Ankit's Mutual Fund Portfolio is Now Live 🚀
🕒Last Updated : 28 November 2025 | 12:51 PM (IST)
लेखक: Ankit Khare
दोस्तों, शुरुआत आसान लग सकती है। मुश्किल तब आती है जब return उम्मीद से कम हो, बाजार गिर रहा हो या परिवार में पैसे की जरूरत बदल जाए। ऐसे समय में व्यवहार परिणाम पर असर डालता है, लेकिन हर exit को गलती या हर निवेशक की परेशानी को अधैर्य कहना ठीक नहीं है।
यहाँ 40% या 60% निवेशकों के बारे में कोई निष्कर्ष नहीं दिया जा रहा है। ऐसे प्रतिशत के लिए मूल dataset, समयावधि और यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आंकड़ा लोगों, folios, SIP accounts या invested amount का है।
अच्छे return कुछ छोटे periods में केंद्रित हो सकते हैं। बार-बार निवेश रोककर फिर शुरू करने से ऐसे periods छूट सकते हैं। फिर भी best-month examples भविष्य के लाभ का प्रमाण नहीं हैं। अपनी जरूरत और allocation देखकर निर्णय लें; सिर्फ किसी headline से डरकर या उत्साहित होकर नहीं।
मान लें हर महीने के अंत में ₹10,000 निवेश होता है, कोई withdrawal नहीं है और काल्पनिक return लगातार 12% effective annual है। मासिक दर 1.12^(1/12) − 1 ली गई है। Tax और fees शामिल नहीं हैं।
5 साल: योगदान ₹6 लाख; model value लगभग ₹8.03 लाख।
10 साल: योगदान ₹12 लाख; model value लगभग ₹22.19 लाख।
15 साल: योगदान ₹18 लाख; model value लगभग ₹47.15 लाख।
20 साल: योगदान ₹24 लाख; model value लगभग ₹91.12 लाख।
30 साल: योगदान ₹36 लाख; model value लगभग ₹3.05 करोड़।
गणना लंबे समय का प्रभाव दिखाती है, कोई तय growth path नहीं। Compounding पहले साल से काम करती है; दस साल बाद अचानक चालू नहीं होती। वास्तविक return घट-बढ़ेगा और अंतिम रकम इस model से काफी अलग हो सकती है।
किसी historical sample में सात साल के सभी rolling periods positive हों, तब भी अगले सात साल का नुकसान असंभव नहीं हो जाता। ऐसा निष्कर्ष प्रकाशित करते समय exact index, TRI या price return, start/end dates और rolling frequency देना आवश्यक है।
Equity में market risk रहता है। Small-cap की liquidity और volatility को भी समझें। SEBI की investor guidance के अनुसार past performance भविष्य का भरोसा नहीं देती।
Emergency खर्च या income loss से योगदान निभाना मुश्किल हो रहा हो।
Goal नजदीक हो और portfolio में अस्थिर assets ज्यादा हों।
Fund का उद्देश्य या आपकी risk-taking capacity बदल गई हो।
कई funds खरीदने के बाद भी वही holdings/category बार-बार दोहर रही हो।
अस्थायी दबाव में SIP घटाना या रोकना हमेशा असफलता नहीं है। नई स्थिति में टिकाऊ योजना बनाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। पहले से emergency reserve रखने से मजबूरी में बिक्री की संभावना कम हो सकती है।
एक लिखित लक्ष्य, निभाने योग्य योगदान, नियमित समीक्षा और अपनी क्षमता के अनुरूप जोखिम रखें। Fund का चयन और व्यवहार दोनों मायने रखते हैं। Mutual funds सभी goals या सभी लोगों के लिए एक जैसा समाधान नहीं हैं, और कोई बाजार आपको करोड़पति बनाने का वादा नहीं करता।
यह financial education है। योजना बदलने से पहले जरूरत हो तो SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें।