इस अंक मेंअपनी बातगुज़रे साल पर एक नज़र और आने वाले संघर्षों की आहटें विशेष लेख नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती चार दशक : एक सिंहावलोकन अमेरिकी सबप्राइम संकट : गहराते साम्राज्यवादी संकट की नयी अभिव्यक्ति सामयिक 'जुआघर' अर्थव्यवस्था के निराले तोहफ़े पूँजीवाद और मज़दूरों का प्रवास निकोलस सारकोजी की जीत के मायने विशेष सर्वहारा अधिनायकत्व के बारे में चुने हुए उद्धरण - लेनिन दर्शन के प्रश्नों पर वार्ता - माओ त्से-तुंग शोध-अध्ययन भारतीय कृषि में पूँजीवादी विकास (दूसरी किस्त) टिप्पणियाँ पूँजीवाद को रामकथा की संजीवनी दलित मुक्ति के सपनों की माया मोदी की वापसी के अर्थ और अनर्थ | 'दायित्वबोध' उन बुद्धिजीवियों की एक वैचारिक पत्रिका है जिन्होंने जनता का पक्ष चुना है, जो विश्व ऐतिहासिक विपर्यय एवं पुनरुत्थान के वर्तमान दौर में भी बेहतर भविष्य से नाउम्मीद नहीं हैं, जो इस बेहतर भविष्य को दूर और उसके लिए नये सिरे से लड़ाई की तैयारी को कठिन मानते हुए भी उससे किसी न किसी रूप में अपने को जोड़े हुए हैं और जो क्रान्तियों की नयी श्रृंखला की सर्जना के लिए आज एक नये क्रान्तिकारी वैचारिक-सांस्कृतिक नवजागरण एवं प्रबोधन के महाउद्यम में, जुट जाने के लिए तत्पर हैं। |
