How to manage erectile dysfunction naturally: Dr. Sunil Dubey
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क्या आप अपनी इरेक्शन समस्या और स्खलन नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए अपनी दवाई बदल-बदल कर थक चुके हैं? आप अपने यौन समस्याओं के कारण विवाहित जीवन से बहुत निराश व असंतुष्ट हैं। आपने इसके लिए समय और पैसा दोनों खर्च किये है लेकिन आपकी यौन समस्याएं वहीं की वहीं खड़ी हैं, मानो वह फेविकोल का जोड़ है। आज के समय में, इन यौन समस्याओं के कारण आपका रिश्ता तनावपूर्ण और चिंतापूर्ण हो गया है। अब क्या करें या क्या न करें, यह स्थिति आपके व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन के लिए क्लेशपूर्ण बन गया है। वास्तव में, देखा जाय तो आपके स्वाभिमान को भी ठेस लगता है जब आपके साथी आपके इस स्थिति में देखते है।
अब आपको चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे हमेशा आपके साथ हैं। वे भारत के शीर्ष श्रेणी के आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर हैं, जिन्हें इस आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी दवा और थेरेपी में विशेषज्ञता हासिल है। वास्तव में, वे पटना में सबसे अच्छे सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर भी हैं, जो पुरे भारत के पुरुष और महिला यौन समस्याओं के लिए अपना व्यापक उपचार और दवा प्रदान करते हैं। उन्होंने सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार खोजने के लिए इरेक्टाइल डिसफंक्शन और शीघ्रपतन पर गहन शोध भी किया है। आज के समय में, उनकी आयुर्वेदिक उपचार सभी आयु वर्ग के यौन रोगियों के लिए रामबाण हैं। आइए जानते हैं कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन और इसके आयुर्वेदिक उपचार के बारे में वह क्या कहते हैं।
“इरेक्टाइल डिसफंक्शन "नपुंसकता" पुरुषों में होने वाली एक बहुत ही आम यौन समस्या है जो उसके पेनिले के निर्माण से संबंधित है। इस स्थिति में, व्यक्ति उचित इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में असमर्थ होता है जो उसके यौन प्रतिक्रिया चक्र को पूरा करने के लिए आवश्यक है। एक पुरुष अपने साथी में प्रवेश नहीं कर पाता है और किसी तरह वह इसे प्राप्त कर भी लेता है तो यह पर्याप्त नहीं होता है जिसकी मांग होती है...”
इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) के प्रकार:
डॉ. सुनील दुबे बताते है कि स्तंभन दोष (ईडी) को आम तौर पर उनके अंतर्निहित कारणों के आधार पर निम्नलिखित मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। इस स्थिति का पहचान करना, सेक्सोलॉजिस्ट का मुख्य कार्य है, जो व्यक्ति के चिकित्सा व उपचार में मदद करते है।
संवहनी स्तंभन दोष (Vascular): यह ईडी का सबसे आम प्रकार है जिसमे पुरुष के पेनिले में रक्त प्रवाह की समस्याएँ शामिल होती हैं। यह रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने वाली स्थितियों, जैसे एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त होना), उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह के कारण व्यक्ति के जीवन में हो सकता है।
न्यूरोजेनिक इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Neurogenic): यह प्रकार तंत्रिका समस्याओं के कारण होता है जो मस्तिष्क से पेनिले तक संकेतों को रोकता है, जो स्तंभन के लिए आवश्यक होता हैं। इसके कारणों में आघात, पैल्विक सर्जरी, विकिरण चिकित्सा, स्ट्रोक, मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS), या रीढ़ की हड्डी की चोट जैसी तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ शामिल हो सकती हैं।
हार्मोनल इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Hormonal): यह हार्मोनल असंतुलन (टेस्टोस्टेरोन में कमी), सबसे आम तौर पर कम टेस्टोस्टेरोन के स्तर के कारण होने वाले ईडी को संदर्भित करता है। इसमें व्यक्ति की थायरॉयड की समस्याएं भी कभी-कभी योगदान दे सकती हैं।
साइकोजेनिक इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Psychogenic): यह प्रकार व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक स्थितियों के कारण होता है जो उसके विचारों, भावनाओं या व्यवहार को प्रभावित करते हैं। उदाहरणों में तनाव, चिंता, अवसाद, प्रदर्शन की चिंता और रिश्ते की समस्याएं शामिल हैं। साइकोजेनिक ईडी वाले पुरुषों को रात में या मास्टरबैशन के दौरान भी इरेक्शन का अनुभव हो सकता है।
यहाँ व्यक्ति को यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ईडी के अक्सर मिश्रित कारण होते हैं, जिसका अर्थ है कि शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारकों का संयोजन इस स्थिति में योगदान दे सकता है। उदाहरण के लिए, एक छोटी सी शारीरिक समस्या चिंता को ट्रिगर कर सकती है, जो बाद में ईडी को खराब कर देती है। ऐसे बहुत सारे मानसिक कारक है जो व्यक्ति को उसके स्तंभन को प्रभावित करते है।
स्थितियों के आधार पर, ईडी को कभी-कभी इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:
· प्राथमिक ईडी (Primary): जब कोई पुरुष अपने जीवन में कभी भी इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में सक्षम नहीं होता है, तो इसे प्राथमिक स्तंभन दोष कहा जाता है। हालांकि यह दुर्लभ है और अक्सर यह व्यक्ति के गहरे मनोवैज्ञानिक मुद्दों या जन्मजात असामान्यताओं से जुड़ा होता है।
· द्वितीयक ईडी (Secondary): वैसे तो यह अधिक आम है और उन पुरुषों में होता है जिनका पहले सामान्य इरेक्टाइल फंक्शन था लेकिन बाद में जीवन में स्तंभन दोष (ईडी) के रूप में विकसित हो गया। यह आमतौर पर शारीरिक या मनोवैज्ञानिक कारकों के कारण होता है।
· परिस्थितिजन्य ईडी (Conditional): यह ईडी जो केवल विशिष्ट स्थितियों में होता है, जैसे कि एक साथी के साथ लेकिन दूसरे के साथ नहीं, या संभोग के दौरान लेकिन हस्तमैथुन के दौरान नहीं। यह व्यक्ति में अक्सर उसके मनोवैज्ञानिक या रिश्ते के मुद्दों से जुड़ा होता है।
किसी भी सेक्सोलॉजिस्ट के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति को किस प्रकार का ईडी है, ताकि वह सबसे प्रभावी उपचार पद्धति निर्धारित कर सके। यह वह स्थिति है जो किसी व्यक्ति को उसकी समस्या के मूल कारण तक ले जाती है।
क्या कोई व्यक्ति शादी से पहले स्तंभन दोष से पीड़ित हो सकता है?
बहुत सारे लोगो के मन में यह भ्रम होता है कि स्तंभन दोष की समस्या शादी के बाद होती है, लेकिन यह सत्य नहीं है। हमारे आयुर्वेदाचार्य डॉ. दुबे, जो बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर भी है, बताते है कि हां, बिल्कुल। कोई व्यक्ति शादी से पहले इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) से जूझ सकता है, यहाँ तक कि आज के समय में, यह तेजी से आम होता जा रहा है, खासकर युवा पुरुषों में। वास्तव में, ईडी अक्सर बड़ी उम्र से जुड़ा होता है, फिर भी यह कई तरह के कारकों के कारण सभी उम्र के पुरुषों को प्रभावित कर सकता है।
यहां बताया गया है कि शादी से पहले एक पुरुष को स्तंभन दोष का अनुभव क्यों हो सकता है:
मनोवैज्ञानिक कारक (युवा पुरुषों में बहुत आम):
प्रदर्शन की चिंता: वास्तव में, यह स्तंभन दोष का एक प्रमुख अपराधी है। व्यक्ति में यौन रूप से अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव, विशेष रूप से नए या महत्वपूर्ण रिश्तों में, भारी हो सकता है। पुरुष अपने साथी को संतुष्ट करने की अपनी क्षमता, अपने पेनिले के आकार या इरेक्शन को बनाए रखने के बारे में चिंता कर सकते हैं, जिससे एक "स्व-पूर्ति भविष्यवाणी" बनती है, जहाँ चिंता ही इरेक्शन को रोकती है। यह प्रदर्शन की चिंता व्यक्ति को स्तंभन दोष की ओर अग्रसर कर सकता है।
· तनाव और सामान्य चिंता: किसी भी व्यक्ति को काम, पढ़ाई, वित्तीय मुद्दों या जीवन में बदलाव से होने वाला तनाव उसके यौन क्रिया को काफी प्रभावित कर सकता है। सामान्य रूप से चिंता शरीर की आराम करने और उत्तेजित होने की क्षमता में बाधा डाल सकती है।
· अवसाद: अवसाद यौन सहित गतिविधियों में रुचि की कमी का कारण बन सकता है, और सीधे एक आदमी की इरेक्शन पाने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
· रिश्ते संबंधी मुद्दे: किसी व्यक्ति के शादी से पहले भी, रिश्ते में संघर्ष, संचार संबंधी समस्याएं या भावनात्मक जुड़ाव की कमी ईडी में योगदान कर सकती है।
· कम आत्मसम्मान या शरीर की छवि संबंधी मुद्दे: खुद के बारे में नकारात्मक धारणाएं चिंता का कारण बन सकती हैं और व्यक्ति के यौन आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।
· अंतरंगता का डर: कुछ पुरुष अंतरंगता, प्रतिबद्धता या भेद्यता से संबंधित अंतर्निहित भय से जूझ सकते हैं, जो ईडी के रूप में प्रकट हो सकता है।
· पिछले नकारात्मक यौन अनुभव: व्यक्ति का पिछला निराशाजनक या दर्दनाक यौन अनुभव भविष्य की मुलाकातों के लिए मानसिक अवरोध पैदा कर सकता है। यह पुरुषों को उसके स्तंभन कार्य को बाधित कर सकता है।
शारीरिक कारक (युवा पुरुषों में भी हो सकते हैं):
अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियाँ: हालाँकि यह वृद्ध पुरुषों में अधिक आम है, लेकिन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग के शुरुआती लक्षण जैसी स्थितियाँ किसी भी उम्र में व्यक्ति के पेनिले में रक्त के प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं।
हार्मोनल असंतुलन: कम टेस्टोस्टेरोन का स्तर, हालाँकि युवा पुरुषों में एकमात्र कारण के रूप में कम आम है, ईडी में योगदान कर सकता है। थायरॉयड की समस्याएँ भी एक भूमिका निभा सकती हैं, जैसे व्यक्ति को स्तंभन दोष का खतरा बढ़ जाता है।
जीवनशैली कारक:
· धूम्रपान: यह शरीर में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है।
· अत्यधिक शराब का सेवन/दवा का उपयोग: इसके अत्यधिक उपयोग से, व्यक्ति के स्तंभन कार्य खराब हो सकता है।
· मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी: इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल की वृद्धि होती है, जो समग्र खराब हृदय स्वास्थ्य में योगदान करते हैं।
· कुछ दवाएं: कुछ प्रिस्क्रिप्शन दवाएं (जैसे, एंटीडिप्रेसेंट, रक्तचाप की दवाएं) साइड इफेक्ट के रूप में ईडी का कारण बन सकती हैं।
चोट या पैल्विक सर्जरी: पैल्विक क्षेत्र में नसों या रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने से पुरुष में इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या हो सकता है।
युवा पुरुषों में इसे अक्सर क्यों नजरअंदाज या खारिज कर दिया जाता है:
डॉ दुबे बताते है कि लोगो में यह एक आम ग़लतफ़हमी है कि ईडी केवल वृद्ध पुरुषों के यौन जीवन को ही प्रभावित करता है। इससे युवा व्यक्ति शर्मिंदा महसूस कर सकते हैं और मदद लेने में अनिच्छुक हो सकते हैं। हालाँकि, अध्ययनों से यह साफ़-साफ़ पता चलता है कि भारत में 40 वर्ष से कम आयु के पुरुषों का एक महत्वपूर्ण प्रतिशत ईडी का अनुभव करता है।
व्यक्तिगत सहायता लेने का महत्व:
अगर कोई पुरुष शादी से पहले अपने जीवन में ईडी की समस्या से जूझ रहा है, तो उसे सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। डॉक्टर किसी भी अंतर्निहित शारीरिक कारणों को खारिज करने में मदद कर सकता है और अगर मनोवैज्ञानिक कारक भूमिका निभा रहे हैं, तो चिंता को प्रबंधित करने और यौन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए थेरेपी (जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी या यौन थेरेपी), काउंसलिंग या अन्य रणनीतियों की सिफारिश कर सकता है। इन मुद्दों को जल्दी संबोधित करने से व्यक्ति को और अधिक परेशानी पैदा करने या भविष्य के रिश्तों को प्रभावित करने से रोका जा सकता है।
एक पुरुष स्तंभन दोष को कैसे रोक सकता है?
भारत के इस सीनियर गुप्त व यौन रोग विशेषज्ञ डॉक्टर का कहना है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन को रोकना या प्रबंधन करना मुख्य रूप से व्यक्ति के अच्छे समग्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने पर निर्भर करता है। चूंकि इरेक्टाइल डिसफंक्शन अक्सर अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं का लक्षण होता है, इसलिए उन मुद्दों को संबोधित करना महत्वपूर्ण होता है। यहाँ एक व्यापक मार्गदर्शिका दी गई है, जो व्यक्ति को बहुत हद तक उसके स्तंभन दोष की समस्या को प्रतिबंधित करने में मदद कर सकता है।
हृदय-स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ:
संतुलित आहार लें: फलों, सब्जियों, साबुत अनाज, कम वसा वाले प्रोटीन और स्वस्थ वसा (जैसे जैतून के तेल, नट्स और वसायुक्त मछली में पाए जाते हैं) से भरपूर आहार पर ध्यान केंद्रित करें। इस संतुलित आहार को दैनिक जीवन में शामिल करे व ऋतुचर्या पर भी ध्यान दे।
खाद्य पदार्थ जो मदद कर सकते हैं:
· फल और सब्जियाँ: खास तौर पर वे जिनमें फ्लेवोनोइड्स (बेरीज, सेब, खट्टे फल) और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अधिक होती है। ऐसे फल व सब्जी पर विशेष ध्यान दे।
· डार्क चॉकलेट: इसमें फ्लेवनॉल्स होते हैं जो रक्त प्रवाह को बेहतर बनाते हैं।
· पत्तेदार सब्जियाँ: जैसे पालक, केला और अरुगुला, जिनमें नाइट्रेट्स की मात्रा अधिक होती है जो नाइट्रिक ऑक्साइड को बढ़ाते हैं, जो इरेक्शन के लिए महत्वपूर्ण यौगिक भी है।
· नट्स: बादाम, अखरोट और पिस्ता में आर्जिनिन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड और स्वस्थ वसा का उत्पादन करने में मदद करता है। इनका एक सिमित मात्रा में नियमित रूप से सेवन करे।
· फैटी मछली: सैल्मन, टूना और मैकेरल ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, जो हृदय के स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं। जो व्यक्ति इस प्रकार के खाद्य-प्रदार्थ का उपयोग करते है उनके लिए फायदेमंद है।
· तरबूज: इसमें एल-सिट्रुलिन होता है, जो रक्त वाहिकाओं को आराम देने में मदद कर सकता है। यह एक ऋतुचर्या वाला फल है, इसका सेवन करे।
· लहसुन: यह धमनियों को स्वस्थ और साफ रखने में मदद कर सकता है। अतः इसका उपयोग करे।
· जैतून का तेल: यह टेस्टोस्टेरोन को बढ़ा सकता है और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकता है। इसका व्यवहार खाने में कर सकते है।
· कॉफी: मध्यम मात्रा में कैफीन का सेवन रक्त प्रवाह में सुधार कर सकता है। यह तनाव को भी प्रतिबंधित करने में मदद करता है।
अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों का प्रबंधन करें:
· मधुमेह को नियंत्रित करें: खराब तरीके से प्रबंधित रक्त शर्करा का स्तर नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे व्यक्ति में ईडी की समस्या हो सकता है। अपने मधुमेह को नियंत्रण में रखने के लिए अपने डॉक्टर के साथ मिलकर काम करें।
· रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी करें: उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है। इन स्थितियों के प्रबंधन के लिए अपने डॉक्टर की सिफारिशों का पालन करें, जिसमें जीवनशैली में बदलाव और/या दवा शामिल हो सकती है।
· हृदय रोग का इलाज करें: ईडी हृदय रोग का एक प्रारंभिक चेतावनी या संकेत हो सकता है। यदि आपके पास हृदय रोग के लिए कोई जोखिम कारक हैं, तो अपने डॉक्टर से उनके बारे में चर्चा करें व इसका सही से उपचार ले।
सकारात्मक जीवनशैली विकल्प चुनें:
· धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है और रक्त प्रवाह को प्रतिबंधित करता है, जिससे व्यक्ति में ईडी का जोखिम काफी बढ़ जाता है। धूम्रपान छोड़ना सबसे प्रभावशाली कदमों में से एक है जो व्यक्ति उठा सकते हैं।
· शराब का सेवन सीमित करें: अत्यधिक शराब का सेवन स्तंभन कार्य को ख़राब कर सकता है। यदि आप इसका सेवन करते हैं, तो संयम से इसका इस्तेमाल करे (65 वर्ष से कम आयु के पुरुषों के लिए प्रतिदिन दो ड्रिंक तक और 65 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों के लिए प्रतिदिन एक ड्रिंक तक)। अगर संभव हो तो इसका त्याग कर सकते है।
· अवैध दवाओं से बचें: कई मनोरंजक दवाएँ यौन क्रिया को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं। अतः इनके सेवन से बचे।
· नींद को प्राथमिकता दें: खराब नींद टेस्टोस्टेरोन सहित हार्मोन के स्तर को बाधित कर सकती है, जो यौन क्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। प्रति रात 7-9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद का लक्ष्य रखें, जो व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य के कल्याण के लिए आवश्यक है।
मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक कारकों को संबोधित करें:
तनाव को नियंत्रित करें: क्रोनिक तनाव, चिंता और अवसाद ईडी के सामान्य मनोवैज्ञानिक कारण माने जाते हैं। अपनी दिनचर्या में तनाव कम करने वाली तकनीकों को शामिल करें, जो निम्नलिखित है:
· माइंडफुलनेस और ध्यान।
· योग या गहरी साँस लेने के व्यायाम।
· शौक और अवकाश गतिविधियाँ।
· प्रकृति में समय बिताना।
परामर्श या चिकित्सा लें: यदि आप महत्वपूर्ण तनाव, चिंता, अवसाद या रिश्ते की समस्याओं का अनुभव कर रहे हैं जो ईडी में योगदान दे सकते हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर या सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से बात कर सकते है, वे अविश्वसनीय रूप से आपके समस्या के निदान में सहायक हो सकते है।
साथी के साथ खुला संचार: अपने साथी के साथ चिंताओं और समस्याओं पर चर्चा करने से प्रदर्शन का दबाव कम हो सकता है और अंतरंगता मजबूत हो सकती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से ईडी में मदद कर सकती है।
सीमित/बचने योग्य खाद्य पदार्थ: प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, अत्यधिक लाल और प्रसंस्कृत मांस, संतृप्त और ट्रांस वसा में उच्च खाद्य पदार्थ, चीनी में उच्च खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ, और अत्यधिक सोडियम। इन सभी खाद्य-पदार्थो को दैनिक जीवन में सीमित रूप से उपयोग करे।
स्वस्थ वजन बनाए रखें: मोटापा ईडी के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा देता है, अक्सर मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के साथ इसके संबंध के कारण। अतः अतिरिक्त वजन को कम करने से इरेक्टाइल फ़ंक्शन में काफी सुधार हो सकता है।
नियमित रूप से व्यायाम करें: शारीरिक गतिविधि व्यक्ति के पेनिले सहित पूरे शरीर में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करती है। यह वजन को नियंत्रित करने, तनाव को कम करने और समग्र हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। अतः व्यक्ति को इसका नियमित अभ्यास करना आवश्यक है।
· प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि (जैसे तेज चलना, जॉगिंग, तैराकी, साइकिल चलाना) का लक्ष्य रखें।
· सप्ताह में दो बार शक्ति प्रशिक्षण को शामिल करें।
· पेल्विक फ्लोर (केगेल) व्यायाम: ये व्यायाम आपके मूत्राशय, आंत्र और यौन क्रिया को सहारा देने वाली मांसपेशियों को मजबूत करते हैं, जिससे स्तंभन शक्ति और नियंत्रण में सुधार हो सकता है।
· ऐसा करने के लिए, पेशाब के बहाव को रोकने या गैस को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मांसपेशियों को कस लें, 3-5 सेकंड तक रोकें, फिर आराम करें। दिन में 2-3 बार, 10-15 बार दोहराएँ।
दवाओं के प्रति सावधान रहें:
अपने डॉक्टर से दवाओं की समीक्षा करें: कुछ प्रिस्क्रिप्शन और ओवर-द-काउंटर दवाएं साइड इफेक्ट के रूप में ईडी का कारण बन सकती हैं (उदाहरण के लिए, कुछ एंटीडिप्रेसेंट, ब्लड प्रेशर की दवाएं)। अपने डॉक्टर से परामर्श किए बिना कभी भी निर्धारित दवा लेना बंद न करें, लेकिन अगर आपको लगता है कि यह ईडी में योगदान दे सकती है, तो संभावित विकल्पों पर चर्चा करें।
महत्वपूर्ण नोट: निवारक उपायों के बावजूद, कुछ पुरुषों को अभी भी ईडी का अनुभव हो सकता है। यदि आप ईडी से जूझ रहे हैं, तो आपको सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है। ईडी एक अधिक गंभीर अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थिति का संकेत हो सकता है जिस पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। एक स्वास्थ्य सेवा पेशेवर सटीक रूप से कारण का निदान कर सकता है और सबसे उपयुक्त उपचार योजना की सिफारिश कर सकता है। अतः मदद लेने में संकोच न करे।
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दुबे क्लिनिक:
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डॉ. सुनील दुबे (दुबे क्लिनिक)
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