श्री दुर्गा चालीसा पाठ | Durga Chalisa PDF in Hindi ( ͡° ͜ʖ ͡°)

DURGA CHALISA PDF IN HINDI


  • Name Of PDF File - Shri Maa Durga Chalisa PDF

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  • Categories - Chalisa ( Durga Chalisa ) and Religion & Spirituality

  • PDF Languages - Hindi And Henglish

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  • Published Date - 12/8/2021

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Durga Chalisa

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।

नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ 1 ॥

Namo Namo Durge Sukh Karani,

Namo Namo Ambe Dukh Harani



निरंकार है ज्योति तुम्हारी।

तिहूं लोक फैली उजियारी॥ 2 ॥

Nirakar Hai Jyoti Tumhari,

Tihoun Lok Phaili Uujiyaari



शशि ललाट मुख महाविशाला।

नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ 3 ॥

Shashi Lalaat Mukh Maha Vishala,

Netra Lal Bhrikoutee Vikaraala



रूप मातु को अधिक सुहावे।

दरश करत जन अति सुख पावे॥ 4 ॥

Roop Maatu Ko Adhik Suhaave,

Darshan Karata Jana Ati Sukh Paave



तुम संसार शक्ति लै कीना।

पालन हेतु अन्न धन दीना॥ 5 ॥

Tum Sansar Shakti Laya Keena,

Palana Hetu Anna Dhan Deena



अन्नपूर्णा हुई जग पाला।

तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥ 6 ॥

Annapoorna Hui Tu Jag Pala,

Tumhi Aadi Sundari Bala



प्रलयकाल सब नाशन हारी।

तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥ 7 ॥

Pralayakala Sab Nashana Haari,

Tum Gouri Shiv Shankar Pyari



शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।

ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥ 8 ॥

Shiv Yogi Tumhre Gun Gaavein,

Brahma Vishnu Tumhein Nit Dhyavein



रूप सरस्वती को तुम धारा।

दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥ 9 ॥

Roop Saraswati Ka Tum Dhara,

Day Subuddhi Rishi Munina Ubara



धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।

परगट भई फाड़कर खम्बा॥ 10 ॥

Dharyo Roop Narsimha Ko Amba,

Pragat Bhayi Phaad Ke Khamba



रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।

हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ 11 ॥

Raksha Kari Prahlad Bachaayo,

Hiranyaykush Ko Swarga Pathayo



लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।

श्री नारायण अंग समाहीं॥ 12 ॥

Lakshmi Roop Dharo Jag Maahin,

Shree Narayan Anga Samahin



क्षीरसिन्धु में करत विलासा।

दयासिन्धु दीजै मन आसा॥ 13 ॥

Ksheer Sindhu Mein Karat Vilaasa,

Daya Sindhu Deejey Man Aasa



हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।

महिमा अमित न जात बखानी॥ 14 ॥

Hingalaja Mein Tumhi Bhavani,

Mahima Amit Na Jaat Bakhani



मातंगी अरु धूमावति माता।

भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥ 15 ॥

Matangi Aru Dhoomawati Mata,

Bhuvaneshwari Bagala Sukhdata



श्री भैरव तारा जग तारिणी।

छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥ 16 ॥

Shree Bhairav Tara Jag Tarani,

Chhinna Bhala Bhava Dukh Nivarini



केहरि वाहन सोह भवानी।

लांगुर वीर चलत अगवानी॥ 17 ॥

Kehari Vahan Soha Bhavani,

Laangur Veer Chalata Agavani



कर में खप्पर खड्ग विराजै।

जाको देख काल डर भाजै॥ 18 ॥

Kar Mein Khappar Khadaga Virajay,

Jako Dekh Kaal Dar Bhajey



सोहै अस्त्र और त्रिशूला।

जाते उठत शत्रु हिय शूला॥ 19 ॥

Sohe Astra Aur Trishula,

Jase Uthata Shatru Hiya Shoola



नगरकोट में तुम्हीं विराजत।

तिहुंलोक में डंका बाजत॥ 20 ॥

Nagarkot Mein Toumhi Virajat,

Tihoun Lok Mein Danka Baajat




शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।

रक्तबीज शंखन संहारे॥ 21 ॥

Shumbh Nishumbh Daanuv Tum Maare,

Rakta Beej Shankhana Sanghaare


महिषासुर नृप अति अभिमानी।

जेहि अघ भार मही अकुलानी॥ 22 ॥

Mahishasur Nrip Ati Abhimaani,

Jehi Agh Bhar Mahi Akulaani



रूप कराल कालिका धारा।

सेन सहित तुम तिहि संहारा॥ 23 ॥

Roop Karaal Kali ka Dhara,

Sen Sahita Tum Tihin Samhara



परी गाढ़ संतन पर जब जब।

भई सहाय मातु तुम तब तब॥ 24 ॥

Pari Gaarh Santana Par Jab Jab,

Bhayi Sahay Matou Tum Tab Tab



अमरपुरी अरु बासव लोका।

तब महिमा सब रहें अशोका॥ 25 ॥

Amarpuri Arubaa Sab Lokaa,

Tab Mahima Sab Kahey Ashoka


ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।

तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥ 26 ॥

Jwala Mein Hai Jyoti Tumhari,

Tumhein Sada Poojey Nar Nari



प्रेम भक्ति से जो यश गावें।

दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥ 27 ॥

Prem Bhakti Se Jo Yash Gave,

Dukh Daridra Nikat Nahin Aave



ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।

जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥ 28 ॥

Dhyaave Tumhein Jo Nar Man Layi,

Janma Maran Tako Chhouti Jaayi



जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।

योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥ 29 ॥

Yogi Sur Muni Kahat Pukaari,

Yog Na Hoye Bina Shakti Tumhari



शंकर आचारज तप कीनो।

काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥ 30 ॥

Shankara Acharaj Tap Ati Keenho,

Kaam Krodh Jeet Sab Leenho



निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।

काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥ 31 ॥

Nishidin Dhyan Dharo Shankar Ko,

Kaahu Kaal Nahin Soumiro Tumko


शक्ति रूप का मरम न पायो।

शक्ति गई तब मन पछितायो॥ 32 ॥


Shakti Roop Ko Maram Na Payo,


Shakti Gayi Tab Man Pachitayo



शरणागत हुई कीर्ति बखानी।

जय जय जय जगदम्ब भवानी॥ 33 ॥

Sharnagat Huyi Kirti Bakhaani,

Jai Jai Jai Jagadambe Bhavani



भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।

दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥ 34 ॥

Bhayi Prasanna Aadi Jagadamba,

Dayi Shakti Nahin Keen Vilamba



मोको मातु कष्ट अति घेरो।

तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥ 35 ॥

Maukon Maatu Kashta Ati Ghero,

Tum Bin Kaun Harey Dukh Mero



आशा तृष्णा निपट सतावें।

रिपू मुरख मौही डरपावे॥ 36 ॥

Asha Trishna Nipat Satavein,

Ripu Moorakh Mohe Ati Darpaave




शत्रु नाश कीजै महारानी।

सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥ 37 ॥

Shatru Nash Kijey Maharani,

Soumiron Ikchit Tumhein Bhavani



करो कृपा हे मातु दयाला।

ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला ॥ 38 ॥

Karo Kripa Hey Maatu Dayala,

Riddhi Siddhi Dey Karahou Nihaala



जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।

तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥ 39 ॥

Jab Lagi Jiyoun Daya Phal Paoun,

Tumhro Yash Mein Sada Sounaoun



दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।

सब सुख भोग परमपद पावै॥ 40 ॥

Durga Chalisa Jo Nar Gaavey,

Sab Sukh Bhog Parampad Pavey



देवीदास शरण निज जानी।

करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥ 41 ॥

Devidas Sharan Nij Jaani,

Karahoun Kripa Jagadambe Bhavani


What Is Durga Chalisa? Durga Chalisa Kya Hai? दुर्गा चालीसा क्या है?


दुर्गा चालीसा माँ दुर्गा की प्राथना करके उन्हें प्रसन्न करने का सबसे सरल मार्ग है । दुर्गा चालीसा ४० लाइननो की होती है । और इसका निर्माण इसलिए किया गया था क्योके पुराने जमानेमे देवी देवताओंको प्रसन्न करके के लिया बहुत कठिन उपाय और प्राथनाए थी । और ज्यादातर मंत्र और प्राथनाए संस्कृत ( sanskrit ) में होने के कारन साधारण लोग उन्हें पढनेमे असमर्थ थे । तो साधारण लोगोको माँ दुर्गा की पूजा और प्राथना करना मुश्किल था । इसलिए श्री दुर्गा चालीसा का निर्माण किया गया जो की हर कोई पढ़ सकता था और पढ़ने में आसान थी । और जिससे के सभी लोग माँ दुर्गा की प्राथना करके उन्हें प्रसन्न करके अपने जीवन को सफल बना सके ।


Why Read Durga Chalisa? Durga Chalisa Kyu Padhna Chahiye? दुर्गा चालीसा क्यों पढ़ना चाहिए?


अगर आपको माँ दुर्गा को प्रसन्न करना है तो उसका सबसे अच्छा उपाय दुर्गा चालीसा का जाप करना है। और मान्यता ये भी है की अगर कोई रोज दुर्गा चालीसा का जाप करता है तो उसको एक अलग सी मन की शांति मिलती है और साथ ही साथ उनमे अलग सी ऊर्जा का भी निर्माण होता है। और अगर उन्हके पूजा और दुर्गा चालीसा के जाप से माँ दुर्गा प्रसन्न हो जाती है तो उनके सारे दुःख भी जल्दी दूर हो जाते है। और उनके जीवन में खुशिया ही खुशिया आजाती है।

पर फिर भी बहुत से लोग अभी भी दुर्गा चालीसा का जाप करते नहीं है। पर अगर बढे बुज़ुर्गोंकी माने तो अगर आप रोज दुर्गा चालीसा का जाप न भी करते हो तबभी आपको नवरात्री के समय जरूर जाप करना चाहिए। क्यों के नवरात्री के वक्त दुर्गा चालीसा के जाप करने से माँ दुर्गा जरूर प्रसन्न होती है। इसीलिए आपको माँ दुर्गा चालीसा सा का जाप जरूर करना चाहिए।


Benefits of Reading Durga Chalisa PDF ( दुर्गा चालीसा का पाठ करने के फायदे ) -


  1. दुर्गा चालीसा मन को शांत रखती है। -

अगर आप दुर्गा चालीसा का जाप करते है तो आपके मन में पॉजिटिव विचारो का निर्माण होता है। और आपके मन की सारि नेगेटिविटी धीरे धीरे कम होना सुरु हो जाती है। और आपका जीवन आनंद से भर जाता है। और चाहे आपका मन कितना भी अशांत क्यों न हो धिरे धिरे साथ हो जाता है। और कोई भी टेंशन आपको परेशान कर नहीं पाता।


2. शरीर में नयी ऊर्जा का निर्माण करती है। -

दुर्गा चालीसा का जब आप जाप करते है तो आपके शरीर में ऊर्जा और शक्ति का निर्माण सुरु हो जाता है। और आपकी शक्ति और आत्मविशवास बढ़ता रहता है। इसलिए अगर आप बहुत ज्यादा आलसी है तू आपको दुर्गा चालीसा का जाप जरूर करना चाहिए इससे आपको एक अलग सी देवी ऊर्जा का अहसास होता है और थकान कम महसूस होती है।


3. जीवन के सारे दुःख दूर होते है और उनसे लड़ने की ताकद भी मिलती है। -

अक्सर ये देखा गया है की जो लोग दुर्गा चालीसा रोज पढ़ते है वो उन्हके जीवन में आने वाले बळे बळे दुख को झेल लेते है और ज्यादातर खुश ही रहते है। और ऐसे लोगो को किसी भी तरहा का दुःख ज्यादा देर तक परेशान नहीं कर सकता। तो अगर आप को भी अपने जीवन के दुखो से लड़ने की ताकद चाहिए तो आपको भी एक बार दुर्गा चालीसा का जाप करना सुरु कर देना चाहिए और देखते ही देखते आपकी ज़िन्दगी खुशियोसे भर जाइए।


Final Words About Durga Chalisa PDF -

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