An inspiring hindi poem written by my friend Dhananjay Singh,
Me Toh Awara Sa Tha
मैं तो आवारा सा था !
एक जुनून सा था, लहरों के उस पार उतर जाने का
गम तो सीने में किनारे से ही लेकर चला था में
उस विशाल से समंदर में अकेला ही चल पड़ा था मैं
मैं तो आवारा सा था !
लहरों की बूंद में न जाने कब छिप गए मेरे अश्क
गमों को पीता, मुस्कुराता जा रहा था मैं
हां, लहरों के उस पार चला जा रहा था मैं
मैं तो आवारा सा था !
मिले तो और भी थे मेरी मुस्कान देख कर
सबको हंसाता, मुस्कुराता, चला जा रहा था मैं
मैं अकेला, लहरों से, लड़ता चला जा रहा था मैं
मैं तो आवारा सा था !
कोई अंजान सा, किनारे से इतने दूर कौन है समंदर में -२
न जाने कुछ बात थी उसकी मासूम सी आँखों में
मुस्कुराया तो मैं उसे देख कर भी था
फिर बूंदों मैं छिपे, मेरे अश्कों को, उसने कैसे देख लिया
बहुत दूर आ चुका था मैं
इरादा, तो उसे भी छोड़ जाने का था
पर सदियों के बाद आज, मुस्कुरा रहा था मैं
हां, अब साथ चल रहा था मैं
उसके साथ चल रहा था मैं
सदियों के बाद आज, मुस्कुरा रहा था मैं
मैं तो आवारा सा था !
खबर उसे भी थी तूफां आने की
खबर उसे भी थी कश्ती के डूब जाने की
पर बहुत दूर आ चुका हु मैं
मुस्कुरा मुस्कुरा कर थक चुका हु मैं
एक अंधेरा सा जैसे होने को है
वो जुनून अब, जैसे खोने को है
सदीयों के बाद आज, देखा हैं मुड़ कर मैंने
किनारे से बहुत दूर आ चुका हु मैं
जिंदगी से, हार चुका हूँ मैं
टूटने को है अब जुनून मेरा
एक रात सी है आने को
अब कोई जुनून नहीं उस पर जाने को
डूब रही है जिंदगी मेरी
अकेला हो चुका हु मैं
बहुत रो रहा हु मैं
बहुत रो रहा हु मैं ||