जय भोजवाल जय समाज
👉🏻भोजवाल सरनेम एक क्रांतिकारी विचारधारा है जो हम सदस्यों को समाज के हित के लिए और समाज की पहचान बनाने के लिए जरूरी है।
👉🏻भुर्जी/भरभूंजा समाज अभी तक अन्य सरनेमों का प्रयोग करता आया है। जिसके कारण हमारी कोई स्वतन्त्र पहचान स्थापित नहीं हो पायी है।
👉🏻 भुर्जी/भरभूंजा समाज की स्वतन्त्र पहचान हेतु एक नये टाईटल पर आम सहमति बनती दिख रही है, इसलिए भविष्य में हम सब मिलकर भोजवाल टाईटल का प्रयोग करते हुये अपनी स्वतन्त्र पहचान स्थापित करेंगे।
👉🏻भुर्जी व हलवाई समाज दो अलग अलग समाज हैं। ये कभी भी एक नहीं हो सकते हैं। यह वेवसाइट केवल भुर्जी/भरभूंजा समाज के लिए कार्य करेगी।
👉🏻 हमारा प्रमुख उद्देश्य अपने असंगठित समाज को भोजवाल सरनेम के जरिये एक विशाल संगठित समाज बनाना है।
👉🏻 हम संगठित तो हमारा समाज संगठित, और समाज संगठित तो देश संगठित।
जय भुर्जी, जय भरभूंजा, जय भोजवाल
"अखिल भारतीय भोजवाल समाज"
निवेदक:-
भोजवाल हरिकेश,
भोजवाल महासभा।
भाड़ की आग - भुर्जी समाज की एक अनदेखी रहस्य्मयी खोज। जरूर देखें
ब्रेकिंग न्यूज़
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कान्यकुब्ज वैश्य भोजवाल समाज ने सभी उपवर्गों को संगठित कर
राजनैतिक भागीदारी हेतु अभियान चलाने का निश्चय किया
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हर राजनीतिक दल से समाज के लोगों को 10 टिकट देने की मांग
***********आरक्षण हमारा संवैधानिक अधिकार,इसे खत्म नहीं होने देंगे
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लखनऊ - २३, जुलाई।
राजनीति में सफलता का मूल मंत्र है - "दोस्त ज्यादा दुश्मन कम" अपने लक्षित क्षेत्र में चुस्त दुरुस्त बूथ प्रबंधन,अन्याय,अनीति, अत्याचार और जन समस्याओं के विरुद्ध आवाज बुलंद करने,
दूसरों को इंशाफ दिलाने को तत्पर रहने वाले लोग ही राजनीति में सफल होते हैं। राजनीति में अच्छी सफलता के लिए अध्ययन,वैधानिक व सामाजिक ज्ञान का होना भी बहुत आवश्यक है। इन सब के बिना आप अच्छे नेता नहीं बन सकते।
उपरोक्त विचार श्री अखिल भारतीय कान्यकुब्ज वैश्य महासभा व्हाट्सएप ग्रुप के मुख एडमिन जय नारायण गुप्ता भारती ने भोजवाल समाज द्वारा गत रविवार ,लखनऊ के चिनहट स्थित मंगलम गेस्ट हाउस में आयोजित " 2022 में हमारे समाज के ज्यादा से विधायक कैसे बने? हमें सत्ता में भागीदारी कैसे प्राप्त हो?" आदि विषयों को लेकर आयोजित बैठक में अध्यक्षीय उद्बोधन के दौरान कहीं।
भारती ने कहा कि हमारा समाज अलग अलग लगभग ६०,उपनामों में बंटा हुआ है। आपस में रोटी बेटी के सम्बन्ध तो होते हैं। परन्तु एक झण्डा,नाम एक नेता के अभाव,उपजातीय विखराव के कारण हमारा संख्या बल मजबूत होते हुए भी हमारी कहीं गणना नहीं हो पाती।सभी राजनीतिक पार्टियां हमारे समाज का शोषण करती हैं।
वोट तो लेती हैं,परन्तु ना पार्टी में महत्वपूर्ण पद देती हैं,न ही चुनाव में टिकट! एक राजनीतिक दल तो हमारे संवैधानिक अधिकार आरक्षण को खत्म करने पर भी आमादा है। जिससे हमारे समाज के बच्चों पर आने वाले समय पर बहुत ही बुरा असर पड़ने की संभावना है।
प्रस्ताव पारित कर सभी पार्टियों से मांग की गई कि वह भुर्जी भोजवाल , समाज के १० - १० नेताओं कार्यकर्ताओं को २०२२ के चुनाव में टिकट दें।
कार्यक्रम आयोजक अरुण कुमार भोजवाल "आजाद" ने राजनैतिक,सामाजिक एकीकरण और जन जागरण के लिए शीघ्र ही पूरे प्रदेश में रथयात्रा निकालने की घोषणा की।
कार्यक्रम एवं महासभा राजनैतिक प्रकोष्ठ संयोजक
राज कुमार भुर्जी भोजवाल बुलन्द शहर ने आरक्षण मुद्दे पर मुखर होने की आवश्यकता पर बल दिया। आरक्षण को लेकर आजादी के समय से लेकर अब तक बने पिछडा वर्ग आयोगों पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला।कहा इस लड़ाई में महासभा को आगे आने पर विचार करना चाहिए।
कान्यकुब्ज वैश्य सभा उत्तर प्रदेश इकाई अध्यक्ष दिनेश गुप्ता छेदी प्रयागराज एवं महासभा बौद्धिक प्रकोष्ठ संयोजक स्वामी दीन गुप्ता हमीरपुर एवं शिव शंकर भोजवाल प्रतापगढ़ ने लखनऊ में एक बड़ी रैली कर समाज की ताकत का प्रदर्शन करने का सुझाव दिया।
डॉ विवेक शेठ गोरखपुर ने समाज के कमजोर वर्ग को मुख्यधारा में लाने हेतु युद्ध स्थल पर कार्यक्रम चलाए जाने का सुझाव दिया।
शिवकुमार भोजवाल लखना इटावा ने सभी वर्गों से भोजवाल नाम अपनाने की अपील की।
कैप्टन धर्मेंद्र गुप्ता रायबरेली ने बच्चों की शिक्षा पर जोर देने पर बल दिया।
डॉ विजय गुप्ता बलरामपुर ने कहा कि हमें सभी पार्टियों से अपनी बात मजबूती से कहना चाहिए और 10 टिकट मांगने चाहिए। फतेहपुर से श्रीकांत भोजवाल ने अपील की कि हमारे समाज को आगे बढ़ाने में सभी राजनीतिक पार्टियां सहयोग करें । उन्होंने समाजवादी पार्टी का नाम लेकर 2022 के चुनाव में समाज को 10 टिकट दिए जाने की मांग की। राजकुमार भुर्जी को टिकट देने की मांग की,कहा कि पूरा समाज उन्हें चुनाव लड़ाने के लिए तैयार है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राम नरेश गुप्ता अयोध्या ने महासभा से आगे आकर राजनीतिक हिस्से की लड़ाई मे भागीदारी के लिए सहयोग करने की मांग की।
शैलेंद्र गुप्ता बहराइच अपने समाज के लोगों के परिचय हेतु एक पुस्तक छपवाने बटवाने का सुझाव दिया। विधि प्रकोष्ठ संयोजक कामेश्वर नाथ गुप्ता एडवोकेट लखनऊ ने सॉफ्टवेयर बनवाकर पूरे समाज की जनसंख्या की गिनती कराए जाने का सुझाव दिया। एसटी में आरक्षण की मांग की। कार्यक्रम संचालक संतोष गुप्ता"शिवाजी" बलरामपुर ने कहा- स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, महात्मा बुद्ध, गुरु नानक देव के बताए रास्ते पर चलकर हमारा समाज आगे बढ़ सकता है रमाशंकर गुप्ता बलिया,रामानंद गुप्ता बाराबंकी आदि ने सामाजिक एकीकरण पर बल दिया।
महासभा अध्यक्ष श्री गोपाल चन्द्र साव,कार्यवाहक अध्यक्ष श्री राजेन्द्र गुप्ता एडवोकेट एवं संरक्षक - श्री छेदीलाल गुप्ता द्वारा कार्यक्रम की सफलता के लिए भेजे गए शुभकामना संदेश की जानकारी दी गई,जिसका करतल ध्वनि से सभी ने स्वागत किया। महासभा जिंदाबाद के नारे लगाए गये।
अध्यक्षता जय नारायण गुप्ता भारती,संयोजन राजकुमार भुर्जी,सयोजक कामेश्वरनाथ गुप्ता,राम अचल गुप्ता आयोजन अरुण कुमार भोजवाल ने तथा संचालन संतोष गुप्ता"शिवाजी" ने किया।
समाचार प्रमाणित
जय नारायण गुप्ता "भारती"
मुख्य एडमिन श्री अखिल भारतीय कान्यकुब्ज वैश्य महासभा व्हाट्सएप ग्रुप दिनांक 24 जुलाई 2021
भोजवाल समाज से जुड़ने के लिए या किसी अन्य जानकारी के लिए संपर्क करें।
Mail Id- bhojwalsamaj2020@gmail.com
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भोजवाल समाज से जुड़ने के लिए या किसी अन्य जानकारी के लिए संपर्क करें। आप सभी से अनुरोध है कि जैसे ही आप सभी भोजवाल समाज के इस वेबसाइट से जुड़ते है तो तुरंत फेसबुक पर फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट भेजिए जिससे हमे पता चलेगा की हम कितने लोग इस वेबसाइट को विजिट किये। कृपया कोई और सुझाव है तो मेल कीजिये। कृपया समाज की कोई भी न्यूज़ , वीडियो , कोई जानकारी है तो मेल पर शेयर कीजिये उसे वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।
एक जाति , एक सरनेम का नारा दीजिये , असंघठित भुर्जी/कानू /भुजवा /भड़भूँजा /मेहरा/चंद्रा /मधेशिया /भटनागर /माथुर /गुप्ता /सक्सेना /श्रीवास्तव आदि जातियों में हमारा भोजवाल समाज बंटा हुआ है। इसको संघठित करने का एक ही रामवाण इलाज है कि सभी जातियों को मिलकर एक सरनेम के प्रस्ताव करना चाहिए। भोजवाल सरनेम एक क्रन्तिकारी विचारधारा है जो हमारे असंघठित समाज को संघठित कर एक नई पहचान दे रहा है। आप सभी से निवेदन है की आप सभी भोजवाल सरनेम पर विचार कर इसे अपनाये और अपने समाज को मजबूत बनाये। हम आपको केवल एक जिला, राज्य तक ही सिमित नहीं रखना है। हम सब मिलकर अपनी जाती अपनी समाज को एक राष्ट्रिय पहचान देना है।
भोजवाल सरनेम ही भुर्जी /कानू आदि की राष्ट्रिय पहचान है।