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Manavta Mandir, Hoshiarpur


The Mission

Data Dayal Maharishi Sivavratlalji, through a suggestion, gave Param Dayal Faqir Chand Ji Maharaj the work of changing education of Santmat over time. At the time of partition of India, Param Dayalji saw bleeding humanity and the sacrament given by Data Dayalji started taking its form. Param Dayalji, while working as Satguru of Time, opened the secrets of Santmat and changed the teaching of Santmat which is evident from his literature.

His experience in Santmat made it clear to him that while his form manifested in his followers to their benefit, he himself had no knowledge of that happening. Manifestations of divine forms during inner practices or during awakened state are projections of one’s own mind. A center was needed to promote and disseminate that experience. In order to spread the education based on that very experience, Param Dayalji established this Manavta Mandir (The Temple of Humanity).


मिशन

दाता दयाल महर्षि शिवव्रतलाल जी महाराज ने परम दयाल फकीर चन्द जी महाराज को संतमत की शिक्षा को समयानुसार बदल जाने का संस्कार और कार्य दिया था. भारत विभाजन के समय मानवता को लहूलुहान देख कर परम दयाल जी में दाता दयाल जी के दिए संस्कार ने अपना स्वरूप ग्रहण किया और परम दयाल जी ने वक़्त के संत सत्गुरु वक़्त की हैसीयत में काम करते हुए संतमत के रहस्यों को खोला और संतमत की शिक्षा में परिवर्तन किया जो उनके साहित्य में परिलक्षित होता है.

इस मार्ग पर चलते हुए परम दयाल जी ने जाना कि 'मेरा रूप लोगों में प्रकट होता है, उनके काम कर जाता है और मैं नहीं होता.' साधन करते हुए या जागते हुए दिव्य रूपों का प्रकट होना वास्तव में अपने ही मन की प्रोजेक्शंस होती हैं, इस अनुभव के प्रचार और प्रसार के लिए एक केंद्र की आवश्यकता थी. परम दयाल जी ने यह मानवता मंदिर उसी अनुभव पर आधारित शिक्षा को फैलाने के लिए एक केंद्र के रूप में स्थापित किया.



Emblem of the temple \



Manavta Mandir (10-04-2011)




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