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इन्द्रप्रस्थ कॉलेज का हिंदी विभाग विद्यार्थियों के सम्पूर्ण विकास के लिए हमेशा सन्नद्ध रहा है । साहित्य, भाषा, मीडिया और अनुवाद जैसे पाठ्यक्रमों के बीच संतुलन कायम करते हुए हम एक ओर विद्यार्थी को समाज और समाज में घट रही घटनाओं के प्रति संवेदनशील बनाते हैं, वहीं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के संयोजन द्वारा उसके भीतर  मार्केट की माँग के अनुसार भी रूचि और कुशलता विकसित करने में सहायता करते हैं । तृतीय वर्ष में विकल्प के रूप में व्यावसायिक विषयों का चयन जहाँ उनके उच्चतर शिक्षा के विकल्पों का विस्तार करता है वहीं उपन्यास, कहानी, कविता का अध्ययन-अध्यापन एक जागरुक और संवेदनशील व्यक्तित्त्व का निर्माण करता है । 

भाषा-शिक्षण की प्रविधियों  में निरंतर नए प्रयोग करते हुए हिंदी विभाग विद्यार्थियों में शोध के प्रति उत्साह जगाने के लिए प्रयासरत है । विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों एवं साहित्यकारों को आमंत्रित करके हिंदी साहित्य सभा प्रतिवर्ष विद्यार्थियों को अपने अनुभव और ज्ञान के फ़लक को विस्तृत करने के अवसर प्रदान करती है । वर्ष  2014 से विद्यार्थियों के लिए एक विशेष सेमिनार का वार्षिक आयोजन शुरू किया गया है, जिसमें सभी शोध-पत्र विद्यार्थियों द्वारा ही लिखे और प्रस्तुत किए जाते हैं । वर्ष 2015 से हिंदी विभाग ने अपनी एक वार्षिक ई-पत्रिका 'सृजन' की भी शुरुआत की है, जिसकी विषय सामग्री विभाग के सभी सदस्यों(छात्राओं और प्राध्यापकों) द्वारा रचित और प्रस्तुत की जाती है I विभाग भाषा और साहित्य के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी  को समझते हुए निरंतर शोध एवं शिक्षण को समानांतर रूप से महत्व देता रहा है । रंगमंच और नाट्य विधा को समर्पित कार्यक्रमों का आयोजन भी विभाग का अनिवार्य हिस्सा है ।

हिंदी विभाग के प्राध्यापक हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं(कविता, कथा-साहित्य, नाटक आदि) साहित्य के इतिहास, आलोचना, मीडिया एवं पत्रकारिता, सिनेमा, भाषा-विज्ञान, अंतर-अनुशासनिक अध्ययन आदि के विशेषज्ञ हैं, जिनके दिशा-निर्देशन में छात्राओं को अध्ययन की व्यापकता के साथ-साथ भविष्य का चुनाव करने में भी सहयोग मिलता है ।