अपना डोनेशन कमेटी – क़वानीन व ज़वाबित
दफ़ा 1: नाम
इस इदारे का नाम “अपना डोनेशन कमेटी”
दफ़ा 2: कमेटी की हैसियत
कमेटी एक ग़ैर-मुनाफ़ा और ख़ैराती इदारा होगी।
यह सिर्फ़ समाजी भलाई और इंसानी मदद के मक़सद से काम करेगी, किसी भी शख़्सी फ़ायदे के लिए नहीं।
दफ़ा 3: मक़ासिद
कमेटी के मक़ासिद निम्नलिखित होंगे:
ग़रीब और ज़रूरतमंद लोगों की मदद के लिए चंदा जमा करना
तालीम, सेहत, खाना और इमदादी हालात में तआवुन फ़राहम करना
बेवाओं, यतीमों, बुज़ुर्गों और माज़ूर अफ़राद की मदद करना
क़ुदरती आफ़ात और हंगामी हालात में लोगों की मदद करना
समाज में इत्तेहाद, तआवुन, रहमदिली और समाजी ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देना
दफ़ा 4: रुकनियत (सदस्यता)
कोई भी ईमानदार और ज़िम्मेदार शख़्स कमेटी का रुक्न बन सकता है
तमाम अरकान के लिए कमेटी के क़वानीन और फ़ैसलों की पाबंदी ज़रूरी होगी
रकम के ग़लत इस्तेमाल या बद-इंतज़ामी की सूरत में रुकनियत ख़त्म की जा सकती है
दफ़ा 5: इंतज़ामी कमेटी
कमेटी में निम्न ओहदेदार होंगे:
सदर
नायब सदर
जनरल सेक्रेटरी
ख़ज़ांची / फ़ाइनेंस सेक्रेटरी
दीगर अरकान (ज़रूरत के मुताबिक़)
दफ़ा 6: ओहदेदारों की ज़िम्मेदारियाँ
सदर
कमेटी का सरबराह होगा
तमाम सरगर्मियों की निगरानी करेगा
बैठकों की सदारत करेगा
सेक्रेटरी
रिकॉर्ड और मीटिंग की कार्यवाही महफ़ूज़ रखेगा
रस्मी ख़त-ओ-किताबत का काम देखेगा
ख़ज़ांची
चंदा और ख़र्च का इंतज़ाम करेगा
माली रिकॉर्ड दुरुस्त रखेगा
अरकान के सामने माली रिपोर्ट पेश करेगा
दफ़ा 7: इजलास (बैठकें)
इजलास बाक़ायदा (मासिक या सिमाही) तौर पर होंगे
फ़ैसले अक्सरियत से किए जाएँगे
ज़रूरत पड़ने पर हंगामी इजलास बुलाया जा सकता है
दफ़ा 8: फ़ंड और चंदा
फ़ंड सिर्फ़ ख़ैराती मक़ासिद के लिए जमा किया जाएगा
तमाम चंदे का मुकम्मल हिसाब-किताब रखा जाएगा
कोई भी रुक्न फ़ंड का शख़्सी इस्तेमाल नहीं करेगा
माली मामलात में पूरी शफ़्फ़ाफ़ियत रखी जाएगी
दफ़ा 9: हिसाब-किताब और जाँच
ख़ज़ांची की जानिब से मुकम्मल हिसाब रखा जाएगा
माली रिपोर्ट अरकान के साथ साझा की जाएगी
मुमकिन हो तो सालाना जाँच या ऑडिट कराया जाएगा
दफ़ा 10: इंतज़ामी अमल
क़वानीन की ख़िलाफ़वरज़ी या रकम के ग़लत इस्तेमाल पर सख़्त कार्रवाई होगी
कमेटी को किसी भी रुक्न को मुअत्तल या ख़ारिज करने का इख़्तियार होगा
अगर किसी मेंबर को किसी भी तरह की दिक्कत हो तो अपनी बात ग्रुप में रखें, ताकि बेहतर से बेहतर फैसला लिया जा सके। किसी से पर्सनल बात करने से बचें
दफ़ा 11: तरमीम (संशोधन)
क़वानीन में तरमीम अक्सरियत की मंज़ूरी से की जा सकती है
तमाम तरमीमात तहरीरी तौर पर दर्ज की जाएँगी
दफ़ा 12: इख़्तिताम (विघटन)
कमेटी के इख़्तिताम की सूरत में:
बाक़ी रकम किसी दूसरी रजिस्टर्ड ख़ैराती तंजीम को दी जाएगी
कोई भी रुक्न रकम या जायदाद पर शख़्सी दावा नहीं करेगा
दफ़ा 13: मदद और तआवुन की पालिसी
कमेटी अपनी हैसियत और दस्तियाब फ़ंड के मुताबिक़, कमेटी की मंज़ूरी से, निम्न हालात में मदद फ़राहम करेगी:
इलाज-मुआविनत
अगर किसी ग़रीब ख़ानदान का कोई फ़र्द बीमार हो और इलाज, दवाइयों या अस्पताल के ख़र्च के लिए मदद की ज़रूरत हो, तो कमेटी मदद करेगी।
बेटी की शादी और ज़रूरी रसूमात
अगर किसी ग़रीब ख़ानदान में बेटी की शादी या ज़रूरी समाजी या मज़हबी रसूमात के लिए मदद चाहिए, तो कमेटी माली या सामान की सूरत में तआवुन कर सकती है।
अचानक परेशानी या संकट
अगर किसी ख़ानदान पर हादसा, रोज़गार छूटना या कोई और अचानक मुश्किल आ जाए, तो कमेटी अपनी हैसियत के मुताबिक़ मदद करेगी।
बुनियादी ज़रूरतों में मदद
अगर किसी ख़ानदान के पास खाना, कपड़े या बच्चों की तालीम (फ़ीस, किताबें, यूनिफ़ॉर्म) जैसी बुनियादी सहूलतें मौजूद न हों, तो कमेटी मदद फ़राहम करेगी।
ज़रूरतों और रोज़गार के लिए विदेश जाने में मदद (बिना सूद.
अगर कमिटी का कोई मेंबर रोज़गार के मक़सद से विदेश जाना चाहता हो और पैसों की कमी की वजह से मजबूर हो, बुनियादी ज़रूरतों हो तो कमेटी अपनी हैसियत के मुताबिक़ मदद कर सकती है,
ताकि उसे सूद वाले क़र्ज़ लेने की मजबूरी न पड़े।
अगर रकम वापसी पर इत्तेफ़ाक़ हो, तो वह आपसी सहमति और सहूलत से होगी
जब कमाने लगे तो 3 से 4 महीने में पैसे वापसी करने होंगे
सूद या लोन लेने की बजाय, ज़रूरतमंदों के लिए कमेटी से मदद लेना सबसे बेहतर और सुरक्षित उपाय है, जिससे वित्तीय बोझ कम हो और बिना किसी अतिरिक्त दबाव के ज़रूरी काम आसानी से पूरे हो सकें।
हादसा या क़ुदरती आफ़त
आग, बाढ़, ज़लज़ला या किसी भी क़ुदरती आफ़त या हादसे की सूरत में कमेटी मुतास्सिर ख़ानदान के साथ खड़ी रहेगी और मुमकिन मदद करेगी।