सो ब्राह्मण कहलाय

      क्या अर्थ है ब्राह्मण का?ब्राह्मणकुल में जन्मा,   वोएक वर्ण याएक जीवनशैलीऐसे प्रश्न   मन में किशोरावस्था से ही गूँजते रहे हैं। कहीं        
सुनाब्रह्मजानाति इति ब्राह्मणः। परन्तु, “अहम् ब्रह्मस्मि” भी कहा गया है।  तो  क्या, “स्वजानाति इति ब्राह्मणः” मान लूँ यह शास्त्रोक्त नहीं हैऐसा तो है नहीं − विश्वविख्यात है“Know Thyself” अथवा “तत् त्वम् असि” | किसी भी काल मेंकिसी भी देश में और किसी भी भाषा में इस जागृति को व्यक्त किया गया होमूल एक ही है। “एक ओंकार” या “एकः स  विप्रा बहुधावदन्ति। पर, “जतो मतततो पथ। उसमें एक पथ गौतम का । यह मार्ग लिए जाता है धम्मपद के अंतिम अध्याय की ओर। संक्षिप्त,सम्पूर्ण।
बुद्ध का ज्ञान तो अनंत है। उन्होंने हमें उतना ही बताया जो हमारी यात्रा के लिए आवश्यक है। उस बुद्धवाणी के हैं तीन पिटकउनमें से एक सुत्तपिटक। सुत्तपिटक में पाँच निकाय,उनमें से एक खुद्दकनिकाय । उसमें उन्नीस ग्रन्थउसमें एक है धम्मपद । धम्मपद में छब्बीस अध्यायअंतिम है ब्राह्मणवग्गो । मात्र इकतालिस छंद । बस ।

एक प्रयास है यहस्वान्तःसुखाय । सरल भाषा मेंसरस दोहों में। आपके समक्ष । आशा है आपके मार्ग में सहायक होगा ।

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