उल्लू वाली अंगूठी को सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं माना जाता, बल्कि धार्मिक मान्यताओं में इसे धन, सौभाग्य और बुद्धिमत्ता से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि सही उंगली, धातु और दिन का ध्यान रखकर इसे धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो सकता है। Read More
धार्मिक मान्यताओं में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। धन-संपदा और घर की सुख-शांति की कामना से इस दिन पूजा, मंत्र-जाप और कुछ पारंपरिक उपाय किए जाते हैं। Read More
बुधदेव 22 अगस्त 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिष में बुध को बातचीत, बुद्धि, व्यापार, पढ़ाई, वाणी और फैसले लेने की क्षमता का कारक माना जाता है। सिंह राशि में बुध के प्रवेश को आत्मविश्वास और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस गोचर का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग पड़ सकता है। वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन राशि के जातकों को इस दौरान धन, बातचीत, घर, करियर और कागजी मामलों में बिना सोचे-समझे फैसला लेने से बचने की सलाह दी गई है। Read More
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और सोमवार व्रत करने वाले भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। शिव भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल चढ़ाकर भोलेनाथ से सुख-शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
साल 2026 में सावन का चौथा और आखिरी सोमवार 24 अगस्त को पड़ रहा है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन एक साथ 5 शुभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे में सोमवार व्रत, शिव पूजा और रुद्राभिषेक करने वाले भक्तों के लिए यह दिन खास माना जा रहा है।
24 अगस्त 2026 को सावन का चौथा सोमवार होगा। इस दिन सावन सोमवार के साथ कई धार्मिक और ज्योतिषीय संयोग बनने की बात कही गई है, जिससे भगवान शिव की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। Read More
शनि बहुत धीमी चाल चलते हैं, इसलिए उनका छोटा-सा स्थान परिवर्तन भी ज्योतिष में विशेष माना जाता है। 20 अगस्त 2026, बृहस्पतिवार को शाम 7 बजकर 45 मिनट पर वक्री शनि रेवती नक्षत्र के दूसरे पद से निकलकर इसके पहले पद में प्रवेश करेंगे। यह बदलाव इसलिए खास है क्योंकि शनि नक्षत्र नहीं बदल रहे हैं, बल्कि वक्री चाल के कारण उसी रेवती नक्षत्र के पिछले चरण में लौट रहे हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका असर 12 राशियों पर अलग-अलग पड़ सकता है। मेष, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए यह बदलाव अधिक ध्यान देने योग्य माना जा रहा है, क्योंकि इन राशियों के लोग इस समय शनि की साढ़ेसाती के अलग-अलग चरणों से गुजर रहे हैं।
ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज के अनुसार रेवती बुध का नक्षत्र है। इसे यात्रा, समापन, सुरक्षा और जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता खोजने से जुड़ा माना जाता है, जबकि शनि कर्म, अनुशासन, जिम्मेदारी और देरी के कारक हैं। Read More
शनिदेव को हिंदू धर्म शास्त्रों में कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 20 अगस्त 2026 को शनिदेव ने रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश किया है। शनि की धीमी गति के कारण उनके राशि और नक्षत्र परिवर्तन को ज्योतिष में विशेष माना जाता है, क्योंकि इसका असर करियर, आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत जीवन पर अलग-अलग रूप में पड़ने की मान्यता है।
इस समय मेष, कुंभ और मीन राशि के जातक शनि की साढ़ेसाती के अलग-अलग चरणों से गुजर रहे हैं। ऐसे में 20 अगस्त के शनि नक्षत्र परिवर्तन को इन तीन राशियों के लिए खास माना जा रहा है और ज्योतिषीय गणना के अनुसार कुछ मामलों में राहत मिलने की संभावना जताई गई है। Read More
ज्योतिष में बुधदेव को बुद्धि, संवाद, व्यापार, पढ़ाई, वाणी और तकनीक का मुख्य कारक माना जाता है। 18 अगस्त 2026 को सिंह राशि में सूर्यदेव के पास आने के कारण बुधदेव अस्त होने जा रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध के अस्त होने पर उनका सामान्य प्रभाव कुछ धीमा पड़ सकता है।
इस अवधि में बातचीत के दौरान भ्रम की स्थिति बन सकती है। जरूरी कामों में देरी और पैसों की योजना बनाने में रुकावट आ सकती है। पढ़ाई, व्यापार, लेखन, हिसाब-किताब और तकनीक से जुड़े लोगों को काम करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।
हर राशि पर इसका असर एक जैसा नहीं माना गया है। मेष, कर्क, वृश्चिक, तुला, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए बुध का यह बदलाव करियर, धन, शिक्षा और व्यक्तिगत प्रगति के लिहाज से शुभ परिणाम दे सकता है। Read More
वैदिक ज्योतिष में बुधदेव को बुद्धि, संवाद, व्यापार, पढ़ाई, वाणी और तकनीक का मुख्य कारक माना जाता है। मंगलवार को सिंह राशि में सूर्यदेव के पास आने के कारण बुधदेव अस्त हो जाएंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध के अस्त होने पर उनका सामान्य प्रभाव कुछ धीमा पड़ सकता है, जिसका असर बातचीत, कामकाज और आर्थिक योजनाओं से जुड़े मामलों में दिखाई दे सकता है।
इस अवधि में आपसी बातचीत के दौरान गलतफहमी पैदा हो सकती है और जरूरी कामों में देरी हो सकती है। पढ़ाई, व्यापार, लेखन, हिसाब-किताब और तकनीक से जुड़े लोगों को अपने काम में ज्यादा सावधानी रखनी होगी। जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना और जरूरी कागजों को ध्यान से जांचना खास रहेगा।
मिथुन, सिंह, कन्या, वृषभ, मकर और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। साफ शब्दों में बातचीत करना और किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी शर्तें पढ़ना इस अवधि में जरूरी रहेगा। Read More
ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार 20 अगस्त 2026 को शाम 7 बजकर 45 मिनट पर शनिदेव रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश करेंगे और 9 अक्टूबर 2026 तक इसी स्थिति में रहेंगे। शनि के इस नक्षत्र परिवर्तन का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग माना जाता है, लेकिन साढ़ेसाती से गुजर रहे जातकों के लिए यह अवधि खास मानी जा रही है।
वर्तमान में मेष, कुंभ और मीन राशि के जातक शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव में बताए गए हैं। 20 अगस्त से 9 अक्टूबर के बीच इन तीनों राशियों के लोगों को नौकरी, कारोबार, धन और निजी जीवन से जुड़े फैसलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। Read More
साल 2026 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। खगोलीय गणना के अनुसार, भारतीय समयानुसार ग्रहण की आंशिक अवस्था सुबह करीब 8:04 बजे शुरू होगी और 11:22 बजे तक रहेगी। ग्रहण का चरम समय सुबह 9:43 बजे बताया गया है।
भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसी वजह से भारतीय क्षेत्र में इसका सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं में ग्रहण को चंद्रमा से जुड़े विषयों के लिहाज से अहम माना जाता है और कुछ राशियों के जातकों को इस अवधि में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। Read More
न्याय और कर्म के कारक माने जाने वाले शनि 20 अगस्त 2026 की शाम 7 बजकर 45 मिनट पर वक्री अवस्था में रेवती नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश करेंगे। शनि इस समय मीन राशि में स्थित हैं। रेवती मीन राशि का अंतिम नक्षत्र है और इसके स्वामी बुध हैं।
शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन 20 अगस्त से 9 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद वक्री शनि दोबारा उत्तराभाद्रपद के चतुर्थ पद में लौट जाएंगे।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार वक्री शनि उन मामलों को दोबारा सामने ला सकते हैं जिन्हें व्यक्ति पहले अधूरा छोड़ चुका है। नौकरी, कारोबार, आर्थिक जिम्मेदारियों, परिवार या पुराने फैसलों से जुड़ी स्थिति फिर चर्चा में आ सकती है। इस दौरान जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है। Read More
गुरु कर्क राशि में उच्च के माने जाते हैं, लेकिन हर राशि के लिए इसका परिणाम एक जैसा नहीं माना जाता। अश्लेषा कर्क राशि में 16 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री तक फैला नक्षत्र है और इसके स्वामी बुध हैं। ज्योतिष में अश्लेषा को गहरी सोच, रणनीति, मनोवैज्ञानिक समझ और परिस्थितियों की तह तक जाने से जोड़ा जाता है।
गुरु ज्ञान, शिक्षा, सलाह, संतान, धन और भाग्य के कारक माने जाते हैं। ऐसे में बुध के नक्षत्र में गुरु का प्रवेश ज्ञान के साथ तर्क और रणनीति को जोड़ सकता है। सही स्थिति में यह बेहतर निर्णय में मदद कर सकता है, जबकि चुनौतीपूर्ण स्थिति में भ्रम, अधिक सोच-विचार और आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। Read More
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार व्यक्ति के करियर और सफलता को समझने के लिए कुंडली में कई ग्रहों की स्थिति देखी जाती है। इनमें सूर्य, बुध, बृहस्पति और शनि को विशेष महत्व दिया जाता है।
इन ग्रहों को अलग-अलग क्षेत्रों से जोड़ा जाता है। सूर्य नेतृत्व और प्रतिष्ठा, बुध बुद्धि और व्यापार, गुरु ज्ञान और अवसर, जबकि शनि मेहनत और स्थिरता का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है।
हालांकि केवल किसी एक ग्रह की स्थिति के आधार पर करियर का पूरा आकलन नहीं किया जाता। ज्योतिष में ग्रह किस भाव में स्थित हैं और किन भावों से उनका संबंध बन रहा है, इसे भी परिणामों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। Read More
ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान, नेतृत्व, पिता, सरकारी सेवा और करियर का कारक माना जाता है। सूर्य हर महीने राशि परिवर्तन करते हैं और इस राशि परिवर्तन को सूर्य संक्रांति कहा जाता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, 17 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजकर 3 मिनट पर सूर्य कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह सूर्य की स्वराशि है, इसलिए इस गोचर को ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है।
सूर्य को ग्रहों का अधिपति और राजा भी माना जाता है। ऐसे में अपनी राशि में सूर्य की मौजूदगी को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। Read More