गणेश चतुर्थी 2026 का पर्व 14 सितंबर से शुरू होगा। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणपति स्थापना के बाद बप्पा को डेढ़ दिन, 3, 5, 7 या 10 दिन तक घर में रखने की अलग-अलग परंपराएं हैं। जानिए किस अवधि में गणपति की पूजा और विसर्जन किया जाता है और क्या 10 दिन तक बप्पा को रखना जरूरी है। Read More
सितंबर के आखिर में बुधदेव राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 26 सितंबर को बुध कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे। बुध और शुक्र के मित्रतापूर्ण संबंध के कारण इस गोचर को व्यापार, नौकरी और आर्थिक मामलों के लिए अनुकूल माना जा रहा है। खास तौर पर कन्या, तुला, मेष और कुंभ राशि के जातकों को लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। Read More
कैंची धाम वाले नीम करौली बाबा को भक्त हनुमान जी का साक्षात अवतार मानते हैं, लेकिन उनकी भक्ति केवल हनुमान उपासना तक सीमित नहीं थी। बाबा भगवान श्रीराम, माता सीता, श्रीकृष्ण, मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं के नाम स्मरण को भी ईश्वर से जुड़ने का सरल माध्यम मानते थे। Read More
गणेश चतुर्थी इस साल 14 सितंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने से पहले उसकी सूंड की दिशा, मुद्रा, रंग, आकार और स्वरूप का ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि सही स्वरूप की गणेश प्रतिमा घर में सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक बनती है। Read More
सितंबर 2026 में मंगल कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से देवगुरु बृहस्पति मौजूद हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु-मंगल की यह युति कुछ राशियों के लिए नीचभंग राजयोग का निर्माण कर सकती है। मेष, वृषभ, कर्क और तुला राशि वालों को करियर, धन और तरक्की से जुड़े मामलों में लाभ मिलने के संकेत हैं। Read More
गणेशोत्सव 2026 की शुरुआत 14 सितंबर से होगी और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन होगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में गणेश जी की स्थापना की दिशा, प्रतिमा का मुख और पूजा स्थल को विशेष महत्व दिया गया है। वहीं ज्योतिषीय मान्यताओं में गणपति का संबंध बुध ग्रह से जोड़ा जाता है। ऐसे में घर में बप्पा की स्थापना करते समय इन नियमों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है। Read More
गणेश चतुर्थी 2026 का पर्व 14 सितंबर से शुरू होगा। ज्योतिष और आध्यात्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, शुभता और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। गणपति का संबंध शरीर के मूलाधार चक्र से भी जोड़ा जाता है। ऐसे में गणेश चतुर्थी पर राशि के अनुसार गणेश जी की पूजा और मंत्र जाप को विशेष फलदायी माना जाता है। Read More
साल 2026 में पितरों को समर्पित पितृपक्ष की शुरुआत पंचक के बीच होगी। 26 सितंबर से पितृपक्ष शुरू होगा, जबकि पंचक का प्रभाव 28 सितंबर की सुबह तक रहेगा। ऐसे में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि पंचक के दौरान ये कर्म किए जा सकते हैं या नहीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केवल पंचक होने के कारण श्राद्ध की तिथि बदलना उचित नहीं माना जाता। Read More
पंचांग के अनुसार, शुक्र ग्रह 11 सितंबर 2026, शुक्रवार की रात 11 बजकर 19 मिनट पर स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष में शुक्र को सुख, प्रेम, धन, सौंदर्य और भौतिक सुविधाओं का कारक माना जाता है। स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु हैं और इसकी राशि तुला है, जिसके स्वामी स्वयं शुक्र हैं। ऐसे में शुक्र का स्वाति नक्षत्र में प्रवेश ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है। Read More
तुलसी की माला को भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की भक्ति, पवित्रता और सात्विक जीवन का प्रतीक माना जाता है। इसे पहनने वालों के लिए खान-पान और आचरण से जुड़े कई धार्मिक नियम बताए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि तुलसी की माला पहनकर प्याज-लहसुन खाने से क्या पाप लगता है और क्या भोजन के समय माला उतारनी चाहिए? अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में इसे लेकर अलग मान्यताएं मिलती हैं। Read More
सूर्य देव 17 सितंबर 2026 को सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। सुबह 7:50 बजे होने वाला यह गोचर करीब एक महीने तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनेगा, जिसका असर मेष, धनु और मकर राशि के जातकों के करियर, धन और कारोबार पर शुभ रह सकता है। Read More
7 सितंबर 2026 को बुधदेव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कन्या बुध की अपनी और उच्च राशि है, इसलिए यहां बुध को मजबूत माना जाता है। इसका असर सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ेगा। खासकर तुला, कुंभ और मीन राशि वालों को खर्च, निवेश, दस्तावेज, साझेदारी और रिश्तों के मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। Read More
शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता कहा गया है। लेकिन क्या घर के मंदिर में शनिदेव की मूर्ति रखकर आरती करनी चाहिए? मान्यताओं में इसके लिए कुछ अलग नियम बताए गए हैं। Read More
अंक ज्योतिष में मूलांक 6 का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है। 2 सितंबर 2026 को शुक्र अपनी स्वराशि तुला में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस बदलाव का असर 6, 15 और 24 तारीख को जन्मे लोगों पर खास तौर पर देखा जा सकता है। आर्थिक अवसरों, रिश्तों, कामकाज और सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। Read More
2 सितंबर 2026 को शुक्रदेव अपनी ही राशि तुला में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह गोचर प्रेम, विवाह, साझेदारी, धन, कला और सामाजिक संबंधों से जुड़े मामलों को प्रभावित करेगा। मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ राशि के जातकों के लिए इसे खास तौर पर शुभ माना जा रहा है। Read More
ज्योतिष शास्त्र में माणिक्य यानी रूबी को सूर्य का प्रमुख रत्न माना जाता है। मान्यता है कि इसे धारण करने से आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, मान-सम्मान और प्रतिष्ठा से जुड़े लाभ मिल सकते हैं। हालांकि, माणिक्य हर व्यक्ति के लिए शुभ हो, यह जरूरी नहीं है। कुंडली में सूर्य की स्थिति देखकर ही इसे पहनने की सलाह दी जाती है। Read More
सितंबर 2026 अंक 9 के प्रभाव वाला महीना माना गया है। अंक ज्योतिष के अनुसार यह समय पुराने काम पूरे करने, रिश्तों में आई दूरियां कम करने और जल्दबाजी से बचकर आगे बढ़ने का है। मूलांक 1 से 9 तक के जातकों के लिए करियर, धन, परिवार और स्वास्थ्य को लेकर अलग-अलग संकेत दिए गए हैं। Read More
हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। इसी वजह से शनिवार को कुछ कामों और आदतों से बचने तथा शाम के समय कुछ धार्मिक उपाय करने का विशेष महत्व बताया गया है। ये भी पढ़ें
2 सितंबर 2026 को शुक्र कन्या राशि से निकलकर अपनी राशि तुला में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे प्रेम, विवाह, साझेदारी, धन, करियर और सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों को बल मिल सकता है। इस गोचर का सबसे ज्यादा असर मेष, मिथुन, तुला, धनु, कुंभ और मकर राशि वालों पर शुभ माना जा रहा है। Read More
सावन पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को मनाई जा रही है। इस बार इसी दिन रक्षाबंधन भी है और शुक्रवार का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सावन पूर्णिमा की रात लौंग से जुड़े कुछ उपाय धन लाभ, अटके पैसे और घर की नकारात्मकता दूर करने के लिए किए जाते हैं। Read More
घर या जमीन खरीदना बड़ा आर्थिक फैसला है। ज्योतिष और वास्तु की मान्यताओं में संपत्ति खरीदते समय वार, तिथि, नक्षत्र और राहुकाल का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। सितंबर 2026 में जमीन खरीदने के लिए 11, 17, 18 और 25 सितंबर की तारीखें अनुकूल मानी गई हैं। Read More
28 अगस्त 2026 को साल का आखिरी आंशिक चंद्र ग्रहण लगा है। यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में हुआ, लेकिन भारत के ज्यादातर हिस्सों में चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहने के कारण दिखाई नहीं देगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग पड़ सकता है। Read More
रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्न, गुड़, वस्त्र और काले तिल का दान करने की परंपरा है, जिसे भाई की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संकटों से रक्षा से जोड़कर देखा जाता है। Read More
रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को साल का आखिरी आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा और सूतक भी मान्य नहीं होगा, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के बाद स्नान, पूजा और जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है। Read More
वास्तु मान्यताओं में घर के दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण को स्थिरता और भारीपन से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिशा में पानी का स्रोत, पूजा घर, रसोई या शौचालय होने से वास्तु असंतुलन हो सकता है, जबकि मास्टर बेडरूम, भारी अलमारी और जरूरी दस्तावेज रखने को अनुकूल माना जाता है। #VastuTips #VastuShastra #HomeVastu
शुक्र 25 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजकर 55 मिनट पर चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 11 सितंबर तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। इस दौरान 2 सितंबर को शुक्र कन्या से निकलकर अपनी राशि तुला में पहुंच जाएंगे, जिससे वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और मकर राशि के जातकों के लिए धन, करियर, रिश्तों और कामकाज से जुड़े अलग-अलग फल माने जा रहे हैं।
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25 अगस्त 2026 को शुक्र ग्रह हस्त नक्षत्र से निकलकर मंगल के स्वामित्व वाले चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र परिवर्तन का असर धन, करियर, व्यापार और रिश्तों से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है, जबकि मेष, वृषभ, वृश्चिक और मीन राशि के लिए नए अवसर बनने की संभावना जताई जा रही है।
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रक्षाबंधन 2026 इस बार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा और त्योहार से एक दिन पहले 27 अगस्त को पंचक शुरू हो जाएगा। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि पंचक के दौरान राखी बांधना शुभ है या नहीं और किन कामों से बचना चाहिए।
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24 अगस्त 2026 को सावन का आखिरी सोमवार और वैष्णव परंपरा की पुत्रदा एकादशी एक ही दिन पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना के साथ दीपदान का विशेष महत्व है, जबकि गृहस्थ परंपरा में पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को रखा जा रहा है।
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22 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजकर 1 मिनट पर सूर्य और शनि के बीच 135 डिग्री का तनावपूर्ण ज्योतिषीय संबंध बना। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका असर काम, जिम्मेदारियों, वरिष्ठों से संबंध, खर्च और मानसिक दबाव पर पड़ सकता है। मेष, सिंह, तुला, मकर और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। #Rashifal2026 #SuryaShani #Astrology
साल 2026 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्रमा कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में रहेगा, लेकिन ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी वजह से भारत में सूतक, पूजा-पाठ और रक्षाबंधन पर इसका असर नहीं माना जा रहा है। #ChandraGrahan2026 #LunarEclipse #Astrology Read More
चंद्रमा 22 अगस्त 2026 को धनु राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस चंद्र गोचर का असर मेष, सिंह, तुला और धनु राशि के जातकों के करियर, धन, नौकरी और निजी जीवन पर सकारात्मक रूप से पड़ सकता है। #ChandraGochar #Rashifal2026 #Astrology
21 अगस्त 2026 की सुबह 10 बजकर 33 मिनट पर बुध और मंगल 45 डिग्री के कोण पर आ गए हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे अर्धकेंद्र योग की तनावपूर्ण स्थिति माना जाता है, जिसका असर जल्दबाजी, विवाद, गलतफहमी और आर्थिक फैसलों पर पड़ने की बात कही गई है। Read More
उल्लू वाली अंगूठी को सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं माना जाता, बल्कि धार्मिक मान्यताओं में इसे धन, सौभाग्य और बुद्धिमत्ता से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि सही उंगली, धातु और दिन का ध्यान रखकर इसे धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो सकता है। Read More
धार्मिक मान्यताओं में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। धन-संपदा और घर की सुख-शांति की कामना से इस दिन पूजा, मंत्र-जाप और कुछ पारंपरिक उपाय किए जाते हैं। Read More
बुधदेव 22 अगस्त 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिष में बुध को बातचीत, बुद्धि, व्यापार, पढ़ाई, वाणी और फैसले लेने की क्षमता का कारक माना जाता है। सिंह राशि में बुध के प्रवेश को आत्मविश्वास और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस गोचर का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग पड़ सकता है। वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन राशि के जातकों को इस दौरान धन, बातचीत, घर, करियर और कागजी मामलों में बिना सोचे-समझे फैसला लेने से बचने की सलाह दी गई है। Read More
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और सोमवार व्रत करने वाले भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। शिव भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल चढ़ाकर भोलेनाथ से सुख-शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
साल 2026 में सावन का चौथा और आखिरी सोमवार 24 अगस्त को पड़ रहा है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन एक साथ 5 शुभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे में सोमवार व्रत, शिव पूजा और रुद्राभिषेक करने वाले भक्तों के लिए यह दिन खास माना जा रहा है।
24 अगस्त 2026 को सावन का चौथा सोमवार होगा। इस दिन सावन सोमवार के साथ कई धार्मिक और ज्योतिषीय संयोग बनने की बात कही गई है, जिससे भगवान शिव की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। Read More
शनि बहुत धीमी चाल चलते हैं, इसलिए उनका छोटा-सा स्थान परिवर्तन भी ज्योतिष में विशेष माना जाता है। 20 अगस्त 2026, बृहस्पतिवार को शाम 7 बजकर 45 मिनट पर वक्री शनि रेवती नक्षत्र के दूसरे पद से निकलकर इसके पहले पद में प्रवेश करेंगे। यह बदलाव इसलिए खास है क्योंकि शनि नक्षत्र नहीं बदल रहे हैं, बल्कि वक्री चाल के कारण उसी रेवती नक्षत्र के पिछले चरण में लौट रहे हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका असर 12 राशियों पर अलग-अलग पड़ सकता है। मेष, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए यह बदलाव अधिक ध्यान देने योग्य माना जा रहा है, क्योंकि इन राशियों के लोग इस समय शनि की साढ़ेसाती के अलग-अलग चरणों से गुजर रहे हैं।
ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज के अनुसार रेवती बुध का नक्षत्र है। इसे यात्रा, समापन, सुरक्षा और जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता खोजने से जुड़ा माना जाता है, जबकि शनि कर्म, अनुशासन, जिम्मेदारी और देरी के कारक हैं। Read More
शनिदेव को हिंदू धर्म शास्त्रों में कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 20 अगस्त 2026 को शनिदेव ने रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश किया है। शनि की धीमी गति के कारण उनके राशि और नक्षत्र परिवर्तन को ज्योतिष में विशेष माना जाता है, क्योंकि इसका असर करियर, आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत जीवन पर अलग-अलग रूप में पड़ने की मान्यता है।
इस समय मेष, कुंभ और मीन राशि के जातक शनि की साढ़ेसाती के अलग-अलग चरणों से गुजर रहे हैं। ऐसे में 20 अगस्त के शनि नक्षत्र परिवर्तन को इन तीन राशियों के लिए खास माना जा रहा है और ज्योतिषीय गणना के अनुसार कुछ मामलों में राहत मिलने की संभावना जताई गई है। Read More
ज्योतिष में बुधदेव को बुद्धि, संवाद, व्यापार, पढ़ाई, वाणी और तकनीक का मुख्य कारक माना जाता है। 18 अगस्त 2026 को सिंह राशि में सूर्यदेव के पास आने के कारण बुधदेव अस्त होने जा रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध के अस्त होने पर उनका सामान्य प्रभाव कुछ धीमा पड़ सकता है।
इस अवधि में बातचीत के दौरान भ्रम की स्थिति बन सकती है। जरूरी कामों में देरी और पैसों की योजना बनाने में रुकावट आ सकती है। पढ़ाई, व्यापार, लेखन, हिसाब-किताब और तकनीक से जुड़े लोगों को काम करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।
हर राशि पर इसका असर एक जैसा नहीं माना गया है। मेष, कर्क, वृश्चिक, तुला, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए बुध का यह बदलाव करियर, धन, शिक्षा और व्यक्तिगत प्रगति के लिहाज से शुभ परिणाम दे सकता है। Read More
वैदिक ज्योतिष में बुधदेव को बुद्धि, संवाद, व्यापार, पढ़ाई, वाणी और तकनीक का मुख्य कारक माना जाता है। मंगलवार को सिंह राशि में सूर्यदेव के पास आने के कारण बुधदेव अस्त हो जाएंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध के अस्त होने पर उनका सामान्य प्रभाव कुछ धीमा पड़ सकता है, जिसका असर बातचीत, कामकाज और आर्थिक योजनाओं से जुड़े मामलों में दिखाई दे सकता है।
इस अवधि में आपसी बातचीत के दौरान गलतफहमी पैदा हो सकती है और जरूरी कामों में देरी हो सकती है। पढ़ाई, व्यापार, लेखन, हिसाब-किताब और तकनीक से जुड़े लोगों को अपने काम में ज्यादा सावधानी रखनी होगी। जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना और जरूरी कागजों को ध्यान से जांचना खास रहेगा।
मिथुन, सिंह, कन्या, वृषभ, मकर और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। साफ शब्दों में बातचीत करना और किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी शर्तें पढ़ना इस अवधि में जरूरी रहेगा। Read More
ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार 20 अगस्त 2026 को शाम 7 बजकर 45 मिनट पर शनिदेव रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश करेंगे और 9 अक्टूबर 2026 तक इसी स्थिति में रहेंगे। शनि के इस नक्षत्र परिवर्तन का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग माना जाता है, लेकिन साढ़ेसाती से गुजर रहे जातकों के लिए यह अवधि खास मानी जा रही है।
वर्तमान में मेष, कुंभ और मीन राशि के जातक शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव में बताए गए हैं। 20 अगस्त से 9 अक्टूबर के बीच इन तीनों राशियों के लोगों को नौकरी, कारोबार, धन और निजी जीवन से जुड़े फैसलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। Read More
साल 2026 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। खगोलीय गणना के अनुसार, भारतीय समयानुसार ग्रहण की आंशिक अवस्था सुबह करीब 8:04 बजे शुरू होगी और 11:22 बजे तक रहेगी। ग्रहण का चरम समय सुबह 9:43 बजे बताया गया है।
भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसी वजह से भारतीय क्षेत्र में इसका सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं में ग्रहण को चंद्रमा से जुड़े विषयों के लिहाज से अहम माना जाता है और कुछ राशियों के जातकों को इस अवधि में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। Read More
न्याय और कर्म के कारक माने जाने वाले शनि 20 अगस्त 2026 की शाम 7 बजकर 45 मिनट पर वक्री अवस्था में रेवती नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश करेंगे। शनि इस समय मीन राशि में स्थित हैं। रेवती मीन राशि का अंतिम नक्षत्र है और इसके स्वामी बुध हैं।
शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन 20 अगस्त से 9 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद वक्री शनि दोबारा उत्तराभाद्रपद के चतुर्थ पद में लौट जाएंगे।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार वक्री शनि उन मामलों को दोबारा सामने ला सकते हैं जिन्हें व्यक्ति पहले अधूरा छोड़ चुका है। नौकरी, कारोबार, आर्थिक जिम्मेदारियों, परिवार या पुराने फैसलों से जुड़ी स्थिति फिर चर्चा में आ सकती है। इस दौरान जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है। Read More
गुरु कर्क राशि में उच्च के माने जाते हैं, लेकिन हर राशि के लिए इसका परिणाम एक जैसा नहीं माना जाता। अश्लेषा कर्क राशि में 16 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री तक फैला नक्षत्र है और इसके स्वामी बुध हैं। ज्योतिष में अश्लेषा को गहरी सोच, रणनीति, मनोवैज्ञानिक समझ और परिस्थितियों की तह तक जाने से जोड़ा जाता है।
गुरु ज्ञान, शिक्षा, सलाह, संतान, धन और भाग्य के कारक माने जाते हैं। ऐसे में बुध के नक्षत्र में गुरु का प्रवेश ज्ञान के साथ तर्क और रणनीति को जोड़ सकता है। सही स्थिति में यह बेहतर निर्णय में मदद कर सकता है, जबकि चुनौतीपूर्ण स्थिति में भ्रम, अधिक सोच-विचार और आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। Read More
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार व्यक्ति के करियर और सफलता को समझने के लिए कुंडली में कई ग्रहों की स्थिति देखी जाती है। इनमें सूर्य, बुध, बृहस्पति और शनि को विशेष महत्व दिया जाता है।
इन ग्रहों को अलग-अलग क्षेत्रों से जोड़ा जाता है। सूर्य नेतृत्व और प्रतिष्ठा, बुध बुद्धि और व्यापार, गुरु ज्ञान और अवसर, जबकि शनि मेहनत और स्थिरता का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है।
हालांकि केवल किसी एक ग्रह की स्थिति के आधार पर करियर का पूरा आकलन नहीं किया जाता। ज्योतिष में ग्रह किस भाव में स्थित हैं और किन भावों से उनका संबंध बन रहा है, इसे भी परिणामों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। Read More
ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान, नेतृत्व, पिता, सरकारी सेवा और करियर का कारक माना जाता है। सूर्य हर महीने राशि परिवर्तन करते हैं और इस राशि परिवर्तन को सूर्य संक्रांति कहा जाता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, 17 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजकर 3 मिनट पर सूर्य कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह सूर्य की स्वराशि है, इसलिए इस गोचर को ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है।
सूर्य को ग्रहों का अधिपति और राजा भी माना जाता है। ऐसे में अपनी राशि में सूर्य की मौजूदगी को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। Read More