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डा रामचंद्र सिं देव

कोरिया
जिले का इतिहास

सन 1680 में मैनपुरी  (यूपी से सिं देव जी के पूर्वज कोरिया आए थे। और वहा के कोल राजा को पराजित करके अपना राज्य स्थापित किया।

कोल भाषा में एक होता है, कोरिया शब्द कोल भाषा से बना है। कोरिया में कोल राजा का राज्य था जो एक पहाड़ पर रहते थे जिसे कोरियागढ. के नाम से जाना जाता था।

 डा सिं देव जी अपने पिता से बहुत अधिक प्रभावित है| उनके सम्पूर्ण जीवन में उनके पिता की अनूठी छाप रही है। सिं देव जी के पिता 1924 में इलाहाबाद से स्नातक किये,यह उस समय की एक असाधारण बात थी  1925 में वे महाराजा की गद्धी पर आसीन हुए। उनकी निम्न प्राथमिकताऐ  थी :-

•      आदिवासियो का सम्पूर्ण विकास करना

•      आदिवासियो की सुरक्षा

•      आदिवासियो को शोषण से बचाना

•      आदिवासियो को अच्छी षिक्षा  प्रदान करना

•      आदिवासियो को मुख्यधारा में लाने के लिए योजनाओ का कि्रयावयन करना।

सन 1928 में छग का पहला कोयला खदान बना, इसके साथ ही 1930 में रेल्वे लाइन का विस्तार हुआ। जो कोयले के खदान के लिए आवष्यक था।

न्यनतम वेतन कानून भारत में पहली बार यह विलक्ष्ण कानून बना सिं देव जी के पिता के कार्यकाल में  इस कानून के अंतर्गत एक मजदूर कितने घंटे कार्य करेगा,वेतन कितना मिलेगा,बोनस आदि सभी मुद्वो को शामिल किया गया था। आजादी के बाद भारत सरकार ने मजूमदार अवार्ड के नाम से इसे आगे बढाया

मिड डे मिल आज सरकार स्कूली बच्चो मध्यान भोजन देने की योजना चला रही है उसकी शुरुवात सिं देव जी के पिता के कार्यकाल में हो गर्इ थी उस समय बच्चों को चना गुड. दिया जाता था जो मध्यान भोजन से कहीं अधिक पौषिटक था।

 डा सिं देव जी की स्कूली शिक्षा राजकुमार कालेज से हुर्इ है, उसके बाद आगे की शिक्षा के लिए वे इलाहाबाद विष्वविधालय गये जहा पर उनके सहपाठी श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह श्री नारायण दत्त तिवारी रहे। साथ ही भूतपूर्व मूख्य मंत्री श्री अजर्न सिंह श्री वी.पी सिंह आपके जूनियर रहे।  

डा सिं देव जी अपने स्कुली षिक्षा के समय से ही सामाजिक कार्यो में जुड गये निम्न कार्य किए

डगनिया में दोस्तो के साथ श्रम दान देकर तालाब का निर्माण किया।

मलेरिया,डायरिया आदि बिमारियो की दवार्इया गरीब बस्ती में जाकर बाटने का कार्य किया।

अपने साथियो के साथ मिलकर रोज दो धंटे जेलो में जाकर कैदियो को षिक्षित करने का कार्य किया।


फोटोग्राफी का शौक :-

डा सिं देव जी कुछ समय तक कलकत्ता में रहे उस दौरान उन्होने ग्लैमर फोटोग्राफी सीखी। वे दो साल तक सत्यजीत रे के साथ रहे कुछ लधु फिल्मो का भी निर्माण किया। एक समय में वे भारत के दस शीर्ष ग्लैमर फोटोग्राफर में गिने जाते थे। उनके अनुसार उनकी खींची गर्इ सबसे सुदंर तस्वीर अभिनेत्री नर्गिस की रही।

राजनिति में प्रवेष :

कलकत्ता से लौटने के बाद सन 1967 में कोरिया से पहली बार चुनाव लडे इस चुनाव में 64 हजार वोटर थे 40 हजार वोट पडे जिसमें से 35 हजार वोट डा सिं देव जी को मिले इस तरह से रिकार्ड मतो से जीतकर राजनितिक जीवन का आगाज किया।  

बस्तर जिले के विकास हेतु किये गये कार्य- बस्तर का विकास करना आपकी पहली प्राथमिकता थी। इस पर आपने प्रसिद्ध पुस्तक बस्तर विकास योजना ;बस्तर डवेलोप्मेंट प्लान  लिखी। जिसमें आपने बस्तर विकास की पूरी योजना की जानकारी दी है। बस्तर में निम्न क्षेत्रों किये गये कार्य:-

•      सड. निर्माण

•      बिजली की व्यवस्था

•      शिक्षा का प्रसार

•      स्वास्थ्य हेतु योजना का कि्रयान्वयन

•      सिचार्इ हेतु नर्इ योजना का निर्माण

•      खनिज पदार्थो के अनावष्यक दोहन पर रोक

•      औधोगिकीकरण पर रोक

•      कृषि हेतु योजना

•      जंगलो से होने वाले में आदिवासियों की भागीदारी

 

खनिज संपदा का दोहन - इस विषय पर डा सिं देव जी का कथन है कि खनिज सपंदा पर किसी एक पीढी का अधिकार नहीं है,इसका प्रयोग जरुरत के अनुसार करना चाहिए। डा सिंग देव जी के अनुसार प्रकृति सिर्फ हमारी जरुरत पूरी कर सकती है,पर हमारी लालच लक्जरी को पूरी नही कर सकती है। पर हम आज जरुरत से ज्यादा इसका प्रयोग कर रहे है। यही हमारे भविष्य के लिए खतरनाक है।

 

हैन्डी क्राप्ट को बढावा- हैन्डी क्राप्ट की बिक्री बढाने के लिए सरकारी सहयोग की बात रखी। साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों में आदिवासियों द्वारा बनार्इ गर्इ वस्तुए जैसे टेबल,कुर्सी अन्य चीजो का प्रयोग की बात कही।

कोसा उधोग लाख को बढावा - कोसा उधोग के विकास के लिए इसको वन विभाग से जोडने की बात कही। साथ ही कोसा बुनकरो को प्रषिक्षण दिया जाना चाहिए, जिससे अच्छी किस्म के वस्त्रो का निर्माण हो उसके अलावा साल के पेडो में कोसा बनाने वाले कीडे को छोड. देने से कोसा के उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।

मषरुम की खेती को बढवा - मषरुम की खेती यह कम लागत में बडी मुनाफा देने वाली खेती है कोरिया में लगभग 600 घरो में मषरुम बनाया जाता है। इसके लिए प्रषिक्षण का आयोजन किया गया अनेक लैब का भी निर्माण किया गया। मषरुम को बनाने के लिए गेंहू के भूसे स्पान से बनाया जाता है।

डा सिं देव जी ने सरकार को इस खेती को और अधिक बढावा देने की बात कही। लघु उघोग,हस्त षिल्प, काटेज उधोग को बढावा -

डा सिंदेव जी का कहना है कि चेंबर आफ कार्मस को लघु उघोग,हस्त षिल्प, काटेज उधोग के विकास की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इससे इसके उत्पादन,क्वालिटी, बिक्री में वृद्धि को सकती है। बिना काटेज उधोग के विकास किये हम गाव की गरीबी नही मिटा सकते है।

 

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    Posted Dec 28, 2011, 8:37 PM by Koria kumar
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