प्रश्न पत्र-38
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प्रश्न पत्र- 38 के उत्तर
1 - जो नग्न मुनिभेष धारकर भी धर्म की विराधना करता है , मनचाहे कार्य करता है, समिति आदि मूलगुणों का पालन नहीं करता है वह किस प्रकार की परिणति को प्राप्त करता है ?
उ- ऐसा साधु अंत समय में समाधि के बिना ही मरण को प्राप्त होता है और समाधिमरण के बिना प्राण त्यागने वाला मार्ग की अप्रभावना करता है ।।
2 - भाव श्रमण या भावलिंग क्या है ?
उ - द्रव्यानुयोग के अनुसार और चरणानुयोग के अनुसार भाव पाहुड़ में आचार्य कुन्दकुन्द देव ने जो भावों की प्रधानता पर जोर दिया है, वही भाव श्रमण या भावलिंग है।।
3 - सर्वार्थसिद्धि ग्रन्थ किन आचार्य द्वारा रचित है ?
उ - आचार्य श्री पूज्यपाद देव जी
4 - धार्मिक जीव को सहधर्मी जीव कितने प्रकार के मिलते हैं ,बताएँ ?
उ- दो प्रकार के :--- १) धर्म का निश्छल भाव से आचरण करने वाले और २) धर्म का आचरण नहीं करने वाले ।।
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प्रश्न पत्र-39
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प्रश्न पत्र 39 के उत्तर
1 - प्रशस्त राग किनके लिए बंध का कारण है ?
उ• - प्रशस्त राग उनके लिए संसार का अथवा संसार के कारणभूत कर्म बन्ध का कारण है जो मोक्ष चाहते ही नहीं है ।।
2 - आत्मा की शरण में रहना व अनुराग करना क्या है ?
उ• - पंचपरमेष्ठी की शरण में रहना आत्मा की शरण में रहना ही है व पंचपरमेष्ठी में अनुराग रखना ही आत्मा से अनुराग करना है ।।
3 - मोक्षमार्गी कौन है ?
उ• - संसार सुख से परांगमुख भव्य जीव ही मोक्षमार्गी है ।।
4 - सोलहकारण भावनाओं में अंतिम भावना में प्रवचन शब्द किसके लिए कहा है ?
उ• - प्रवचन शब्द शास्त्र के लिए एवं सहधर्मी भव्य आत्माओं को भी कहा जाता है । मोक्षमार्ग पर चलने वाले सभी प्राणी प्रवचन नाम से कहे हैं ।।
आज आपको गाथा 123 के लिखित प्रवचन के शेष भाग का स्वाध्याय करवाया जा रहा है।
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प्रश्न पत्र-40
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प्रश्न पत्र 40 के उत्तर
1 - "बिना कारण के कार्य का होना" किसके समान है ?
उ• - जैसे बिना माता पिता के पुत्रोत्पत्ति का हर्ष मनाना है ।।
2 - एकान्त मिथ्यात्व किसे कहते हैं। ?
उ• - मात्र एकान्त अभिप्राय को पुष्ट करने वाले किसी एक कथन को स्वीकारना और अन्य को असत्य कहना एकान्त मिथ्यात्व है ।।
3 - बारहवें गुणस्थान का क्या नाम है एवं इसमें कौन सी कर्म प्रकृतियों का क्षय होता है ?
उ• - बारहवां क्षीणमोह नामक गुणस्थान है और इसमें चारित्र मोहनीय की सभी कर्म प्रकृतियों का अभाव हो जाता है ।।
4 - वास्तव में धर्म क्या है ? प्राकृत में बताइये ।
उ• - चारित्तं खलु धम्मो...... ऐसा प्रवचनसार ग्रन्थ में कहा है ।।
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प्रश्न पत्र-41
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प्रश्न पत्र 41 के उत्तर
1 - चर्या कितने प्रकार की बताई है , नाम बताओ ?
उ• - श्रावक और श्रमण के लिए दो प्रकार की चर्या कही है । सागार चर्या , अनगार चर्या ।।
2 - अनगार चर्या से युक्त कौन होता है ?
उ• - श्रमण
3 - धर्म की विनय किसे कहा है ?
उ• - दस धर्मों में रुचि रखना ही धर्म की विनय है ।।
4 - क्या प्रवचन वत्सलत्व भावना निश्चय और व्यवहार रूपी होती है ?
उ• - हां ! प्रवचन वत्सलत्व भावना निश्चय और व्यवहार दोनों रूप होती है ।।
प्रश्न पत्र-42
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प्रश्न पत्र 42 के उत्तर
1 - व्यवहार नय से एवं निश्चय नय से पदार्थ कितने कहे हैं, नाम बताएं ?
उ• - व्यवहार नय से नौ पदार्थ कहे हैं-- 7 तत्त्व + पाप+ पुण्य ।।
निश्चय नय से एकमात्र आत्मा ही पदार्थ है ।।
2 - निश्चय नय से प्रवचन वात्सल्य क्या है ?
उ• - कर्म और नोकर्म से रहित शुद्धात्मा का श्रद्धान,ज्ञान और आचरण करना निश्चयनय से प्रवचन वात्सल्य है ।।
3 - नैष्कर्म्य दशा क्या है ?
उ• - जो पुण्य,पाप दोनों से उपयोग हटाकर ज्ञान नय में रमता है, यही स्थिति शुद्धोपयोग की है।इसे ही नैष्कर्म्य की दशा कहा है।।
4 - अक्रम से चलकर लक्ष्य पर पहुंचने वाला श्रावक किसे कहा है ?
उ• - जो पाप छोड़ने से पहले पुण्य छोड़ने की बात करता है ।।