विनम्र आभार

इस साईट पर प्रस्तुत सारी जानकारी उस्ताद हाफिज़ खां जी की देन है और इसे साईट रूप में प्रस्तुत करने की अनुमति के लिए मैं उनका आभारी हूँ. इस साइट पर प्रस्तुत सारी जानकारी संगीत के गुरुओं का सहयोग और उनका ज्ञानदान है. ये इन गुरुओं का बड़प्पन है जो वो अपना समय निकल कर सुर साधना के लिए और इससे जुड़े तमाम युवा संगीत साधकों के लिए संगीत की अनमोल जानकारी बाँट रहे हैं. सुर साधना इन सभी गुरुओं की आभारी है और हम आशा करते हैं कि सुर साधना के साथ और भी बहुत सारे संगीत विद्वान / विदुषी जुड़ेंगे। 

उस्ताद बाले खां जी
सितार की दुनिया में बहुत बड़ा नाम रखने वाले उस्ताद रहमत खान जी, जो 'गायकी अंग' सितार वादन शैली के स्थापक माने जाते हैं, उनकी छठीं पीढ़ी में, उनके पोते उस्ताद बाले खान खुद सितार की दुनिया में एक बहुत बड़ा नाम रहे हैं. बाले खान जी धारवाड़ (कर्नाटक) की बहुत बड़ी धरोहर हैं. इनको २००१ में कर्नाटक कलाश्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. बाले खान जी अपने गहरे, चिंतनशील एवं शुद्ध सितार वादन के लिए जाने जाते रहे हैं. बाले खान जी अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन सितार के संगीत की जो शैली और गहराई वो छोड़ के गए हैं, शायद आने वाली कई पीढ़ियां उसे एक मापदंड की तरह अपनाएंगी.


बाले खान जी के बारे में विस्तृत जानकारी सितार रत्न साईट पे उपलब्ध है.    


उस्ताद हाफिज खां जी

उस्ताद हाफिज़ खान जी भारत के उभरते हुए सितार संगीत विशारद हैं. हाफिज़ खान जी कर्नाटक विश्वविद्यालय और कल्केरी संगीत विद्यालय में पिछले कई सालों से संगीत सिखा रहे हैं. हाफिज़ खान जी संगीत की बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं जो कि उनके सितार वादन के अलावा हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायन की श्रेष्ठता से जाहिर होता है. स्वाभाव के बहुत ही सरल एवं विनम्र हैं और उनके संगीत में उनके घराने की शुद्धता की झलक साफ़ दिखाई दी है. गुरु के स्वरुप में उनकी लगन, प्रमाणिकता और आधिपत्य बहुत सहज रूप में महसूस की जा सकती है. हाफिज़ खान जी के शब्दों में: "मेरी जिम्मेदारी संगीत सिखाने की है. संगीत सीख कर कोई भी गाना सीख सकता है. सुरों की शिक्षा संगीत की नींव है और संगीत सिखाने में मेरा पूरा ध्यान इसी पर रहता है."

हाफिज़ खान जी के बारे में और विस्तृत जानकारी सितार रत्न की साईट पर उपलब्ध है.