करें – (सल्फर 200, 1M)
वृद्धावस्था के दूसरे रोगों के लिए अन्य अध्याय देखें।
मूत्राशय प्रदाह – Cystitis
मूत्राशय प्रदाह – Cystitis
सर्दी लगना, डर जाना, सीलन भरे स्थान में अधिक समय रहना, पथरी, सुजाक, मूत्र नली का सिकुड़ना, चोट आदि के कारण मूत्राशय प्रवेश में दर्द, सर्दी में चुभन मालूम होना, अकड़न या भार महसूस होना, कपकपी होना। खाँसने पर कष्ट से पेशाब निकलना, मूत्र में रक्त या श्लेष्मा होना, आदि लक्षण होते हैं। रोग पुराना होने पर पीब जैसा गाढ़ा श्लेष्मा के साथ ज्यादा पेशाब; दर्द कमर तक फैल जाता है। मूत्र-ग्रंथि प्रदाह में दर्द नीचे की ओर बढ़ता है।
● जब पेशाब बूंद बूंद कर दर्द के साथ आए, जलन हो, कभी खून आए, और मूत्र नली में लोहे के गर्म सलाख डालने जैसा दर्द हो – (कैंथरिस 30, दिन में तीन बार)
● सूजन के कारण पेशाब की एक बूंद तक भी अत्यंत पीड़ा के साथ निकले। पेशाब काला, लाल या भूरा और सड़ांध वाला हो, बेहद बेचैनी हो – (टैरेन्टूला हिस्पैनिया 30, दिन में तीन बार)
● जब रोगी पेशाब जाते समय दर्द के मारे चीख उठे, दर्द जांघ से नीचे की ओर फैले – (पैरिआरा ब्रावा Q या 6, आवश्यकतानुसार)
● जब दर्द के साथ खून मिला गर्म पेशाब आए, जोर लगाने के बाद कुछ बुंद ही निकले – (एपिस मेल 30, दिन में तीन बार)
● जब पेशाब में खून व एल्बुमिन आदि आए तथा जलन व कटने जैसा दर्द हो – (टैरेबिन्थ Q, 10-15 बूंद आवश्यकतानुसार)
● नवविवाहित स्त्रियों को जब कष्ट संभोग के बाद हो – ( स्टैफिसैग्रिया 30, दिन में तीन बार)
● जब दर्द के मारे रोगी कापने लगे – (पल्साटिला 30, दिन में तीन बार)
● जब बीमारी सुजाक(Syphilis) के कारण हो – (कैनाबिस सैटाइवा 30, दिन में तीन बार)
● रोग की पुरानी अवस्था में जब पेशाब रात के समय बार-बार हो और पेशाब के साथ गाढ़ा, डोरी की तरह का श्लेष्मा निकले, दर्द न हो – (चिमाफिला 30, दिन में तीन बार)
अनजाने में पेशाब निकल जाना – Involuntary Urination
अनजाने में पेशाब निकल जाना – Involuntary Urination
यह रोग अक्सर बच्चों में होता है। मूत्राशय की पेशियों की कमजोरी की वजह से पेशाब रोकने की शक्ति कम हो जाती है। बड़े लोगों में यह रोग सुजाक, चोट, गुर्दे में पथरी, पेट में कीड़े की वजह से और स्त्रियों में प्रसव के दौरान हो सकता है।
● बच्चों में जब पेट में कीड़ों की वजह से हो – (सिना 30, दिन में तीन बार)
● जब पेशाब में घोड़े के पेशाब जैसी बदबू हो – (एसिड नाइट्रिक 30, दिन में तीन बार)
● जब नींद में ऐसा महसूस हो कि रोगी पेशाब घर में ही पेशाब कर रहा है – (क्रियोजोट 30, दिन में तीन बार)
● जब पेशाब सिर्फ दिन में ही ज्यादा हो – (साइलिशिया 30, दिन में तीन बार)
● मूत्र तंत्र की शिथिलता के कारण रोग – (कॉस्टिकम 30, दिन में तीन बार)
● रोग पुराना हो जाने पर – (सल्फर 200, एक खुराक)
● बूढ़ों को यह रोग होने पर – (कोनियम 30, दिन में तीन बार)
● नम्र स्वभाव के रोगियों को; जब हर समय ध्यान पेशाब में ही लगा रहता है – (पल्साटिला 30, दिन में तीन बार)
● स्त्रियों में लगातार पेशाब हो; लगे की योनिपथ से गर्भाशय ही बाहर निकल जाएगा – (पोडोफाइलम 30, दिन में तीन बार)
गुर्दे में या मूत्र पथरी – Renal Calculus
गुर्दे में या मूत्र पथरी – Renal Calculus
शारीरिक क्रियाओं में गड़बड़ी होकर चूर्ण की तरह का पदार्थ गुर्दे या मूत्राशय में इकट्ठा होने लगता है। इसे ही मूत्र पथरी कहते हैं। जब यह खिसक कर मूत्र नली में आ जाता है तो रोगी असहनीय दर्द अनुभव करता है।
लक्षण : पेशाब में रुकावट, बार-बार पेशाब होना, कभी-कभी पेशाब के साथ खून आना, असहनीय दर्द, जलन आदि।
● गुर्दे में असहनीय दर्द, खासकर जब दर्द बाईं तरफ हो और मूत्र द्वार तक फैले; बार बार पेशाब की इच्छा (दर्द दाईं ओर भी हो सकता है) – (बर्बेरिस वल्गेरिस Q, 5-10 बूंद, हर 15 मिनट के अंतर से या आवश्यकता अनुसार)
● पुराने रोग में; पेशाब गाढ़े लाल रंग का, पेट में वायु की अधिकता, दाएं तरफ दर्द, कभी कभी पेशाब में रुकावट – (लाइकोपोडियम 30, सुबह शाम दें)
● मूत्र पथरी के दर्द में इतनी तकलीफ हो कि रोगी दर्द के कारण लेटने लगे, बूंद बूंद पेशाब आए – (पैरिआरा ब्रावा 30, दिन में तीन बार)
● पेशाब में बहुत तेज जलन व दर्द; पेशाब गाढ़ा व खून मिला। धुंधला, कालापन लिए हो – (टैरेबिन्थ Q, 5-5 बूंद, दिन में 3 बार)
● पेशाब में सफेद चूर्ण, खासकर बाएं तरफ दर्द – (हाइड्रेंजिया Q, 5-10 बूंद, दिन में तीन बार)
● पेशाब के अंत में असहनीय दर्द; खड़े होकर पेशाब करने से पेशाब आसानी से हो जाए। गर्म खाने पीने से तकलीफ बढ़े पर गर्म सेक से आराम हो – (सरसापैरिला Q या 6, दिन में तीन बार)
● गुर्दे व मूत्राशय में सूजन; तेज कटने-फटने जैसा दर्द, पेशाब मुश्किल से हो, पेशाब की जगह बूंद बूंद करके खून आए – (कैंथरिस 30, दिन में तीन बार)
● बायोकेमिक औषधि – (मैग्नेशिया फॉस 6x, हर 2 घंटे बाद)
पेशाब में रुकावट – Strangury
पेशाब में रुकावट – Strangury
यह दूसरे मूत्र तंत्र रोगों का एक उपसर्ग भर है। मूत्र की थैली में पेशाब रहता है पर निकलता नहीं या बहुत कष्ट से निकलता है। मूत्र प्रदेश में बहुत जलन होती है। गठिया, कृमि, हिस्टीरिया, वात, मूत्रग्रंथि प्रदाह, मूत्राशय प्रदाह, आदि कारणों से यह रोग हो सकता है। रोग की बढ़ी हुई अवस्था में मूत्र के साथ पीब व श्लेष्मा निकलता है।
● जब ठंड या किसी अन्य कारणों से अचानक पेशाब रुक जाए – (कैम्फर Q, सुंघाएं)
● ठंडी, सूखी हवा लगने के कारण पेशाब रुक जाए – (एकोनाइट 30, आधे घंटे के अंतर से)
● पेशाब में घोड़े के पेशाब जैसी बदबू होने पर – (एसिड नाइट्रिक 30, दिन में तीन बार)
● पेशाब में अत्यधिक बदबू होने पर – (एसिड बेन्ज 30, दिन में 3-4 बार)
● चोट लगने के कारण रोग – (आर्निका 30 या 200, 2-3 खुराक दें)
● पेशाब की नली में जलन, पेशाब बूंद-बूंद कर आए – (कैंथरिस 30, दिन में तीन बार)
● पुराने सुजाक के कारण पेशाब की रुकावट – (कैनेबिस सैटाइवा 30 या 200 की 2-3 खुराक)
● पेशाब थोड़ा थोड़ा, बहुत बदबूदार; साथ में खून हो। पेट में अफारा – (टैरेबिन्थ Q या 6, दिन में तीन बार)
बहुमूत्र या मधुमेह – Diabetes
बहुमूत्र या मधुमेह – Diabetes
इस रोग में मूत्र की मात्रा बढ़ जाती है और मूत्र बार-बार होता है इसे मधुमेह कहते हैं। मधुमेह में मूत्र के साथ चीनी भी मौजूद रहती है। मधुमेह रोगी धीरे धीरे दुर्बल हो जाता है। इसके रोगी को जख्म हो जाए तो जल्दी ठीक नहीं होते। कभी-कभी सड़ भी जाते हैं। रोग बढ़ने पर भूख नदारद, दुबलापन, पैरों में सूजन, कामवासना का बढ़ना, क्षय, फेफड़े में सूजन, दिन-रात में बहुत अधिक पेशाब आदि लक्षण पाए जाते हैं।
● प्रमुख दवा – (सिजीजियम जैम्बो Q, दिन में चार बार)
● पेशाब में जलन व एल्बुमिन – (टैरेबिन्थ Q, 8-10 बूंद, दिन में 4 बार)
● हाथ पैरों में जलन, पित्त की अधिकता – (सिफेलैंड्रा इंडिका Q, दिन में 4 बार)
● बहुमुत्र के साथ जोड़ों में दर्द – (लैक्टिक एसिड 3x या 6, दिन में तीन बार)
● बायोकेमिक औषधि – (नैट्रम सल्फ 12x व नैट्रम फॉस 12x, दिन में चार बार)
प्यास – Thirst
प्यास – Thirst
● बुखार में गर्मी की हालत में प्यास न हो – (चाइना 30)
● अत्यधिक प्यास लगे – (लाइकोपस विर 6)
● जब प्यास के कारण नींद तक न आए – (एलियम सैटाइवा 30 )
● जब मरीज पानी बहुत पीता है और खाना कम खाता है – (सल्फर 30 या 200)
● सल्फर से आराम न आने पर जब प्यास बहुत हो व भूख बिल्कुल खत्म हो जाए – (डिजिटेलिस 30)
● मुंह खुश्क। थोड़ी-थोड़ी देर में थोड़े-थोड़े पानी की प्यास। अमिट प्यास – (आर्सेनिक एल्ब 30)
● खाने की इच्छा समाप्त हो जाने पर। ठंडे पानी की प्यास – (कैल्केरिया आर्स 30)
● गले मे तीव्र जलन , प्यास बहुत अधिक – (कैंथरिस 30)
● मुंह खुश्क रहने पर भी प्यास न हो – (पल्साटिला 30)
● बुखार में ठंड लगने की अवस्था में भी बेहद प्यास – (नैट्रम म्यूर 30)
● प्यास बहुत अधिक। रोगी हर बार खूब पानी पिए – (ब्रायोनिया 30)
● बुखार में तेज प्यास लगे – ( एकोनाइट 30 )
● मुंह लार से तर होते हुए भी प्यास लगे – (मर्क सॉल 30)
जोडों का दर्द, गठिया व वात रोग – Gout, Rheumatism and Arthritis
जोडों का दर्द, गठिया व वात रोग – Gout, Rheumatism and Arthritis
जोड़ के दर्द दो तरह के होते हैं l छोटे जोड़ों के दर्दो को गठिया कहते हैं, इन जोड़ों का दर्द जब काफी पुराना हो जाता है तब जोड़ विकृत यानि टेढ़े – मेढ़े हो जाते हैं तब इसे पुराना संधि प्रदाह (arthritis deformans) कटे हैं l बड़े जोड़ों तथा पुट्ठे के दर्दो को वात रोग (rheumatism) कहते हैं l वात रोग (gout) में जोड़ों की गांठें सूज जाती है, बुखार हो जाता है, बेहद दर्द और बेचैनी होती है l कारण : ओस या सर्दी लगना, देर तक भीगना, अधिक मांस, खटाई या ठंडी वस्तुएं खाना, शराब का अधिक सेवन करना व विलासिता, आदि l
● अर्टिका युरेन्स Q – मुख्य दवा l जब पेशाब में यूरिक एसिड व युरेट्स काफी मात्रा में आये – (10 बूंद दिन में 3 बार)
● कोल्चिकम 30- छोटे जोडों में दर्द व सुजन, दर्द कटने या चुभने जैसा; रात में या चलने फिरने से बढ़े – (दिन में 3 बार)
● पल्साटिला 30- जब दर्द एक जोड़ से दुसरे जोड़ में चलता-फिरता रहे – (दिन में 4 बार)
● लीडम पाल 30- रोग खासकर पैर के अंगूठे में सूजन के साथ l ठण्ड या बर्फ की पट्टी से रोग घटे l दर्द नीचे से ऊपर की ओर जाये – (दिन में 4 बार)
● एकोनाइट 30- जब रोग अचानक ठंड के कारण शुरू हो – (दिन में 4 बार)
● सल्फर 30- जब गठिया रोग चर्म रोगों के साथ शुरू हो – (दिन में 3 बार)
● रस टक्स 30 या 200- जब रोग ठण्ड से बढ़े l सेकने व चलने फिरने से आराम आये – (दिन में 3 बार)
● कल्केरिया कार्ब 30 या 200- मौसम बदलने के साथ रोग की पुनरावृत्ति – (दिन में 3 बार)
● स्टेफिसेगिरिया 30 या 200- हाथ पैर के छोटे छोटे जोड़ों में दर्द व सूजन – (दिन में 3 बार)
● शराबियों में जोड़ों का दर्द – (नक्स वोमिका 30 या 200, दिन में 3 बार)
● स्टैलेरिया मीडिया Q,- जब दर्द स्थान बदलता रहे l हिलने डुलने से रोग बढ़े – (दिन में 3 बार)
● लाइकोपोडियम 30,- अंगुलियों के जोडों का दर्द – (दिन में 3 बार)
रोग के दबाने या रोग के बाद के विकार – Ailments after suppression of diseases
रोग के दबाने या रोग के बाद के विकार – Ailments after suppression of diseases
● दस्त रोकने के कारण रोग – (एब्रोटेनम 30 या 200)
● खसरे, टाइफाइड आदि के दब जाने से दमा – (इपिकैक 30)
● बच्चों में त्वचा के दाने दब जाने से बहरापन, दमा आदि – ( पल्साटिला 30)
● पित्ती दब जाने के कारण रोग – (एपिस मेल 30)
● जब दाने ठीक से उभरने से पहले ही दबा दिया जाए – (जिंकम मैट 30)
● त्वचा के दाने दब जाने के कारण दस्त – (ब्रायोनिया 30)
प्रबल इच्छाएं – Desires
प्रबल इच्छाएं – Desires
● कड़वी चीजें खाने की इच्छा – (डिजिटेलिस 30, नैट्रम म्यूर 30)
● पत्ता गोभी खाने की इच्छा – (साइक्यूटा वी 30, कोनियम 30)
● कोयला खाने की इच्छा – (एल्युमिना 30, साइक्यूटा वी 30)
● मिट्टी, चूना, चॉक रेत, कोयला, आदि खाने की इच्छा – (एल्युमिना 30, नाइट्रिक एसिड 30, नक्स वोमिका 30, टैरेन्टूला हिस 30)
● अंडा खाने की इच्छा – (कैल्केरिया कार्ब 30, पल्साटिला 30)
● चिकनाई वाला खाना खाने की इच्छा – (कैल्केरिया फॉस 30, मेजेरियम 30, नक्स वोमिका 30, नाइट्रिक एसिड 30)
● मछली खाने की इच्छा – (नैट्रम म्यूर 6x, नैट्रम फॉस 6x, फॉस्फोरस 30)
● फल खाने की इच्छा – (एल्युमिना 30, कार्बो वेज 30, एसिड फॉस 30, एसिड सल्फ 30, विरेट्रम एल्ब 30)
● शहद खाने की इच्छा – (सैबाडिला 30, विरेट्रम एल्ब 30)
● आइसक्रीम खाने की इच्छा – (कैल्केरिया कार्ब 30, फॉस्फोरस 30)
● दूध पीने की इच्छा – (ऑरम मेट 30, चेलिडोनियम 30, मर्क सॉल 30, रस टॉक्स 30, सैबाडिला 30)
● ठंडा दूध पीने की इच्छा – (एपिस मेल 30, एसिड फॉस 30)
● अचार खाने की इच्छा – (एंटीम क्रूड 30, हिपर सल्फ 30, लैकेसिस 30, सल्फर 30)
● रेत खाने की इच्छा – (टैरेन्टूला हिस 30)
● ओएस्टर (Oyester) खाने की इच्छा – (ब्रायोनिया 30, कैल्केरिया कार्ब 30, लैकेसिस 30, लाइकोपोडियम 30, नैट्रम म्यूर 30, रस टॉक्स 30)
● सुअर का गोश्त (pork) खाने की इच्छा – (कैल्केरिया फॉस 30, क्रोटेलस होर 30, मेजेरियम 30
अरुचि – Aversions
अरुचि – Aversions
● नहाने से – (सल्फर 30 या 200)
● अंधेरे से – (सैनिकुला 30)
● खेलने से (बच्चों में) – (बैराइटा कार्ब 200)
● स्कूल जाने से – (कैल्केरिया फॉस 6x या 200)
● गणित से – (लाइकोपोडियम 30 या 200)
● डबल रोटी व मक्खन से – (साइक्लेमन 30)
● प्रकाश से – (टैरेन्टुला हिस 30)
● अंडों की गंध से – (कॉलचिकम 30)
● प्याज, लहसुन से – (सैबाडिला 30)
● नमक से – (फॉस्फोरस 30)
● माँ के दूध से – (साइलिशिया 12x या 30)
● बच्चों को, माँ के दूध नमकीन होने के कारण – (कैल्केरिया फॉस 6x या 30)
रोगों के कुछ खास कारण – Causations
रोगों के कुछ खास कारण – Causations
● जब रोगी कहे कि रोग फलां साल में फलां शिकायत के होने के बाद से है – (कर्बोवेज 30 या 200)
● गुस्से के बाद (अपच, सांस रोग, आदि) – (कैमोमिला 30 या 200)
● बिजली गिरने, कौंधने, आदि से अंधापन – (फॉस्फोरस 200)
● रोने से खाँसी – (आर्निका 30 या 200)
● गर्म दूध पीने से दस्त – (सीपिया 30)
● मीठा खाने से दस्त – (अर्जेंटम निट 30)
● अचानक डर के कारण रोग – (एकोनाइट 30)
● गर्म कॉफी पीने से दस्त – (नैट्रम म्यूर 30)
● ठंडा, बासी, सड़ा भोजन खाने पीने से उल्टी, दस्त – (आर्सेनिक एल्ब 30)
● नहाने से सिर दर्द – (एंटीम क्रूड 30)
● कॉफी पीने से सिरदर्द – (नक्स वोमिका 30)
● धूप(सूरज की गर्मी) से सिरदर्द व उल्टी – (ग्लोनॉइन 6 या 30)
● जहरीले घाव (जो ठीक होने में ना आये) – (लैकेसिस 30)
● रात में जागने से अपच – (नक्स वोमिका 30)
● चिकनाई युक्त या गरिष्ठ भोजन से अपच आदि – (पल्साटिला 30)
● चोट लगने के कारण रोग – (आर्निका 30 या 200)
● यात्रा के दौरान उल्टी या मिचली – (कॉकुलस इंडिका 30)
● खाना बनने की गंध से उल्टी या मिचली – (सीपिया 30 या 200)
● धुंए (मोटर गाड़ियों, फैक्टरी आदि के धुंए से खासकर शहरों में) से रोग बढ़े – (एसिड सल्फ 30)
● गीले (wet) मौसम में शायटिका, दर्द आदि – (रस टॉक्स 200 या 1M)
● मानसिक उत्तेजना से टट्टी लगना या टट्टी की हाजत – (जलसेमियम 30)
● मन में पुरानी दहशत के कारण हाथ-पैर कांपना – (ओपियम 200 या 1M)
● क्लोरो-माइसिटिन का बुरा असर – (कर्बोवेज 30)
● डी. पी. टी. के बाद हुए रोग – (कैल्केरिया सल्फ 1M या 10M एक खुराक)
● बिजली के झटके के बाद हुए रोग – (मॉर्फिनम 200)
● किसी प्रियजन की मृत्यु के कारण हुए रोग; दुःख – (इग्नेशिया 200 या 1M)
● बाल कटवाने के कारण हुए रोग – (बेलाडोना 30)
● फ्लू के बाद हुए रोग – (जलसेमियम 30)
● तरबूज खाने के बाद हुए रोग – (जिंजिबर 30)
● रेलयात्रा में पेट दर्द – (कर्बोवेज 30)
● तेज गंध (सुगंध या दुर्गंध) से रोग बढ़े – (फॉस्फोरस 30 या 200)
● न्यूमोनिया के बाद हुए रोग – (काली कार्ब 30)
● धूप में लगातार काम करने से हुए रोग – (नैट्रम कार्ब 30)
● टायफाइड के बाद हुए रोग – (सोराइनम 200 या 1M)
● तैरने या पानी मे गिर जाने के बाद रोग – (एंटीम क्रूड 30 या 200)
सूजन (जलोदर) – Dropsy
सूजन (जलोदर) – Dropsy
किसी विशेष अंग जैसे सिर, हाथ, पेट पर सूजन होने को स्थानीय शोथ (Oedema) कहते हैं, सारे शरीर पर सूजन होने पर सर्वांगीण शोथ (anasarca) कहते हैं।
कारण : जिगर या तिल्ली का बढ़ना, मलेरिया, मासिक धर्म की गड़बड़ी, पुराना अतिसार, आदि। पसीना, पेशाब या पाखाने का रुकना।
लक्षण : सूजी हुई जगह नरम हो जाती है दबाने पर उस जगह गड्ढा पड़ जाता है जो धीरे-धीरे भरता है। प्यास, त्वचा खुश्क, अरुचि, पेशाब में लाली, सांस लेने में कष्ट, आदि।
● प्यास बिल्कुल नहीं। त्वचा खुश्क, पीली मोम जैसी; पेशाब बहुत थोड़ा। गर्मी में कष्ट बढ़ता है; ठंडक से आराम आता है। शरीर मे डंक मारने जैसा दर्द – (एपिस मेल 6 या 30)
● तेज प्यास, पर पानी पीते ही उल्टी हो जाती है। ठंड अच्छी नही लगती – (एपोसाइनम Q)
● कहीं भी सूजन होने पर उपयोगी – (थलास्पी बी. पी. Q)
● गुर्दे में विकार आने की वजह से सूजन – (टैरेबिन्थ Q)
● बेचैनी, परेशानी, प्यास ज्यादा। छाती, दिल, जिगर, तथा गुर्दे की बीमारी की वजह से सूजन – (आर्सेनिक एल्ब 30)
● हृदय रोग के कारण सूजन, नाड़ी धीमी व कमजोर, पेशाब थोड़ा, काले रंग का, एल्बुमिन मिला हुआ। ठंडा पसीना – (डिजिटेलिस 30)
● पेशाब या तो बहुत थोड़ा आता है या आता ही नहीं। मरीज बेहोशी में सोया रहता है; सब इंद्रियां शिथिल हो जाती है – (हैलेबोरस 6 या 30)
● कमजोर करने वाली बीमारी के बाद सूजन – (चाइना 6)
● किसी रुके या दबे हुए चर्म रोग के कारण सूजन – (सल्फर 30)
दवाएं आवश्यकतानुसार दिन में 2-3 बार दी जा सकती हैं।
नमक खाना बंद कर देना चाहिए। हल्का और सादा भोजन लें।
पसीना – Perspiration
पसीना – Perspiration
● केवल सिर पर पसीना या शरीर के सिर्फ एक भाग पर खट्टा तथा ठंडा पसीना – (कैल्केरिया कार्ब 30 या 200)
● पसीने के कारण सारा सिर, माथा, गला, मुंह सब भीग जाते हैं। पसीना बहुत बदबूदार जो पांव में घाव तक कर देता है – (साइलिशिया 30 या 200)
● सिर को छोड़कर बाकी सारे शरीर पर पसीना – (रस टॉक्स 30)
● बगलों में बहुत दुर्गन्धित पसीना – (पेट्रोलियम 30)
● बहुत कमजोरी से या घातक रोग के बाद ज्यादा पसीना आए – (चाइना 30)
● आंख बंद करते हीं या सोते ही पसीना आए – (कोनियम 30 या 200)
● शरीर के बिना ढके हिस्से पर पसीना आए – (थूजा 30)
● शरीर को अत्यंत कमजोर कर देने वाला पसीना – (फॉस्फोरस 30)
● संगीत का आनंद लेते समय ज्यादा पसीना आना – (टैरेन्टूला 30)
● नींद से जागते ही पसीना आए – (सैम्बुकस 30)
● टायफाइड आदि रोगों के बाद दिन-रात पसीना आए। जरा सा हिलने-डुलने से पसीना बढ़े – (सोराइनम 200)
● रोगी जिस करवट लेटे उसकी दूसरी ओर पसीना आए – (एसिड बेन्जोइक 30)
● पसीने से कपड़े पर पीला दाग पड़े – (कार्बो एनिमेलिस 30)
● सारे शरीर में बेहद पसीना, खास कर जननांगों में – (एसिड फॉस Q, या 6)
● चलते समय बहुत पसीना आए। खाते समय ठंडा पसीना आए – (मर्क सॉल 30)
● श्लेष्मिक झिल्लियों की बेहद खुश्की की वजह से आंख, नाक, जीभ, मुंह, गला, व होंठ खुश्क व सूखे हुए। पसीना बिल्कुल न आए – (नक्स मौस्केटा 6 या 30)
● पसीना रुक जाने से खून भरी टट्टियाँ आने लगे – (नक्स वोमिका 30)
● पसीना रुक जाने से जुकाम या बुखार होने पर – (एकोनाइट 30)
● पसीने की हालत में भीग जाने पर (सर्द गर्म हो जाने पर) खांसी, जुकाम, या बुखार हो – (रस टॉक्स 30 या 200)
दवाओं का सेवन आवश्यकता अनुसार दिन में 2 या 3 बार किया जा सकता है।
नींद विकार – Disordered Sleep
नींद विकार – Disordered Sleep
नींद के दौरान खास लक्षण: नींद में बोलना, नींद न आना, आदि इसमे दिए गए हैं।
● पेट के बल सोना – (मेडोराइनम 1M, 2-3 खुराक)
● बच्चे जिनका पेट ज्यादा खाने व कीड़ों के कारण बड़ा हो; पेट के बल सोये। पालने में अच्छी नींद आए, तेज थपकियों के बाद हीं बच्चा सो पाए – (सिना 30 या 200)
● बच्चा दूध उलटने के बाद गहरी नींद सोये – (ऐथ्यूजा 30)
● नींद में डरावने सपने देखना, चिल्लाना, दाँत किटकिटाना – (काली ब्रोम 30)
● नींद के दौरान आँखे आधी खुली रहें – (लाइकोपोडियम 30 या 200)
● रोगी दिन में सोए व रात में रोए – (जलापा 30)
● खुशी के कारण नींद न आए – (कॉफिया 30 या 200)
● मानसिक तनाव के कारण नींद न आए – (नक्स वोमिका 30 या 200)
● नींद में सुबकियां आए – (ऑरम मेट 200 या 1M)
● पढ़ने से नींद आए – (मैग फॉस 6x या 30)
● नींद में बोलना – (पल्साटिला 30)
● अंधेरे में न सो पाना – (स्ट्रामोनियम 30 या 200)
● अचानक नींद टूट जाए और नीचे की ओर गिरने का भय हो – (बोरेक्स 30)
● नींद न आना (मुख्य दवा) – (पैसिफ्लोरा Q, 20 बूंद सोते समय)
● बायोकैमिक दवा – (फेरम फॉस 30x व काली फॉस 6x)
नकसीर फूटना – Epistaxis
नकसीर फूटना – Epistaxis
नाक से खून बहना। चोट लगने, क्रोध, अथवा किसी और बीमारी की जटिलता के रूप में यह रोग हो सकता है।
● जब लड़कियों को मासिक स्राव की बजाय नाक से खून आए – (पल्साटिला 30, दिन में 3 बार)
● नकसीर की रामबाण दवा – (ब्रायोनिया Q, दिन में 3 बार)
● सुबह उठने पर , मुँह धोने से नकसीर फूटे या खाना खाने के बाद नाक से खून आए – (अमोनियम कार्ब 30, दिन में 3 बार)
● चोट लगने के कारण नाक से खून आए – (आर्निका 30 या 200, दिन में 3 बार)
● नाक से खून आए जो जल्दी न जमता हो – (फॉस्फोरस 30, दिन में 3 बार)
● जब बच्चा नाक छीलकर खून निकाल लेता हो – (ऑरम ट्रिफाइलम 30, दिन में 3 बार)
● नाक से चमकीला खून आये – (मिलीफोलियम Q, दिन में 3 बार)
● जब नाक से कालापन लिए खून आए – (हैमामेलिस Q, दिन में 3 बार)
● जब नाक से खून रात में आए और नाक में ही जमा हो जाए – (मर्क सौल 30, दिन में 3 बार)
● जब नाक से खून रात में आए और नाक में ही जमा हो जाए – (मर्क सौल 30, दिन में 3 बार)
● काली खांसी, स्कारलेटिना, मियादी बुखार, डिफ्थीरिया के दौरान नाक से गाढ़ा खून आए – (एसिड म्यूर 30, दिन में 3 बार)
● सर्दी जुकाम के दौरान नाक से खून आए – (इपिकैक 30, दिन में 3 बार)
● गर्मी या धूप में रहने से नाक से खून आए – (लैकेसिस 30, दिन में 3 बार)
● बायोकैमिक दवा – (फेरम फॉस 6X, दिन में 3 बार)
मेरुदंड का शोथ – Spondilitis
मेरुदंड का शोथ – Spondilitis
● गर्दन का शोथ(cervical Spondilitis)। ऐसा लगे कि किसी ने हड्डियां चाकू से खुरच दी है। मेरुदंड की कमजोरी, काम करने से रोग बढ़े। गर्माहट से आराम आए – (एसिड फॉस 30, दिन में 3 बार)
● रीढ़ की हड्डियों में तेज दर्द, ऐसा लगे जैसे हड्डियां टूट गई हो। चक्कर आए जो आंखें खोलने से बढ़े – (थैरीडियोन 30, दिन में 3 बार)
● कमर के बीच के हिस्से (lumbar and sacral) में दर्द हो जो दाएं कंधे तक जाए – (क्लोरोमाइसिटिन 30, दिन में 3 बार)
● कमर के निचले हिस्से का शोध व मेरुदंड की कशेरुकाओं की गड़बड़ी व कमजोरी(deformities and softening)। खासकर मोटे थुलथुले रोगियों के लिए। रोगी को ठंड ज्यादा लगे व हाथ पैर ठंडे रहे – (कैल्केरिया कार्ब 200 या 1M, सप्ताह में एक बार)
● कमर के सबसे निचले हिस्से(coccyx) में जलन(intercurrent remedy) के साथ दर्द – (सल्फर 200 या 1M, 15 दिन में 1 बार)
● रक्ताल्पता के रोगी जो लंबाई में तो खूब बढ़ जाते हैं मगर शरीर कमजोर ही रहता है नमक व ठंडे पेय की तीव्र रूचि व अंधेरे से डर लगता है। जलन के साथ तेज कमर दर्द जो सिर तक जाता है – (फॉस्फोरस 30 या 200, दिन में 2 बार)
● कमर व कंधों के बीच में दर्द। कमर के बीच के हिस्से(lumbar and sacral) में दर्द। शारीरिक व मानसिक कमजोरी। चक्कर आएं। खासकर अविवाहित रोगियों के लिए – (कोनियम 200 या 1M, 15 दिन में 1 बार)
● कमर के निचले हिस्से में दर्द व कमजोरी। मेरूदंड में जलन जो चूतड़ों तक जाए व चलने से बढ़े – (काली कार्ब 30 या 200, हर 6 घंटे बाद)
● ठंड लगने, वजन उठाने या भीग जाने के कारण कमर दर्द, गर्माहट व चलने-फिरने से आराम – (रस टॉक्स 200 या 1M, दिन में 2 बार)
● कमर के बीच के हिस्से (lumbo-sacral) में दर्द जो हिलने-डुलने से बढ़े। कमर के निचले हिस्से(small of back) में कड़ापन व सुई चुभने सा दर्द – (ब्रायोनिया 30, दिन में 3 बार)
● जब मेरुदंड की शोथ के कारण कमर दर्द दिन के समय ज्यादा हो व समुद्र के किनारे बढ़े – (मैडोरहिनम 200 या 1M, सप्ताह में एक बार)
कीड़े या किसी जानवर का काटना – Insect or Animal Bites
कीड़े या किसी जानवर का काटना – Insect or Animal Bites
ततैया, बिच्छू, भौरा या मधुमक्खी आदि के काटने पर पहले सावधानी पूर्वक डंक निकाल देना चाहिये फिर स्पिरिट ऑफ़ केम्फर रुई में भिगो कर उस जगह पट्टी बांध देनी चाहिये l
● ततैया, बिच्छू, आदि के काटने पर – (एपीस मेल 30, 1-2 घंटे पर)
● मधुमक्खी के काटने पर – (एसिड कार्बोलिक 6 या 30 और एपीस मेल 30, दिन में 4-5 बार)
● पागल कुत्ते, बिल्ली, गीदड़ आदि के काटने पर अस्पताल में टीके लगवाएं एवं साथ में – (हाइड्रोफोबिनम 200, 3 खुराक व बाद में बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● मकड़ी मलना – (लीडम पाल 200, दिन में 3 खुराक)
दिमाग़ी कमजोरी – Mental weekness
दिमाग़ी कमजोरी – Mental weekness
बहुत जटिल व पुरानी बीमारियां, जिनमें रोगी की जीवनी शक्ति क्षीण हो जाती है, स्नायुमंडल कमजोर हो जाता है, बहुत ज्यादा मानसिक परिश्रम, हस्तमैथुन, वंश परंपरा से आये दोष, आदि की वजह से दिमागी कमजोरी उत्पन्न हो सकती है।
● प्रमुख दवा (खासकर बढ़ती उम्र के नौजवानों में) – (एसिड फॉस Q, 5-10 बूंद, पानी के साथ)
● जब थोड़ी सी दिमाग़ी मेहनत से परेशानी लगे – (एसिड पिकरिक 30, दिन में 3 बार)
● जब परिश्रम करने की इच्छा न हो। अत्यधिक स्नायविक दुर्बलता – (फॉस्फोरस 30 या 200, की 3 खुराक)
● मितली, कलेजे में संकुचन, दम घुटे, जीभ साफ़ हो – (इपिकैक 6 या 30, 2-2 घंटे के बाद)
● निराशा, शोक व दुःख के कारण रोग। – (इग्नेशिया 30 या 200, दिन में 3 बार)
● मानसिक परिश्रम करने वाले, चिड़चिडे स्वभाव के रोगी जिन्हें अक्सर कब्ज रहता है – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
● बायोकैमिक औषधि – (काली फॉस 6X या फाइव फॉस 6X)
भूख न लगना – Anorexia
भूख न लगना – Anorexia
लक्षण: खाना हजम न होना, कभी दस्त, कभी कब्ज, मुंह में पानी आना आदि l
● मुख्य दवा; जब कोई खास कारण पता न चले – (लैसिथिन 3X, दिन में 3 बार)
● मसालेदार या गरिष्ठ भोजन अधिक मात्रा में खा लेने के बाद – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)
● भूख न लगना, परन्तु खाना शुरू करने पर भूख का लौट आना – (चाइना 30, दिन में 3 बार)
● थोड़ा सा खाने से हीं पेट भर जाए, गर्म खाना – पीना अच्छा लगे, मीठा खाने की इच्छा, पेट में गैस भरी रहती हो – (लाइकोपोडियम 30, दिन में 3 बार)
● मुंह से वायु निकलना; डकारें, हाथ – पैर ठन्डे, छाती में दर्द – (कार्बो वेज 30, दिन में 3 बार, भोजन से आधे घंटे पहले)
● किसी बीमारी के बाद भूख न लगना – (जैन्शियाना ल्युटिया Q, 5 बूंद पानी में 3 बार)
सादा बुखार – Simple Fever
सादा बुखार – Simple Fever
ठंड लगने, चोट लगने, खाने- पीने या किसी अन्य कारण से बुखार हो जाये तो उसे सादा बुखार कहते हैं l सादा बुखार 103० F तक या इससे भी ज्यादा हो सकता है l
● ठंड लगने से बुखार, प्यास, बेचैनी, मृत्यु का भय – (एकोनाइट 30, हर 2 घंटे पर)
● जब पसीना और प्यास बिलकुल न हो – (जल्सेमियम 30, हर 2 घंटे पर)
● आंख चेहरा लाल, हाथ पैर ठंडे, तेज बुखार के दौरान बच्चा चौंक उठे – (बेलाडोना 30, हर 2 घंटे पर)
● चुपचाप लेटे रहने की इच्छा, हिलने डुलने से रोग बढ़े, रोगी पानी देर से मगर काफी मात्रा में पिए, जीभ सफ़ेद – (ब्रायोनिया 30, हर 2 घंटे पर)
● भीगने के कारण बुखार, शरीर में दर्द, पतले दस्त, जीभ का अगला भाग लाल – (रस टक्स 30, हर 2 घंटे पर)
● ठंडा, बासी खाना या खराब पानी पीने के कारण बुखार, बेचैनी व थोडा थोडा पानी जल्दी जल्दी पीने की इच्छा – (आर्सेनिक 30, हर 2 घंटे पर)
बच्चों के लिए कुछ खास दवाएं – Some important medicines for Children
बच्चों के लिए कुछ खास दवाएं – Some important medicines for Children
● जब बच्चे का विकास बहुत धीमे हो, जैसे चलना, बोलना, दांत निकलना, वजन बढ़ना आदि – (बैराइटा कार्ब 200, या 1M)
● जब अंडकोष नीचे न उतरे – (ऑरम म्यूर नेट्रम 6 या 30)
● जब दूध से एलर्जी हो – (ट्युबरकुलाइनम 200 या 1M)
● बच्चों से खट्टी बू आये – (हिपर सल्फ़ 30, एसिड सल्फ़ 30)
● बच्चा देर से बातचीत करना सीखे – (नैट्रम म्यूर 30)
● बच्चा देर से चलना सीखे – (कल्केरिया कार्ब 200 या 1M)
● कमजोरी के कारण सिर का बोझ न संभाल सके – (ऐथ्युजा 30)
● शारीरिक व मानसिक कमजोरी – (जिन्कम मैट 30)
● डर या सजा के कारण गुमसुम होना – (इग्नेशिया 200 या 1M)
● बच्चे को ठण्ड ज्यादा महसूस हो – (साइलिशिया 200 या 1M)
डर – Fears
डर – Fears
● सड़क पार करने, अकेले रहने, और तूफान से डर – (फॉस्फोरस 30 या 200)
● भीड़ का डर – (अर्जेंटम नाइट्रिकम 30 या 200)
● अंधेरे का डर – (बेलाडोना 30, स्ट्रामोनियम 200, काली ब्रोम 30)
● परीक्षा का डर – (एनाकार्डियम 200, लाइकोपोडियम 200, साइलीशिया 200)
● बच्चों में गोद से या झूले से गिर जाने का डर – (जेलसेमियम 30, बोरेक्स 30)
● पिछली डर वाली बातें याद करके डर लगना – (ओपियम 200)
● ऊंचाई का डर – (अर्जेंटम नाइट्रिकम 200, पल्साटिला 200, स्टेफीसेगिरिया 200)
● बारिश से डर – (इलेप्स कॉर 30, नाजा 30)
● अजनबियों का डर – (बैराइटा कार्ब 200)
● किसी से बात करने, छूने, या देखने का डर – (एंटीम क्रूड 200)
कामेच्छा – Desire
कामेच्छा – Desire
● तीव्र कामेच्छा – (टैरन्टूला हिस्प 200 या 1M)
● जब रोगी एक औरत से संतुष्ट न होकर दाएं बाएं जाए और भोली-भाली औरतों पर बुरी नजर डाले। अपने इष्ट मित्रों व बच्चों से लगाव न हो – (एसिड फ्लोर 200 या 1M)
● रोगी हमेशा बुरे विचारों से घिरा रहे – (स्टेफीसेगेरिया 200 या 1M)
● जब तीव्र कामेच्छा के कारण हस्तमैथून के लिए विवश हो – (ओरिगेनम 30 या 200)
● नामर्दी के लक्षणों के साथ तीव्र कामेच्छा – (कैलेडियम 30)
● शराबियों में – (नक्स वोमिका 30 या 200)
● विचार मात्र से वीर्य पतन – (कोनियम 30 या 200)
● न चाहते हुए भी काम वासना पूर्ण विचार व लिंग में तनाव – (फॉस्फोरस 30 या 200)
● आदमियों में लड़कों के साथ काम वासना, समलैंगिक सहवास – (प्लैटिना 200 या 1M)
कोढ़ – Leprosy
कोढ़ – Leprosy
इस रोग में त्वचा पर धब्बे (सफेद या गुलाबी सा) आ जाते हैं। जिनमें धीरे-धीरे संवेदना खत्म हो जाती है, और वह हिस्सा गलने लगता है।
● मुख़्य औषधि (इलाज शुरू करने के लिए) – (सल्फर C M, 2-3 खुराक)
● इस रोग की दूसरी मुख्य दवा। इसमें त्वचा बहुत मोटी हो जाती है व त्वचा से छिछड़े (Scale) से झड़ते हैं – (हाइड्रोकोटाइल 30, दिन में 3 बार)
● अन्य दवाइयों के साथ यह औषधि 15-20 दिन में 1 बार दें – (वैसीलिनम 200, कुछ महीनों तक)
● जब फटी हुई त्वचा में से चिपचिपा स्राव निकले – (ग्रेफाइटिस 30, दिन में 3 बार)
● कोढ़ के साथ शरीर पर उपदंश (Syphilis) के दानें व चकत्ते हों – (थायरोएडिन 200 व सिफिलिनम 1M, 2-3 खुराक)
खाने पीने की चीजों से रोग वृद्धि
खाने पीने की चीजों से रोग वृद्धि – Aggravation from food and drinks
● मटर व फलियों से रोग वृद्धि – (पेट्रोलियम 30, फेरम फॉस 30, पल्साटिला 30, सीपिया 30, ब्रायोनिया 30, कैल्केरिया कार्ब 30, चाइना 30, काली कार्ब 30, लाइकोपोडियम 30)
● छाछ (मट्ठा) पीने से रोग वृद्धि – (पल्साटिला 30, सीपिया 30)
● पत्तागोभी खाने से रोग वृद्धि – (ब्रायोनिया 30, चाइना 30, लाइकोपोडियम 30, पेट्रोलियम 30, फॉस्फोरस 30, पल्साटिला 30)
● गाजर खाने से रोग वृद्धि – (कैल्केरिया कार्ब 30)
● गंदा पानी पीने से रोग वृद्धि – (लाइकोपोडियम 30, कैम्फर Q, जिंजिबर 30)
● अंडा खाने से रोग वृद्धि – (कैल्केरिया कार्ब 30, कॉलचिकम 30, पल्साटिला 30, सल्फर 30)
● अंडों की गंध से रोग वृद्धि – (कॉलचिकम 30, फेरम आर्स 30)
● खट्टी चीजों से रोग वृद्धि – (लैकेसिस 30, नैट्रम कार्ब 30)
● शहद खाने से रोग वृद्धि – (फॉस्फोरस 30, ब्रायोनिया 30)
● गर्म चीज खाने से रोग वृद्धि – (पल्साटिला 30)
● आइसक्रीम खाने से रोग वृद्धि – (आर्सेनिक एल्ब 30)
● मांस की गंध से रोग वृद्धि – (आर्सेनिक एल्ब 30, कॉलचिकम 30)
● मुर्गे का मांस (Chicken) खाने से रोग वृद्धि – (नक्स वोमिका 30)
● तरबूज खाने से रोग वृद्धि – (एसिड फ्लोर 30, जिंजिबर 30)
● ठंडा दूध पीने से रोग वृद्धि – (काली आयोडाइड 30)
● गर्म दूध पीने से रोग वृद्धि – (सीपिया 30)
● माँ का दूध पीने से रोग वृद्धि – (सिना 30, नैट्रम कार्ब 30, साइलीशिया 30)
● घी, तेल, चिकनाई खाने से रोग वृद्धि – (पल्साटिला 30)
● काली मिर्च खाने से रोग वृद्धि – (आर्सेनिक एल्ब 30, चाइना 30, सिना 30, नक्स वोमिका 30, सीपिया 30)
● आलू खाने से रोग वृद्धि – (एल्युमिना 30, पल्साटिला 30, मर्क सॉल 30, सीपिया 30)
● मिर्च-मसाले वाला खाना खाने से रोग वृद्धि – (नक्स वोमिका 30)
● स्ट्रॉबेरी खाने से रोग वृद्धि – (सीपिया 30)
● मीठा खाने से रोग वृद्धि – (अर्जेंटम नाइट्रिकम 30, कैमोमिला 30, नैट्रम कार्ब 30)
● चाय पीने से रोग वृद्धि – (चाइना 30, कॉफिया 30, सीपिया 30)
गले मे दर्द – Pain in Throat
गले मे दर्द – Pain in Throat
गले मे दर्द स्वरयंत्र (larynx) या टॉन्सिल (tonsil) में सूजन आ जाने के कारण होता है।
कारण : सर्दी लगना, चोट लगना, ज्यादा तेज बोलना, आबो हवा बदलना आदि।
लक्षण : गला में दर्द, बुखार, आवाज बैठना, निगलने मे दर्द या कष्टआदि।
● अचानक सूखी ठंड लगने के कारण गले मे दर्द, तेज बुखार, बेचैनी – (एकोनाइट 30, दिन में 3 बार)
● गला लाल, सूजा हुआ, निगलने में परेशानी, गले मे सुई गड़ने जैसा दर्द – (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)
● गला सूजा हुआ, सूजी हुई जगह चमकीली, लाल; प्यास न हो, गले मे डंक मारने जैसा दर्द – (एपिस मेल 30, दिन में 3 बार)
● गला पकने से मवाद हो जाए और दर्द हो – (हिपर सल्फ 30, दिन में 3 बार)
● गले मे दर्द; बहुत लार आए, मवाद बनने की पहली अवस्था में – (मर्क सॉल 30, दिन में 3 बार)
● गले मे दर्द, जो ठंडी चीजें पीने से घटे – (फाइटोलक्का 30, दिन में 3 बार)
● जब गले को ढकना या लपेटना असह्य हो – (लैकेसिस 30, दिन में 3 बार)
छोटी माता – Chicken Pox
छोटी माता – Chicken Pox
यह ज्वर तथा फैलने वाली छूत की बीमारी है l इसमें अनेक पारदर्शी स्राव भरे दाने होते हैं l
● रोग के शुरू होने पर तेज बुखार व बेचैनी – (एकोनाइट Aconite 6 या 30, दिन में 4 बार)
● सिर में बहुत रक्त संचय हो और तेज सिर दर्द – (बेलाडोना Belladonna 6 या 30, दिन में 4 बार)
● दानों में जब बहुत खुजली हो – (रस टाक्स Rhus Tox 6X या 30, दिन में 3 बार)
● बायोकैमिक दवा – ( फेरम फास Kali Mur 6X व काली म्यूर 6X)
जीभ के विकार – Tongue affection of
जीभ के विकार – Tongue affection of
● जीभ मोटी व थुलथुली हो एवं उस पर दांतो के निशान पड़े हों, लार आए, सफेद मैल जमी हो- (मर्क सॉल 30, दिन में 3 बार)
● जब जीभ पर घाव हो जाए, खिचाव हो- (बोरेक्स Borax 30 या 200, दिन में 3 बार)
● मुंह में व जीभ पर घाव; खून बहता रहे। मुंह से दुर्गंध आए- (एसिड सल्फ Acid Sulph 30 या 200, दिन में 3 बार)
● जीभ बहुत लंबी मालूम दे जैसे दातों में लग रही है। गले में घाव, मुंह बहुत सुखा, निगलने में परेशानी हो- (एथ्यूजा Ethuja 30 या 200, दिन में 3 बार)
● जीभ पर घाव हो जो धीरे-धीरे गले में फैल जाए, जीभ बीच मे फटी हुई हो। लगातार खून मिला लार टपके। मुंह से बदबू आए- (एसिड नाइट्रिक Nitric Acid 30 या 200, दिन में 3 बार)
● जीभ नक्शे की तरह चित्रित हो एवं ऐसा लगे जैसे कि जीभ पर बाल पड़ा है- (नैट्रम म्यूर Natrum Mur 30 या 200, दिन में 2 बार)
● ऐसा लगे जैसे जीभ जली हुई है टपकन का सा दर्द महसूस हो- (बेलाडोना Beladonna30 या 200, दिन में 3 बार)
● जीभ की नोक पर घाव हो- (फाइटोलक्का Phytolacca 30 या 200, दिन में 3 बार)
● जीभ की नोक त्रिभुजाकार लाल रंग की हो- (रस टॉक्स Rhus Tox 30 या 200, दिन में 3 बार)
बोरिक एसिड Boric Acid 20 ग्रेन, 1 औंस ग्लिसरीन में मिलाकर जीभ पर बाहरी प्रयोग से लाभ होता है।
जीभ व मुंह के छाले – Aphthae
जीभ व मुंह के छाले – Aphthae
आमतौर पर कब्ज होने की वजह से मुंह व जीभ में छाले हो जाते हैं l
● हिपर सल्फ़ 30- मुंह में छाले, जिनमे बहुत दर्द हो – (दिन में 3 बार)
● बोरेक्स 30- बच्चों के मुंह में छाले – (दिन में 3 बार)
● मर्क सौल 30- बहुत लार आना, जीभ मोटी हो जाना – (दिन में 3 बार)
● नाइट्रिक एसिड 3 या हिपर सल्फ़ 30- जीभ में छाले – (दिन में 3-4 बार)
● नेट्रम म्यूर 6X- जीभ व मुंह के छाले का बायोकेमिक दवा – (4 गोली दिन में 3 बार)
नेट्रम फ़ॉस 6X व काली म्यूर 6X मिलाकर लेने से विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स की कमी की पूर्ती होती है व छालों में आराम मिलता है l