शब्द यज्ञमेरी कहानियां


ऋषिकेश खोङके " रुह "

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देश ऐसे ही चलता है

राम गोपाल से कह रहा था: पता नही देश का क्या होगा |

गोपाल ने पुछा : क्यों क्या हुवा भाई |

राम : अरे कल मकान की रजिस्ट्री करवाने गया तो बाबू रिश्वत मांग रहा था, अब क्या हर काम रिश्वत से करवाऐंगे | खैर छोड , बताओ आज कैसे दर्शन दिये |

यार मेरा लोन तेरे ओफिस मे अटका पडा है सो तेरी सहायता चाहिये | गोपाल ने कहा

थोडा सोच कर राम बोला : हो तो जायेगा पर ५% कमिशन लगेगा ,यार मेरी बात नही है पर बाकी जो अपना काम करेंगे उनको तो कुछ देना ही पडेगा ना! तू तो समझता ही है |

हां समझता हूं, दे दूंगा : गोपाल ने थके स्वर मे कहा

उसे देख कर राम बोला : यार अब थोडा तो चलाना ही पडता है, देश ऐसे ही चलता है |