आज उत्तर भारत का क्षेत्र पुरानी परम्पराओ की वजह से प्रेमी युगलों की निर्मम हत्या का दुखद नजारा देख रहा है | यदि इन पुरानी परम्पराओ बदला नहीं गया तो , ये बहुत
सारे मनोज-बबली जैसे प्रेमियों को निगल जायेगा | ये परम्पराए हमारे समाज में घर कर गयी है | इस लिए मानव का मन इसे आसानी से नहीं छोड़ने वाला है | मानव जनता है कि प्रेम
विवाह करना भारत की पुरानी परंपरा रही है | परन्तु वह समाज कि इन परम्पराओ में इतनी मजबूती के संग जकड़ा है कि वह इससे छूट नहीं पा रहा है |
इन मानव अधिकार और इंसानियत विरोधी परम्पराओ के बदलने का वक्त आ चुका है | हम
ये नहीं कहते है कि हमारी परम्पराए गलत थी , जो भी थी वह समय के अनुसार सही रही होगी
, परन्तु हमें समय के साथ - साथ अपने परम्पराओ को परिमार्जित करते रहना चाहिए | संसार
का हर नियम परिवर्तनशील है | हर नियम - कानून एक निश्चित काल के लिए ही प्रशंगिक होती
है | समय के साथ - साथ प्राकृतिक नियम भी बदलते है | जैसा कि हम जानते है कि प्रकृति
में हर मौसम एक निश्चित समय पर ही आता है | ये सब प्रकृति के नियम है | जब प्रकृति बदलाव करती है फिर हम मानव उन परम्पराओ को क्यों नहीं छोड़ते है , जो कि आज पूरी तरह से अप्रशंगिक हो चुकी है |
प्रेम- विवाह हमारे इतिहास का एक हिस्सा रहा है | इसमे कुछ भी गलत नहीं है
| यदि हम वैज्ञानिक दृष्टि से देखे तो भी इसके इफेक्ट ना के बराबर है | यही कारण है
कि इस्लाम धर्म है कोई गोत्र जैसी प्रथा ही नहीं है | वहां तो लोग अपने करीबियों से
भी शादी कर लेते है | यही कारण है कि मुस्लिमों में आज एकता और लोगों से कहीं अधिक
है | मुस्लिमो में भाईचारा की भावना भी औरो की अपेक्षा अधिक मजबूत है |
इतिहास गवाह है कि भगवान् श्री कृष्ण ने अपनी सगी बहन सुभद्रा की शादी , अपनी
सगी बुआ के पुत्र अर्जुन के साथ भगाकर कराया था | कृष्ण भगवान् ने भी रुकमणि से
शादी भागकर किया था | यदि ये गलत होता तो भगवान् श्री कृष्ण ऐसा क्यों करते | भगवान् श्री कृष्ण ने ऐसा सिर्फ और सिर्फ मानव और नारी के अधिकार की रक्षा के लिए किया
था | जब ये सब सही है तो फिर मनोज - बबली गलत कैसे हो सकते है |
खाप के अनुसार मनोज - बबली एक ही गोत्र के थे तो मनोज और बबली भाई-बहन हुये
| अब यदि हम इतिहास देखे तो अर्जुन ने भी अपने मामा की बेटी से शादी किये थे | इस प्रकार
से अर्जुन और सुभद्रा भी भाई-बहन थे | ये सब जानते हुये भी भगवान् श्री कृष्ण ने उनकी
शादी क्यों कराई | ये सोचने को बात है | कुछ लोग विज्ञानं का सहारा लेकर इस प्रकार
के रिश्ते को गलत साबित करने की नाकाम कोशिस में लगे रहते है | यदि जेनिटिक का इतना
ही इफेक्ट है तो अभिमन्यु इतना बलशाली कैसे पैदा हुआ | ये भी विचार करने की बात है |
प्रेम विवाह :
१. प्रेम विवाह से हमारा आपस का भाई चारा मजबूत होगा |
२. हर गाँव में आज गुट बंदी चल रही है | ऐसी स्थिति में प्रेम विवाह ही हमारे आपसी वैमनस्य को समाप्त कर सकता है |
३. प्रेम विवाह से ही हम अपने बच्चों को उनके गृहस्थ जीवन का सही अधिकार दे सकते है |
४. यदि खुशहाल जीवन जीना है तो इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रेम ही है |
५. यदि आप अपने बच्चे को उसका प्रेम नहीं दे सकते है तो आप खुद ही अपने बच्चे का गृहस्थ जीवन बर्बाद कर रहे है |
६. प्रेम - विवाह भारत जैसे महान देश में भाई चारा की भावना को मजबूत करने एक एक आसान और कारगर तरीका है |
७. बेटी की मर्जी के बगैर शादी , बेटी का बलात्कार है | ये बलात्कार सामान्य बलात्कार से कही अधिक घिनौना कर्म है |
८. क्योकि इस प्रकार कि शादी में बेटी का जीवन भर बलात्कार होता है | ९. यदि आप अपनी बेटी की शादी उसकी मर्जी के खिलाफ कर रहे है तो आप खुद उसका बलात्कार करवा रहे है |
१०. यदि आप ऐसा करते है तो आप तो आप दुनिया के सबसे घिनौने माता-पिता है |
११. यदि आप ऐसा करते है तो आप माता-पिता जैसे शब्द को ही बदनाम करते है |
१२. ऐसे लोगों को माता-पिता कहलाने का कोई हक़ नहीं है |
१३. क्योकि माता-पिता सदा अपने बच्चो को खुश और आबाद देखना चाहते है |
१४. झूठी इज्जत के नाम पर किसी के जीवन को बर्बाद करने का हक़ किसी को भी नहीं है , चाहे वो माता-पिता या भाई ही क्यों ना हो |
१५. प्रेम विवाह ही दुनिया का सर्वोत्तम विवाह है |
१६. पारंपरिक विवाह जो कि अक्सर लड़की-लडके कि मर्जी के बगैर होती है , वो शायद
शादी काम सौदेबाजी ज्यादा होती
है | यही कारण है कि दुनिया के अधिकांश देशों में प्रेम विवाह ही प्रचलित है |
१७. प्रेम विवाह हमारे इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है | उदहारण स्वरुप : अर्जुन - सुभद्रा , कृष्ण - रुकमणि , संयोगिता - पृथ्वीराज चौहान |
१८. शादी बच्चो का अधिकार है , इसलिए ये शादी उनकी मर्जी से ही होनी चाहिए |
१९. अप्रशंगिक परम्पराओ के नाम पर दो प्रेमियों को जुदा करना महापाप है
२०. ऐसा पाप करने वाले को तो ईश्वर भी माफ़ नहीं करेगा | अतः खाप जैसी अप्रशंगिक संस्थाओ पर तुरंत रोक लगायी जाए |
२१. प्रेम - विवाह हमारे बच्चो का हक़ है |
२२. प्रेम का सही प्रसार प्रेम - विवाह से ही हो सकता है |
२३. देश की उन्नति में प्रेम - विवाह बहुत ही सहायक है क्योकि आज
का हर कोई किसी ना किसी से प्रेम करता है और प्रेम
- विवाह करना चाहता है , परन्तु समाज के इन बन्धनों के वजह से उन्हें बहुत सी मुसीबते झेलनी पड़ती है |
२४. यदि हम आज की पीढ़ी को उसका अधिकार देंगें तो वह इन समाज की इन मुसीबतों
के बजाय अपने समाज और देश के विषय में सोचेगे है |
२५. प्रेम - विवाह का निर्भीक अधिकार , समाज , देश के विकास , भाईचारा और प्रेम - प्रसार के लिए सदा जरूरी
रहा है , आज भी है ,सदा रहेगा |
२६. हमारा देश आज २१वी सदी में जी रहा है , फिर भी लोगो को उनका अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है |
२७. प्रेम - विवाह को एक जन जागरण रुपी अभियान देने का वक्त आ गया है |
२८. देश के विकास के लिए , मानव और नारी जाति के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार को चाहिए की वह प्रेम - विवाह को और मजबूत करे |
२९. राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग , राष्ट्रिय महिला आयोग , न्यायपालिका , कार्य
पालिका और खुद राजनितिक पार्टियों को प्रेम- विवाह रुपी जन जागरण को में अपना सहयोग करके प्रेम की रक्षा करनी चाहिए |
३०. भारत सरकार को प्रेमी युगलों की रक्षा के लिए कुछ नए नियम बनाने चाहिए , क्योकि प्रेम – विवाह उनके अधिकार की बात है |
३१. प्रेम की रक्षा भी भारत सरकार का एक अहम् और महत्वपूर्ण कार्य है |
३२. एक सफल सशक्त प्रेम-विवाह : जन जागरण अभियान के जरिये ही देश और समाज की सोच बदली जा सकती है |
३३. अतः आज समाज और देश में प्रेम - विवाह के लिए एक सशक्त प्रेम-विवाह : जन जागरण अभियान की जरूरत है |
३४. खाप जैसी संस्थाए और खाप जैसी सोच समाज और देश के लिए पोलियो और एड्स की तरह है |
३५. इस लिए खाप जैसी सोच के विनाश के लिए पल्स पोलियो जैसा अभियान और जन जागरण अति आवश्यक है |
हमारे देश में आज प्रेम विवाह संकट में है | इसलिए आज भारत में प्रेम विवाह
को उसका सही स्थान देने का वक्त आ चुका है | आज जरूरत है कि गाँव - गाँव जाकर हर किसी
को प्रेम की परिभाषा और प्रेम की एहमियत बतायी जाए | आज हमे प्रेम - विवाह का
एक जागरण और अभियान चला कर लोगों की सोच बदलने का वक्त है | भारतीय मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग को भी इसमे सक्रियता के साथ सहयोग करना चाहिए | भारत सरकार को चाहिए
कि वो इस प्रकार का जनजागरण कराये | इस प्रकार के जन जागरण अभियान से ही हम लोगो का
नजरिया बदल सकते है | यदि सरकार वास्तव में जाति - पांति का भेदभाव मिटाना चाहिती है
तो उसे प्रेम - विवाह को बढ़ावा देना ही होगा | यदि आप सब देश , समाज और प्रेम की सच्ची रक्षा चाहते है तो प्रेम अभियान को बढ़ावा देना ही होगा | May 14, 2010
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