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डीजल हर बार नहीं है फायदे का सौदा

पेट्रोल के दामों में हाल में कटौती हुई है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा है। पेट्रोल के लगातार बढ़ रहे दामों ने आम कंस्यूमर के मन में खौफ पैदा कर दिया है। कुछ लोग पेट्रोल कार बेचकर नई डीजल कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो कुछ पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ऑप्शन अपना रहे हैं। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कुछ टिप्स, जिनकी मदद से आप पेट्रोल का खर्चा कम कर सकते हैं: 

पेट्रोल के दामों में हालिया कटौती कार मालिकों के लिए अच्छी खबर है, लेकिन लोगों ने इससे निबटने के लिए उपाय करने शुरू कर दिए हैं। हाल तक पड़ोस में जाने के लिए टूवीलर का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग अब टूवीलर से ऑफिस जाने लगे हैं तो कुछ मेट्रो या दूसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ ने कार पूलिंग का बढ़िया तरीका खोज निकाला है तो कुछ एक कदम आगे बढ़कर पेट्रोल कार को डीजल या सीएनजी में बदलवा रहे हैं। ऐसा वे इस उम्मीद में कर रहे हैं कि इन दोनों फ्यूल की कीमतें पेट्रोल से हमेशा कम ही रहेंगी और उनका बजट कंट्रोल में रहेगा। एक एमएनसी में काम करने वाले रजत का कहना है कि अब मैं जब भी मुमकिन हो, टूवीलर का इस्तेमाल करने लगा हूं तो उन्हीं के सहयोगी रचित डीजल कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं। 

फिलहाल एक लीटर पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 66.42 रुपये है, जबकि डीजल की कीमत 40.91 रुपये है। हालांकि ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेट्रोल की कार को डीजल की कार से बदलवाने का फायदा तभी है, जब आप कार का इस्तेमाल काफी ज्यादा करते हों। ऑनलाइन कार पोर्टल carwala.com के वाइस प्रेजिडेंट बनवारी लाल शर्मा के मुताबिक अगर आप हर महीने में कम-से-कम 700-800 किमी कार नहीं चलाते हैं तो डीजल, एलपीजी जैसे वैकल्पिक ईंधन पर पैसे खर्च करना सही नहीं होगा। 

साथ ही, अगर आप पेट्रोल कार को बेचकर डीजल कार खरीदना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि पुरानी कार को सही दाम मिलने पर ही बेचें, वरना जो पैसा बचाकर आप डीजल कार खरीदना चाहते हैं, उसका फायदा नहीं होगा। 

दामों की बात करें तो पिछले कुछ बरसों में पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सीएनजी के दाम ही काफी हद तक स्थिर रहे हैं। हालांकि सीएनजी किट लगवाने के अपने नुकसान भी हैं। अगर आपके पास बड़ी कार नहीं है तो सबसे पहले आपको बूट स्पेस को भूल जाना होगा। दूसरे सीएनजी हर जगह (खासकर दिल्ली के बाहर) आसानी से उपलब्ध नहीं है। फिर सीएनजी किट फिट कराने के लिए 25 से 40 हजार रुपये का खर्च अलग से पड़ेगा। इसके अलावा डीजल कार खरीदने की सोच रहे हैं तो उसकी ईएमआई से आपकी जेब पर एक्स्ट्रा बोझ पड़ेगा। 

पेट्रोल कार कब फायदेमंद 

राजीव के पास मिड साइज सेडान (लंबी) कार है। उनका ऑफिस घर से 7 किमी दूर है। वह रोजाना ऑफिस आने-जाने के अलावा वीकएंड पर 50 किमी तक ड्राइव करते हैं। 

500 किमी : हर महीने चलती है कार 
10 किमी/लीटर : माइलेज 
3,600 रुपये : पेट्रोल खर्च/महीना 
10,000 रु. : कार की ईएमआई 
13,600 रु. : कुल खर्चा 

अगर वह बदलकर डीजल कार चाहते हैं 

लाख रु. : ज्यादा होगी डीजल कार की कीमत 
लाख रु. : कम कीमत में बिकेगी मौजूदा पेट्रोल कार 
2 लाख रु. : नुकसान, पुरानी कार बेचने व नई कार खरीदने में 
14500 रु: नई कार की ईएमआई 
13 किमी/लीटर: माइलेज 
1800 रु. : डीजल खर्च/महीना 
16300 रु. : कुल खर्चा 

पैसे की बचत के लिए पुरानी कार को बदलकर नई डीजल कार खरीदने का आइडिया बेकार। 

डीजल कार कब फायदेमंद 

सुमित के पास मिड साइज सेडान कार है। उनका ऑफिस घर से 42 किमी दूर है। वह रोजाना ऑफिस कार से जाते-आते हैं और वीकएंड पर 50 किमी तक ड्राइव करते हैं। 

2,000 किमी : हर महीने चलती है कार 
10 किमी/लीटर: माइलेज 
14,500 रुपये : पेट्रोल खर्च/महीना 
10 हजार रुपये: कार की ईएमआई 
24,500 रु. : कुल खर्चा 

अगर वह बदलकर डीजल कार चाहते हैं 

लाख रु. : ज्यादा होगी डीजल कार की कीमत 
लाख रु. : कम कीमत में बिकेगी मौजूदा पेट्रोल कार 
लाख रु. : नुकसान, पुरानी कार बेचने व नई कार खरीदने में 
14,500 रु. : नई कार की ईएमआई 
13 किमी/लीटर : माइलेज 
7हजार रु. : डीजल खर्च/महीना 
21500 रु. : कुल खर्चा 

पैसे की बचत के लिए पुरानी कार को बदलकर नई डीजल कार खरीदने का आइडिया अच्छा। 

ऐसे बचाएं पेट्रोल खर्च 

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल : मुमकिन हो तो पेट्रोल वैसे क्रेडिट कार्ड या पेट्रोल कार्ड से भरवाएं, जिस पर आपको टैक्स छूट या कैश बैक जैसी सुविधाएं मिलती हों। बहुत सारे कार्ड 2.5 फीसदी तक ट्रांजैक्शन चार्ज की छूट देते हैं। 

सही स्पीड बनाए रखें : हमेशा सामान्य रफ्तार से गाड़ी चलाएं। 60 किमी/घंटा से ज्यादा तेज स्पीड से कार चलाने से करीब 15 फीसदी ज्यादा फ्यूल खर्च होता है। 

टायरों में सही हवा बनाए रखें : टायरों में अगर हवा कम हो तो फ्यूल ज्यादा खर्च होता है। ध्यान रखें कि हवा बहुत ज्यादा भी न भरवाएं, वरना सड़क पर पकड़ कम हो जाती है। 

ब्रेक और क्लच का इस्तेमाल कम करें : आप जितनी ज्यादा बार ब्रेक दबाएंगे, उतना ज्यादा फ्यूल खर्च करेंगे। बार-बार ब्रेक लगाने से बचने का तरीका है कि एक ही रफ्तार पर गाड़ी चलाएं। साथ ही, दूसरी गाड़ियों के बहुत करीब गाड़ी न चलाएं। इसी तरह गियर बदलने के अलावा बाकी वक्त क्लच दबाने से बचें। 

कार में फालतू सामान न रखें : कार में उतना ही सामान रखें, जितना जरूरी हो। कार का वजन 50 किलो बढ़ने पर करीब 2 फीसदी फ्यूल ज्यादा खर्च होता है। 

एयर फिल्टर साफ रखें : बंद एयर फिल्टर करीब 10 फीसदी ज्यादा फ्यूल कंस्यूम करते हैं, इसलिए एयर फिल्टर्स को लगातार साफ कराते रहें। वक्त पर सर्विस कराएं। कारबोरेटर और इंजन को बराबर चेक करते रहें कि उनमें कोई लीकेज न हो। 

जरूरत न होने पर इंजन बंद कर दें : लंबी रेड लाइट या किसी के लिए इंतजार करते हुए इंजन बंद कर दें। अगर आप एक मिनट के लिए इंजन चालू छोड़ देते हैं तो उस पर इंजन दोबारा शुरू करने से ज्यादा फ्यूल खर्च होता है।

 

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