माँ
डॉ. जयेश ऐम. ढोडिया
माँ तो माँ होती है।
हर दू:ख की दवा होती है।
प्रेरणा की मूरत होती है।
सबसे ख़ूबसूरत होती है।
माँ तो माँ होती है।
हर घर की शान होती है।
परिवार की जान होती है।
घर की कमान होती है।
अच्छी इंसान होती है ।
माँ तो माँ होती है।
सबकी सांस होती है।
जीने का ऐहसास होती है ।
मिठासा आभास होती है।
अच्छा उपन्यास होती है।
माँ तो माँ होती है।
सुनाने के लिए आसान होती है।
बचाने के लिए समर्थवान होती है।
आशा का किरन होती है।
बच्चों का जीवन होती है ।
माँ तो माँ होती है।
परिवारकी दोर होती है।
कभीना कमज़ोर होती है।
भुलाना शके ऐसी तसवीर होती है।
पत्थर पे लिखी लकीर होती है।
माँ तो माँ होती है।
उनकी ममता ना जोल होती है।
दुनिया में वो अनमोल होती है।
वो जो करती है, जैसे करती हैं करने दो।
वो माँ है उसे माँ ही रहने दो ।
माँ तो माँ होती है।
निष्ठावान शिक्षक
-डॉ. जयेश ऐम. ढोडिया
क्या लिखू उनके बारेमे, वो खुद मुकदर लिखते हैं ।
सहनशीलता और प्रतिष्ठा से, वो सिकन्दर दिखते हैं ।।
अपनी कर्तव्यनिष्ठा से, वो पत्थर पे लकीर खींचते हैं ।
यकीन मानिए, वो पत्थर से भी पानी निकालने की हैसियत रखते हैं ।।
क्या लिखू उनके बारेमे…
क्या लिखू उनके बारेमे, वो नए आकार रचते हैं ।
नए तरंग और नई ऊर्जा के साथ, हर घड़ी वो दिखते हैं ।।
अनपढ़ घर के बच्चोंकोभी, विद्वान् बनाने की सोंच रखते हैं ।
यकीन मानिए, वो प्रलय और निर्माण के सर्जन की कैफियत रखते हैं ।।
क्या लिखू उनके बारेमे…
उनके चिंतन पर तो बड़े बड़े के सर भी झुकते हैं ।
सूनहरे अक्षरोंसे वो देशका भविष्य लिखते हैं ।।
कभी डांट और कभी प्यार से, छात्रोंमें मानव मूल्य जतन करते हैं ।
यकीन मानिए, वह गड्ढे से, बेहतर इमारत निर्माण करते हैं ।।
क्या लिखू उनके बारेमे…
हर रोज सिखाते सिखाते खुदभी नया सिखते है ।
नई सीख से अंधेरे को उजाले में भी बदलते हैं ।।
देश के ज़्यादातर प्रश्नो के उत्तर उन्हीं से तो मिलते हैं ।
यकीन मानिए, वो श्रेष्ठ राष्ट्र श्रेष्ठ संस्कृति बनाने की अहमियत रखते हैं ।।
क्या लिखू उनके बारेमे…
कर्म
डॉ. जयेश ऐम. ढोडिया
एक दिन तुम्हारे ही कर्म, तुमसे मिलने आएंगे।
बहुत ज्यादा हसाएंगे या बहुत ज्यादा रुलाएंगे ।
कर्म से ही आये है और कर्म से ही जाएंगे ।
तुम घमंड करना ही मत क्योंकि तुम्हारे कर्म ही तुमको समझायेंगे।
एक दिन तुम्हारे ही कर्म….
भूतकाल के कर्म ही भविष्य बनाएंगे ।
अच्छे कर्म ही हमें अच्छे मार्ग दिखाएंगे ।
बुरा कर्म, बुरे लोग, बुरे से ही मिलवाएंगे ।
तूम बुरा सोचना ही मत क्योंकि तुम्हारे कर्म ही तुमको बनाएंगे।
एक दिन तुम्हारे ही कर्म….
स्वार्थ और ईर्ष्या ही तुम्हारा सिर झुकवाएँगे।
बुरी आदतें और बुरे कर्म ही तुम्हें मिटाएँगे।।
अच्छे कर्म धर्म से करो वही तुमे बचाएंगे।
तुम गलत करना ही मत क्योंकि तुम्हारे कर्म ही तुमको जिताएंगे।।
एक दिन तुम्हारे ही कर्म….
खुद बढ़ो दूसरोंको बढ़ाओ वाले काम तुमे आगे बढ़ाएँगे ।
नाकामीओ से घबराना मत वो सही रास्ता बताएँगे ।
दूर रहना उन लोगोसे जो तुम्हे इस्तेमाल करवाएंगे ।
तुम निडर रहना क्योंकि तुम्हारे कर्म ही तुमको बचाएंगे ।
एक दिन तुम्हारे ही कर्म….
मुश्किल का हल निकलेगा।
-डॉ. जयेश ऐम. ढोडिया
मुश्किल का हल निकलेगा
आज नहीं तो, कल निकलेगा।
खुद पर यक़ीन रख,
मेहनत का भी फल निकलेगा ।।
मुश्किल का, हल निकलेगा।
जिस राह पर कांटे हो ,
वहीं फूलों का महल निकलेगा।
सिर्फ़ अच्छा करता चल,
हर कदम से नया कल निकलेगा ।।
मुश्किल का, हल निकलेगा ।
जो सपना आज अधूरा है,
कल वही मुकम्मल निकलेगा।
गिरना भी ज़रूरी है कभी-कभी,
तभी संभलने का हुनर निकलेगा ।।
मुश्किल का, हल निकलेगा ।
रात कितनी भी लंबी हो,
सवेरा बनकर पल निकलेगा।
वक्त लगेगा, मगर एक दिन,
तेरा भी सूरज निकलेगा ।।
मुश्किल का, हल निकलेगा ।
जीवन का खेल
-डॉ. जयेश ऐम. ढोडिया
जीवन एक खेल है । सारा परिस्थिति का मेल है ।
हम तो एक खिलाडी है। खेलना हमारा काम है ।।
खेल के कुछ अच्छा कर जाये वोही हमारे नाम है ।
जो समजे उसे राम है । जो ना समजे उसेभी राम राम है ।।
जीवन एक खेल है…
कई जान लगाकर खेलते है । कई जी जान लगाकर खेलते है ।
पर अगर हार गए तो दर्शक क्या लोग भी बहुत बोलते है ।।
कोई तोल के बोलते है । कोई बोल के तोलते है ।
जो समजे उसे राम है । जो ना समजे उसेभी राम राम है ।।
जीवन एक खेल है…
हारका गम, जीत की खुशी, अंदाज अलग रहता है ।
एक को जीत का सेहरा, दुसरे को दर्द गहरा रहता है ।।
हार, जीत तो लगा रहता है । यही सोच कर जीवन जगा रहता है ।
जो समजे उसे राम है । जो ना समजे उसेभी राम राम है ।।
जीवन एक खेल है…
लोग खेल खेलते भी हैं और बाद में झेलते भी है ।
जीवन का भी यही राज है । इसलिये ऊपरवाले पर भी नाज है ।।
क्या जितना क्या हारना सब प्रभु के नाम है ।
जो समजे उसे राम है । जो ना समजे उसेभी राम राम है ।।
जीवन एक खेल है…
बाप
डॉ. जयेश ऐम. ढोडिया
होता क्या है बाप, तुम क्या जानो ।
तुममें छुपी है उनकी छाप, तुम क्या जानो।
उनकी सारी बात, तुम ना मानो।
फिरभी तुम्हारे साथ, तुम क्या जानो।।
होता क्या है बाप ...
वो मीठा सा एहसास, तुम क्या जानो।।
तुमसे नहीं करता कोई आश, तुम क्या जानो।।
कभी बिगडने ना देगा हालात, तुम क्या जानो।
सोचेंगा तुम्हारे लिए दिन रात, तुम क्या जानो।।
होता क्या है बाप ...
अच्छे कर्मों से मिला वो वरदान, तुम क्या जानो ।
तुम्हारी हिम्मत और अभिमान, तुम क्या जानो ।।
सपनोंको देता त्याग, तुम क्या जानो ।
वो हर परिस्थिति लेता है नाप, तुम क्या जानो।।
होता क्या है बाप ...
जिनके नहीं हैं बाप, उनकी हालत तुम क्या जानो।
उनकी आँसू ,आवाज बिना रोनेकी बात, तुम क्या जानो।।
जिम्मेदारी का वो साथ, तुम क्या जानो।
उस पर लिख सकते है उपन्यास, तुम क्या जानो ।।
होता क्या है बाप ...
जिंदगी का सफर
-डॉ. जयेश ऐम. ढोडिया
ज़िंदगी में ऐसी भी नौबत आयी थी।
हर जगह मुश्किल ही मुश्किल पाई थी।।
आँखों में आँसू थे, चेहरे पे तन्हाई थी।
फिर भी होठो पे थोड़ी सी मुस्कान सजाई थी।।
ज़िंदगी में ऐसी भी नौबत आयी थी।
रास्ते बंद थे, मंज़िल भी पराई थी।
हर कदम पर जैसे एक नई लड़ाई थी।।
कभी धूप तेज़ थी, कभी रात गहरी थी।
हर मोड़ पर जिंदगी भी ठहरी थी।।
ज़िंदगी में ऐसी भी नौबत आयी थी।
अपने भी खामोश थे, किस्मत भी रूठी थी।
हर खुशी जैसे मुझसे कहीं दूर छूटी थी।।
जीस दर पर सुकून की उम्मीद लगाई थी।
उसी दर से बड़े दर्द की सौगात आई थी।।
ज़िंदगी में ऐसी भी नौबत आयी थी।
काँटों से भरी राह, कदमों में थकान थी।
फिर भी मन में जीत की एक उड़ान थी।।
उम्मीद की किरण कही ना कहीं बाकी थी।
क्योंकि अंधेरों में भी मैने रोशनी की झलक झाँकी थी।।
ज़िंदगी में ऐसी भी नौबत आयी थी।
जिम्मेदारी
डॉ. जयेश ऐम. ढोडिया
जिम्मेदारी है जी रहा हूं। जहर भी पी रहा हूं।
चुनौति है पर लड रहा हूँ। मंजिल पे बढ़ रहा हूँ।।
कोई क्या लगाएगा मेरे ख़्वाहिशों का अंदाजा ।
हर वक्त जी भी रहा हूं। हर वक्त मर भी रहा हूं।।
जिम्मेदारी…..
आप है तो जी रहा हु। आपके लिए ही जी रहा हूं ।
हालातों के हिसाब से रिश्ते भी जी रहा हूँ ।।
कोई क्या लगाएगा मेरे बर्दाश्त करने का अंदाजा ।
मर जाने जैसा वक़्त गुजार के भी जी रहा हूं ।।
जिम्मेदारी…..
पहचान खो रहा हूं। पहचानने वालेभी खो रहा हूं ।
मुझको समझने वाले अच्छे इंसानभी खो रहा हूं ।।
कोई क्या लगाएगा मेरी किस्मत का अंदाजा ।
बचपन से घर संभाले मुस्कान खो रहा हूं ।।
जिम्मेदारी…..
चुप होकर जी रहा हूं। सब्र से जी रहा हूं ।
कुछ खोके जी रहा हूं। तो कुछ पाके जी रहा हूं ।।
कोई क्या लगाएगा मेरी मंजिल का अंदाजा ।
मरते हुए हौसले के साथ चल के भी जी रहा हूं ।।
जिम्मेदारी…..
समंदर हूँ लौट के आऊंगा
डॉ. जयेश ऐम. ढोडिया
समंदर हूँ लौट के आऊंगा।
पानी हूँ, सुनामी बनके समझाऊंगा ।
तैरती क़िश्ती को डूबनेसे बचाऊंगा ।
कर्म से ही आया हूँ और कर्म से ही जाऊंगा ।
समंदर हूँ लौट के आऊंगा।
मेरी गहराई में सबको समाऊंगा ।
किनारो से टकराके कभी नहीं डराउँगा।
अपनी लहरों से रास्ते खुद बनाऊंगा।
बदलने आया हूँ बदलके ही जाऊंगा।
समंदर हूँ लौट के आऊंगा।
शिक्षा का भंडार हूँ सूखा नहीं कहलाऊंगा।
सुरक्षा का कर्म भी निष्ठा से निभाऊंगा।
उफान से बहती सरिता में भी राह बनाऊँगा,
इंसाफ करने आया हूँ, सब साफ़ करके जाऊँगा।
समंदर हूँ लौट के आऊंगा।
कर्म की मशाल लेकर आँधियों से टकराऊंगा ।
सफलताका स्वाद सबको चखाउंगा ।
ख़ामोशी मेरी वक्त पर सबको समझाऊंगा।
तूफ़ान बनकर आया हूँ, चट्टान बनकर जाऊँगा।।
समंदर हूँ लौट के आऊंगा।
ज़िंदगी के हालात
-डॉ. जयेश ऐम. ढोडिया
ज़िंदगी में ऐसा भी वक्त आता है।
साया भी अजनबी सा हो जाता है।।
हालातों का बोझ इतना बढ़ जाता है।
यकीन मानिये, कोई सहारा भी सुकून नहीं दे पाता है।।
ज़िंदगी में ऐसा भी वक्त आता है।
ज़िंदगी का भी ऐसे मोड़ से नाता है।
इंसान खुद को भी नहीं समझ पाता है।।
कुछ दर्द किसी से कहा नहीं जाता है ।
यकीन मानिये, खामोश रहकभी सहा नहीं जाता है।।
ज़िंदगी में ऐसा भी वक्त आता है।
आँखों में ग़म साफ नज़र आता है।
चेहरा फिर भी मुस्कुराता है।।
इंसान हालातो से ईतना टूट जाता है।
यकीन मानिये, हर रोज़ कुछ न कुछ पीछे छूट जाता है।।
ज़िंदगी में ऐसा भी वक्त आता है।
बिना शिकायत जो दर्द सह जाता है।
वही फिर से जीने का हौसला पाता है।।
गिरने के बाद भी जो संभल जाता है।
यकीन मानिये, वही जिंदगी में मुकाम बना पाता है।।
ज़िंदगी में ऐसा भी वक्त आता है।