"ललाटपट्टे  लिखिता विधात्रा षष्ठीदिने याक्षरमालिका च। 
तां जन्मपत्री  प्रकटीं विधत्ते दीपो यथा वास्तु घनान्धकारे।।"
 
भावार्थ-- - जन्म से छठे दिन (षष्ठी को ) ब्रह्मा ने ललाटरूपी पट्ट पर जो अक्षरमाला लिख दी है,उसी (शुभाशुभ कर्मफल ) को जन्मपत्री उसी प्रकार प्रकट करती है ,जिस प्रकार घने अंधकार में पडी हुई वस्तु को दीपक प्रत्यक्ष  कराता है...





1-व्यक्ति को अपना जीवन सुखी रखने के लिए अपने से जुड़े व्यक्तियों को प्रसन्न रखना चाहिए,परन्तु ये सब इन्द्रियां  नहीं करने  देतीं ,,इन्द्रियों  को वश में रखना आवश्यक है....




 2-
व्यक्ति में पांच गुण --धन,बन्धु,अवस्था,कर्म  और विद्या का होना आवश्यक है ,इनमें से जिस व्यक्ति में जितने ज्यादा गुण होंगे, वह उतना माननीय और सम्माननीय  होगा.
(मनु स्मृति )      

                             पांच यज्ञ :----
                    १--वेद का पठन -पाठन ---ब्रह्म यज्ञ
                   २--पितरों का तर्पण----पितर यज्ञ  p
                  ३---हवन करना ---- देव यज्ञ
                 ४--जीवों को अन्न की बलि देना ---भूत यज्ञ
                 ५-अतिथि का आदर सत्कार करना---मनुष्य यज्ञ .
 इन पांच महा यज्ञों को करने से मनुष्य पापों से छुटकारा पाता है . (मनु स्मृति)

1- यज्ञ करने वाला ब्राह्मण -ज्ञानी वेदाध्यायी और पवित्र हो
 2- पित्र श्राद्ध  -भोज, ज्ञानी और पवित्र ब्राह्मण को ही देना चाहिए ,जिसने वेदों का अध्य्यन किया हो और  उसे अपने       आचरण में उतारा हो ---(मनु स्मृति
)




  घर में संध्या वंदन करने से एक,गौ स्थान में सौ,नदी किनारे लाख ,तथा शिव के समीप में अनंत गुना फल होता है -                 
                  
 
                                "गृहेषु तत्सम संध्या,गोष्ठे शतगुणा स्मृता ,
                                नद्या शतगुणा प्रोक्ता अनंता शिवसन्निधौ " 
                                                                  
                                                          - (लाघुशाताताप  स्मृति )
                                          

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