Gurukul Vishwapeeth
Astrologer Dr. Bhagwat Guruji - 9765810211
Divine Healing Course on 22nd March 2026, Sunday
Astrologer Dr. Bhagwat Guruji - 9765810211
Upcoming Events
तर्पण साधना शिबिर : Saturday, 28th March 2026, 3 pm
28th March 2026 : Saturday, 3 pm
ऐहिक और पारलौकिक प्रगति सिद्ध करनेवाली सनातन, आसान, सिद्ध तर्पण साधना गुरुकुल में सिखाई जाती है |
तर्पण साधना कोई भी कर सकता है, किसी भी समय कर सकता है और साधना को कठिन नियम भी नहीं है | नित्य तर्पण करने से भाग्य खुलता है और यश मिलता है | दुनिया भर में हजारो साधक तर्पण साधना करके अपना जीवन पवित्र और उज्वल बना रहे है |
तर्पण साधना से होनेवाले लाभ
१) मन शांत हो जाता है |
२) आत्मिवश्वास बढ़ता है |
३) मन में आनेवाले कुविचार समाप्त हो जाते हो |
४) कार्य क्षमता बढ़ती है |
५) परिस्थिती अनुकूल बन जाती है |
६) लोगोंका हमारी ओर देखने का ढंग बदल जाता है |
७) दैवी कृपा हो जाती है |
८) यश प्राप्त होता है |
९) रुके हुए कार्य बनने लगते है |
१०) संकट आने बंद हो जाते है |
११) ऐहिक और पारलौकिक दोनों जीवन साध्य हो जाते है |
Free Divine Healing Treatment Camp
21st Marchr 2026, Saturday, 6 pm to 8 pm.
Gurukul Vishwapeeth, Near Last Bus Stop, Wadgaon Sheri, Pune - 14
Divine Healing Course (1 Day) (tentative: Date may change)
22nd March 2026, Sunday
Venue: Gurukul Vishwapeeth, Near Last Bus Stop, Wadgaon Sheri, Pune - 14
"डिव्हाइन हीलिंग थेरेपी" यह ऐसी पद्धती है जिससे अनेक किस्म की व्याधियाँ ठीक हो जाती है | यह सनातन पद्धती है और वेदोंमें इसके बारेमे उल्लेख है | महाभारत, पुराण, बायबल अदि में भी इस विद्या के उदाहरण आये हुए है | एनर्जी का चैनेलिंग, डिव्हाइन कोड का प्रोग्रामिंग करके, नजदीक के तथा दूर के व्याधिग्रस्तोंपर इसका प्रयोग किया जा सकता है | स्वयं के उद्धार के लिए भी यह अत्यंत प्रभावी सिद्ध साबित हुई है |
कोई भी यह विद्या सिख सकता है और लोगोंकी व्याधियाँ ठीक कर सकता है |
Vastushanti Muhurt - April 2026
1) 5 April 2025, Thursday
2) 14 March 2026, Saturday
3) 16 March 2026, Monday
भृगु अस्ट्रोलॉजी
३० वर्षोंसे यह संस्था विविध क्षेत्रों में कार्यरत है |
संस्था में ज्योतिष शास्त्र, वास्तु शास्त्र, रत्न शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, डिव्हाइन हीलिंग, मन्त्र शास्त्र आदि लोगोपकारक शास्त्रों का अध्ययन तथा अध्यापन किया जाता है |
अभ्यास क्रम बहुत आसान भाषा में सिखाया जाता है | एक्स्ट्रा करिक्यूलर ऑक्टिविटीस बहुत होती है जैसे की चर्चा, सहल, परिसंवाद इ।
संस्था से पास हुए हजारो विद्यार्थी भारत तथा परदेस, दुनिया भर में पढ़ी हुयी विद्या द्वारा लोगोपकारक कार्य कर रहे है |
Founder: Bhrugu Astrology
B.Sc; D.S.C. Tech; D.B.M; D.Per.M; D.Prod.M; MBA, D.Litt.
He has 44 years of study on Astrology and other occult sciences.
He is practising astrology for more than 25 years and his predictions helped thousands of people.
9765810211
गुरूजी का ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन बचपन से , उम्र के १५ वे साल से ही शुरू हुआ | अनेक ग्रंथोंका गुरूजी ने दीर्घ काल अध्ययन किया और अनेक गुरुओंका मार्गदर्शन तथा आशीर्वाद गुरूजी को मिले | सह्याद्रि पहाड़ी पर स्थित परमहंस गणेशानंद सरस्वती जी से उन्हें शक्तिपात तथा दीक्षा प्राप्त हो गयी | १९८२ से लेकर आज तक गुरूजी सह्याद्रि पहाड़ी पर शिवरात्रि के पर्व पर रात्रि में रूद्र याग करते है | उनसे गुरूजी को अध्यात्म, परमात्मा, मनुष्य के परम कर्तव्य, नितिशास्त्र, आत्मा अदि के बारे में ज्ञान मिला |
दो बार पैदल भारत भ्रमण करके अनेक गुरुजनोंसे विद्या प्राप्त किये ब्रह्मचारी बाबा बूध नाथ महाराज के दीर्घ संपर्क में गुरूजी रहे | उनसे गुरूजी को अध्यात्म, शाबरी मंत्र तथा योग की गुप्त क्रियाओंके बारेमे गुरूजी को ज्ञान प्राप्त हुआ | बाबा बुधनाथ महाराज ने धनकवडी, पुणे में आयु के १०४ में समाधी ली |
एस्ट्रोलॉजर भागवत गुरूजी ने ज्योतिशास्त्र का अध्ययन, अध्यापन, प्रचार, प्रसार हेतु 'गुरुकुल विश्वपीठ' तथा 'भृगु अस्ट्रोलोग्य एग्जाम बोर्ड' की स्थापना की जिसके द्वारा साधकोंको ज्योतिष शास्त्र, वास्तु शास्त्र, रत्न शास्त्र अदि विषय सिखाये जाते है |
पुरस्कार
२०१६ में ज्योतिष शास्त्र में विशेष उपलब्धि होतु नेपाल की उप पंतप्रधान हर हाइनेस श्री सुजातजी कोइराला के हाथो गुरूजी को 'भारत विभूति पुरस्कार से सन्मानित किया गया |
पुणे कॉर्पोरेशन ने २ बार गुरूजी को गौरव पुरस्कार से गौरवान्वित किया | और अनेक राष्ट्रीय एवं आंतर राष्ट्रीय पुरस्कार गुरूजी को प्राप्त हुए |
किताबे
गुरूजी ने आज तक ज्योतिष शास्त्र, वास्तु शास्त्र, अध्यापन, सामाजिक आदि विविध विषयोंपर ३६ किताबे लिखी |
गुरूजी ने हजारो विद्यार्थियोंको ज्योतिष शास्त्र / वास्तु शास्त्र सिखाया उनमे से बहुत सारे विद्यार्थी अपनी स्वयं की प्रैक्टिस कर रहे है |
भृगु अस्ट्रोलॉजी संस्था द्वारा किये जाने वाले कार्य
जन्म कुंडली से पढाई, नौकरी धंदा, व्यवसाय, विवाह, संतती, कोर्ट कचहरी के बारेमें अचूक भविष्य तथा मार्ग दर्शन दिया जाता है |
किसी व्यक्ति के जन्म के समय जो ग्रहमान था तथा वर्तमान में ग्रहोंका भ्रमण हो रहा है, उसका बड़ा प्रभाव जातक पर पड़ता हुआ दिखता है | कुंडली का अभ्यास करके व्यक्ति का भविष्य कैसा जायेगा, कौनसे क्षेत्र में उसे सफलता मिलेगी यह समझ में आता है |
कुंडली के द्वारा जातक के बारे में बाहत कुछ समझ में आता है |
१) किसी का आरोग्य
२) पढाई
३) विवाह
४) कोर्ट कचहरी
५) प्रेम सम्बन्ध
६) यश अपयश
७) कौनसे क्षेत्र में सफलता मिलेगी
यह समझ है |
बेसिक और एडवांस ज्योतिष शास्त्र के क्लासेस चलाये जाते है |
पंचांग, तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण ,राशि, ग्रह, भाव, दशा, साढ़ेसाती, पत्रिका मिलन, मांगलिक पत्रिका,
शास्त्रों के अध्ययन से होने वाले लाभ
१) ज्ञान प्राप्त होता है |
२) बुद्धि स्थिर हो जाती है |
३) द्विविधा नष्ट हो जाती है |
४) योग्य निर्णय ले सकते है |
५) लोगों को योग्य मार्ग दर्शन कर सकते है |
६) उप जीविका चल सकती है |
७) आने वाले समय को जान सकते है, तथा खबरदारी ले सकते है |
ग्रहशांति, नक्षत्र शांति, पितृ शांति आदि विधि विधान यथाशास्त्र, वेदोक्त पद्धति से संपन्न किये जाते है |
गणेश पूजन, गौरी पूजन, भूमि पूजन, कलश स्थापन, पुण्याह वाचन, गुरु पूजन, नवग्रह देवता पूजन, ग्रह आधी देवता , ग्रह प्रत्यधि देवता पूजन, नक्षत्र देवता पूजन, ब्रह्मा, विष्णु, महेश देवता पूजन, तर्पण, अभिषेक, हवन, उतारा आदि किया जाता है |
ऐहिक और पारलौकिक प्रगति सिद्ध करनेवाली सनातन, आसान, सिद्ध तर्पण साधना गुरुकुल में सिखाई जाती है |
तर्पण साधना कोई भी कर सकता है, किसी भी समय कर सकता है और साधना को कठिन नियम भी नहीं है | नित्य तर्पण करने से भाग्य खुलता है और यश मिलता है | दुनिया भर में हजारो साधक तर्पण साधना करके अपना जीवन पवित्र और उज्वल बना रहे है |
तर्पण साधना से होनेवाले लाभ
१) मन शांत हो जाता है |
२) आत्मिवश्वास बढ़ता है |
३) मन में आनेवाले कुविचार समाप्त हो जाते हो |
४) कार्य क्षमता बढ़ती है |
५) परिस्थिती अनुकूल बन जाती है |
६) लोगोंका हमारी ओर देखने का ढंग बदल जाता है |
७) दैवी कृपा हो जाती है |
८) यश प्राप्त होता है |
९) रुके हुए कार्य बनने लगते है |
१०) संकट आने बंद हो जाते है |
११) ऐहिक और पारलौकिक दोनों जीवन साध्य हो जाते है |
साधना का फल शीघ्रता से मिले इस लिए दीक्षा दी जाती है |
दीक्षा से साधारण व्यक्ति 'साधक' बना जाता है | दीक्षा से गुरु का आशीर्वाद एवं गुरूजी ने दीर्घकाल साधना से प्राप्त की हुई शक्ति साधक को तात्काल प्राप्त हो जाती है | दीक्षा प्राप्त होने पर साधक जल्दी सिद्ध हो जाता है, उसे शीघ्रता से यश मिलता है | दीक्षा से जीवन धन्य हो जाता है | बिना गुरु के मनुष्य केवल प्राणी ही रहता है |
दीक्षा से होनेवाले लाभ
१) गुरुकृपा हो जाती है |
२) शीघ्रता से यश मिलता है |
३) द्विविधा नष्ट हो जाती है |
४) मार्ग सुकर बन जाता है |
५ ) आत्मिवश्वास बढ़ता है |
ईश्वर तथा देवताओंकी कृपा हो, पीड़ा कम हो, यश प्राप्त हो इसलिए हवन किया जाता है |
यश की प्राप्ति के लिए मेहनत जरुरी है | और जीतनी मेहनत जरुरी है उतनी ही देवताओंकी कृपा जरुरी है | बिना देवताओंकी कृपा के मेहनत भी व्यर्थ जाती है |
हवन से होनेवाले लाभ
१ ) आत्मिवश्वास बढ़ता है |
२ ) कार्य क्षमता बढ़ती है |
३ ) परिस्थिती अनुकूल बन जाती है |
४ ) लोगोंका हमारी ओर देखने का ढंग बदल जाता है |
५ ) दैवी कृपा हो जाती है |
६ ) यश प्राप्त होता है |
७ ) रुके हुए कार्य बनने लगते है |
८ ) संकट आने बंद हो जाते है |
९ ) ऐहिक और पारलौकिक दोनों जीवन साध्य हो जाते है |
सर्टिफाइड, जेन्यून रत्न योग्य कीमत में उपलब्ध है |
रत्नों में भाग्य छिपा रहता है | रत्न धारण करने से रत्नो का भाग्य हमें मिलता है | कुंडली का उचित अध्ययन करके योग्य रत्न धारण करने से हमारी प्रगति हो जाती है |
रत्नों से होने वाले लाभ
१) रत्नों से नसीब अच्छा हो जाता है |
२) संधि प्राप्त होती है |
३) लोगों पर हमारा प्रभाव बढ़ जाता है |
४) कार्य का विस्तार हो जाता है |
५) सफलता बढ़ जाती है |
किसी जातक की कुंडली में घटस्फोट वा वैधव्य का योग हो तो शादी से पहले 'कुम्भ वा अर्क विवाह' किया जाता है, जिससे आगे की हानि टल जाती है |
गणेशजी, हनुमानजी, कनीफनाथजी, माताजी आदि की यथा शास्त्र, वेदोक्त पद्धतीसे मूर्ति स्थापना की जाती है |
वास्तु परिक्षण करते समय भूमि, भूमि का आकार, भूमि का ढलान, भूमि पर वास्तु का स्थान, वास्तु में स्थित स्टैटिक एनर्जी, फ्लोविंग एनर्जी, तत्व विचार, मुख्य दरवाजा, किचन, मास्टर बेड रूम, जीना, देव मंदिर आदि बहुत सारे मुद्दों का अध्ययन किया जाता है |
निवासी घर, कम्पनी, होटल, दवाखाना, मंदिर, गोडाऊन, बाग, अभ्यासिका आदि सभी वास्तु का परिक्षण करना जरुरी होता है |
१) वास्तु का हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता रहता है |
२) शुभ वास्तु में हमारी प्रगति होती है तो अशुभ वास्तु में हमें पीड़ा होती है |
३) हमारे वास्तु में हम रहे अथवा कहीं दूसरे जगह रहे, वास्तु का हमारे उपर प्रभाव पड़ता है |
४) वास्तु में स्थिर तथा चलायमान ऊर्जा होती है जिसका प्रभाव होता है |
५) वस्तुमे स्थित तत्वों का असर हमपे पड़ता रहता है |
तीर्थ क्षेत्र, सनातन क्षेत्र, आदि जगह पर यात्राएं आयोजित की जाती है |
पवित्र, शुभ, ऊर्जावान स्थल में जाने से मन शुद्ध होता है, नसीब सफल होने लगता है जिससे यश प्राप्त होता है, दुःख दूर होते है |
dowsing द्वारा भूमि के निचे का पानी खोजा जाता है |
पवित्र, शुभ, ऊर्जावान स्थल में जाने से मन भी शुद्ध होता है, नसीब सफल होने लगता है जिससे यश प्राप्त होता है, दुःख दूर होते है |
खेती, कारखाना, निवास, मत्स्य खेती ऐसे सभी उपक्रमों के लिए पानी की आवश्यकता होती है | जल बिना जीवन संभव नहीं |
डिवाईन हीलिंग के माध्यम से लोगोंकी व्याधियाँ ठीक की जाती है |
इस विद्या से दैवी शक्तियों के माध्यम द्वारा मनुष्य तथा प्राणियोंकी व्याधियाँ ठीक की जाती है | सृष्टि में, ईश्वर की इच्छा से दैवी शक्तियाँ सदैव कार्यरत रहती ही है जो सृष्टि में सुव्यवस्था बनाती रहती है | अव्यवस्था होने से व्याधियाँ होती है | योग्य प्रकार से प्रार्थना करने पर तथा Channelling of Energy करने पर दैवी शक्तिया अति शीग्र गति से व्याधियाँ ठीक करती है |
जन्म दिनांक से जाने भविष्य
जन्म तारीख के अंक तथा नाम के अक्षरों से संलग्न अंकों का हमारे ऊपर बड़ा प्रभाव पड़ता हुआ दिखता है | जन्म तारीख से हमें कौन से अंक शुभ / अशुभ होंगे, गाड़ी का नंबर क्या होना चाइये, फ्लैट का नंबर क्या होना चाहिए, कौनसी तिथि में महत्व पूर्ण काम करना चाहिए यह समझ में आता है |
गुरु गोरखनाथ, मछिन्द्र नाथ और ८४ सिद्ध प्रणित शाबरी मन्त्रों का बड़ा प्रभाव अनुभव होता है | शाबरी मन्त्रोंसे अनेक पीड़ाएँ कम हो जाती है | शाबरी कवच पाठ करने से पीड़ा करने वाली अदृश्य शक्तियाँ निकल जाती है और साधक सुरक्षित हो जाता है |
किसी के हस्ताक्षर से जाने उसकी मानसिकता, तरक्की के मार्ग क्या होते है |
जैसे मानसिकता होती है वैसा ही अक्षर होता है | अक्षरों से और लिखने के तरीके से हमें जातक की मानसिकता, रूचि, अरुचि, कार्य करने का ढंग और बहुत सारे आयाम समझ में आते है |
हिप्नोटिस्म
ऍस्ट्रॉलॉजर भागवत गुरुजी हिप्नॉटिक ट्रीटमेंट देते हुए ।
हिप्नोटिस्म पूर्णतया वैज्ञानिक है |
हिप्नोसिस के द्वारा बहुत से फर्क किये जाते है |
१) दुर्गुण कम किये जाते है |
२) सद्गुण बढ़ाये जाते है |
३) आत्मविश्वास बढ़ाया जाता है |
४) कॉन्सेंट्रेशन बढ़ाया जाता है |
५) स्मरण शक्ती बढ़ाई जाती है |
६) सकारात्मकता बढ़ाई जाती है |
७) संघर्ष करने की शक्ति बढ़ाई जाती है |
८) किसी सब्जेक्ट में रूचि बढ़ाई जाती है |
९) बच्चोंमें पढाई में रूचि बढ़ाई जाती है |
१०) गलत आदतें छुड़ाई जाती है |
गुरुकुल विश्वपीठ में 'बेसिक कोर्स इन हिप्नोटिस्म' सिखाया जाता है तथा हिप्नोटिक ट्रीटमेंट दी जाती है |
लामा-फेरा अति प्रभावशाली बौद्ध उपचार पद्धति है।
इस पद्धति का उपयोग खासतौर से नकारात्मक शक्तियों, तनाव, अवसाद को दूर करने के लिए किया जाता है।
लामा-फेरा दो शब्दों से मिलकर बना है। दोनों शब्दों का अर्थ और अपनी पहचान है। लामा का अर्थ फॉलोवर यानी अनुयायी, जो बुद्ध के सिद्धांतों पर चलते हैं और उनके मार्ग को अंर्तहृदय से जीवन में अपनाते हैं। फेरा का अर्थ है दौरा।
मूलरूप से तिब्बती लामाओं द्वारा अपनायी जाने वाली इस उपचार पद्धति का प्रयोग 620 ई.पू. से हो रहा है। इसके अन्तर्गत उपचारात्मक परिस्थिति में भगवान बुद्ध की ऊर्जा को शामिल किया जाता है। उनकी उपचारात्मक शक्ति लामा-फेरा से उपचार लेने वाले व्यक्ति के शरीर में संचारित होती है।
इस उपचार पद्धति में बारह प्रतीकों का प्रयोग किया जाता है। हालांकि इसकी विधि अन्य उपचारात्मक पद्धति जैसे रेकी से थोड़ी भिन्न है लेकिन इसके प्रतीकों की जबर्दस्त शक्ति नकारात्मक ऊर्जा के उपचार में बड़ा योगदान देती हैं । लामा-फेरा के सत्र के ठीक बाद चिकित्सक को कंपन और शक्ति के स्तर में परिवर्तन का अहसास होता है। यह पद्धति निगेटिव एनर्जी, व्यापारिक समस्याएं, जमीन-जायदाद, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं आदि के उपचार में कारगर साबित होती है। यह शरीर की रासायनिक क्रियाओं को बढ़ाती है, मांसपेशियों, हड्डियों को मजबूत करती है, पाचन विकार को दुरुस्त कर है और स्फूर्ति देती है ।
किस तरह है भिन्न यह पद्धति
लामा-फेरा में प्रदान की जाने वाली चिकित्सीय तकनीक कई अन्य एनर्जी हीलिंग सिस्टम जैसे रेकी से अलग है। इस प्रक्रिया में उपचार करने वाले का सबसे महत्वपूर्ण कार्य। लामा- फेरा में पारंपरिक रेकी उपचारत्मक पद्धति से कम समय लगता है। लेकिन इसमें चिकित्सीय क्रम के पूरा होने से पहले रेकी की तुलना में दुहराव ज्यादा होते हैं। कौन सीख सकता है जो लोग वास्तव में लामा-फेरा सीखना चाहते हैं और उपचारात्मक कार्यो के द्वारा लोगों की सहायता करना चाहते हैं, इसे सीख सकते हैं। दूसरी बात, इसमें शामिल पद्धति को समझना कि स्वास्थ्य लाभ कराने वाला व्यक्ति भगवान बुद्ध से ऊर्जा प्राप्त करता है और पारंपरिक बौद्ध मंत्रों के उच्चारण के साथ ही भगवान बुद्ध की आध्यात्मिक तकनीक और उनके बताये जिस मार्ग पर समाज चलता है, उसका सहारा लेना है।
लाम-फेरा सीखने वाले व्यक्ति को भगवान बुद्ध और लामा- फेरा में ऊर्जा को दर्शाने के लिए प्रयोग किये जाने वाले प्रतीकों के साथ उपयुक्त संबंध स्थापित करने होते हैं। लामा-फेरा सत्र के दौरान प्रयोग किये जाने वाले प्रतीक उच्च आवृत्ति पर कार्य करते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये तेजी के साथ इसलिए कार्य करते हैं क्योंकि इसके कोर के साथ नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने में बहुत कम समय लगता है।
यह ऐसी पद्धति है जिसका प्रयोग सदियों से हिमालय के बौद्ध मठों में होता आया है |
लामा-फेरा के फायदे
हर प्रकार के तनाव से मुक्ति।
डर और भय से आजादी के साथ ही नकारात्मक शक्तियों को भी दूर रखना।
इसके अभ्यास से याद्दाश्त को तेज बनाया जा सकता है तथा मैडीटेशन के माध्यम से एकाग्रता को भी उच्च स्तर तक ले जाया जा सकता है।
आंतरिक शक्ति को बढ़ाने के लिए यह सबसे अच्छा इलाज है, साथ ही सभी बीमारियों के अंतिम क्षण के रोगियों के लिए यह सबसे बेहतर इलाज है।
पिछली जिंदगी की बातों तथा समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद करता है।
एक अभ्यासी अच्छी तरंगों को महसूस करता है तथा अपने ऊर्जा स्तर में बदलाव महसूस करता है।
व्यवसाय प्रॉपर्टी एवं स्वास्थ्य इत्यादि की समस्याओं को खत्म करता है।
शरीर की रासायनिक प्रणाली को दुरुस्त कर मांस-हड्डियां, पाचन क्रिया को ऊर्जा तथा ताकत प्रदान करता है।
बीमारी के कारणों पर जड़ से प्रभाव डालकर उन्हें ठीक करता है।
सक्रिय जागरूक एवं आत्म विश्वास देता है।
ऋषि तुल्य, ज्ञानी, मनोबल संपन्न, सुदृढ, अध्यात्मिक, दैवी गुण संपन्न संतती के प्राप्ती हेतु
शारीरिक संस्कार : शारीरिक आरोग्य, सुदृढ, ताकतवर, स्वस्थ शरीर के लिये व्यायाम, योगा, प्राणायाम
मानसिक संस्कार : मनोबल, आत्म विश्वास, अडिग मन के लिये मानसिक व्यायाम
बौद्धिक संस्कार : उत्तम विचार, कल्पना शक्ती, अनुमान, रिजनिंग, विश्लेषण शक्ती के लिये बौद्धिक व्यायाम
अध्यात्मिक संस्कार : उत्तम वर्तन, ईश्वर पार दृढ श्रद्धा, सकारात्मकता
दैवी कृपा प्राप्ती : दैवी कृपा, नसीब कि अनुकूलता
गुरुकुल विश्वपीठ द्वारा चलित सामाजिक कार्य
हर साल बरसात के पहले वृक्षारोपण किया जाता है |
वृक्षों से निसर्ग की सुंदरता बढती है और हवा में प्राणवायु का प्रमाण बढ़ता है | अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर उनकी सुरक्षा करना यह समय की बड़ी जरुरत आ गई है |
विविध क्षेत्रों में कार्य करनेवाले विद्वानों का उचित सन्मान किया जाता है |
पुरस्कार और सन्मान करने से शाबासकी मिल जाती है और लोगोंको अच्छे, समाजोपयोगी कार्य में रूचि बढती है |
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग साधना बहुत ही प्रभावी सिद्ध हुई है | योग, प्राणायाम, ध्यान अदि का प्रसार हो इसलिए योग वर्ग चलाये जाते है |
तम्बाखू और तत्सम नशीले पदार्थोंका सेवन अनेक प्रकारसे हानी कारक होता है | धन खर्च होता है, बुद्धि का नाश हो जाता है, समाज में पत नहीं रहती, परिवार में अव्यवस्था हो जाती है | इस लिए मादक पदार्थोंका सेवन नहीं करना चाहिए और लोगोंको भी इनसे दूर रखना चाहिए | इस लिये तम्बाखू विरोध अभियान चलाया जाता है जिसे में तम्बाखू सेवन के दुष्प्रभाव लोगोंको समझाया जाता है |
Monday 5 pm to 9 pm
Thursday 5 pm to 9 pm
Astrologer Dr Bhagwat Guruji
9765810211
facebook.com/ajaychandra.bhagwat
instagram.com/bhruguastrology