राम दूत अतुलित बल धामा I अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा II
हे पहुना यही मिथिले में रहुना
जउने सुख बा ससुरारी में तउने सुखबा कहूना
हे पहुना यही मिथिले में रहुना ||
रोज़ सबेरे उबटन मलके इत्तर से नहवाईब हो
एक महीना के भीतर करिआ से गोर बनाएब हो
झूठ कहत न बानी तनिको मौको एगो देहु ना
हे पहुना यही मिथिले में रहुना ||
मीत नविन मन भावन ब्यंजन पर सब कंचन थारी
स्वाद भूख बढ़ जाइ सुनी सारी सरहज के गारी
बार बार हम करब चिरौरी
अउरी कुछ हु लेहुना
हे पहुना यही मिथिले में रहुना ||
कमला बिमला दूध मति में झिझरी रोज़ खिलाई हो
सावन में कजरी गा गा के झूला रोज़ झुलाइब हो
पवन देव से करब निहोरा धीरे धीरे बहुना
हे पहुना यही मिथिले में रहुना ||
हमर निहोरा रघुनन्दन से माने या माने
पर ससुरारी के नाते परताप के जाने
या मिथिने में रह जइयो
या संग अपने रख लेहुना
हे पहुना यही मिथिले में रहुना ||
जो आनंद बिदेह नगर में देह नगर में कहु ना
हे पहुना यही मिथिले में रहुना ||