This project is about exploring memories and creating stories while giving you the opportunity to develop your language skills in Hindi.
यादों की पोटली
वो बचपन की मस्ती,
जब खुशियाँ थी सस्ती !
अनमोल था अपनों का प्यार,
अनोखा था कहानियों का संसार !
छोटी-छोटी चीजों में खुशियाँ थी बड़ी-बड़ी,
हर काम में मिलती थी शाबाशियाँ घड़ी-घड़ी !
ना था किसी परेशानी का मेला,
ना जिम्मेदारी का था झमेला !
वो बचपन की मस्ती,
जब खुशियाँ थी सस्ती !
बचपन! चाहे वो किसी का भी हो सबको याद तो जरूर आता ही है। हर किसी के मन में यही बात आती है कि काश! हम अपने बचपन को एक बार फिर से जी सकें और वही आनंद और शरारतें एक बार फिर से कर पाएँ। ऐसा वापस होना संभव तो नहीं है लेकिन हम अपने बचपन की कुछ यादों को ताज़ा करने के लिए अपनी यादों की पोटली (पोटली में बंद कुछ ख़ास यादों को सबके साथ साझा करते हैं) को खँगालनें की कोशिश करते हैं ।
कहानियाँ----- आपके-हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है। हर किसी के जीवन का कोई न कोई क़िस्सा है। कुछ धुँधली-पुरानी यादें , कुछ जो हमने सुनी हैं, कुछ पढ़ी हैं, कुछ जो हमने ख़ुद जी हैं। जो न जाना था तुमने, वो जानेंगे हम इनसे । क़िस्सों का ये संसार हमारा, बुनता है यादों का पिटारा । उन्हें आज दोहराने का, साथ में सुनने-सुनाने का, दोबारा से जी जाने का मौक़ा मिला है।
कहानियाँ जीवन का आधार हैं, जो जीवन जीने की कला सिखाती हैं, मुस्कराने की वजह बताती हैं। कुछ बीती हुई, कुछ आज की कहानियाँ जो जोड़ती है तुम्हारे, हमारे कल को, आज को । कहानियों के झरोखे से हम अलग- अलग संस्कृतियों, देशों, कलाओं को जान पाते हैं। कल्पना से परे एक दुनिया की सैर कर आते हैं। आओ हम मिलकर अपने कुछ क़िस्से / कहानियों को याद करें और उन्हें अपने जीवन में उतार कर देखें ।
अधिगम उद्देश्य :
भाषा के विभिन्न कौशलों का विकास ।
रचनात्मक तथा सृजनात्मकता कौशल का विकास ।
काल्पनिकता तथा जिज्ञासा का विकास करना ।
इतिहास व संस्कृति से परिचय ।
छात्रों को स्वावलंबी बनाना ।
मौलिकता व संवेदना का विकास करना ।
प्रक्रिया
अपनी दादा/दादी/नाना/नानी/ परिवार के अन्य सदस्य/ दोस्त/ पुस्तक/ इंटरनेट या अन्य किसी माध्यम से पुरानी किस्सों/कहानियों को चुनें ।
इस किस्से/ कहानी को Global Context से जोड़ें ।
इस पुरानी किस्से/कहानी को अपने अनुसार नए रूप में प्रस्तुत करें ।
प्रस्तुतीकरण हेतु छात्र किसी भी माध्यम का चुनाव कर सकते हैं । ( कविता/ गाना/ बुक क्रिएटर, पॉडकास्ट, ब्लॉग, वीडियो, प्रेजेंटेशन, कैनवा , कॉमिक स्ट्रिप, sway, आपके द्वारा चुना अन्य कोई माध्यम )
इन किस्से/कहानियों का चुनाव बच्चे अपने इच्छानुसार करेंगे ।
किस्से/कहानियाँ विभिन्न विषयों, समय, देशकाल पर आधारित हो सकती हैं ।
प्रतिबिंबन पत्रिका (Reflection journal) एक सतत प्रक्रिया है। इस पत्रिका को 'कैसे' के आधार पर भरें। प्रतिबिंबन पत्रिका (Reflection journal) तक पहुँचने के लिए, कृपया पीपी अवलोकन पृष्ठ पर जाएँ ।
अपने अधिगम परिणाम (outcome) पर कार्य करें ।
अपने प्रदर्शनी विचार पर भी कार्य करें ।
अपना काम जमा करें। जमा करने हेतु दिशानिर्देशों के बारे में यहां से जानें.
Resources : दादा, दादी, नानी, नाना माँ, पापा परिवार के अन्य सदस्य, पुरानी मैगज़ीन आदि की सहायता ले सकते हैं |
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