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प्राक्कथन
भगत मुंशीराम जी के साहित्य के प्रकाशन के बाद उसे इंटरनेट पर प्रकाशित करने की प्रबल इच्छा मेरे मन में थी.

इसी सिलसिले में मैंने यूनीकोड हिंदी, गूगल साइट बनाना, विकिपीडिया संपादन आदि सीखे. बचपन से ही कुछ प्रश्न अपने समुदाय में सुनता आ रहा हूँ कि हम कौन हैं, कहाँ से आए हैं और हमारे पुरखे क्या करते थे. इसी खोज में कार्य और अध्ययन करते हुए विकिपीडिया पर 'मेघवाल' नामक आलेख लिखा जिसे मेघवंशी समुदाय में काफी पढ़ा और सराहा गया. इस आलेख ने एक अद्भुत कार्य यह किया कि बिखरे हुए मेघवंशी समुदायों में आपसी पहचान बढ़ी. इस बीच इन समुदायों की गतिविधियों को रिकार्ड करने और उनका प्रचार-प्रसार करने के लिए  ब्लॉगिंग सीखी और इस प्रकार 'मेघनेट', 'मेघ भगत' और 'निरत' ब्लॉग्स बनाए.

जब हम इंटरनेट पर कार्य करते हैं तो परिवार वालों को पता नहीं होता कि घर का यह सदस्य कंप्यूटर पर इतना क्यों बैठता है और क्या करता है. खास कर यदि वह इस कार्य से कमाई कर के न ला रहा हो. पुराने मित्र और पाठक मेरे इस प्रयास के बारे में जानते हैं लेकिन इन दिनों श्रीमती जी (शांति देवी भगत) की खीझ और जिज्ञासा बढ़ गई थी. उनके लिए मैंने यह सुलभ सी साइट तैयार की है. इसमें वह सभी कुछ लगभग आ गया है जिसे मैं महत्व का मानता हूँ.

कुछ हिंदी आलेखों का अंग्रेज़ी पाठ वास्तव में गूगल अनुवाद हैं. इन पर अभी कार्य होना है. तब तक के लिए क्षमा.

आशा है कि आप इस सामग्री को प्रेमपूर्वक पढ़ेंगे और अपना स्नेह बनाए रखेंगे.

Forward

After the publication of literature of Bhagat Munshi Ramji I had a satrong wish to publish it on the Internet.

For this purpose I learned Unicode Hindi and making Google site, editing Wikipedia etc. Since childhood I had known some questions asked within our community as to who we've been, where have we come from and what our ancestors used to do. During my search and studying the various works I contributed to an stub article ‘Meghwal’ on Wikipedia which was read and much admired in Meghvanshi communities. The article did a wonderful work  and resulted in an enhanced mutual recognition amongst scattered Meghvanshi communities. In order to record the developmental activities of these communities I learned blogging and started writing on 'MEGHnet', 'Megh Bhagat' and 'Nirat' blogs.

When we work on the Internet our family members may not know the sort of work we do on computer and why. It is especially so when we are not earning money from it. My old friends and the readers are aware of my efforts, but these days, my wife (Shanti Devi Bhagat) had increased anger and curiosity. I have prepared this site for her for easy access. Whatever had been of importance to me has been included in it.

English text of some Hindi articles is in fact the Google translation. These have to be worked out. Please bear with me.

Hope you will fondly read this material and continue to bestow your affection.





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