एक गीत : तुझसे मिलने चला आया हैं मन जो तनहा पला आया हैं कुछ ख्वाब समेटे हुए थोडा बहुत ऐठे हुए तेरे नैनो की गवाही पर काजल जो जला आया हैं तुझसे मिलने...... चुपचुप कैसे मुलाकाते रही तमाम तनहा राते रही राज सारे बोलने को सारे ख़त खोलने को होंठ जो अब तक सिला आया हैं तुझसे मिलने चला आया हैं.......
| तुम बिन सच कितना खाली सा मेरे मन का जोगी दर्पण तुम चाहो तो तोड़ के बंधन मेरे मन के गीत सजा दो तुम चाहो तो प्रीत निवेदन मेरा इक पल में ठुकरा दो ! टूट न जाए संयम मनका कुछ मनके संयम के गुथना जब तक मेरी नींद न टूटे मेरे सपन में बस तुम रुकना ! स्वपन प्रिया ये दुनिया झूठी हम-तुम को न सह पाएगी अपने पावन नातों को यह जाने क्या-क्या कह जाएगी टूट न जाए, संयम मनका कुछ मनके संयम के गुथना, जब तक जारी -"सपन सवारी" चिंतन का घट पूरन रखना !
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