21 फरवरी 2008

अंतर-राष्ट्रीय मातृ-भाषा दिवस पर विशेष


सर्वात्रिक  इंटरनैट

ਪੰਜਾਬੀ

सूचना एवं संचार टैकनालोटी का वरदान

 

कम्प्यूटर का इस्तेमाल पहले सिर्फ गिनती और हिसाब-किताब करने के लिऐ किया गया, इसके बाद में इसका इस्तेमाल सूचना (कम्प्यूटर रुप डिजीटल भाषा) के वितरण में किया जाने लगा। कम्प्यूटर एवं संचार यन्त्रों की हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज के पूर्ण विकास के लिऐ सूचना एवं संचार यन्त्र टैक्नोलोजी में लगातार विस्तार हो रहा है। इंटरनैट का जन्म सूचना संचार यन्त्रों एवं  कम्पयूटरों में सूचना के आदान प्रदान से हुआ है। इंटरनैट से हर आम-ख़ास के लिऐ हर पल सूचना उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। इंटरनैट टैकनालोजी ने हरेक विषय से संबधित सूचना आबंटित करने के नऐ रास्ते खोल दिऐ हैं। सरकारें इ-इनेबलड हो गई हैं तथा आन-लाईन गवरनमैंट में तबदील हो गई हैं। इस टैकनोलोजी ने सूचना की ज़रूरतों को मुख्य रकते हुऐ हर समय (24 घंटे 365 दिन) सेवाऐं उपलब्ध करवाने के नऐ आयाम खोले हैं ताकि नागरिक तथा व्यापारी वर्ग की ज़रुरतों की पूर्ती करने में खरी उतर सके।

 

-गवरनैंस के लाभ

 

-गवरनैंस की सहायता से नागरिकों की सही मायने में सेवा हो सकती है, उनकी सरकार से सुविधाऐं लेने की इच्छाओं की पूर्ती हो सकेगी तथा उन के द्वारा चुने गऐ सरकार के नुमांइदे सरकारी सेवाऐं आम जनता तक पहुँचाने में कामयाब हो सकेंगे जिन वायदों के आधार पर ही वो अपने चुनावी क्षेत्र से लोकप्रिय नेता बनकर उभरे थे।

जन-साधारण  राजकीय आर्थिक सहायता योजना,  स्वास्थ्य,  सफाई,  रोजगार,  अनाज की कीमत, शिक्षा के बारे में जानकारी लेने के लिए उत्सुक है। सूचना अधिकार ऐकट के अनुसार वैसे भी यह सूचना उपलब्ध करवानी सरकार की जिम्मेवारी भी है। जो कि इंटरनैट की सहायता से आन-लाइन गवरनमैंट (-गवरनैंस) द्वारा सही सही मिलनी संभव है। ताकि हरेक नागरिक इस जानकारी के लिऐ सरकारी व अर्ध-सरकारी दफतरों में ना भटके तथा इस तरह सरकार की कार-गुजारी का मुलांकन भी कर सके।

         इंटरनैट की सुविधा से पंचायतें सड़कों, सेहत और ग्रामीण विकास के संदर्भ में मंजूर हुई ग्रांटों के बारे में जानकारी ले सकती हैं।

         किसान बेच-मोल पर नज़र रख सकते हैं

         बेरोजगार रोजगार खोज सकते हैं और आन-लाइन आवेदन-पत्र दे सकते हैं

         अघ्यापक पाठ योजना तैयार कर सकते हैं और विधार्थी दत्तकार्य सम्पूर्ण कर सकते हैं

         इस सुविधआ से राज्य सरकार के हितैशी संबधित मामलों को उच्च अधिकारियों से सलाह-मश्वरा तथा शिकायतों का शीध्र निपटारा करने के लिऐ आन-लाइन संपर्क कर सकते हैं।

 

राज्यों की सरकारें इ-गवरनैंस द्वारा दी गई सुविधाओं में लाऐ गऐ सुधारों के बारे में समय-समय पर ब्यान करती रहती हैं। रोज़ाना अखबारों के द्वारा आम जनता को इंटरनैट का इस्तेमाल कर इ-गवरनमैंट सेवाऐं लेने के लिऐ उत्साहित किया जाता है। इस कार्य में तेजी लाने के लिऐ प्रधान मन्त्री द्वारा भारत निर्माण योजना के अंतर्गत अलग से वित्त का प्रबंध है। भारत सरकार ने इंटरनैट के इस्तेमाल के लिऐ टैलीफोन की दरों में भारी कमी कर के इस के इस्तेमालकर्ताओं की गिणती को बढा कर तथा इलैकट्रानिक तीव्रता बढाने में बड़ा योगदान डालने की कोशिश की है।

 

समाज के दो वर्ग

 

विश्वभर में इंटरनैट की सहायता से इ-गवरनैंस टैकनोलोजी ने सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाने की कोशिश की है परंतु इस टैकनोलोजी का सही मायने में लाभ विकसित देश ही उठा रहे हैं कयोंकि विकासशील व अविकसित देशों के वासी सूचना तक पहुँच न होने के कारण अपने हकों के प्रति जागरुक ही नहीं हैं। यह आम नागरिक का बुनियादी हक है कि वो ये जान सके कि उस के द्वारा चुनी गई सरकार उस के भले के लिऐ कया कर रही है।

 

वो जो भली भांति अपने हकों यां सूचना के प्रति जागरूक हैं सूचित वर्ग से संबधित हैं और वो जो सूचना से वंचित हैं असूचित वर्ग से संबध रखते हैं। इस तरह से समाज दो वर्गों में बंट चुका है।

 

खण्डित इंटरनैट से सर्वात्रिक इंटरनैट

 

सूचना संचार यन्त्र जानकारी प्राप्त और जानकारी से वंचित के बीच की दरार का अंतर कम करने में सहायता करते हैं।  जैसे- जैसे जनता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होगी वैसे ही मानवीय अधिकारों के हनन  में कमी आएगी।

 

क्योंकि सूचना संचार के पुर्जे, सूचना के लिऐ अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल करते हैं इस तरह की अवस्था के कारण समाज में इंटरनैट के इस्तेमालकर्ताओं की दो भागों में बंटत हो गई है। एक वो जो  सूचना प्राप्त कर उस का इस्तेमाल कर सकते हैं दूसरे वो जो इस सूचना का इस्तेमाल अपने भले के लिऐ करने में असमर्थ हैं।

 

इंटरनैट व इस का माध्यम

 

सरकारी व निजी संस्थान राजकीय व राष्ट्रीय स्तर पर समाज के दो वर्गों की बंटत को दूक करने के लिऐ जरूरी कदम उठाऐं ताकि भाषा सूचना प्राप्त व और इसके इस्तेमाल करने में अडचन न बने। समाज में इंटरनैट का इस्तेमाल आसान (भाषा की मुश्किल दूर कर) करने में सहायता करके इस बंटत का अंत करने की कोशिश की जा सकती है। इस समय जो सूचना इंटरनैट पर उपलब्ध है वो ज्यादातर अंग्रेजी भाषा में ही है। हर प्रकार की ज़रूरी सूचना राजकीय व राष्ट्रीय भाषा में डिजीटाइज़ करने के लिऐ उत्साहित किऐ जाने के लिऐ कदम उठाऐ जाने चाहिऐ। इस प्रकार प्रत्येक सभ्यता और भाषा जिंदा रखी जा सकेगी।

 

अगर हम अपने देश की बात करें तो मालूम पड़ता है कि आज सिर्फ 3 प्रतिशत लोग अंग्रेज़ी भाषा का ज्ञान रखते हैं और 40 प्रतिशत लोग हिन्दी व इस के रूपांतर का इस्तेमाल करते हैं।

 

विश्वभर में इस समय 7000 के करीब भाषाऐं बोली जाती हैं जिन में से केवल 12 भाषाओं में सूचना डिजीटाइज़ करके इंटरनैट पर प्रकाशित की जा सकी है। इन 7000 भाषाओं में से केवल 25 प्रतिशत भाषाऐं ही सकूलों में प्राथमिक शिक्षा के रूप में पढाई जाती हैं बाकी की भाषाऐं जिन का इस्तेमाल लोग अपने जीवन काल के दौरान हाव-भाव व्यक्त करने के लिऐ करते हैं, प्राथमिक शिक्षा में शामिल न किऐ जाने के कारण, संचार साधन से प्रसारित व प्रकाशित न होने के कारण जल्दी ही लुप्त हो जाऐंगी। अगर यूंही चलता रहा तो एक अनुमान के मुताबिक सन 2050 तक विश्व की लगभग 3000 भाषाऐं लुप्त हो जाऐंगी।

 

इसी लिए यूनैसको ने साल 2008 को अंतरराष्ट्रीय भाषा साल मनाने का फैसला लिया है ताकि विश्व भर से लुप्त हो रहीं भाषाओं की रक्षा की जा सके। इस का मुख्य कारण यह भी है कि भाषा के लुप्त होने के साथ-साथ हम अपना अमीर खजाना भी खो लेते हैं क्योंकि ज्यादातर साहित्य आम-तौर पर क्षेत्रीय या मातृ भाषा में ही होता है। इस का किसी और भाषा में किया गया अनुवाद वो भाव कभी भी अभिव्यक्त नहीं कर सकता जो इस की मूल भाषा में होता है।

 

क्षेत्रीय भाषा आम जनता के विचार, सभ्यता, हाव-भाव को व्यक्त करती है और इस द्वारा सूचना का आदान-प्रदान भी आसान होता है बजाऐ इस के कि यह किसी अन्य भाषा में दी या ली जाऐ।

 

सर्वात्रिक इंटरनैट

 

इस दिशा में इंटरनैट व इ-गवरनैंस का इस्तेमाल करते हुऐ हमारे देश में इस समय अधिकतर सरकारी व निजी संस्थाओं की ओर से आम जनता के लिऐ सूचना प्रकाशित करने के लिऐ जो वैब-साइटें उपलब्ध करवाई गई हैं उन पर ज्यादातर सूचना अंग्रेजी भाषा में ही उपलब्ध है जबकि 95 प्रतिशत प्रदेशवासी अंग्रेजी के बारे में जानकारी नहीं रखते या फिर इस भाषा में प्रकाशित सूचना से लाभ लेने में असमर्थ हैं।

 

वैसे भी इंटरनैट पर उपलब्ध सूचना अंग्रेजी में होने के कारण यह अति खण्डित बन चुका है, जबकि अगर इस पर सारी भाषाऐं (कम से कम राज्य भाषा या राष्ट्र भाषा) में सूचना उपलब्ध हो सके तो यह सर्वात्रिक इंटरनैट बन पाऐगा। इस का सबसे बडा लाभ यह होगा कि हर नागरिक इस का योग्य इस्तेमाल कर सकेगा। जिस प्रकार रूस, चीन व जापान जैसे देशों ने अपनी राष्ट्र भाषा मे अपनी वैब-साइटों पर सूचना प्रकाशित की है।

 

मात्र 3 प्रतिशत भारतीय अंग्रेजी भाषा बोल-समझ पाते हैं जबकि 40 प्रतिशत हिन्दी बोल-समझ सकते हैं

         गावों शहरों में रहने वाली जनता का पालन-पोषण जिस वातावरण में होता है वहाँ घरों, स्कूलों सरकारी विभागों में क्षेत्रीय भाषा का इस्तेमाल किया जाता है।

 

         वैसे भी हमारे यहाँ ज्यादातर लोग क्षेत्रीय भाषा को पहल देते हैं फिर चाहे वो गावों रहने वाले हों में या शहरों में।

 

हमें जिंदगी के हर कदम पर सूचना की ज़रूरत पडती है। आम नागरिक डिजीटाइजड सूचना के इस्तेमाल से लाभ उठा सकता है बशर्ते कि यह उसकी अपनी भाषा में उपलब्ध हो। इसी प्रकार की योजना बनाने की सख्त जरूरत है जिस के अंतर्गत हर नागरिक तक उस की जरूरत की सूचना राज्य की भाषा में या उसकी मातृ भाषा में प्रकाशित की जाऐ।

 

विश्व भर में 5 करोड़ से अधिक ळोग हिन्दी बोलते हैं इसके बावजूद वैब-साइटों पर हिन्दी भाषा का इस्तेमाल उस स्तर पर नहीं किया जा रहा है। इस समय बहुभाषिय वैब साइटों का निर्माण करने के लिए टैकनालोजी उपलब्ध है जैसे कि

  • खास किसम के अक्षर (फाँट) का इस्तेमाल (जिसमें उपभोगकर्ता को फाँट डाउनलोड करने की आवश्यकता) 
  • सरवर पर आर्षित फाँट की प्रोसैसिंग (सरवर पर अधिक बोझ)
  • सकैन की हुई सूचना का प्रकाशन (नई सूचना प्रकाशित करना मुश्किल)

 

उपरोक्त प्रस्तावित समाधानों में कोई-न-कोई मुश्किल जरूर है। अति-आधुनिक टैकनालोजी यूनीकोड फाँट है जिस की मदद से प्रकाशित की गई सूचना को देखने पढ़ने के लिऐ कोई फाँट डाउनलोड नहीं करना पड़ता।

 

इस श्रंख्ला में सबसे पहले  एक बहु-भाषीय वैब साइट (अंग्रेज़ी, हिंदी, पंजाबी में) भाषा के महत्व को लेकर उत्तर-भारतीय प्रांतो के लिए प्रकाशित की गई। (http://veerpunjab.com/ll/h/hdefault.htm)

 

दूसरी बहु-भाषीय वैब साइट (अंग्रेज़ी, हिंदी, पंजाबी) में एक शिक्षा संस्थान के बारे में शिक्षा प्राप्त करने वालों गावों या शहरों के विधार्थियों के लिए प्रकाशित की गई।   (www.usbsindia.org)

 

इस श्रंख्ला की तीसरी वैब साइट पंजाब प्रांत के वासियों को इस राज्य तथा बाहर के बारे में अधिक से अधिक सूचना पंजाबी भाषा में प्रदान करने के लिए प्रकाशित की गई।   (www.veerpunjab.com)

 

इस प्राजैकट ने काफी सराहना प्राप्त की है जिसका सबूत पाठकों के बढते हिट-नंबर हैं।

जन-साधारण अपेक्षित सूचना मातृ-भाषा में प्राप्त कर सुविधा महसूस कर रहा है।

 

इस परियोजना द्वारा संस्कृति एवं भाषा का सम्मान बढाने की कोशिश की जा रही है और जहाँ इस के द्वारा नैट पर जन-साधारण सम्मिलित होगा वहीं नैट उपभोगताओं की संख्या भी बढेगी।

 

स्थानीय सरकार और राष्ट्रीय स्तर पर भाषा-आबंटन बंद करने और इन्सानी परस्पर प्रभाव बढाने के लिए विषय-वस्तु की सृष्टि, विधायन और शिक्षा, सांस्कृतिक और विज्ञान सबंधित सामग्री प्रत्येक भाषा में डिजिटल रूप मे उपलब्ध कराने हेतु संस्थाओं को उत्साहित करे

 

इस विधि से सभी संस्कृतियाँ अपने आप को विश्व-भर में अभिव्यक्त कर सकेंगी और इंटरनैट पर सभी भाषाएँ स्वदेशी भाषा समेत उपलब्ध होने से सुलभता से सूचना का लाभ लिया जा सकेगा।