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ऐसा कुप्रचार किया जा रहा हैं कि पूज्य संत श्री आसारामजी बापू वशीकरण विद्या आजमाते है l आश्रम वशीकरण की बात स्वीकार नही करता l जिस प्रकार कोयल पक्षी अपनी मीठी वाणी से जगत को वश में कर लेता है, उसी प्रकार पूज्य बापूजी के श्रीमुख से प्रवाहित गीता, भागवत, रामायण, उपनिषद्, षडदर्शन एवं वेदों के उपदेशों का अमृत जनमानस को उन के सत्संग में खींच लाता हैं l आभामंडल विशेषज्ञ ने इस रहस्य का अध्ययन करके बताया कि उनकी आभा इतनी शक्तिशाली और व्यापक है कि उसके दिव्य प्रभाव से लोग उनकी ओर खींचे चले आते हैं l स्वामी विवेकानंद और स्वामी रामतीर्थ जैसे महापुरुषों का व्यक्तित्व भी ऐसे भगवदीय आकर्षण से संपन्न था l श्रीकृष्ण के बन्सीनाद से प्रभावित होकर पशु-पक्षी और मानव सुध-बुध भूल के वशीभूत होकर उनकी ओर खींचे चले आते थे l पूज्य बापुजी के श्रीमुख से उन्हीं भगवान श्रीकृष्ण की ‘गीता’ के सत्संग की वर्षा होती हो, वहाँ लाखों-करोडों साधक-श्रध्दालु खिंचकर आयें, तो कुप्रचार करनेवाले लोग ‘वशीकरण’ कहते हों तो यह वशीकरण भारतीय संस्कृति का है, भगवान श्रीकृष्ण का है, महापुरुषों का है l ऐसे ज्ञानोपदेश के रसपान के जादु को रोकने हेतु पिछले पाँच हजार वर्षों में इस देश पर हीन वृत्ति के लोगों ने, विधर्मियों ने और विदेशी आक्रांताओं ने हमले किये परंतु वे सफल नहीं हो पाये l आश्रम के विरुध्द कुप्रचार किया जा रहा है कि बालकों की बलि चढायी गयी होगी l यह बात इतनी घृणास्पद व दु:खद है कि इससे भारत भर में फैले हुए सैकडों आश्रमों एवं करोडों साधकों व श्रध्दालुओं को आघात पहुँचा है l बापूजी के सत्संग में आने के बाद और दीक्षा लेने के बाद शिष्य-भक्त मांस, मछली व अंडे जैसे पदार्थ न खाने की प्रतिज्ञा लेते हैं और परंपरागत रूप से पशुबलि देनेवाले कई समूहों को ऐसे पशुबलि न चढाने के लिए समझाया जाता है l ऐसी परिस्थिति में बालकों की बलि की घृणास्पद बात फैलानेवाले आश्रम द्वारा चलाये जा रहे भारतीय सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के यज्ञ में हड्डियाँ डालने जैसी प्रवृत्ति करा रहे हैं l जो धर्महित, देशहित, समाजहित और हमारी संस्कृति के हित के लिए बंद होनी चाहिएl भगवान श्रीकृष्ण को ख़त्म कराने के लिए कंस मैदान में आ गया था, भगवान बुध्द व महावीर को हैरान, परेशान, बदनाम करने के लिए उनके समकालीन निंदकों ने समस्त दाँव-पेच अपनाए थे l जिन भी अवतारों, महापुरुषों ने वैदिक सनातन संस्कृति के प्रचारक व प्रहरी का काम किया है या समाज-सेवा , धर्मसेवा व समाज-सुधार का बिगुल फूँका है उनकी लोकप्रियता से भयभीत होकर असामाजिक तत्वों ने उन्हें बदनाम करने में, सताने में कोई कमी नहीं रखी l मंसूर को शूली पर चढाया गया, जीसस को क्रोंस पर चढाया गया, सुकरात को जहर दिया गया, मुहम्मद पैगम्बर को मक्का से मदीना हिजरत करने के लिए विवश किया गया - इतिहास ऐसे सैंकडों दृष्टान्तो से भरा पड़ा है l ऐसे में पूज्य आसारामजी बापू, जिनके करोड़ों अनुयायी हैं, को बदनाम करने के लिए विभिन्न रूप से स्वार्थी तत्व मैदान में आए हैं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं हैं l व्यक्ति की देह से भी उसकी ईश्वर, अपनी संस्कृति तथा धर्म के प्रति श्रध्दा कीमती है l आज यूरोप, अमेरिका व रशिया का श्रध्दाविहिन समाज विनाश की ओर धकेला जा रहा है l ऐसे समय में कठोर परिश्रम के बाद करोड़ों व्यक्तियों के ह्रदय में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित के लिए संतो ने पैदा की हुयी श्रध्दा को अपने तुच्छ अंहकार की पूर्ति के लिए , क्षुद्र स्वार्थ के लिए तोड़ना, यह लाखों मानवों की ह्त्या करने के समान माना जायेगा और ऐसा महापाप करनेवाले तत्वों को ईश्वर माफ नहीं करते हैं - इतिहास साक्षी है l आश्रम के भक्तजन बाल संस्कार केन्द्र चलाते हैं, संकीर्तन यात्राओं के द्वारा जनजागृति करते हैं, गरीबों में भंडारों के द्वारा उन्हें अनाज - कपडे तथा जीवनावश्यक वस्तुओं का वितरण करते हैं, युवाधन सुरक्षा अभियान चलाते हैं, विद्यार्थी उज्जवल भविष्य निर्माण शिबिरों का आयोजन करते हैं, व्यसनमुक्ति का यज्ञ चलाते हैं, मांसाहार का निषेध करते हैं l आश्रम द्वारा ऐसी समाज- कल्याण (सोशल वेलफेअर ) की, सर्वहितकारी ( पब्लिक इन्ट्रेस्ट की ) सेवाप्रवृत्तियाँ होती हैं l आश्रम के एक एक कोने , एक एक वृक्ष, एक एक कमरे का उपयोग सभी जातिवालों के लिए खुला है l आश्रम द्वारा साल में लाखों मरीजों की चिकित्सा - सेवा की जाती है l लाखों पिछडे, आदिवासियों, वंचितों, गरीबों, विधवाओं, अनाथों को भंडारों के द्वारा अन्न, वस्त्र, बर्तन, आदि का दान किया जाता है l भारतभर में अनेक स्थानों पर लाखों लोगों को नि:शुल्क भोजन व हजारों लोगों को राशनकार्डों द्वारा प्रतिमाह नि:शुल्क अनाज वितरण की व्यवस्था की गई है l आश्रम द्वारा 'पातंजल योगविज्ञान' अनुरूप अनेक तालिमबध्द प्रशिक्षकों के द्बारा सैकड़ों शिबिरों के माध्यम से विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिया जा रहा है l बड़ी संख्या में विद्वान्, वैज्ञानिक, न्यायाधीश, पत्रकार, सांसद, विधायक, मंत्री एवं देश का प्रबुध्द वर्ग पूज्य बापूजी के सत्संग - मार्गदर्शन से लाभान्वित होकर अपने को धन्य कर रहा है l भक्तों की विशाल संख्या को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष देश के सात स्थानों पर गुरुपूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया गया था ताकि लोगों को परिश्रम न पड़े l हर जगह पूज्य बापूजी द्वारा यह घोषणा की गयी की 'चीज-वास्तु, रुपया-पैसा, दान नहीं चाहिए, लेकिन किसी भी पार्टी को वोट का दान जरुर करो l सभी पार्टिया मेरी हैं, मैं सब का हूँ l जैसे सूर्य सबका, चाँद सबका ऐसे ही बापूजी सभीके l' सभी पार्टियों के नगरसेवक, विधायक, सांसद और मंत्री बापूजी के पास आते हैं, बापूजी का आशीर्वाद पाते हैं और सफल हो जाते हैं l बापूजी के करोड़ों- करोड़ों श्रोता हैं l गुरुपूर्णिमा पर्व पर अपनी श्रध्दा - भक्ति अभिव्यक्त करने के लिए प्रत्येक स्थान में लाखों -लाखों श्रध्दालु भक्तों का मानव-समूह उमड़ पड़ा था l आश्रम के बारे में भ्रामक प्रचार किया जा रहा हैं की आश्रम में तांत्रिक विद्या का प्रयोग होता है l इस बारेमें स्पष्ट किया जाता है कि आश्रम में न तो तांत्रिक विद्या का प्रयोग किया जाता है और न ही उसे समर्थन या सहयोग दिया जाता है l आश्रम ने गीता और वेदान्त में प्रशस्त कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का मार्ग अपनाया है l आश्रम समाज और गरीब-गुरबों की सेवा द्वारा कर्मयोग, ध्यान द्वारा ज्ञानयोग, आत्मबोध और सर्वशक्तिमान एक ईश्वर की सम्पूर्ण शरणागति की साधना द्वारा भक्तियोग के प्रचार- प्रसार में रत है तथा सदाचरण द्वारा सर्वांगीण विकास के विचारों से ओतप्रोत है l इसका प्रत्यक्ष प्रमाण पूज्य बापूजी का सत्संग है, जो एक खुली किताब है, जिसे गत अनेक वर्षों से आम जनता ऑडियो व वीडियो के माध्यमों से सुन व देख रही है l पूज्य बापूजी ने केवल यूरोप, अमेरिका ही नहीं, अपितु पाकिस्थान में भी भारतीय संस्कृति की ध्वजा फहरायी है l वे पाकिस्थान के हृदयस्थल-समान सिंध प्रान्त के विभिन्न स्थानों में हजारो हिंदू और मुसलामानों के बिच भारत की वैदिक परंपरा एवं संत-सूफी परंपरा की सत्संग वर्षा करनेवाले लोकसंत हैं l पाकिस्थान के हिंदू- मुसलमान सभीने उनका सत्संग पाकर धन्यता का अनुभव किया l सन १८९३ में शिकागो में 'विश्वधर्म संसद' में स्वामी विवेकानंदजी ने भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया था, उसी प्रकार सन १९९३ में आयोजीत 'विश्वधर्म संसद' में भारत का प्रतिनिधित्व करके समग्र विश्व में देश का गौरव बढाया था l उपर्युक्त परिस्थितियों में जब तक गुजरात एवं देश की आम जनता कुप्रचार से गुमराह हुए बिना, दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए कटिबध्द न हो, तब तक संतो को सताने, हमारी संस्कृति को मिटाने, हिंदू-हिंदू को लड़ाने के लिए ये षडयंत्र चलते रहेंगे l वाघेला परिवार के दो कुलदीपकों के आकस्मिक देहावसान विषयक उनके परिजनों को जितना आघात लगा है, उतना ही आघात और दुःख बापूजी सहीत समग्र आश्रम परिवार को हुआ है l इस सम्पूर्ण घटनाक्रम के विषय में जाँच चल रही है l आश्रम किसी भी न्यायिक जाँच के लिए पुरी तरह सहयोग देगा और किसी भी उच्चस्तरीय एजेंसी द्वारा जाँच का स्वागत करता है तथा इस घटना को लेकर कोई टिप्पणी करके न्यायिक प्रक्रिया में अवरोधरूप नहीं बनना चाहता है l आश्रम द्वारा पुलिस व प्रचार - माध्यमों के समक्ष पुरी पारदर्शिता रखते हुए पूरी जानकारियाँ एवं सहयोग दिया गया l पुलिस की जाँच प्रक्रिया चालु है, निर्णय अभी तक घोषित नहीं हुआ फिर भी संस्था को गुनहगार मानते हुए देश के कोने कोने से आए हुए निर्दोष भगवत्प्रेमी भक्तजनों पर कुछ असामाजिक तत्वों ने अपने स्वार्थ के लिए किराए के गुंडे लाकर जिस तरह से पथराव, बेरहमी से मारपीट, बहनों के साथ बीभत्स व्यवहार किया, उन के वाहन जलाए, उनकी धार्मिक स्वतन्त्रता का हनन किया, उसकी हम कड़े-से कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं l निर्दोष, मासूम बालकों की चिताओं पर अपने क्षुद्र स्वार्थ की रोटियाँ सेकनेवालो के षडयंत्र की भी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषीयों को कड़ी- से कड़ी सजा दी जानी चाहिए l पूज्य बापूजी ने कहा कि अमदावाद के लोग मुझे अच्छी तरह से पहेचानते हैं l अमदावाद के लोग सज्जन व अच्छे हैं, उनको बदनाम नहीं होने दिया जाय l किराए के आदमी लाकर असामाजिक तत्वों द्वारा बदनियती से यहाँ साजिश कराई गई है l भगवान सबका मंगल करें l आप भी खुश रहें, सुखी रहें व दूसरों को भी खुश करें, सुखी रखें l |
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