सहमत
दूसरी दुनिया की तखलीक के लिए

 

दर्द होता है यहां 

 
वसंत की गवाही 

मौन का खतरा 

फ़लस्तीन के बारे में...

प्रतिरोध

होना एक कवि


मैंने कभी नहीं चाहा
एक कवि होना
जिसके बारे में लोग कहें
कि उसने लिखीं अनुपम कविताएं

मैंने चाहा है होना
दुश्मन की घात में छिपी
जनता की देह पर वरदी
उसके हाथों में बंदूक
जेब में कारतूस
होठों पर के गीत

किसान,
मज़दूर,
खेतिहर, चरवाहे, बढ़ई, कुम्हार, गड़रिये
कहें मेरे बारे में
कि उसने हमारे गीत गाये
उसने हमारी भूख को
और हमारे आंसुओं को शब्द दिये
मुखर की हमारी पीडा़
उसने नहीं बताया सिर्फ़ मरहम
वह लडा़
हमारी कतारों में
और उसका खून भी बहा
हमारे साथ
और हमने युद्धभूमि में
उसकी कविताएं सुनीं
बंदूकों की गरज के बीच

युद्ध के मैदान में मेरे शब्द
संगीनों की तरह चमकें
और पहचानें दुश्मन के
मोरचे लगे दिलों को
गोलियों की तरह

मैं चाहता हूं
कि लोग मेरे बारे में इस तरह सोचें
जैसे सोचता है
युद्ध के मैदान में एक सिपाही
दूसरे के बारे में

रेयाज़-उल-हक