राम कहो या ‘मरा-मरा’

।।  राम श्रीराम श्रीराम श्रीराम  ।।

 


राम कहो या ‘मरा-मरा’ दोंनो एक समझते हैं ।  

मतलब उल्टा नाम कहो फिर भी नहीं रूठते हैं ।।  


‘तू’, ‘रे’, ‘तेरे’ कहते जन उनको, लेकिन वो खुश रहते हैं ।

सभी लोग व साधू भी तो, ऐसा कहने पे बिगड़ते हैं ।।  


राम प्रभू अग-जग के स्वामी अनुराग सभी से रखते हैं  

उनको सम है मान अमान सभी का आदर करते हैं  


  

भक्तो की तो बात न पूछो, उनके वश हो रहते हैं  

भक्तों के कारण धरती पे आ वन-वन में भी भटकते हैं 


 
असहाय-सहायक राम दयामय, सुर नर मुनि सब भजते हैं ।

सच्चे भक्तों से रघुनायक खुद आकर गले से मिलते हैं ।।
 

रामजी सीधे-साधे हैं, किसी को कुछ न कहते हैं ।  

गुण को देखें राम सदा अवगुन क्षमा वो करते हैं ।।



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