Meghvansh

1

Mohinder P Mamualiya
Meghvanshion dwara bahut saarey group internet par dekhney ko mil rahe hain....lekin updates ke mamley mein koi interest nahi leta....group creat karna yaa join kar lene se jimedaari poori nahi hoti.... Aap logon ka kya kehna hai iss baarey mein...????
Unlike ·  · Share · Unfollow Post · October 18 at 11:26pm
Seen by 23
You, Tararam Gautam, Rattan Gottra and 2 others like this.

Bharat Bhushan आपका कहना सही है. परंतु यह एक कलैक्टिव कोशिश होती है. आशा है यह सामूहिक प्रयास फलदायी होगा.
October 18 at 11:29pm · Like · 2

Mohinder P Mamualiya plz put on ur comments...
October 18 at 11:29pm · Like

Tararam Gautam It create n sense value.
October 18 at 11:29pm via mobile · Unlike · 1

Bharat Bhushan Tararam Gautam ji, सच है कि यह मूल्यों की भावना पैदा करता है.
October 18 at 11:33pm · Like · 1

Mohinder P Mamualiya Sir aap ki shudd hindi ...... aap samaj gaey hongey...
October 18 at 11:35pm · Unlike · 1

Bharat Bhushan Mohinder P Mamualiya ji, ये ग्रुप अपनी बात प्रभावी रूप से रखने में मदद करते हैं. हमें यह कार्य जिम्मेदारी से करना होगा.
October 18 at 11:36pm · Like · 3

Heera Bose जय मेघ
October 18 at 11:36pm · Unlike · 1

Mohinder P Mamualiya Jai megh keh ke nahi... valki kuchh vichar rakhney se jiyada faida hoga..... we need this group to be more n more beneficiary for the community...
October 18 at 11:38pm · Like · 2

Bharat Bhushan Mohinder P Mamualiya ji, मेरी हिंदी आपको कदम-कदम पर बर्दाश्त करनी होगी:) वैसे जो मैंने लिखा है उसका अर्थ है - It gives meaning to values of life.
October 18 at 11:42pm · Like · 1

Tararam Gautam एक बार एक विदेशी मेघ बन्धु मुझसे मिलने आये। उन्होंने एक सुझाव दिया जय मेघ का नारा दिया जाना चाहिए और यह अधिक से अधिक प्रचारित करना चाहिए। हकीकत यह है की तब तक जय मेघ या जय मेघ ऋषि का नारा दूर दूर तक नहीं था। मेरी राय जानना चाहा। मेरी राय यही थी कि जय भीम में सब समाहित है। फिर बोले तो जय भीम के साथ जय मेघ कह सकते है। क्या उत्तर हो सकता था?
October 18 at 11:48pm via mobile · Unlike · 1

Mohinder P Mamualiya Sir mein majak kar raha hu..... waise mein kaafi achhi hindi bol leta hu...aur samajh sakta hu...lekin kuchh typical words preshaan kartey hain....
October 18 at 11:49pm · Unlike · 2

Mohinder P Mamualiya Mere khyaal se Bhim sahib ke saath hammarey aur log bhi judey huey hain... Sirf Jai megh kehney se unko achha nahi lagega....
October 18 at 11:51pm · Unlike · 2

Bharat Bhushan मेरा मानना है कि अन्य दलित समुदायों को 'मेघवंश' शब्द अपने में संजोए है. इस बात का व्यापक प्रचार हुआ है. आगे भी इसे इसी अर्थ में प्रयोग करना होगा.
October 18 at 11:55pm · Like · 1

Mohinder P Mamualiya Bharat Bhushan sir thoda details mein batao na....
October 18 at 11:56pm · Unlike · 1

Bharat Bhushan प्रचीन इतिहास में जिस सिंधुघाटी सभ्यता का ज़िक्र है और वहाँ के शासक का उल्लेख है उसे वेद-पुराणों आदि में मेघ, प्रथम मेघ, अहि मेघ, मेघ ऋषि, राजऋषि मेघ, वृत्र, वृत्रासुर आदि नाम से पुकारा गया है. उससे जितनी जातियाँ आगे चल कर निकलीं वे उसी के वंश की हैं. राजस्थान के एक आईपीएस अधिकारी श्री आरपी सिंह ने उन्हें 'मेघवंश' कह कर पुकारा है. इस विषय में मैं उनका समर्थक हूँ. उन्होंने 'मेघवंश' शब्द का काफी प्रचार किया है.
October 19 at 12:04am · Edited · Like · 1

Bharat Bhushan Tararam Gautam ji और Rattan Gottra ji जैसे विद्वान भी मेघवंश शब्द का प्रयोग कर रहे हैं.
October 19 at 12:09am · Edited · Like

Ramsa Kadela Megh जय मेघ .....जय भीम .... नमो बुदायः !!
Ramsa Kadela Megh's photo.
October 19 at 12:26am via mobile · Like

Mohinder P Mamualiya Pehley do words theek hain .... teesra kya hai...???
October 19 at 12:27am · Like

Rattan Gottra Jay Megh & Jai Bhim are not synonymous. They have their own respective significance. However, their boundaries do overlap to a great extent. Though Mr. RP Singh has done a good job, identical efforts still need to be continued to popularise all intent & purpose behind that attempt.
Pratham Megh continued to exercise his suzerainty over Sapta-Sindhu only because of his ability to get cooperation of all the tribes during that period. However, when that unity was jeopardised, the power of Meghwanshis was challenged by the Aryans. Therefore, if in the modern scenario, Dr. Ambedkar's name suits much, the slogans given by him need to be preferred to cover all communities under one unified umbrella, as was ably done by Pratham Megh.
October 19 at 12:27am via mobile · Unlike · 3

Ramsa Kadela Megh जब पहले दो पढ लिये तो तिसरा पढने मे नही आ रहा है कया.... वो भी उसी भाषा मे लिखा है .
October 19 at 12:37am via mobile · Like · 1

Mohinder P Mamualiya But the meaning is not clear... sounds like sanskrit...
October 19 at 12:39am · Unlike · 1

Rattan Gottra Even major national level political parties have now started to win over the sentiments of people by using the name of Dr. BR Ambedkar.
October 19 at 12:40am via mobile · Unlike · 4

Mohinder P Mamualiya Mr Ramsa Kadela Megh ji don't try to be so rude... we r just discussing n trying to understand each other... don't take it anyway plz..
October 19 at 12:40am · Unlike · 1

Ramsa Kadela Megh हमारै फोन मे आधा शबद लिखा नही जाता ...इसलिये आपको साँउड मे परेशानी होती है ..
October 19 at 12:43am via mobile · Unlike · 2

Mohinder P Mamualiya Bharat Bhushan ji main uss tesrey word ka matlab abhi bhi samajh nahi paya hu... plz elaborate... Mr Ramsa Bhai to naraz ho rahe hain....
October 19 at 12:46am · Like

Tararam Gautam Thanks to Rattan Gottraji it was and is only expected reply. And ought to be.
October 19 at 1:08am via mobile · Unlike · 3

Bharat Bhushan Mohinder P Mamualiya ji, तीसरा शब्द 'नमो बुद्धायः' है. अर्थ है कि 'मैं बुद्ध को नमन करता हूँ'.
October 19 at 8:38am · Like · 1

Mohinder P Mamualiya ok n thanx
October 20 at 4:40pm via mobile · Like · 1




2

Bharat Bhushan
अधिक नहीं जानता लेकिन उन्नाव में जहाँ 1000 हज़ार टन सोना होने की अफवाह के आधार पर खुदाई की जा रही है वह उस क्षेत्र के पास है जहाँ मेघवंश के राजाओं का राज्य था. मेरी हार्दिक इच्छा है कि वहाँ खुदाई में मेघ राजाओं के सिक्के और इतिहास मिल जाए जिससे मेघों के इतिहास की जानकारी मिले. लेकिन उससे भी ज़रूरी है कि सभी मेघों के पास दो-दो किलो सोना हो.
Like ·  · Share · Unfollow Post · October 18 at 12:21pm
Seen by 22
Dinesh Khemani Palli, Ramsa Kadela Megh and Heera Bose like this.
3 shares

Ramsa Kadela Megh असली सोना तो हमारा ...गोरव शाली इतिहास है .अगर वो पथर पै लिखा मिले तो भी मै समझुगा कि लाखो टन से भी बङे गौरव की बात होगी . यही हमारी मँगलकामना है .
October 18 at 12:27pm via mobile · Unlike · 1

Ramsa Kadela Megh जय महाराजा मेघ .....
Ramsa Kadela Megh's photo.
October 18 at 12:35pm via mobile · Unlike · 2

Bharat Bhushan जय मेघ, जय भारत.
October 18 at 12:37pm · Like · 1

Tararam Gautam फतेहपुर और मिर्जा पुर में पहले से ही मेघ वंश के अवशेष मिल चुके है। सोना खोजना प्रपंच है। हकीकत कुछ और ही निकलेगी।
October 18 at 12:46pm via mobile · Edited · Unlike · 2

Rattan Gottra Excuse me, why express wishes over a story initiated by a 'TUCHA' Sadhu?
October 18 at 12:42pm via mobile · Like

Bharat Bhushan Tararam Gautam ji, फतेहपुर में भी सोना होने की बात उठी है. यह अच्छी बात है.
October 18 at 12:45pm · Like

Bharat Bhushan Rattan Gottra ji, साधु चाहे टुच्चा हो परंतु मेरा सपना टुच्चा नहीं है. फिल्म बनाने वाले पैसे लेकर सपना दिखाते हैं. मैंने सभी मेघों को दो-दो किलो सोने का सपना मुफ्त में दे दिया है और शुभकामनाएँ भी देता हूँ.
October 18 at 12:50pm · Like

Dinesh Khemani Palli Ye kaha par hai sar
October 18 at 12:51pm · Unlike · 1

Ramsa Kadela Megh मेघवँश इतिहास के राजवँश की जो झलक अब तक हमने देखी .वो वाकई मे- "सोने पै सुहागा" लगी . इसी कङी मे अगर मेघ इतिहास उजागर होता रहै तो . बङे गोरव की बात होगी . ..(जय मेँघ)
Ramsa Kadela Megh's photo.
October 18 at 12:51pm via mobile · Like · 2

Dinesh Khemani Palli Jai meg maharaja ki
October 18 at 12:52pm · Like · 1

Bharat Bhushan Dinesh Khemani Palli ji, इस विषय में ताराराम जी की लिखी उपर्युक्त पुस्तक बहुत उपयोगी है. इन्हीं कमेंट्स में Tararam Gautam जी की भी टिप्पणी है. आप उनसे सीधे तौर पर प्रश्न कर सकते हैं. मेघों के इतिहास का उनसे बड़ा जानकार दूसरा नहीं मिलेगा.
October 18 at 12:57pm · Edited · Like

Tararam Gautam सपना यही दिखाया जाय कि वे इस देश के शासक बने। एक शासक कौम को हमेशा इसके इर्द गिर्द ही सोचना चाहिए। आपके अखनूर में भी मेघ वंश कालीन सोना गडा है। पता करिए। अखनूर की पुरानी हिस्टरी देखिये।
October 18 at 12:58pm via mobile · Unlike · 2

Rattan Gottra I have heard that various satellites orbiting around earth are capable of scanning earth and finding minerals like gold, silver, iron (also coal, oil, water) hidden below the surface of earth! Why the Govt is not focussing an eye of one satellite on this area to find out what lies beneath?
The fact is that some 'educated illiterates' are sitting in the Archeological Survey of India & the minister-in charge of the department also seem to be either dull-headed, or deeply under the spell in predictions ( though dubious ) made by Sadhus!
October 18 at 1:04pm via mobile · Like · 2

Tararam Gautam वास्तविकता यह है कि ब्राह्मणवादी मिथकों को तर्क संगतता देने के लिए ही ऐसे उपक्रम किये जाते है। एक बार बाबा साहेब के पास ऐसे प्रपंची साधू पहुंचे और बताया कि वेदों में सोना बनाने की विधि है----आदि आदि। बाबा साहेब ने कहा हमारा देश बहुत गरीब है। आप वो बताइए देश का उद्धार हो जायेगा। समय दिया गया। पर कुछ नहीं मिला। अंत में बाबा साहेब ने बताया ऐसे वितंडा को छोडिये और देश के निर्माण से जुड़िये। यह बात मुझे सोहनलाल शास्त्रीजी ने बताई थी जो उनके पी ए थे। संभवतः उन्होंने अपनी पुस्तक में भी जिक्र किया है।
October 18 at 1:16pm via mobile · Unlike · 3

Bharat Bhushan Rattan Gottra ji, आप सही कह रहे हैं. उपग्रहों के ज़रिए भी यह खोज की जा सकती है. लेकिन ये उपग्रह विदेशी हैं. जैसा कि ऊपर Tararam Gautam ji ने कहा है यह वितंडावाद से ग्रसित तंत्र है जो साधु के सपने पर कार्य करता दिखता है. साइंटिफिक एटीट्यूड ग़ायब है.
October 18 at 1:24pm · Like · 2

Mohinder P Mamualiya Media ne bahut parchar kar diya hai...abb khudaai honi hi hai.... hahahahahahahaha
October 18 at 10:41pm · Unlike · 1

Tararam Gautam एक बात यह भी महतवपूर्ण है कि फतेहपुर; भीटा और मिर्जापुर व इसके आस पास कुछ जगहों पर की गयी खुदाई में मेघ राजाओं के होने के प्रमाण मिले है। यह क्षेत्र एतिहासिक भूमि रही है।
उन्नाव की जिस जगह पर खुदाई की जा रही है। उसका वर्णन ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वर्णन में किया है। ह्वेनसांग को यहा बलि देने के लिए लाया गया था। उसने इस जगह का नाम अयमुख लिखा है जिसकी पहचान ए कनिंघम ने दौडिया खड़ा से ही की थी।
यहा पर पांच संघाराम थे जिसमे एक हजार भिक्षु रहते थे। निश्चित है कि मेघ लोग बुद्ध अनुयायी थे तो उस समय वे वहां के निवासी रहे होंगे। बाद में गुप्तों के उत्कर्ष के समय उनको यहा से पलायन करना पडा होगा। ये सब इतिहास के लुप्त पन्नों में है।
October 20 at 12:56am via mobile · Like · 1





3


Ramsa Kadela Megh
मेघवँश के गोरवशाली इतिहाश की जो झलक ~ताराराम जी ने दिखलाई वही~ "सोने मे सुहागा" है . जो मेघवँश इतिहास को समझने और अधिक खोज करने मे सदा पाठको और शौधकरताऔ के लिये सहायक है ~ ताराराम जी को साधुवाद है — with Bhagwanaram Meghwal Mandwala and 9 others.
मेघवँश के गोरवशाली इतिहाश की जो झलक ~ताराराम जी ने दिखलाई वही~ "सोने मे सुहागा" है . जो मेघवँश इतिहास को समझने और अधिक खोज करने मे सदा पाठको और शौधकरताऔ के लिये सहायक है ~ ताराराम जी को साधुवाद है
Unlike ·  · Share · Unfollow Post · October 18 at 4:16pm
Seen by 23
You, Tararam Gautam, Ramsa Kadela Megh, Tara Chand Dass and 2 others like this.

Bharat Bhushan निस्संदेह.
October 18 at 5:55pm · Like · 1

Tararam Gautam जिन लोगों ने इस खंड को पढ़ा है उनको अपने विचार रखने चाहिए ताकि इस इतिहास को सभी संदेहों से परे अवगाहित किया जा सके।
October 18 at 7:33pm via mobile · Like

Bharat Bhushan मैंने यह पुस्तक पढ़ी है और मैं मानता हूँ कि यह पहली पुस्तक है जो इतिहास के संदर्भों सहित मेघों की कथा कहती है. इसे मैंने अपने ब्लॉग पर इस तरह से प्रस्तुत किया था

http://www.meghnet.com/.../meghvansh-itihas-aur-sankriti...

Meghvansh - Itihas Aur Sankriti - मेघवंश - इतिहास और संस्कृति | MEGHnet
www.meghnet.com
October 18 at 7:44pm · Like · 1 · Remove Preview

Tararam Gautam Jजी लोगों ने इस खंड को पढ़ा है उनको अपने विचार रखने चाहिए ताकि इस इतिहास को सभी संदेहों से परे अवगाहित
October 18 at 7:50pm via mobile · Unlike · 2

Ramsa Kadela Megh सीताराम लालस की लिखि राजसथानी शबद कोश मे मेघ का अरथ एक पुराना राजवँश लिखा पाया ~तो मुझे गोरव के साथ खेद हुआ . कि उसका इतिहास देखने को नही मिला . परँतु इस खँड को पढकर हमारा गोरव साकार हुआ !
October 18 at 8:01pm via mobile · Like · 2

Tararam Gautam उस शब्द कोष के संदर्भित पेज को फेस बुक पर डाले।
October 18 at 8:10pm via mobile · Unlike · 2

Ramsa Kadela Megh देखो ~ राजसथानी -शबदकोश सँपादक ~सीताराम लालस (भाग 2) राज.पुरातन गरँथमाला गँथाक 157 .परकाशन सँवत 2044.....पेज सँ. 410.. पर ~मेघ का अरथ .....एक पुराना राजवँश लिखा है
Ramsa Kadela Megh's photo.
October 18 at 8:33pm via mobile · Edited · Unlike · 1

Tararam Gautam इस से यह स्पष्ट है कि मेघ वंश एक प्रसिद्द राजवंश रहा होगा व ब्राह्मणी परंपरा का नहीं था अतः ब्राह्मणवादी पौराणिक आख्यानों में स्थान नहीं मिला परन्तु जन मानस में वह बहुत लोकप्रिय था। जनता भूली नहीं तभी राजस्थानी शब्द कोष के संकलनकर्ता को इस शब्द के इस अर्थ को लिखना पड़ा।
October 18 at 8:48pm via mobile · Unlike · 3

Ramsa Kadela Megh बाबा रामदेव ने भी एक वाणी मे कहाँ था.. मेघाँ रो राज काज मत भुलो ~कोई भुला भरम रै जाल !
October 18 at 8:54pm via mobile · Unlike · 2

Bharat Bhushan Ramsa Kadela Megh ji and Tararam Gautam ji, आप दोनों ने जो सूचनाएँ दी हैं ये महत्वपूर्ण हैं. 'मेघाँ रो राजकाज मत भूलो- कोई भुला भरम रै काज'- आप क्या इस पूरे पद को यहाँ डाल सकते हैं?
October 18 at 10:08pm · Like · 1

Ramsa Kadela Megh बाबा रामदेव की लोक परँपरा मे मेघवँश (मेघवालो)को .."बाबे रा रिखियाँ" कहा जाता है ..अतः मेघो को ही रिख कहा गया है
Ramsa Kadela Megh's photo.
October 18 at 10:20pm via mobile · Unlike · 2

Ramsa Kadela Megh जैसा कि ताराराम जी ने कहाँ है कि मेघवँश बामणी मनुवादी परँपरा से अलग था तभी मेघो का इतिहास हिँदु पोथियो मे देखने को नही मिलता . इसिलिये ~ सँमातर कोश हिँदी थिसारस मे मेघ का अरथ "असुर" लिखा गया है
October 18 at 10:36pm via mobile · Unlike · 3



Comments