प्रश्न पत्र-8
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प्रश्न पत्र- 8 के उत्तर
१. जिन प्रतिमाओं की श्रद्धापूर्वक भक्ति करने को क्यों कहा?
उत्तर क्योंकि वर्तमान काल में साक्षात अरिहंत भगवान का अभाव है।
२. जिनेंद्र भगवान की भक्ति करने से क्या होगा?
उत्तर जिस प्रकार विष नामक मंत्र से विष उतर जाता है उसी प्रकार जिनेंद्र भगवान की भक्ति से संसार वृद्धि में कारणभूत मोह रूपी विष उतर जाता है।
३. अरिहंत किसे कहते हैं?
उत्तर जिन्होंने घातिया कर्मों को नष्ट कर केवल ज्ञान में संपूर्ण पदार्थों को देख लिया उन्हें अरिहंत कहते हैं।
४. अरिहंत भत्ती को सस्ता-सहज उपाय क्यों बताया?
उत्तर क्योंकि अरिहंतो की मात्र श्रद्धापूर्वक भक्ति करने से ही अरिहंत पद की प्राप्ति हो जाती है।
कौन से साधु पुनः पुनः इसी संसार में भ्रमण करते रहते हैं ❓ जानिए पूज्य गुरुदेव की मंगलमय वाणी में
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प्रश्न पत्र-9
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प्रश्न पत्र 9 के उत्तर
1️⃣बोधिकिसे कहते हैं ?
उत्तर रत्नत्रय की प्राप्ति होना बोधि है।
2️⃣मूढ व्यक्ति किसे कहा गया है?
उत्तर जो व्यक्ति संयम ग्रहण करके जिन भक्ति में प्रमाद करता है उसे मूढ कहा गया है।
3️⃣कौन से साधु पुनः पुनः इसी संसार में भ्रमण करते रहते हैं?
उत्तर जो भिक्षु मात्र नग्न होकर रहता है और जिन भक्ति के बिना रहता है मैं वह चार गतियों के दुखों को दूर नहीं कर सकता है।
4️⃣सम्यकदृष्टि श्रावक या साधु कौन कौन होते हैं?
उत्तर जो सदैव अरिहंत भगवान की भक्ति में तत्पर रहते हैं।
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प्रश्न पत्र-10
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प्रश्न पत्र 10 के उत्तर
1. आचार्य परमेष्ठी को नाव की उपमा क्यों दी गई है?
उ-1 आचार्य परमेष्ठी भव्य आत्माओं को भवसागर रुपी नदी से पार लगाने के लिए शिक्षा- दीक्षा और प्रायश्चित देते हैं इसीलिए उन्हें नाव की उपमा दी गई है।
2- आचार्य किस प्रकार दीपक के समान जिन मार्ग को प्रकाशित करते हैं?
उ- जिस प्रकार दीपक निर्लिप्त भाव से जगत को प्रकाशित करता है उसी प्रकार आचार्य परमेष्ठी भी बिना किसी ख्याति,पूजा ,लाभ के लोभ से जिनेंद्र भगवान के द्वारा दिखाए गए मार्ग को व्यवहार और निश्चय , द्रव्यार्थिक और पर्यायाथिक नय से अपने ज्ञान रूपी प्रकाश से प्रकाशित करते हैं।
3- आचार्य परमेष्ठी कैसी आत्मा हैं?
आचार्य परमेष्ठी जगत के उद्धारक आत्मा हैं।
4- पंचाचार के नाम लिखो ।
ज्ञानाचार
दर्शनाचार
वीर्याचार
तपाचार
चरित्राचार
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प्रश्न पत्र-11
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प्रश्न पत्र 11 के उत्तर
1.आचार्य परमेष्ठी सर्वश्रेष्ठ क्यों हैं?
उ. आचार्य यथा लब्ध जिनवाणी को अपनी बुद्धि से क्षयोपशम के अनुसार स्वयं ग्रहण करते हैं और अन्य भव्य जीवों को भी प्रदान करते हैं। इसी उपकार के कारण परमेष्ठी सर्वश्रेष्ठ हैं
2.गाथा 87 में किन आचार्यों को जयवंत कहा हैं?
उ. जो आचार्य ख्याति लाभ से, एकांत मति लोगों से संमोह नहीं करते हैं और समिति को विनिष्ट नही करते हैं वह आचार्य सदा जयवंत हो
3.आचार्य किन शिष्यों की रक्षा करते हैं ?
उ. चारित्र की शिक्षा और संस्कार देने के बाद मार्ग भ्रष्ट जीवों को उनकी रक्षा करते हैं
4.आचार्य देव कैसे वैद्य हैं?
उ. आचार्य देव संसार दुख को नाश करने वाले वैद्य हैं
प्रश्न पत्र-12
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प्रश्न पत्र- 12 के उत्तर
1. बहुश्रुत भक्ति में मुख्यता से कौन से परमेष्ठी की भक्ति है?
➡️ बहुश्रुत भक्ति में मुख्यता बहु श्रुत को धारण करने वाले साधु परमेष्ठी की भक्ति है
2. साधु परमेष्ठी की भक्ति से कौन सा ज्ञान बढ़ता है?
➡️ साधु परमेष्ठी की भक्ति से श्रुतज्ञान का क्षयोपशम बढ़ता है
3. श्रुत के कितने अंग होते है?
➡️ श्रुत अर्थात् जिनवाणी के बारह अंग होते हैं
4.ज्ञानतपोजिनपूजाविद्यातिश्यैश्च जिनधर्म:| इसका अर्थ क्या है?
➡️ इसका अर्थ ये है - जिन धर्म की प्रभावना ज्ञान, तप, जिनपूजा और विद्या के अतिशय से करनी चाहिए