प्रश्न पत्र-5
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प्रश्न पत्र- 5 के उत्तर
1 - वैय्यावृत्ति करने में कौन समर्थ है?
उ. वही व्यक्ति वैय्यवृत्य में समर्थ है जो अनेकान्त रूप से शरीर और आत्मा के सम्बंध को जानने वाला है ।
2 - वैय्यावृत्ति किस उद्देश्य से करनी चाहिए?
उ. रत्नत्रय का दिव्य लाभ पाने के लिए ।
3 - जिनधर्म वत्सल कौन कहलाता हैं?
उ. जो व्यक्ति यथा शक्ति अपने धन-बल का उपयोग साधुजनो की, साध्वियो की, सह धर्मी की, आपत्ति-विपत्ति का निवारण करता है, वह जिन शासन का आदर करने वाला जिन धर्म वत्सल कहलाता है।
4 - श्री धवला जी में वैय्यावृत्य की क्या व्याख्या की गयी है?
उ. “व्याप्रत” अर्थात् रोग आदि से व्याकुल साधु के विषय में जो किया जाता है उसका नाम वैय्यावृत्य है।
चित्त शुद्धि कैसे होती है ? जानिए पूज्य गुरुदेव की मंगलमय वाणी में
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प्रश्न पत्र-6
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प्रश्न पत्र 6 के उत्तर
प्रश्न-१ श्री कृष्ण को तीर्थंकर नाम कर्म का बंध कैसे हुआ?
श्री कृष्ण ने मुनि महाराज को औषधि दान देकर तीर्थंकर नाम कर्म का बंध किया।
प्रश्न-२ किस प्रकार की धारणा से मोक्ष की हानि होगी?
मुझे किसी की सेवा की ज़रूरत नहीं है या मै किसी की सेवा नहीं करूँगा, इस प्रकार की एकान्त धारणा से मोक्ष मार्ग की हानि होगी।
प्रश्न-३ वैय्यावृत्य तप पूज्य क्यों है?
वैय्यावृत्य तप में भी अंतरंग तप होने से साक्षात निर्जरा और चित्त शुद्धि का कारण होने से पूज्य है।
प्रश्न-४ जीव भाव किस तरह से बना रहता है?
परस्पर में एक दूसरे का उपकार करने से ही जीव भाव बनाए रख सकते है।
क्यों करते हैं जिनेंद्र भगवान की भक्ति❓समझते हैं पूज्य गुरुदेव की मंगल वाणी में आज की कक्षा में
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प्रश्न पत्र-7
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प्रश्न पत्र 7 के उत्तर
प्रश्न 1. अरिहंत भक्ति भावना को प्राकृत में लिखें।
उत्तर अरिहंत भत्ती भावणा
प्रश्न 2. मेंढक ने बावड़ी में क्या सुना?
उत्तर मेंढक ने सुना कि भगवान महावीर का विपुलाचल पर्वत पर समवशरण आया है।
प्रश्न 3 अरिहंत भक्ति की विशेषताएं लिखें।
उत्तर १.आत्मिक अनंत सुख को देने वाली है।
२. मूर्छा, काम भाव, अहंकार और निद्रा आदि मानसिक विकारों को दूर करने वाली है।
३. पुण्य का आश्रव और बंध कराने वाली है।
४. मोक्षमार्ग बतला कर मुक्ति दिलाने वाली है।
प्रश्न 4 पुण्य कितने प्रकार का होता है? जीव को कैसा पुण्य करना चाहिए?
उत्तर पुण्य दो प्रकार का होता है।
१. पापानुबन्धी पुण्य
२. पुण्यानुबन्धी पुण्य
जीव को हमेशा निदान रहित पुण्य करना चाहिए।