रणजीत सिंह

यह पृष्ठ निर्माणाधीन है. आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है. हम जल्द इस इस पृष्ठ को संपादित करने की कोशिश करेंगे. पुनः पधारें !

खाली हाथ कैसे लौटा दें?
खाली हाथ कैसे लौटा दें?

एक बार महाराज रणजीत सिंह कहीं जा रहे थे कि सामने से एक ईंट आकर उन्हें लगी। सिपाहियों ने चारों ओर नजर दौड़ाई, तो एक बुढ़िया दिखाई दी। उसे गिरफ्तार करके महाराज के सामने हाजिर किया गया।

बुढ़िया महाराज को देखते ही डर के मारे कांप उठी। बोली, ''सरकार! मेरा बच्चा कल से भूखा था। घर में खाने को कुछ न था। पेड़ पर पत्थर मार रही थी कि कुछ बेर तोड़कर उसे खिलाऊं किंतु वह पत्थर भूल से आपको आ लगा। मैं बेगुनाह हूं; सरकार मुझे क्षमा किया जाय।''

इन्हें भी देखें
घर-घर का मंगल करने वाले गणपति 'बप्पा मोरया'
साहित्य और सांस्कृतिक एकता
तोमर सामंतों ने बचाई हिन्दू संस्कृति
घोड़े बेच कर सोना
एक टोकरी भर मिट्टी
बेकार से बेगार भली
दूसरा हिंद स्वराज लिखने की जरूरत

महाराज ने कुछ देर सोचा और बोले, ''बुढ़िया को एक हजार रुपया देकर ससम्मान छोड़ दिया जाये।''

यह सुन सारे कर्मचारी अचम्भित रह गये। आखिर एक ने पूछ ही लिया, ''महाराज जिसे दण्ड मिलना चाहिए, उसे रुपये दिये जायेंगे?”

रणजीत सिंह बोले, ''यदि एक वृक्ष पत्थर लगने पर मीठा फल देता है, तो पंजाब का महाराज उसे खाली-हाथ कैसे लौटा दे?''


Comments