Ankit's Mutual Fund Portfolio is Now Live 🚀
🕒Last Updated : 26 November 2025 | 12:09 AM (IST)
लेखक: Ankit Khare
दोस्तों, लंबे निवेश-समय में कुछ अच्छे महीने कुल return पर बड़ा असर डाल सकते हैं। इसलिए बार-बार अंदर-बाहर जाने की योजना में दो फैसले सही होने चाहिए: कब निकलना है और कब वापस आना है। लेकिन किसी चुने हुए historical example से हर बार निवेश में बने रहने पर लाभ की गारंटी नहीं निकलती।
गणित समझने के लिए दो काल्पनिक scenarios लें। पहले में कुल return 135.30% और दूसरे में 73.87% हो। यहाँ इन आंकड़ों को किसी नामित fund की प्रमाणित performance या verified study के रूप में नहीं दिया जा रहा है।
₹1 लाख पर 135.30% return से अंतिम value ₹2,35,300 होगी।
₹1 लाख पर 73.87% return से अंतिम value ₹1,73,870 होगी।
Return में अंतर 61.43 percentage points है।
अंतिम रकम का अंतर ₹61,430 है, जो ₹2,35,300 से लगभग 26.11% कम है।
इसलिए 61.43 percentage-point return अंतर को “आधी wealth चली गई” कहना सही नहीं है। तुलना करते समय denominator और शुरुआती पूँजी देखना जरूरी है।
कौन-सा fund, Direct/Regular plan और Growth/IDCW option लिया गया?
सटीक start/end dates और data का स्रोत क्या है?
गायब महीनों में पैसा cash में रखा गया या शून्य return मान लिया गया?
सिर्फ best months हटाए गए हैं या worst months और दूसरे scenarios भी दिखाए गए हैं?
Costs, taxes और वापस निवेश करने की वास्तविक कठिनाई शामिल है?
बाद में सबसे अच्छे महीने पहचानना आसान होता है। उस समय पहले से उन्हें पहचानना अलग चुनौती है। चुने हुए months को हटाने वाली calculation एक explanation हो सकती है; वह किसी व्यक्ति को सच में उतना return मिलता, इसका प्रमाण नहीं है।
अगर goal लंबी अवधि का है, चुना asset mix जरूरत के अनुकूल है और खर्च के लिए अलग buffer है, तो हर खबर पर फैसला बदलना जरूरी नहीं। लेकिन सिर्फ “रुको, सब ठीक हो जाएगा” भी पर्याप्त नहीं है। Fund की strategy, portfolio overlap, लागत और अपनी जरूरतों की समीक्षा करें।
Goal पास आ रहा हो, आय बदली हो या portfolio जरूरत से ज्यादा concentrated हो तो rebalancing का कारण हो सकता है। ऐसे फैसले केवल recent return के आधार पर नहीं लेने चाहिए।
तेज बढ़त के साथ गिरावट और liquidity risk भी हो सकते हैं। किसी category के कुछ अच्छे महीनों को देखकर उसमें पूरी रकम लगाना जरूरी निष्कर्ष नहीं है। SEBI की risk-management जानकारी निवेश को horizon और जरूरत से मिलाने पर जोर देती है।
Return के headline से पहले calculation पढ़ें। अपनी investment policy लिखें: लक्ष्य, contributions, समीक्षा और किन परिस्थितियों में बदलाव करेंगे। इससे निर्णय समझने में मदद मिलेगी, पर कोई policy नुकसान मिटाने की गारंटी नहीं देती। यह लेख शैक्षिक है, व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं।