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आत्मजा

आत्मजा

 

पक्षांची  मंजुळ  गाणी

निर्मळ  झऱ्याचे  पाणी

तशी  भासे  लोभसवाणी

माझी  छकुली  फुलराणी

 

क्षण  क्षण  दे  नव  आनंदा

मज  स्वप्नांची  पूर्तता

मी  कुशीत  तुजला  घेता

ये  अर्थ  जसा  जणू  गीता

 

काया  तव  जणू  का  साय

कर  इवले  इवले  पाय

हरपून  भान  मज  जाय

नित  पाहणे  हाच  उपाय

 

झुलझुलते  हळू  रांगणे

बडबडते  मधु  बोलणे

खळखळूनी  कधी  हासणे

भूवरीच  ये  चांदणे

 

तू  पाळण्यात  अशी  निजती

शिंपल्यात  जणू  का  मोती

सृष्टी  अंगाई   गाती

वारा  तव  झोका  देती  

 

पाहू  मी  तुजला  कितीदा

घेऊ  तुज   कुशीत  कितीदा

मम   हृदयाची  हर्षदा

तू  माझी  गे  आत्मजा

 

© सुरेश नायर

२ /२०१०