स्वागतमत्र सर्वेषामिहान्तर्जालपुटे।
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Bipin Kumar Jha
Cell for Indian Sciences and Technology, HSS, IIT Mumbai

Rashtriya Sanskrit Sansthan, Vedavyasa Campus
Balahara, Via-Garli, Dist. Kangra, PIN 177108

Apan Shrotriya Samaj


Sanskritam



सारस्वत-निकेतनम् ... उक्त दो शब्द स्वतः ही अपना अस्तित्व व्यक्त करते हैं। अस्तु सारस्वत-निकेतनम्- विद्वज्जनानां समाहारः/गृहम् के अर्थ में स्वयं को गुरुकुल के समीप ला खडा करता है। ज्ञान का उद्गम माँ सरस्वती। भाषा का उद्गम (केन्द्र) देवभाषा संस्कृत। इन दोनों की कृपा से इस धरती पर गुरुकुल ने जिसप्रकार ज्ञान और संस्कृति का पोषण किया आज इण्टर्नेट के युग में वैसे ही ’आनलाइन गुरुकुल’ की आवश्यकता है। कार्य दुष्कर अवश्य है परन्तु आप सभी विद्वज्जन यदि सारस्वत-निकेतनम् में आनलाइन प्रवास स्वीकार करें तो इस प्रकार का कोई भी स्वप्न मात्र दिवास्वप्न न होगा। ज्ञान का अथाह भण्डार इस विश्व में फैला है परन्तु कहीं भाषाबन्धन तो कहीं कोई और बन्धन हमें विवश करते हैं। उस ज्ञान से वंचित होने को। परन्तु जिसप्रकार चाणक्य का गुरुकुल महाजनपदों सीमा को लाँघकर राष्ट्र का निर्माण कर सका, यदि ऐक्य सम्भव हुआ तो हम भी हर सीमा को लाँघ कर ज्ञानसिन्धु को सर्वसुलभ बना सकेंगे।

 सारस्वत-निकेतनम् सैकडो लोगों के दशाधिक वर्षों के निरत परिश्रम की परिणति है। इसकी पृष्ठभूमि में हमारे कुछ अन्य पूर्व प्रयास रहे हैं-

 (क) संस्कृतम्- www.sanskritam.ning.com  पर संस्कृतम् के रूप मे विख्यात हमारा यह प्रयास संस्कृतप्रेमियों द्वारा सराहा गया। संस्कृत प्रेमियों के इस समुदाय नें हमें भविष्य में संस्कृत क्षेत्र में कुछ करने का स्वप्न दिखाया और उन्हें पूर्ण करने का साहस दिया।

 (ख) अपन श्रोत्रिय समाज www.apanashrotriyasamaj.ning.com पर  बने संस्कृति प्रेमी मैथिल श्रोत्रिय जनों के इस समुदा ने भाषा और संस्कृति के उत्थान एक उपजाति विशेष की संस्कृति को माडल बनाकर भविष्य के प्रयासों की नींव रखी गयी।

(ग) जाह्नवी संस्कृत ई-जर्नल- www.jahnavisanskritejournal.com इस साइट के रूप में विद्यमान यह ऐसी  विश्व की प्रथम आनलान संस्कृत त्रैमासिक शोधपत्रिका है जिसका निबन्धन e-journal के रूप में हुआ है। यह शोधपत्रिका संस्कृत विद्वानों, लेखकों एवं मीडीया के लिये विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा है।

 (घ) वर्षाऽमृतम्- यह ब्लाग है । यहाँ पाठकों एवं संस्कृत मैथिली प्रेमियों को सारस्वत-निकेतनम् के अन्तर्गत ब्लागिंग करने की विशेष सुविधा दी गयी है।

(ङ) अन्य ब्लाग्स- हमारे द्वारा कई अन्य महत्त्वपूर्ण जालपुट तैयार किये गये जिसमें गूगल समूह, फेसबुक, आर्कुट, ट्वीटर, वर्डप्रेस आदि का उपयोग किया गया है।

(च) संस्कृत-

 प्रस्तुत सारस्वत-निकेतनम् में जो सुविधाएं उपलब्ध हैं उनमे से कुछ प्रमुख  हैं- चित्र, गीत-संगीत, चित्रगीत, चलचित्र, ब्लाग, निबन्ध, व्यक्तित्व-कृतित्व परिचय, महत्वपूर्णग्रन्थ सूची, पर्वविवरण, लुप्तप्राय ग्रन्थ pdf रूप में, आनलाइन गुरुकुल, साफ्ट-लिंक्स, साक्षात्कार और .....। ये संस्कृतम् (संस्कृत) और अपन श्रोत्रिय समाज दोनों के लिये पृथकशः उपलब्ध है। दोनों के लिये सामान्य शर्त के रूप में सदस्यता अनिवार्य की गयी है। यह सदस्यता निश्शुल्क है। इसमें आप के द्वारा प्रदत्त वैयक्तिक जानकारी वैयक्तिक ही रखी जाती है।