A Gift to Amitabh - Poetry by Abhaya

I am dedicating these set of poems embedded into pictures.. to brother Amitabh Bachchan.. Most of these poetry may have already been shared at the blog.. yet this set has been especially created for him as he enters into Seventies..
The pictures in each poetry need to be clicked to be read.. if some of  you want to save a copy right click the picture and select save picture as.. to a suitable location..

 

एक मां की अलग कहानी

कैसे उसे ज्ञात हो जाता
जब सिगरेट छुपा रहा होता उससे मै 
या कैसे उसे पता चल जाता 
नई मित्र कन्या का मेरे जीवन में आना 
या फिर खाने में क्या मुझको भाता 
चाहे फिर किसी पहर हो खाना 
कैसे बुरा काम पर दिन गुजरा 
था यह भी उसे पता चल जाता 
और पिता के गुस्से से कैसे 
मुझे बचाना है यह सब उसे ज्ञात था 
यही नही दुनिया के हर गलत वार से 
मुझे बचाना भी था आता 
कैसे जान सकी थी मां कि 
किसकी संगत किस रंग की या किस ढंग की है 
रात अकेले जगना ही क्यों न पड़ जाये 
पर राह देखती बैठी ही वह सदा थी रहती 
कैसे वही अकेली सब कुछ सुन लेती 
और फिर सुनकर ढाढ़स देती 
सदा कहां से शब्द प्यार विश्वास बढ़ाते 
क्या जाने वह ढूंढ कहीं से लाती 
कैसे पहले मुझे डांटती फिर मन में पछताती 
घर में कितनी भी कैसी भी बाधायें हों 
फिर भी सारे सुख सपने मेरे सदैव सहलाती 


Original English by - Amitabh Bachchan 
Translation into Hindi अभय शर्मा, 7 अक्टूबर 2009

 
Subpages (72): View All
Comments