प्रश्न पत्र-1
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प्रश्न पत्र- 1 के उत्तर
1.साधु समाधि भावना से क्या अभिप्राय है?
उत्तर - साधु की समाधि बिगड़े नहीं, बल्कि उनके चित्त में विशुद्धी बनी रहे।
2. किसको साधु समाधि भावना बनी रहती है?
उत्तर - जो धर्म ध्यान और शुक्ल ध्यान को ध्याने वाले ध्याता हैं उन्हीं साधु की साधु समाधि भावना बनी रहती है।
3. स्वाश्रित साधु किसे कहते हैं?
उत्तर - जो साधु स्व-स्वभाव में लीन रहते हैं, पर में आश्रित नहीं रहते उन्हें स्वाश्रित साधु कहते हैं।
4. आत्मा में सदैव एक समान विशुद्धि क्यों नहीं बनी रह सकती?
उत्तर - क्योंकि कर्मोदय का आत्मा पर प्रभाव पड़ता है इसलिए सदैव एक समान विशुद्धि नहीं बनी रह सकती है।
साधु समाधि भावना के तीन भेद कौन-कौन से हैं? जानिए पूज्य गुरुदेव की मंगलमय वाणी में
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प्रश्न पत्र-2
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प्रश्न पत्र 2 के उत्तर
1. पराश्रित साधु समाधि भावना क्या है?
उत्तर - अन्य साधु की समाधि बनी रहे, उसके चित्त में संक्लेश न हो, यही पराश्रित साधु समाधि भावना है।
2. स्व-पराश्रित साधु समाधि भावना किसे कहते हैं?
उत्तर - अपनी आत्मा के साथ-साथ पर की आत्मा की भलाई में जो तत्पर रहते हैं ऐसी भावना को स्व-पराश्रित साधु समाधि भावना कहते हैं।
3. जिन साधु साध्वियों को द्रव्य हिंसा का पूर्णतया आजीवन त्याग है उन्हें किस से बचना चाहिए?
उत्तर - उन्हें भाव हिंसा से बचना चाहिए।
4. अभी तक की चार गाथाओं में कैसी समाधि भावना चल रही थी?
उत्तर - जीते जागते समाधि अर्थात चित्त की विशुद्धि ना बिगड़े।
कैसे की जाती है एक क्षपक साधक की सेवा? समझते हैं पूज्य गुरुदेव की मंगल वाणी में आज की कक्षा में
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प्रश्न पत्र-3
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प्रश्न पत्र 3 के उत्तर
1 - क्षपक कौन कहलाता है?
उ. जो साधक समाधिमरण अंगीकार करता है , वह क्षपक कहलाता है ।
2 - दश धर्म का वास्तविक आराधक कौन होता है?
उ. तपस्या के साथ सम्यक् श्रुतज्ञान को जो धारण करता है वह दश धर्म का आराधक होता है ।
3 - कैसे क्षपकसाधु को संबल प्रदान करना अन्य साधक का कर्तव्य है?
उ. जो साधु अपनी आत्म भावना से स्खलित हो रहा हो, अपने चित्त की अस्थिरता के कारण मार्ग से दूर हो रहा हो.... ऐसे क्षपक साधु को संबल प्रदान करना अन्य साधक का कर्तव्य है ।
4 - तप और श्रुत से युक्त कौन सा साधक होता है?
उ. दश धर्म की आराधना करने वाला साधक तप और श्रुत से युक्त होता है ।
साधु समाधि में लगे हुए साधक को शुभ भाव बनाये रखने के लिये व्रतों की सम्भाल कैसे करनी चाहिए? समझते हैं पूज्य गुरुदेव की मंगल वाणी में आज की कक्षा में
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प्रश्न पत्र-4
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प्रश्न पत्र 4 के उत्तर
1 - मनुष्य भव कैसा है?
उ. मनुष्य भव निश्चित ही अस्थिर है , क्षणभंगुर है।
2 - साधु समाधि को बिगाड़ने में पाँचों पाप का मूल कारण क्या है?
उ. परस्पर का विवाद ही साधु समाधि को बिगाड़ने में पाँचों पाप का मूल कारण है ।
3 - सावधान रहने वाले साधक के भाव कैसे होते हैं?
उ. सावधान रहने वाले साधक के सदैव शुभ भाव बने रहते हैं ।
4 - कैसा साधक अपनी आत्मा में तृप्त होता है?
उ. जिस साधक को अपनी आत्मा की निर्विकल्पता की भावना रहती है और दूसरे मुनि के प्रति भी सम्यक् भावना रखता है , वह अपनी आत्मा में तृप्त होता है ।